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शुक्रवार, 8 मई 2026

मनुष्य एक आशंकित जीव है

हम सब धर्मपरायण लोग हैं ! आस्थावान हैं ! धर्म-भीरु भी हैं ! हम अपने-अपने तरीके से अपने इष्ट की आराधना करते हैं ! पर साथ ही साथ, कहीं ना कहीं मतलबी और स्वार्थी भी हैं ! इसके अलावा एक बहुत बड़ी संख्या उन लोगों की भी है जो अनिष्ट के डर से, किसी अनहोनी की आशंका से ही धर्म का पालन करते हैं ! यह बात दुनिया के सभी धर्मों-पंथों में समान रूप से पाई जाती है और बचपन से ही मन में बिठा दी जाती है कि यदि सर्वोच्च सत्ता की आराधना नहीं की तो अनिष्ट हो जाएगा.........................😞   

#हिन्दी_ब्लागिंग  

म नुष्य एक मतलबपरस्त, स्वार्थी तथा आशंकित जीव है ! उसे हर समय कुछ पाने की लालसा के साथ-साथ किसी न किसी अनहोनी का डर भी लगा रहता है ! इसीलिए उसे एक संबल की तलाश रहती है। उसके पूजा, इबादत या उपासना करने का सबसे बड़ा कारण यही भावनाएं हैं ! पर जहां डर होता है वहां श्रद्धा नहीं होती ! इसीलिए वह विभिन्न धर्मस्थानों की शरण में जाता रहता है ! कुछ महान हस्तियों, दिव्य पुरुषों-महिलाओं को छोड़ दिया जाए तो ऐसी भावनाएं कमोबेश संसार के सभी इंसानों में व्याप्त है !

आशंका 
नहोनी के डर के बाद धार्मिक होने का दूसरा बड़ा कारण है, अपनी विभिन्न कामनाओं की पूर्ति की चाह! हमें लगता है कि अगर हम ईश्वर की आराधना करेंगे तो वे खुश हो कर हमारी मनोकामनाएं पूरी कर देंगे ! यह सोच भी हर धर्म में मौजूद है। कोई मन्नत मांगता है, कोई चढ़ावा चढ़ाता है, कोई दान देता है, कोई विशेष कर्मकांड करता है। हम भूल जाते हैं कि प्रभु सर्वज्ञानी है, निष्पक्ष है, न्यायप्रिय है ! वे हमें हमारे कर्मों के अनुसार फल देंगे नाकि कर्मकांडों की वजह से ! हमारे लिए पूजा या इबादत एक सौदा या व्यापार बन जाते हैं कि हम ये करेंगे तो वो ये कर देगा ! इसी सौदेबाजी में जब हमारी इच्छाएं पूर्ण नहीं होतीं तो हमारा विश्वास भी डगमगाने लगता है तो हमारी अस्थिरता और खुदगर्ज दिलोदिमाग कोई और ठीहा ढूँढ़ने लगते हैं !   

भय 
दमी के धार्मिक होने का एक और बड़ा कारण परिवार की परंपरा भी होती है ! परिवार जैसा करता चला आया है अगली पीढ़ियां भी उस पर सवाल ना उठा, उसी का अनुसरण करने लगती हैं ! इसी के साथ एक बात और भी है कि इंसान कुछ लोगों को किसी पंथ से लाभ होता देख या किसी स्थल विशेष की महत्ता को सुन सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए उधर आकर्षित होता है, ऐसी अस्थिरता वह अपने जीवन में कई-कई बार दोहराता रहता है !

डर 
एक आम धारणा है कि यदि मैंने उपासना नहीं कि तो ईश्वर नाराज हो मुझे और मेरे परिवार को दंडित कर देंगे ! यह डर तो बचपन से इंसान के मन में बैठ जाता है, पर वह यह भूल जाता है कि प्रभु हम सबके पालनहार हैं, न्यायप्रिय हैं, दयालु हैं, बेवजह वे किसी को दंड नहीं देते ! हमारे कर्म ही हमारा भाग्य निर्धारित करते हैं ! पर अनहोनी का डर उसके दिलोदिमाग पर ताउम्र हावी रह उससे कुछ ना कुछ उल्टा-सीधा करवाता ही रहता है ! देखा जाए तो यह भी तो प्रभु की इच्छानुसार ही होता है...!


@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 🙏 

बुधवार, 31 दिसंबर 2025

ईश्वर से डायरेक्ट कनेक्शन 😮

मौत से सभी को डर लगता है ! हजारों आस्थावान लोग अपना टीन-टप्पर बेच कर, जान बचाने खातिर पैगंबर साहब के पास पहुंच गए ! क्रिसमस भी आया और चला गया ! पर ना कोई बरसात हुई ना हीं बाढ़ दिखी, न दुनिया डूबी, न धरती कांपी, न आसमान फटा ! लोग पूछने लगे, नोआ भाई, पानी कहां है ? पैगंबर साहब बोले, मेरी ईश्वर से बात हुई, मैंने उनसे आप लोगों के भले के लिए दुआ की और कहा कि नावें कम पड़ रही हैं, तो उन्होंने मुझे और नावें बनाने का समय देते हुए, फिलहाल बाढ़ को स्थगित कर दिया है ! लोग मान भी गए.............!    

#हिन्दी_ब्लागिंग 

इं सान ने जब से होश संभाला है, शायद तभी से उसका सबसे बड़ा डर अपनी मौत का ही रहा है ! अपनी या अपने प्रियजनों की मृत्यु उसे सदा भयभीत किए रखती है ! आस्था और डर के बीच बहुत ही महीन रेखा होती है, उसी घालमेल का फायदा उठा संसार भर में कुटिल लोग इस भय को अपने हित में भुनाते रहे हैं ! आज के सोशल मीडिया का बवंडर यदि ऐसे लोगों के चेहरे बेनकाब करता है तो दूसरी और उन्हें मशहूर करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ता !   

