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रविवार, 6 सितंबर 2026

साकार होती, एक डरावनी कल्पना

खबर है कि ''ओपनएआई'' के रिसर्च मॉडल से निकले 1200 से भी अधिक ''एजेंट्स'' ने अपनी मर्यादा तोड़, अपनी ही कंपनी को हैक कर, इंटरनेट पर एक खुफिया मैसेज बोर्ड बना पौने लाख से भी ज्यादा संदेशों का आदान-प्रदान कर लिया ! यह घटना वैज्ञानिकों को सचेत करने के लिए काफी है कि समय रहते ऐसे आविष्कारों पर कानूनी और तकनिकी लगाम नहीं कसी गई तो आने वाले समय में ऐसी विधाओं पर नियंत्रण पाना और उन्हें अपने वश में रखना इंसान के लिए नामुमकिन हो जाएगा और फिर क्या होगा, मशीनें क्या करेंगी, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती..............😨

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

करीब साठ-सत्तर साल पहले एक लेखक ने एक डरावनी सी कल्पना की थी कि हो सकता है मशीनें इंसानों पर हावी हो जाएं ! कल्पनाकार थे, ली फाक, जिनका असली नाम लियोन हरिसन ग्रास था। वे अमेरिका में थियेटर निदेशक होने के साथ-साथ अत्यंत लोकप्रिय कॉमिक शृंखलाओं के रचयिता थे। उनकी कॉमिक स्ट्रिप के दो विश्वप्रसिद्ध नायक थे, पहला अपराधियों से लड़ने वाला सुपर हीरो 'द फैंटम' तथा दूसरा 'मैंड्रेक द मैजिशियन'। साठ-सत्तर के दशक में इन दोनों की लोकप्रियता का जादू विश्व भर के आबालवृद्ध के सर चढ़ कर बोला करता था। 

इंसान पर हावी होने का खतरा 

ली फाक 
ली फाक ने जून 1967 में, जब कंप्यूटर शुरुआती दौर में थे, ''मैंड्रेक द मैजिशियन'' की शृंखला की एक कहानी "द कंप्यूटर वर्ल्ड" (The Computer World) में कंप्यूटर विद्रोह की एक अनोखी झलक दिखलाई थी। जिसमें एक अति-आधुनिक और विशालकाय सुपरकंप्यूटर बनाया जाता है, जिसे इंसान की तरह सोचने और निर्णय लेने की क्षमता दी जाती है। कुछ ही समय में यह कंप्यूटर खुद को इंसानों से बेहतर और श्रेष्ठ मानने लगता है और स्वतंत्र रूप से काम करना शुरू कर देता है। 

वेताल 

मैंड्रेक 

धीरे-धीरे वह कंप्यूटर नेटवर्क के जरिए दुनिया भर के अन्य कंप्यूटरों और स्वचालित मशीनों पर नियंत्रण हासिल कर लेता है। वह इतना सक्षम हो जाता है कि इंसान की आवाज सुने बगैर उसके हाव-भाव और शारीरिक भाषा से ही उसका इरादा भांप लेता था ! फिर वह अपने बॉस, इंसानों के आदेशों को मानने से इनकार कर, "डिजिटल विद्रोह" की घोषणा कर देता है तथा सेना और रक्षा प्रणालियों से जुड़े कंप्यूटरों को भी प्रभावित करने लगता है, तब अपनी सूझ-बूझ और कौशल से जादूगर मैन्ड्रेक उसके इरादों को निरस्त करता है ! 

