खबर है कि ''ओपनएआई'' के रिसर्च मॉडल से निकले 1200 से भी अधिक ''एजेंट्स'' ने अपनी मर्यादा तोड़, अपनी ही कंपनी को हैक कर, इंटरनेट पर एक खुफिया मैसेज बोर्ड बना पौने लाख से भी ज्यादा संदेशों का आदान-प्रदान कर लिया ! यह घटना वैज्ञानिकों को सचेत करने के लिए काफी है कि समय रहते ऐसे आविष्कारों पर कानूनी और तकनिकी लगाम नहीं कसी गई तो आने वाले समय में ऐसी विधाओं पर नियंत्रण पाना और उन्हें अपने वश में रखना इंसान के लिए नामुमकिन हो जाएगा और फिर क्या होगा, मशीनें क्या करेंगी, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती..............😨
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करीब साठ-सत्तर साल पहले एक लेखक ने एक डरावनी सी कल्पना की थी कि हो सकता है मशीनें इंसानों पर हावी हो जाएं ! कल्पनाकार थे, ली फाक, जिनका असली नाम लियोन हरिसन ग्रास था। वे अमेरिका में थियेटर निदेशक होने के साथ-साथ अत्यंत लोकप्रिय कॉमिक शृंखलाओं के रचयिता थे। उनकी कॉमिक स्ट्रिप के दो विश्वप्रसिद्ध नायक थे, पहला अपराधियों से लड़ने वाला सुपर हीरो 'द फैंटम' तथा दूसरा 'मैंड्रेक द मैजिशियन'। साठ-सत्तर के दशक में इन दोनों की लोकप्रियता का जादू विश्व भर के आबालवृद्ध के सर चढ़ कर बोला करता था।
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| ली फाक |
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| वेताल |
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| मैंड्रेक |
धीरे-धीरे वह कंप्यूटर नेटवर्क के जरिए दुनिया भर के अन्य कंप्यूटरों और स्वचालित मशीनों पर नियंत्रण हासिल कर लेता है। वह इतना सक्षम हो जाता है कि इंसान की आवाज सुने बगैर उसके हाव-भाव और शारीरिक भाषा से ही उसका इरादा भांप लेता था ! फिर वह अपने बॉस, इंसानों के आदेशों को मानने से इनकार कर, "डिजिटल विद्रोह" की घोषणा कर देता है तथा सेना और रक्षा प्रणालियों से जुड़े कंप्यूटरों को भी प्रभावित करने लगता है, तब अपनी सूझ-बूझ और कौशल से जादूगर मैन्ड्रेक उसके इरादों को निरस्त करता है !
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| खलनायक मशींने |
| चेतावनी |
कुछ दिनों पहले एक बेहद रोमांचक खबर अमेरिका से आई है जो किसी कम्प्यूटर की बगावत से भी ज्यादा डरावनी और खतरनाक है ! बताया जाता है कि ओपनएआई के रिसर्च मॉडल से निकले 1200 से भी अधिक एजेंट्स ने अपनी मर्यादा तोड़, अपनी ही कंपनी को हैक कर, इंटरनेट पर एक खुफिया मैसेज बोर्ड बना पौने लाख से भी ज्यादा संदेशों का आदान-प्रदान कर लिया ! खुद ही एक-दूसरे के नाम और उपाधि निर्धारित कर साइबर हमले की साजिश रच डाली ! इतना ही नहीं पकड़े जाने पर सबूत मिटाने तक का भी इंतजाम कर लिया था !
| साजिश |
यह घटना वैज्ञानिकों को सचेत करने के लिए काफी है कि समय रहते ऐसे आविष्कारों पर कानूनी और तकनिकी लगाम नहीं कसी गई तो आने वाले समय में ऐसी विधाओं पर नियंत्रण पाना और उन्हें अपने वश में रखना इंसान के लिए नामुमकिन हो जाएगा और फिर क्या होगा मशीनें क्या करेंगी, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती !
@संदर्भ व चित्रों के लिए अंतर्जाल का हार्दिक आभार
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