स्वयंभू पैगंबर, एबो नूह
गस्त 2025 ! अचानक एक  “What will happen and how it will happen” शीर्षक का वीडियो, टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स पर तेजी से वायरल होने लगा ! जिसमें अफ्रीकी देश घाना के कसोआ इलाके का एक टाट (बोरा) धारी, एबो नूह (Ebo Noah) नामक स्वयंभू पैगंबर दावा करता नजर आता है कि उसे ईश्वर से संदेश प्राप्त हुआ है कि आगामी क्रिसमस के दिन से भीषण बरसात होगी, जिसके फलस्वरूप भयंकर बाढ़ आएगी, जिसका प्रकोप तीन साल तक रहेगा। धरती का अधिकतम हिस्सा जलमग्न हो जाएगा ! सारे मनुष्य, जीव-जंतु, पेड़-पौधे नष्ट हो जाएंगे ! आगे वह बताता है कि इस विपदा से बचने के लिए उसने आठ विशाल नावें बनाई हैं ! जो लोग इन नावों में आएंगे, दान देंगे, जगह बुक करेंगे, सिर्फ वही बचेंगे, बाकि सब खत्म हो जाएंगे ! डर बेचने का उसका धंधा चल निकला ! वैसे इस शख्स ने खुद को वर्तमान समय का नोआ यानी नूह घोषित कर रखा है, जो आने वाली हर विपदा से अपने अनुयायियों को बचाता रहेगा ! 
विशालकाय नौका 
निर्माणाधीन 

जा हिर है ! मौत से सभी को डर लगता है ! एबो की भविष्यवाणी से डर कर हजारों आस्थावान लोग अपना टीन-टप्पर बेच कर, जान बचाने खातिर उसकी शरण में पहुंच गए ! क्रिसमस भी आया और चला गया ! पर ना कोई बरसात हुई ना हीं बाढ़ दिखी, न दुनिया डूबी, न धरती कांपी, न आसमान फटा ! लोग पूछने लगे, नूह भाई, पानी कहां है ? पैंगबर साहब बोले, मेरी ईश्वर से बात हुई, मैंने उनसे आप लोगों के भले के लिए दुआ की और कहा कि नावें कम पड़ रही हैं, तो उन्होंने मुझे और नावें बनाने का समय देते हुए, फिलहाल बाढ़ को स्थगित कर दिया है ! लोग मान भी गए !   

मौत का खौफ 

इस आदमी के करीब 35000 पिच्छलगु हैं ! ये सदा टाट, बोरा पहने रहता है ! खुद को जमीन से जुड़ा बताता है ! मंहगे फोन को ईश्वर से कांटेक्ट के लिए जरुरी बताता है ! ईश्वर की राह पर चलते हुए इसने खुद को ही कॉन्ट्रैक्टर भी बना लिया, प्रॉफ़ेट भी और टिकट चेकिंग क्लर्क भी, सब कुछ एक साथ ! फिर भी लोग उस पर भरोसा कर रहे हैं ! वे यह नहीं देख पाते कि उन्हें प्रलय का दिन बताने वाला एक लाख डॉलर की नई गाड़ी खरीद रहा है ! जिसे वह उन्हीं के प्रेम की भेंट बताता है ! कोई यह नहीं पूछता कि बाढ़ आ ही क्यों रही थी ? यदि आनी जरुरी थी तो रुक क्यों गई ? हमने जो अपना घर-बार बेच दिया उसका क्या होगा ? वही डर, वही भय, वही आशंका, इन सभी लोगों को चुप रखे हुए है ! छोड़ दिया है सबको अपनी नियति पर !

शौक 
धर एबो के खिलाफ  काफी  कुछ लिखा भी  जा रहा है ! कई धार्मिक  नेताओं ने भी साफ कहा है कि ये बाइबल की कहानी को तोड़-मरोड़कर अपने  फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है ! कानून अपने ही दायरे में कैद है ! उधर पब्लिक है कि  मानती ही नहीं कि उसके साथ  कुछ गलत हुआ है, उसे सिर्फ  अपनी जान बचाने की पड़ी है और इसके लिए वो इंतजार कर रही है बाकि नावों के बनने का !
हश्र 
हा लांकि खबर यह है कि फिलहाल पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है, पर इससे उसकी ''पूंछ'' और भी बढ़ गई है और उसे अपने पुराने गेट-अप में तरह-तरह के समारोहों में शामिल होने का न्योता मिल रहा है,  जिनमें Sarcodie's Concert भी एक है ! जय हो ! 

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

बुधवार, 23 अप्रैल 2025

सपूत

हेमंत जब चुप हुआ तो रामगोपाल जी उससे आँखें नहीं मिला पा रहे थे ! अपने आप को बेटे के सामने बौना महसूस कर रहे थे ! लाज आ रही थी उन्हें अपनी सोच और निराधार विचारों पर ! आक्रोश था अपने पर कि कैसे उन्होंने अपने बेटे के बारे में गलत सोच लिया ! क्या उन्हें खुद अपने  दिए संस्कारों पर भी भरोसा नहीं रह गया था ! वे उठे और बेटे को कस कर गले से लगा लिया, आँखों से आंसू लगातार बहे जा रहे थे ! हेमंत उन्हें ऐसे संभाल रहा था जैसे वह उनका पिता हो........!

#हिन्दी_ब्लागिंग    

शाम की चहलकदमी के बाद रामगोपाल जी घर आ, नम आँखों के साथ पत्नी रमा की फोटो के सामने बहुत देर तक खड़े रहे ! आज उन्हें बिछुड़े हुए पूरा एक साल हो गया था ! पत्नी के देहावसान के पश्चात वे इस शहर में बिलकुल अकेले रह गए थे ! इकलौता बेटा हेमंत अपनी पत्नी स्नेहा और तीन साल की बिटिया के साथ दिल्ली में रहता है ! उसने कई बार कहा, कितनी बार समझाया, इन बारह महीनों में बीसियों बार मनाने की कोशिश की कि पापा हमारे पास आ जाओ ! पर रामगोपाल जी ने, इस उम्र में अकेले रहना ठीक नहीं है, जानते हुए भी दिल्ली जाना गवारा नहीं किया ! वैसे तो वर्षों से उनके साथ रह रहा सहायक दीनू तो था, पर उसकी भी काफी उम्र हो चुकी थी ! 

