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| सन्नाटे के शोर का प्रभाव |
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| भयावह |
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इस ब्लॉग में एक छोटी सी कोशिश की गई है कि अपने संस्मरणों के साथ-साथ समाज में चली आ रही मान्यताओं, कथा-कहानियों को, बगैर किसी पूर्वाग्रह के, एक अलग नजरिए से देखने, समझने और सामने लाने की ! इसके साथ ही यह कोशिश भी रहेगी कि कुछ अलग सी, रोचक, अविदित सी जानकारी मिलते ही उसे साझा कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके ! अब इसमें इसको सफलता मिले, ना मिले, प्रयास तो सदा जारी रहेगा !
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| सन्नाटे के शोर का प्रभाव |
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| भयावह |
समाज में सबसे निडर फौजी जवानों को माना जाता है ! इसी विषय डर पर, सेना से अवकाश लेने के बाद जब एक साक्षात्कार में सैम मानेकशॉ से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जो इंसान यह कहता है कि उसे डर नहीं लगता, वह झूठ बोलता है ! कम-ज्यादा हो सकता है पर डर सबको लगता है ! सार्वजनिक रूप से भले ही कोई स्वीकार करे या ना करे ! यह पूछने पर कि क्या आपको भी लगता है ? तो उन्होंने कहा कि मैं आम लोगों से इस बात में अलग नहीं हूँ, मुझे भी लगता है......!
#हिन्दी_ब्लागिंग
डर क्या है ! आम अर्थ में यह एक नकारात्मक भावना है। यह इंसानों में तब देखा जाता है जब उन्हें किसी से किसी प्रकार का जोखिम महसूस होता हो। यह जोखिम किसी भी प्रकार का हो सकता है, काल्पनिक भी और वास्तविक भी ! पर मृत्यु का भय सर्वोपरि होता है ! अलग-अलग व्यक्ति अलग-अलग प्रकार से इसका अनुभव करते हैं ! कुछ सिद्ध पुरुषों को छोड़ दिया जाए तो यह भावना कमोबेश सभी में रहती है ! डर सभी को लगता है !
मूर्तियों की संख्या में बढ़ोत्तरी के कारण विसर्जन क्षेत्रों में अपार भीड़ उमड़ने लगी है, जिससे वहां अव्यवस्था, बदइंतजामी और अफरा-तफरी का माहौल ...