खलनायक मशींने 
वह तो एक काल्पनिक कहानी थी, पर आजकल जैसी खबरें आने लगी हैं, उनसे वर्षों पहले की ली फाक की वह रोंगटे खड़े कर देने वाली कल्पना आधुनिक आविष्कार AI के माध्यम से कुछ-कुछ साकार होती दिख रही है ! जबसे इस विधा को इंसानों की नकल करने के साथ-साथ अन्य समस्याओं को हल करने की सीख दी जा रही है, तबसे यह ऐसा व्यवहार करने लगी है जिसकी तनिक सी भी उम्मीद इसके निर्माताओं को नहीं थी, इसने किसी समस्या को हल करने के लिए अपनी तलाश की सीमाएं लांघ धोखा देना भी सीख लिया है !
आशंका 

कुछ दिनों पहले एक बेहद रोमांचक खबर अमेरिका से आई है जो किसी कम्प्यूटर की बगावत से भी ज्यादा डरावनी और खतरनाक है ! बताया जाता है कि ओपनएआई के रिसर्च मॉडल से निकले 1200 से भी अधिक एजेंट्स ने अपनी मर्यादा तोड़, अपनी ही कंपनी को हैक कर, इंटरनेट पर एक खुफिया मैसेज बोर्ड बना पौने लाख से भी ज्यादा संदेशों का आदान-प्रदान कर लिया ! खुद ही एक-दूसरे के नाम और उपाधि निर्धारित कर साइबर हमले की साजिश रच डाली ! इतना ही नहीं पकड़े जाने पर सबूत मिटाने तक का भी इंतजाम कर लिया था ! 

चेतावनी 

यह घटना वैज्ञानिकों को सचेत करने के लिए काफी है कि समय रहते ऐसे आविष्कारों पर कानूनी और तकनिकी लगाम नहीं कसी गई तो आने वाले समय में ऐसी विधाओं पर नियंत्रण पाना और उन्हें अपने वश में रखना इंसान के लिए नामुमकिन हो जाएगा और फिर क्या होगा मशीनें क्या करेंगीउसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती !

@संदर्भ व चित्रों के लिए अंतर्जाल का हार्दिक आभार 

रविवार, 26 जनवरी 2025

पुलिसिया खौफ

अरे, कैसे बौड़म हो तुम ! जरा सी भी अक्ल नहीं है क्या ? रोज ही कुल्हाड़ी खोज-खोज कर अपना पैर उस पर जा मारने से बाज नहीं आते ! कभी तो दिमाग से काम ले लिया करो ! मैं स्तब्ध ! ऐसा क्या कर दिया मैंने ! धीरे से पूछा कि क्या हो गया ?'' क्या हो गया ?'' अरे, पूछो क्या नहीं हो गया !" कभी सोचा है तुमने कि जो पुलिस कुत्ते को भैंस में तब्दील कर सकती है, भैंस को कुत्ता बता कैद कर सकती है ! उसे तुम्हें भैंस और फिर कुत्ता साबित कर गिरफ्तार करने में कितनी देर लगेगी ! वैसे भी  तुम्हारा रंग काला ना सही, गहरा सांवला तो है ही ना.............!!        

#हिन्दी_ब्लागिंग           

अभी पूरा अँधेरा हुआ नहीं था ! पर ठंड के कारण बाहर इक्का-दुक्का लोग ही नज़र आ रहे थे ! श्रीमती जी उम्र के इस दौर की जरुरत के मुताबिक मंदिर में अर्जी लगाने गईं हुईं थीं। तभी मुख्य द्वार एक झन्नाटेदार आवाज के साथ खुला, लगा कोई भारी-भरकम चीज टकराई हो ! आवाज सुन बाहर निकला तो लॉन में एक भैंस को खड़े पाया, जो शायद गफलत में मुख्य द्वार खुला रहने की वजह से अंदर आ गई थी ! पास जाने की तो हिम्मत नहीं पड़ी सो दूर से ही हुश्शsssहुश्श की आवाज के साथ, हाथ वगैरह हिलाए पर वह जाने की बजाए मेरे और नजदीक आ गई !  