अलौकिक अनुभूति 
ऐसा  नहीं है कि रामगोपाल जी परिवार के साथ रहना नहीं चाहते थे या उनका आपस में प्रेम नहीं था ! बेटे और उसके परिवार पर वे दिलो-जान से न्योछावर थे ! वो तो पोती को सदा अपने कंधे पर बैठाए, उसका घोड़ा बना रहना चाहते थे ! उसकी एक-एक हरकत को संजो लेना चाहते थे ! उसकी मासूमियत को यादगार बना लेना चाहते थे ! पर आए दिन अखबारों में छपने वाली खबरें उन्हें आशंकित और विचलित कर देती थीं ! उनके दिल में एक अनजाना डर, एक काल्पनिक खौफ घर कर गया था ! रोज ही कोई ना कोई ऐसी घटना सामने आ जाती थी, जिसमें सारी सम्पत्ति हथिया या पूरी जमीन-जायदाद अपने नाम कर बेटा-बहू, माँ-बाप को किसी स्टेशन या एयर पोर्ट पर लावारिस छोड़ गायब हो जाते हैं ! यदि कोई घर ले भी जाता है तो मतलब निकलते ही पालकों को शेष जीवन बिताने के लिए वृद्धाश्रम में छोड़ आता है ! उन्हें अपने बेटे पर विश्वास तो था पर दिल का क्या करें, जो उलटे-सीधे विचारों से इधर-उधर भटकाता रहता था ! 

तभी  फोन की घंटी बजती है ! हेमंत था दूसरी तरफ ! उसने बिना इनको कुछ कहने का मौका दिए, फरमान सुना दिया कि वह दो दिन बाद आ रहा है उनको लेने ! इस बार कोई बहाना नहीं चलने वाला और वे उसके साथ जा रहे हैं ! रामगोपाल जी जानते थे कि बेटा पूर्णतया उन पर गया है जो ठान लिया उसे पूरा करना ही होता है ! इन्होंने सोचा कि चलो कुछ दिन रह आता हूँ, हफ्ते दस दिन में लौट आऊंगा ! पर बेटे ने तो कुछ और ही सोच रखा था।  

पिता-पुत्र 
अगले  कुछ दिन तो बवंडर भरे थे ! उस तूफान में कब सामान पैक हुआ, कब मकान का निपटारा हुआ, कब सारी औपचारिकताएं पूरी हो गईं, कब दिल्ली घर पहुंच गए, पता ही नहीं चला ! जैसे किसी ने सम्मोहित कर दिया हो ! लाख चाह कर भी विरोध नहीं कर पाए रामगोपाल जी ! होश तब आया जब पोती किलकारी मारती हुई उछल कर दद्दू की गोद में चढ़ गई ! उस स्वर्गिक पल में रामगोपाल जी ने सब प्रभु पर छोड़ दिया, जो होगा देखा जाएगा !  

पर मन में एक खटका बना ही हुआ था, क्योंकि उन्हें अपना सामान नजर नहीं आ रहा था ! हेमंत से पूछने पर उसने कहा आप जहां रहेंगे वहां रखवा दिया है ! रामगोपाल जी समझ गए कि मुझे यहां नहीं रहना है ! सामान पहले ही वृद्धाश्रम भिजवा दिया गया है ! आज नहीं तो कल तो जाना ही था, पहले से ही पहुंचा दिया गया है ! तभी हेमंत बोला, पापा आपके लिए एक सरप्राइज है ! रामगोपाल जी ने मन में सोचा काहे का सरप्राइज बेटा, मैं सब जानता हूँ ! तुम भी दुनिया से अलग थोड़े ही हो ! पैसा क्या कुछ नहीं करवा लेता है ! खुद पर क्रोध भी आ रहा था कि सब जानते-समझते भी सब बेच-बाच कर यहां क्यों चले आए ! पर अब तो जो होना था हो चुका था !

तभी हेमंत की आवाज सुनाई पड़ी, पापा चलिए ! रामगोपाल जी के पैर मन-मन भारी हो गए थे, किसी तरह खुद को घसीटते हुए बाहर आ खुद को लिफ्ट में समो दिया ! पर यह क्या ! लिफ्ट नीचे ना जा ऊपर की ओर चल अगले माले पर रुक गई ! उन्हें कुछ समझ नहीं आया ! तभी हेमंत ने बाहर निकल सामने के फ्लैट की घंटी बजाई ! दरवाजा खुला, जिसने खोला उसे देख रामगोपाल जी झटका खा गए, सामने दीनू खड़ा था ! दीनू यहां ? उन्हें बोध ही नहीं हो रहा था कि क्या हो रहा है ! वे कहां हैं ! क्या देख रहे हैं और जो देख रहे हैं वह सच भी है या नहीं ! पर अभी तो कुछ और भी हैरतंगेज होने वाला था !

हेमंत ने अंदर जा आवाज लगाई, काका बाहर आ जाओ, पापा आ गए हैं ! और अंदर से जो आया उसे देख कर तो रामगोपाल जी चकरा कर गिरते-गिरते बचे ! उनके सामने उनके बचपन का, भाई समान, जिगरी यार निशिकांत चला आ रहा था ! निशिकांत ने लपक कर उन्हें गले लगा लिया ! वर्षों के बिछुड़े दोस्तों के मिलन पर सभी की आँखें भीग गईं ! फोन से तो बात होती थी पर मिले अरसा बीत चुका था ! आज ईश्वर की कृपा हुई थी ! पर रामगोपाल जी पूरी तरह असमंजस में थे ! उन्हें सब कुछ किसी नाटक की तरह लग रहा था, जिसमें वे भी थे, पर नहीं थे ! तभी नीचे से बहू का संदेश आ गया, खाना तैयार है !

जब सब खाने की मेज पर इकठ्ठा हुए तो हेमंत ने सारी कहानी का खुलासा किया ! उसने बताया कि उसके अनेक प्रयासों के बावजूद पापा यहां आने के लिए मान नहीं रहे थे ! वह उनके लिए सदा परेशान रहता था। पर कोई हल नहीं निकल पा रहा था ! पर पिछले पखवाड़े जब निशिकांत काका का फोन आया और पता चला कि उनकी तबियत ठीक नहीं रहती, तो मैं उनसे मिलने गया ! वे भी बिलकुल अकेले रहते थे ! उन्होंने शादी वगैरह नहीं की थी ! मैंने उनके पास जा कर सारी परिस्थितियों का जायजा लिया और उसी समय  स्नेहा से मश्विरा कर एक योजना बना डाली।  उसी के तहत निशिकांत काका को भी अपने साथ ले आया ! यह ऊपर वाला फ्लैट भी उन दिनों बिकाऊ था, इसे ले लिया गया ! उसके बाद पापा को यहां कैसे लाया यह आप सब को पता ही है ! रही दीनू काका की बात तो उन्हें इस उम्र में अकेला छोड़ने का तो सोचा भी नहीं जा सकता था ! उनके लिए भी यहां एक अलग कमरे की व्यवस्था है, कोई दिक्कत नहीं होगी ! अब हम सब एक साथ रहेंगे ! मेरा सपना पूरा हुआ ! इससे ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है ! 

हेमंत जब चुप हुआ तो रामगोपाल जी उससे आँखें नहीं मिला पा रहे थे ! अपने आप को बेटे के सामने बौना महसूस कर रहे थे ! लाज आ रही थी उन्हें अपनी सोच और निराधार विचारों पर ! आक्रोश था अपने पर कि कैसे उन्होंने अपने बेटे के बारे में गलत सोच लिया ! उस बेटे के बारे में जो उनका ही नहीं उनसे जुड़े लोगों का भी भला सोचता हो ! क्या उन्हें खुद अपने दिए संस्कारों पर भी भरोसा नहीं रह गया था ! वे उठे और बेटे को कस कर गले लगा लिया, आँखों से आंसू लगातार बहे जा रहे थे ! हेमंत उन्हें ऐसे संभाल रहा था जैसे वह उनका पिता हो ! बहू उनकी पीठ सहला रही थी ! इधर मासूम छुटकी जो यह जान कर ठुमक रही थी कि दादू अब यहीं रहेंगे उसको अब यह सब देख समझ ही नहीं आ रहा था कि ये हो क्या रहा है !

कुछ दिनों बाद आज फिर रामगोपाल जी पत्नी की तस्वीर के सामने खड़े थे ! सामने कप बोर्ड पर उनके तथा निशिकांत जी के नाम के फिक्स्ड डिपॉज़िट के पेपर रखे हुए थे, जो हेमंत ने दोनों घरों को बेच कर मिली राशि से बनवाए थे ! निशिकांत जी जैसे पत्नी को बता रहे थे कि तुम चिंता मत करना तुम्हारे लायक बेटे ने बिना बोले, अघोषित रूप से  मेरे सा-साथ दीनू तथा निशिकांत हम तीनों की जिम्मेदारी ले ली है ! भगवान उसे सदा सुखी रखें !

@दो चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2025

अमेरिका की कार्रवाई से जुड़े - यदि, तो, जैसे कुछ अंदेशे

सबसे भयावक है कि जिस मैक्सिको की सीमा से कूद-फांद कर ये लोग अमेरिका में घुसे थे, यदि उसी मैक्सिको में वापस फेंक दिए जाते तो ? पनामा के जंगलों में घटने वाली जो थोड़ी-बहुत बातें बाहर आती हैं, वे इतनी डरावनी, भयानक व हृदय-विदारक हैं कि उनका विवरण भी नहीं किया जा सकता ! वापस तो आना दूर, वहां जो नारकीयता इन पर बीतती उसका तो अंदाज भी नहीं लगाया जा सकता ! खासकर युवतियों-महिलाओं की मुसीबतों, उनके शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न के बारे में...........!!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

पिछले दिनों अमेरिका ने अपने यहां चोरी-छुपे, अनैतिक तथा गैर कानूनी रूप से घुसने वाले कुछ ऐसे लोगों को वापस भारत भिजवा दिया, जिन्हें ना यहां की सरकार ने, ना समाज ने, ना ही उनकी लियाकत ने इजाजत दी थी ''खच्चर वाले रास्ते'' से वहां जाने की ! ना ही जहां ये जा रहे थे, वहां की सरकार ने, या समाज ने या किसी और ने न्योता था, अपने यहां आने को ! 

जैसा कि अपने देश में होता आया है, जहां कुछ लोग मौतों में भी अपने लिए अवसर तलाशने लगते हैं, इस घटना पर भी उनके बचाव में पिंकी-गुड्डू जैसे गैंग उतर आए ! उन जैसों से ही यह सवाल है कि भाई रात के अंधेरे में यदि आपके घर कोई दिवार टाप कर अंदर घुसता है, तो क्या आप उसे डिनर खिला, उपहार दे, अपनी गाड़ी में उसके घर छोड़ने जाओगे या पहले खुद छितरैल कर पुलिस के हवाले करोगे ? 

हताशा में, बेघर हुए, नकारे हुए, हाशिए पर सरका दिए गए कुछ लोग सच को झूठ और झूठ को महा झूठ बना कर, अपने को फिर स्थापित करने का मौका तलाशते रहते हैं ! भले ही हर बार बेइज्जत हो (चाटने वाली बात कुछ भदेश हो जाती है) मुंह की खानी पड़ती हो ! ऐसे मौकापरस्तों, अवसरवादियों को किनारे कर (already they are) कुछ आशंकाओं पर नजर डाल, उनके परिणाम के बारे में सोचें तो रोंगटे खड़े हो जाएंगे !   

मान लीजिए, लौटाए गए ऐसे लोगों को, जिनका ना कोई रेकॉर्ड होता है, ना ही गिनती, ना ही दस्तावेज, उन्हें कैद कर सालों-साल के लिए जेल में डाल  दिया जाता  तो ? 

आप दुनिया के सबसे ताकतवर देश में, उसकी इजाजत के बगैर, अवैध रूप से घुस-पैठ करते पकड़े जाते हो ! यदि वह अपने देश में अराजकता और हिंसा फैलाने का दोष लगा गोली ही मार देता तो, पता भी नहीं चलता ! होती किसी की हिम्मत पूछने की ? वैसे भी कितने ही मार दिए जाते हों, क्या पता ! मार कर दुर्घटना का रूप दे दिया जाता हो, क्या पता ! कितने कैसी सजा भुगत रहे हों, क्या पता !