यही थीं 
मुझसे ना अंदर जाते बन रहा था ना हीं वहां खड़े रहते ! खुद को सभ्य, शांतिप्रिय, भाईचारे का हिमायती मानने वाले मुझ जैसे लोग किसी प्रकार का डंडा-लाठी भी अपने घर में नहीं रखते, पर आज अपनी स्वरक्षा के लिए ऐसी किसी चीज की जरुरत शिद्दत से महसूस हो रही थी ! इसी बीच भैंस बोल उठी, भाई साब, मुझे बचा लो ! मुझे एक झटका सा लगा ! पर मैं जैसे किसी दूसरे लोक में सपना देख रहा होऊं ! पता नहीं क्यों उसके इस तरह बोलने पर मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ, उलटे मैंने उससे पूछा कि क्या बात है, तुम घबराई सी क्यों हो ?

उसने बताना शुरू किया कि सुबह घोसी मोहल्ले में पुलिस आई थी जो किसी काले रंग के कुत्ते को खोज रही थी, जिसने किसी बड़े, रसूखदार आदमी को काट लिया था ! कुत्ता तो उन्हें नहीं मिला पर उनका हवलदार मुझे जैसे देखता हुआ गया, उससे मैं बहुत ही घबड़ा गई ! मैं बहुत ही डरपोक टाइप की भैंस हूं ! रंग भी मेरा काला है ! यदि पुलिस मुझे पकड़ कर ले गई और मेरी कुटाई कर मुझसे कुबुलवा लिया कि मैं भैस नहीं कुत्ता हूँ, तो मेरा क्या होगा ! इसी डर से मैं तबेले से भाग आई और आपका दरवाजा खुला देख अंदर आ गई ! अब आप ही मुझे बचा सकते हैं !

मेरी दबी-ढकी इंसानियत और पशुप्रेम ने अंगड़ाई ली ! मैंने उसे बाल्टी भर पानी पीने को दिया और पिछवाड़े के किचन गार्डन में ले जा कर कहा तुम यहां सुरक्षित महसूस करो, यदि भूख लगी हो तो यह घास वगैरह भी खा सकती हो ! वर्षों की पड़ी हुई मुफ्तखोरी की आदत यहां भी परोपकार के बहाने मुफ्त में झाड़-झंखाड़ की सफाई करवा लेने से बाज नहीं आई !  

अभी अपनी टुच्ची चतुराई पर खुश हो ही रहा था कि श्रीमती जी का आगमन हो गया ! आते ही बरस पड़ीं, बाहर का दरवाजा खुला पड़ा है और तुम यहां बैठे कम्प्यूटर टिपटिपा रहे हो ! कोई जानवर वगैरह घुस आया तो ? इतना भी नहीं कि जरा देख-दाख लिया करो, जनाब को फुरसत ही नहीं रहती ! इतने में उनकी नजर किचन गार्डन में घास चरती भैंसिया पर जा पड़ी, वहीं से चिल्लाईं, मैंने कहा था ना कि पशु-मवेशी घुस आएगा ! लो देखो, भैंस सारा लॉन चर गई है ! निकालो इसे !

मैंने उन्हें शांत करते हुए सारी बात बता कर कहा कि इसीलिए मैंने उसे अंदर लिया है ! मैंने सोचा था कि इस बात पर तो वे मेरी तारीफ करेंगी ही, पर यहां तो सदा की तरह फिर पासा उलटा पड़ गया ! श्रीमती जी ने सारी बात सुन अपना माथा पीट लिया, बोलीं, अरे कैसे बौड़म हो तुम ! जरा सी भी अक्ल नहीं है क्या ?तुमसे अक्लमंद तो ये भैंस है जिसने खतरा भांप लिया ! एक तुम हो जो कुल्हाड़ी खोज-खोज कर अपना पैर उस पर जा मारने से बाज नहीं आते ! कभी तो दिमाग से काम ले लिया करो ! 