सबसे भयावक है कि जिस मैक्सिको की सीमा से कूद-फांद कर ये लोग अमेरिका में घुसे थे, यदि उसी मैक्सिको में वापस फेंक दिए जाते तो ? पनामा के जंगल जो मानव तस्करी करने वाले सबसे खतरनाक, निष्ठुर, माफियाओं के गढ़ हैं ! जहां माफियाओं द्वारा पैसे के लिए नृशंस, पाश्विक कृत्य जानवरों तक को दहला देते हैं ! वहां घटने वाली जो थोड़ी-बहुत बातें बाहर आती हैं, वे इतनी डरावनी, भयानक व हृदय-विदारक होती हैं कि उनका विवरण भी नहीं किया जा सकता ! वहां से इनका वापस आना तो दूर, वहां जिन्दा रह पाना भी मुश्किल होता ! जो नारकीयता इन पर बीतती उसका तो अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता ! खासकर युवतियों-महिलाओं की मुसीबतों, उनके शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न के बारे में ! उनकी तो जिंदगी नर्क बन कर रह जाती !

रही एजेंटों की बात तो वे पहुंचाने के पैसे लेते हैं, लौटा कर लाने के नहीं ! सोचने की बात है जो घुस-पैठ करवाने के ही पचास-पचास लाख ले लेते हों वे उस बदतरीन परिस्थिति में क्या नहीं मांग सकते ! वैसे भी ऐसे बदनसीबों की तलाश वहां के माफिया को रहती है जो शरीर के अंगों की तस्करी करते हैं ! उनको तो एक ही शरीर से करोड़ों की आमदनी हो जाती है ! तो...................................!!

माँ-बाप को, घर के बड़ों को, परिवार को, दूसरों की शिकायत या और किसी पर दोष मढ़ने की बजाय शुक्र मनाना चाहिए कि बच्चे सशरीर घर वापस आ गए हैं ! इसके साथ ही देश के ऐसे ''गरीबों'' को सबक लेना चाहिए कि लाखों-करोड़ों खर्च कर चौबीस घंटे किसी अनहोनी के डर से आशंकित रह, 14-14 घंटे की ड्यूटी करने से कहीं बेहतर है कि बाहर जाने की लालसा त्याग, यदि देश में ही परिवार के संग रह, उन्हीं पैसों से देश में ही कुछ कर सकून की जिंदगी बसर कर ली जाए !   

रविवार, 26 जनवरी 2025

पुलिसिया खौफ

अरे, कैसे बौड़म हो तुम ! जरा सी भी अक्ल नहीं है क्या ? रोज ही कुल्हाड़ी खोज-खोज कर अपना पैर उस पर जा मारने से बाज नहीं आते ! कभी तो दिमाग से काम ले लिया करो ! मैं स्तब्ध ! ऐसा क्या कर दिया मैंने ! धीरे से पूछा कि क्या हो गया ?'' क्या हो गया ?'' अरे, पूछो क्या नहीं हो गया !" कभी सोचा है तुमने कि जो पुलिस कुत्ते को भैंस में तब्दील कर सकती है, भैंस को कुत्ता बता कैद कर सकती है ! उसे तुम्हें भैंस और फिर कुत्ता साबित कर गिरफ्तार करने में कितनी देर लगेगी ! वैसे भी  तुम्हारा रंग काला ना सही, गहरा सांवला तो है ही ना.............!!        

#हिन्दी_ब्लागिंग           

अभी पूरा अँधेरा हुआ नहीं था ! पर ठंड के कारण बाहर इक्का-दुक्का लोग ही नज़र आ रहे थे ! श्रीमती जी उम्र के इस दौर की जरुरत के मुताबिक मंदिर में अर्जी लगाने गईं हुईं थीं। तभी मुख्य द्वार एक झन्नाटेदार आवाज के साथ खुला, लगा कोई भारी-भरकम चीज टकराई हो ! आवाज सुन बाहर निकला तो लॉन में एक भैंस को खड़े पाया, जो शायद गफलत में मुख्य द्वार खुला रहने की वजह से अंदर आ गई थी ! पास जाने की तो हिम्मत नहीं पड़ी सो दूर से ही हुश्शsssहुश्श की आवाज के साथ, हाथ वगैरह हिलाए पर वह जाने की बजाए मेरे और नजदीक आ गई !  

यही थीं 
मुझसे ना अंदर जाते बन रहा था ना हीं वहां खड़े रहते ! खुद को सभ्य, शांतिप्रिय, भाईचारे का हिमायती मानने वाले मुझ जैसे लोग किसी प्रकार का डंडा-लाठी भी अपने घर में नहीं रखते, पर आज अपनी स्वरक्षा के लिए ऐसी किसी चीज की जरुरत शिद्दत से महसूस हो रही थी ! इसी बीच भैंस बोल उठी, भाई साब, मुझे बचा लो ! मुझे एक झटका सा लगा ! पर मैं जैसे किसी दूसरे लोक में सपना देख रहा होऊं ! पता नहीं क्यों उसके इस तरह बोलने पर मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ, उलटे मैंने उससे पूछा कि क्या बात है, तुम घबराई सी क्यों हो ?

उसने बताना शुरू किया कि सुबह घोसी मोहल्ले में पुलिस आई थी जो किसी काले रंग के कुत्ते को खोज रही थी, जिसने किसी बड़े, रसूखदार आदमी को काट लिया था ! कुत्ता तो उन्हें नहीं मिला पर उनका हवलदार मुझे जैसे देखता हुआ गया, उससे मैं बहुत ही घबड़ा गई ! मैं बहुत ही डरपोक टाइप की भैंस हूं ! रंग भी मेरा काला है ! यदि पुलिस मुझे पकड़ कर ले गई और मेरी कुटाई कर मुझसे कुबुलवा लिया कि मैं भैस नहीं कुत्ता हूँ, तो मेरा क्या होगा ! इसी डर से मैं तबेले से भाग आई और आपका दरवाजा खुला देख अंदर आ गई ! अब आप ही मुझे बचा सकते हैं !

मेरी दबी-ढकी इंसानियत और पशुप्रेम ने अंगड़ाई ली ! मैंने उसे बाल्टी भर पानी पीने को दिया और पिछवाड़े के किचन गार्डन में ले जा कर कहा तुम यहां सुरक्षित महसूस करो, यदि भूख लगी हो तो यह घास वगैरह भी खा सकती हो ! वर्षों की पड़ी हुई मुफ्तखोरी की आदत यहां भी परोपकार के बहाने मुफ्त में झाड़-झंखाड़ की सफाई करवा लेने से बाज नहीं आई !  

अभी अपनी टुच्ची चतुराई पर खुश हो ही रहा था कि श्रीमती जी का आगमन हो गया ! आते ही बरस पड़ीं, बाहर का दरवाजा खुला पड़ा है और तुम यहां बैठे कम्प्यूटर टिपटिपा रहे हो ! कोई जानवर वगैरह घुस आया तो ? इतना भी नहीं कि जरा देख-दाख लिया करो, जनाब को फुरसत ही नहीं रहती ! इतने में उनकी नजर किचन गार्डन में घास चरती भैंसिया पर जा पड़ी, वहीं से चिल्लाईं, मैंने कहा था ना कि पशु-मवेशी घुस आएगा ! लो देखो, भैंस सारा लॉन चर गई है ! निकालो इसे !

मैंने उन्हें शांत करते हुए सारी बात बता कर कहा कि इसीलिए मैंने उसे अंदर लिया है ! मैंने सोचा था कि इस बात पर तो वे मेरी तारीफ करेंगी ही, पर यहां तो सदा की तरह फिर पासा उलटा पड़ गया ! श्रीमती जी ने सारी बात सुन अपना माथा पीट लिया, बोलीं, अरे कैसे बौड़म हो तुम ! जरा सी भी अक्ल नहीं है क्या ?तुमसे अक्लमंद तो ये भैंस है जिसने खतरा भांप लिया ! एक तुम हो जो कुल्हाड़ी खोज-खोज कर अपना पैर उस पर जा मारने से बाज नहीं आते ! कभी तो दिमाग से काम ले लिया करो ! 

मैं स्तब्ध ! ऐसा क्या कर दिया मैंने ! धीरे से पूछा कि क्या हो गया ?'' क्या हो गया ?'' अरे, पूछो क्या नहीं हो गया !" कभी सोचा है तुमने कि जो पुलिस कुत्ते को भैंस में तब्दील कर सकती है, भैंस को कुत्ता बता कैद कर सकती है ! उसे तुम्हें भैंस और फिर कुत्ता साबित कर गिरफ्तार करने में कितनी देर लगेगी ! वैसे भी  तुम्हारा रंग काला ना सही, गहरा सांवला तो है ही ना ! खुद तो अंदर जाओगे ही, मुझे भी परेशानी में डालोगे ! अगले हफ्ते मेरी तीन-तीन किटी पार्टियां हैं, क्या मुंह दिखाउंगी वहां !

अब बदहवास होने की मेरी बारी थी ! करूँ तो क्या करूँ ? मेरा तो कहीं छिपने का ठिकाना भी नहीं है ! कहाँ जाऊं ? ऐसे में AI का ख्याल आया। डूबते को तिनके का सहारा ! कम्प्यूटर खोल, AI के सामने अपनी समस्या रखी और उसका हल पूछा ! एक बार तो लगा कि वह भी सकते में आ गया है ! पर कुछ समय बाद उसका जवाब आया कि संसार में यदि कहीं की भी पुलिस किसी के पीछे पड़ जाए तो वह किसी भी हालत में बच नहीं सकता ! वही हाल आपका है। बचने का एक ही उपाय है ! आप कुत्तों की थोड़ी सी बोली सीख, अपने को कुत्ता डिक्लेयर कर, सरेंडर कर दो ! चकित हो मैंने पूछा इससे क्या होगा ? जवाब आया, इससे आप पुलिस की मार से बच जाएंगे और जब आपको कोर्ट में कुत्ते के रूप में पेश किया जाएगा तो आप भौंक कर दिखा जज को भी अपने श्वानपुत्र होने का विश्वास दिला देंगे ! फिर जो थोड़ी-बहुत सजा होगी उसे पूरा कर वापस आ जाइएगा ! मरता क्या ना करता ! कम्प्यूटर से ही सीखने की कोशिश कर रहा हूँ,

भौं-भौं....भौं.....भौं-भौं-भौं 

सोमवार, 25 दिसंबर 2023

शनि महाराज, सवालों के घेरे में

सवाल शनि देव पर भी उठता कि क्यों महाराज, आप तो खुद को न्याय का देवता कहलवाते हो ! फिर क्यों इतनी देर लग जाती है दोषियों को दंड मिलने में ? क्यों भ्रष्टाचारियों के दिल नहीं दहलते आपके डर से ? या फिर यह डर, कानून, नियम सब भोले-भाले आम लोगों के लिए ही होते हैं ? उस पर न्याय में विलंब आपके अस्तित्व पर भी तो सवाल उठा देता है ! अच्छा, क्या आपको कुछ अजीब नहीं लगता जब उसी अजीबोगरीब तरीके से आए पैसे से आपकी पूजा-अर्चना होती है, भोग लगता है ? क्या प्रभु आप भी............!!   

#हिन्दी_ब्लागिंग 

शनि देव को न्याय का देवता कहा गया है जो मनुष्यों को उनके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं ! शायद ये अकेले ऐसे देवता हैं जिनकी पूजा लोग श्रद्धा से कम, डर से ज्यादा करते हैं ! उन्हीं के जन्म स्थान के रूप में प्रसिद्ध है, शिंगणापुर ! जहां की मान्यता है कि इस देव स्थान में यदि कोई चोरी करता है तो वह गांव के बाहर नहीं जा पाता या तो अपनी दृष्टि खो बैठता है या फिर घोर कष्टों में पड़ जाता है ! कहते हैं इसीलिए यहां घरों-दुकानों में दरवाजे नहीं लगाए जाते ! इस देव स्थान का प्रबंधन सुचारु रूप से करने के लिए एक न्यासी बोर्ड का गठन किया गया है जिसका काम यहां के वित्त को व्यवस्थित करने, हितधारकों के हितों को बनाए रखने, परिचालन करने और दिशा-निर्देश में मदद करना है !  