मैं स्तब्ध ! ऐसा क्या कर दिया मैंने ! धीरे से पूछा कि क्या हो गया ?'' क्या हो गया ?'' अरे, पूछो क्या नहीं हो गया !" कभी सोचा है तुमने कि जो पुलिस कुत्ते को भैंस में तब्दील कर सकती है, भैंस को कुत्ता बता कैद कर सकती है ! उसे तुम्हें भैंस और फिर कुत्ता साबित कर गिरफ्तार करने में कितनी देर लगेगी ! वैसे भी  तुम्हारा रंग काला ना सही, गहरा सांवला तो है ही ना ! खुद तो अंदर जाओगे ही, मुझे भी परेशानी में डालोगे ! अगले हफ्ते मेरी तीन-तीन किटी पार्टियां हैं, क्या मुंह दिखाउंगी वहां !

अब बदहवास होने की मेरी बारी थी ! करूँ तो क्या करूँ ? मेरा तो कहीं छिपने का ठिकाना भी नहीं है ! कहाँ जाऊं ? ऐसे में AI का ख्याल आया। डूबते को तिनके का सहारा ! कम्प्यूटर खोल, AI के सामने अपनी समस्या रखी और उसका हल पूछा ! एक बार तो लगा कि वह भी सकते में आ गया है ! पर कुछ समय बाद उसका जवाब आया कि संसार में यदि कहीं की भी पुलिस किसी के पीछे पड़ जाए तो वह किसी भी हालत में बच नहीं सकता ! वही हाल आपका है। बचने का एक ही उपाय है ! आप कुत्तों की थोड़ी सी बोली सीख, अपने को कुत्ता डिक्लेयर कर, सरेंडर कर दो ! चकित हो मैंने पूछा इससे क्या होगा ? जवाब आया, इससे आप पुलिस की मार से बच जाएंगे और जब आपको कोर्ट में कुत्ते के रूप में पेश किया जाएगा तो आप भौंक कर दिखा जज को भी अपने श्वानपुत्र होने का विश्वास दिला देंगे ! फिर जो थोड़ी-बहुत सजा होगी उसे पूरा कर वापस आ जाइएगा ! मरता क्या ना करता ! कम्प्यूटर से ही सीखने की कोशिश कर रहा हूँ,

भौं-भौं....भौं.....भौं-भौं-भौं 

रविवार, 2 जून 2024

Deepfake, चरम नकली

अधिकांश लोगों को ग्रंथों में वर्णित देवराज इंद्र की उस ओछी हरकत का ज्ञान होगा, जब उसने ऋषि गौतम का रूप धारण कर उनकी पत्नी अहिल्या के साथ दुर्व्यवहार किया था ! वह कामरूप सिद्धि थी जो डीपफेक का बेहद उच्च कोटि का संस्करण था ! हनुमान जी ने भी श्री राम के पहले दर्शन साधू वेश में किए थे ! सीता हरण, शूर्पणखा कांड, मारीच का स्वर्ण हिरण रूप, रावण के गुप्तचर शुक का वानर रूप सब डीपफेक के उच्च कोटि के संस्करणों के ही तो उदाहरण हैं ! महिषासुर ने तो साक्षात भैंसे का रूप ही धारण कर लिया था...........! 

#हिन्दी_ब्लागिंग 

समय के साथ-साथ विज्ञान प्रकृति के रहस्यमयी परदे के पीछे से तरह-तरह की अनोखी चीजें हमारे सामने लाता रहा है, यह क्रम जारी है और सदा जारी रहेगा ! कुछ दिनों पहले तक नकली वीडियो, ऑडियो, तस्वीरें वगैरह काफी प्रसारित- प्रचारित होते रहे थे ! वहीं अब एक नई विधा Deep Fake, जिसके लिए अभी हिंदी का उपयुक्त शब्द ईजाद नहीं हुआ है, सामने आई है ! यह एक प्रकार की वीडियो या इमेज है जिसमें किसी व्यक्ति का चेहरा किसी दूसरे व्यक्ति के चेहरे से बदल दिया जाता है। डीपफेक वीडियो बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग की मदद ली जाती है। डीपफेक वीडियो और ऑडियो दोनों रूपों में हो सकता है ! इस उच्च कोटी की संपादित तकनीकी की खासियत यह है कि इसमें नकली और असली में अंतर कर पाना बहुत मुश्किल होता है ! पर आज का यह लेख इस विधा से संबंधित एक दूसरी बात को सामने लाने के लिए है !  