शनि जन्मभूमि, शिंगणापुर 
अब इसी न्यासी बोर्ड के कई ऐसे कारनामे उजागर हुए हैं, जिन्हें इस बोर्ड के सदस्यों ने बिना गांव के बाहर गए, खुले खिड़की दरवाजों के सामने, बिना किसी डर-भय के ''वित्त को व्यवस्थित करते हुए सिर्फ बोर्ड के हितधारकों के हितों को को ध्यान में रख'' अंजाम दिया ! खबर के सामने आने से पता चला है कि न्यासी बोर्ड ने बासठ श्रमिकों की जगह 1800 लोगों को अनौपचारिक रूप से भर्ती कर वेतन में हेरा-फेरी की ! दर्शन की रसीदों में घपला कर करोड़ों का गबन किया ! मंदिर को मिलने वाले दान को एक निजी शिक्षण संस्थान को दिया जाता रहा ! बिजली आपूर्ति पर प्रति माह 40 लाख के डीजल का खर्च दिखाया जाता रहा ! मंदिर के सौंदर्यीकरण पर 50 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद 50 फीसदी ही काम हो पाया है और यह सब लंबे समय से होता आ रहा है ! और वे सब फलते-फूलते रहे न्याय के दरबार में, ठीक न्यायाधीश की नाक के नीचे ! 

अब सवाल शनि देव पर ही उठता कि क्यों महाराज, आप तो खुद को न्याय का देवता कहलवाते हो ! फिर क्यों इतनी देर लग जाती है दोषियों को दंड मिलने में ? क्यों भ्रष्टाचारियों के दिल नहीं दहलते आपके डर से ? कैसे हिम्मत होती है आपके सामने कुकृत्य करने की ? या फिर यह डर, कानून, नियम सब भोले-भाले आम लोगों के लिए ही होते हैं ? खासमखास इससे परे होते हैं ! उस पर न्याय में विलंब आपके अस्तित्व पर भी तो सवाल उठा देता है ! अच्छा, क्या आपको कुछ अजीब नहीं लगता जब उसी अजीबोगरीब तरीके से आए पैसे से आपकी पूजा-अर्चना होती है, भोग लगता है ? 

क्या प्रभु आप भी............!! 

शनिवार, 28 जनवरी 2023

डर..! सभी को लगता है

समाज में सबसे निडर फौजी जवानों को माना जाता है ! इसी विषय डर पर, सेना से अवकाश लेने के बाद जब एक साक्षात्कार में सैम मानेकशॉ से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जो इंसान यह कहता है कि उसे डर नहीं लगता, वह झूठ बोलता है ! कम-ज्यादा हो सकता है पर डर सबको लगता है ! सार्वजनिक रूप से भले ही कोई स्वीकार करे या ना करे ! यह पूछने पर कि क्या आपको भी लगता है ? तो उन्होंने कहा कि मैं आम लोगों से इस बात में अलग नहीं हूँ, मुझे भी लगता है......!       

#हिन्दी_ब्लागिंग 

डर क्या है ! आम अर्थ में यह एक नकारात्मक भावना है। यह इंसानों में तब देखा जाता है जब उन्हें किसी से किसी प्रकार का जोखिम महसूस होता हो। यह जोखिम किसी भी प्रकार का हो सकता है, काल्पनिक भी और वास्तविक भी ! पर मृत्यु का भय सर्वोपरि होता है ! अलग-अलग व्यक्ति अलग-अलग प्रकार से इसका अनुभव करते हैं ! कुछ सिद्ध पुरुषों को छोड़ दिया जाए तो यह भावना कमोबेश सभी में रहती है ! डर सभी को लगता है !  


समाज में सबसे निडर फौजी जवानों को माना जाता है ! इसी विषय पर एक बार सेना से अवकाश लेने के बाद एक साक्षात्कार में सैम मानेकशॉ ने कहा था कि जो इंसान यह कहता है कि उसे डर नहीं लगता, वह झूठ बोलता है ! कम-ज्यादा हो सकता है पर डर सबको लगता है ! यह पूछने पर कि क्या आपको भी लगता है, उन्होंने एक आपबीती सुनाई ! 

उनके अनुसार जब वे विश्व युद्ध के दौरान बर्मा में नियुक्त थे तो उनके मातहत एक सोहन सिंह नाम का बिगड़ैल, शरारती किस्म का जवान हुआ करता था। उसकी हरकतों के कारण उसकी पदोन्नति नहीं होती थी ! ऐसे ही एक बार तरक्की के लिए उसका नाम भी लिस्ट में तो आया, पर उसे फिर मौका नहीं मिला ! उसके बाद मुझे बताया गया कि जरा सावधान रहें, आपकी सुरक्षा भी बढ़ाई जा रही है क्योंकि सोहन लाल ने कहा है कि आज मैं साहब को गोली मार दूँगा ! वैसे उससे उसके हथियार ले कर उसे बंदी बना लिया गया है ! ऐसा जान कर मैंने सोहन सिंह को बुलवाया और उससे इस बारे में पूछा, तो वह बोला, साहब बहुत बड़ी गलती हो गई ! लिस्ट में नाम ना पा कर गुस्से में ऐसा कह दिया ! माफ कर दीजिए ! मैंने कहा, नहीं. नहीं मुझे मारना है न, यह मेरी पिस्तौल ले और मुझे गोली मार दे ! यह कह कर मैंने अपनी पिस्तौल उसके सामने लोड कर उसकी ओर बढ़ा दी ! उसने हाथ जोड़ लिए और माफी माँगने लगा ! इसके बावजूद मेरे साथियों ने कहा कि इस पर विश्वास मत कीजिए, ये बाज नहीं आएगा ! पर मैंने सब जानते समझते हुए भी सोहन लाल को कहा कि आज रात तुम्हारी ड्यूटी मेरे टेंट के बाहर होगी और सुबह की चाय मेरे लिए तुम लेकर आओगे ! सुबह वह नियत समय पर गर्म पानी और चाय ले कर आया ! बाद में लोगों ने मुझसे पूछा कि साहब आपको डर नहीं लगा ! तो मैंने बताया कि जरूर लगा, पर लीडरशीप की मांग यह होती है कि उसको जाहिर न किया जाए ! लीडर से यह अपेक्षा रहती है कि वह सामने वाले की स्थितियों-परिस्थितियों को समझ, उसके अनुरूप स्थिति को संभाल सके ! 