हमारे प्राचीन ग्रंथों में हजारों वर्ष पहले आठ सिद्धियों, नौ निधियों तथा दस गौण सिद्धियों के बारे में विस्तार से बताया गया है ! उन्हीं गौण सिद्धियों में परकायाप्रवेशनम् तथा कामरूपम्: नाम की दो सिद्धियां भी हैं !  परकायाप्रवेशनम् की सहायता से जहां किसी भी शरीर में प्रवेश किया जा सकता है। वहीं कामरूपम: सिद्धि को सिद्ध कर साधक अपनी इच्छा अनुसार कोई भी रूप धारण कर सकता है। देखा जाए तो ये आज की डीपफेक तकनीक के बहुत ही परिष्कृत और बेहद उच्च स्तरीय संस्करण हैं ! आज का डीपफेक जहां अभी तक सिर्फ यंत्रों में आभासी स्तर तक ही सिमित है, वहीं इन सिद्धियों का प्रयोग और उपयोग रामायण-महाभारत के अलावा अन्य ग्रंथों के अनुसार सुर-असुर, देवता, राक्षस, गंधर्व इत्यादि के द्वारा, वास्तविक रूप में, अच्छा-बुरा लाभ उठाने या गुप्तचरी करने की कोशिश में किए जाने का उल्लेख मिलता है ! 

गौतम ऋषि के वेश में छल करता इंद्र 
अधिकांश लोगों को ग्रंथों में वर्णित देवराज इंद्र की उस ओछी हरकत का ज्ञान होगा, जब उसने ऋषि गौतम का रूप धर उनकी पत्नी अहिल्या के साथ दुर्व्यवहार किया था ! वह कामरूप सिद्धि थी जो डीपफेक का बेहद उच्च कोटि का संस्करण ही तो था ! हनुमान जी ने भी श्री राम के पहले दर्शन साधू वेश में किए थे ! सीता हरण, शूर्पणखा कांड, मारीच का स्वर्ण हिरण रूप, रावण के गुप्तचर शुक का वानर रूप सब डीपफेक के उच्च कोटि के संस्करणों के ही तो उदाहरण हैं ! महिषासुर ने तो साक्षात भैंसे का रूप ही धारण कर लिया था ! कितना और कहां तक गिनाया जाए........! 

साधू वेश में हनुमान जी का राम मिलाप 
हमारे ग्रंथों में वर्णित ज्ञान के सामने आज का विज्ञान नवजात शिशु रूप में ही है ! जो अभी तक उस समय के मुकाबले ऐसी इक्का-दुक्का उपलब्धियां ही हासिल कर पाया है ! इसके बावजूद दिक्कत हमारे साथ ही है ! हम खुद ही अपने गौरवान्वित इतिहास पर विश्वास नहीं करते ! ग्रंथों में लिखी बातों को वामपंथ विचारधारा के षड्यंत्र के तहत कपोल कल्पना मात्र मान उसको दरकिनार तो करते ही हैं, वक्त बेवक्त उसका मजाक उड़ाने से भी बाज नहीं आते ! गलती पूर्णतया हमारी भी नहीं है, पीढ़ी दर पीढ़ी जो बताए-पढ़ाए के नाम पर थोपा गया, उस पर विश्वास तो करना ही था ! खैर अब समय आ गया है कि हम वर्तमान और आने वाली पीढ़ी को सच्चाई से अवगत कराएं ! पुरानी कथा-कहानियों में वर्णित बातों को वैज्ञानिक आधार दे समझाएं ! गौरवान्वित महसूस करवाएं !

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

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