तो सार यही है कि शरीर की प्रकृति प्रदत्त अन्य स्थाई भावनाओं, चेष्टाओं, जरूरतों की तरह डर भी एक जरूरी भावना है ! यह है, तभी इंसान खुद को सचेत, सावधान व सुरक्षित रख पाता है ! इंसान रूपी कंप्यूटर का यह ऐसा आवश्यक सॉफ्टवेयर है जिसे डिलीट नहीं किया जा सकता ! 

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से

रविवार, 5 दिसंबर 2021

कुछ तो है, जो समझ से बाहर है

अचानक देश के दक्षिणी भाग से, दक्षिण अफ्रीका से आया एक आदमी खतरे का वायस बन जाता है ! सवाल यहीं से सर उठाता है कि जब सारी दुनिया खबरदार थी ! सभी जगह कड़ी एहतियात बरती जा रही थी तो वह शख्स भारत कैसे पहुंचा ? क्या जहाज पर चढ़ते समय उसकी चेकिंग नहीं हुई ? यदि उस समय वह ठीक था तो क्या यात्रा के दौरान वह संक्रमित हुआ ? हुआ तो कैसे ? यदि ऐसा हुआ भी तो क्या वह अकेला ही बीमार हुआ ? सच्चाई क्या है, आम जनता को कोई भी बताना नहीं चाहता, अपने-अपने स्वार्थों के तहत .........!      

#हिन्दी_ब्लागिंग 

कुछ तो है..! कुछ ऐसा, जिसका एहसास तो हो रहा है पर साफ-साफ समझ नहीं आ रहा ! महामारी के दो सालों बाद, जब लग रहा था कि दुनिया की दिनचर्या फिर ढर्रे पर आ रही है, सब कुछ, कुछ-कुछ नॉर्मल हो रहा है, तभी फिर एक नई डरावनी खबर संसार पर तारी होने लगती है, एक नए नाम और व्यवहार के साथ ! शुरुआत तो कोरोना की भी ऐसे ही हुई थी ! पर तब दुनिया उससे बिलकुल अनजान थी ! कोई राह नहीं थी ! कोई इलाज नहीं था ! अँधेरे में हाथ-पैर मार कर किसी तरह पार पाया गया था ! पर अब तो देश-दुनिया सभी के सचेत रहते, फिर कैसे खतरा मंडराने लगा !!

मजे की बात यह कि इस ज्यादा खतरनाक और तेज नए अवतार से पीड़ित व्यक्ति दो ही दिन में ठीक हो बैडमिंटन भी खेलने लगता है ! अब जो धुंधली तस्वीर बनती है, उसे कोई भी साफ करने की जहमत नहीं उठाता ! सिर्फ डराने पर जोर दिया जाता है

अचानक देश के दक्षिणी भाग से, दक्षिण अफ्रीका से आया एक आदमी खतरे का वायस बन जाता है ! सवाल यहीं से सर उठाता है कि जब सारी दुनिया खबरदार थी ! सभी जगह कड़ी एहतियात बरती जा रही थी तो वह शख्स भारत कैसे पहुंचा ? क्या जहाज पर चढ़ते समय उसकी चेकिंग नहीं हुई ? यदि उस समय वह ठीक था तो क्या यात्रा के दौरान वह संक्रमित हुआ ? हुआ तो कैसे ? यदि ऐसा हुआ भी तो क्या वह अकेला ही बीमार हुआ ? वैसे ही फिर खबर आती है कि अमेरिका से आए दो कोरोना पॉजिटिव देश के मध्य तक पहुँच गए ! क्या अमेरिका, जो महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा था, वहाँ भी लापरवाही बरती जा रही है ? क्या वहाँ यात्रियों का परिक्षण नहीं किया जाता ? उस पर भारत आने पर क्या उनकी जांच नहीं हुई ? यदि सब ठीक था, तो वे कहां और कैसे संक्रमित हुए ?   


ये तो बाहर से आए लोगों की बात थी ! अपने ही देश में उसी दक्षिणी भाग से फिर एक व्यक्ति संक्रमित पाया जाता है ! वह तो कहीं बाहर भी नहीं गया था ! तो क्या जीवाणु यहां पहले से मौजूद था ? यदि हाँ, तो क्या वह कोरोना की पारी खत्म होने का इन्तजार कर रहा था कि वह हटे तो मैं आऊँ ! या फिर उस अकेले आदमी की प्रतिरोधक क्षमता ही सबसे कमजोर थी ! वैसे इन जीवाणुओं को दक्षिण का डोसा-सांभर ही क्यूँ सुहाता है ! जो वहीं से अपना शिकार चुनते हैं ! मजे की बात यह कि इस ज्यादा खतरनाक और तेज नए अवतार से पीड़ित व्यक्ति दो ही दिन में ठीक हो बैडमिंटन भी खेलने लगता है ! अब जो धुंधली तस्वीर बनती है, उसे कोई भी साफ करने की जहमत नहीं उठाता ! सिर्फ डराने पर जोर दिया जाता है ! सच्चाई क्या है आम जनता को कोई भी बताना नहीं चाहता, अपने-अपने स्वार्थों के तहत !

पिछले दिनों क्रिकेट के मैचों के दौरान खचाखच भरे स्टेडियम में बिना मास्क और दूरी बनाए बैठे लोग ! बेपरवाह नेताओं की बेतरतीब रैलियां ! दूषित वातावरण, अस्वच्छ माहौल में महीनों से रह रहे किसान ! त्योहारों के दौरान बाजार में एक दूसरे के कंधे छीलती हजारों की भीड़ ! इन सबके बावजूद कोरोना के घटते आंकड़े ! फिर अचानक सुस्त पड़े, मुद्दा-विहीन खबरिया चैनल सक्रीय हो उठते हैं, एक नए वैरिएंट ओमिक्रान का डोज पी कर !!       

विशिष्ट पोस्ट

जिसने सबसे ज्यादा विभिन्न रोगग्रस्त पात्रों का किरदार निभाया

अनेकों बार  Autism, Dyslexia, Progeria, Paraplegia, Alzheimer, Amnesia, Schizophrenia जैसी अनेक  बीमारियों पर, जिनका नाम भी आम लोगों ने सुना...