बुधवार, 31 मई 2023

नागपुर का जीरो माइल स्टोन स्मारक

भारत के इस भौगोलिक केंद्र का उपयोग नागपुर से दूसरे राज्‍यों की दूरियों को नापने के लिए भी किया जाता था। इसीलिए विभिन्न प्रदेशों के फासलों को दर्शाता एक पत्‍थर स्‍थापित किया गया था, जिसे ‘जीरो माइल स्टोन’ कहा गया। यह दर्शनीय स्थल नागपुर में विधानभवन के दक्षिण-पूर्व, सिविल लाइन पर स्थित है.........!   

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जीरो माइल किसी भी शहर, गांव या देश की वह जगह होती है, जहां से अन्य शहर, गांव या देश के साथ उसकी दूरी मापी जाती है। अब शहर अपने-आप में खासे बड़े, लम्बे-चौड़े होते हैं सो उनमें एक ख़ास जगह निर्धारित की जाती है जहां से दूसरे शहरों की दूरी को आँका जाता है ! पहले किसी भी शहर के मुख्य डाकघर के स्थान को ज़ीरो मान कर वहाँ से अन्य दूरियां नापी जाती थीं ! फिर समय के साथ कुछ बदलाव हुए और विभिन्न शहरों के विभिन्न स्थानों को जीरो माइल का दर्जा दे दिया गया ! जैसे दिल्ली का जीरो माइल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का समाधि स्थल, राजघाट है। कोलकाता का राजभवन है ! मुंबई का चर्च गेट है ! पटना का बड़ी पहाड़ी के पास है ! पुणे का जी.पी.ओ. है ! देहरादून का घंटाघर माना जाता है ! चेन्नई के फोर्ट रेलवे स्टेशन के पास मुथुस्वामी रोड पर स्थित है। परन्तु सभी जगह जीरो दर्शाता सिर्फ एक पत्थर भर स्थापित है ! पर नागपुर का जीरो माइल स्टोन सेंटर, देश में इस नाम से संबंधित सबसे ज्यादा व्यवस्थित, दर्शनीय, अनुरक्षित, प्रसिद्ध व लोकप्रिय है !  



नागपुर, संतरों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध यह शहर यूं तो अपने-आप में अनेकानेक खूबियों को समेटे हुए है, पर एक खूबी ऐसी भी है जो अपने-आप में और भी विशिष्ट है ! वह है एक ऐतिहासिक स्मारक, जिसे जीरो माइल यानी शून्‍य मील का पत्‍थर के नाम से जाना जाता है।दरअसल, जब 1907 में जी.टी.एस. (Great Trigonometrical Survey) के दौरान अंग्रेजों ने भारत को अलग-अलग स्‍टेट में विभाजित किया तो इस विभाजन के बाद नागपुर को पूरे देशभर का केंद्र माना गया था। भारत के इस भौगोलिक केंद्र का उपयोग नागपुर से दूसरे राज्‍यों की दूरियों को नापने के लिए भी किया जाता था। इसीलिए विभिन्न प्रदेशों के फासलों को दर्शाता एक पत्‍थर यहां स्‍थापित किया गया, जिसे ‘जीरो माइल स्टोन’ का नाम दिया गया ! यह दर्शनीय स्थल नागपुर में विधानभवन के दक्षिण-पूर्व, वर्धा रोड़, सिविल लाइंस पर स्थित है ! 


हालांकि कुछ प्रतिवेदनों के अनुसार भारत विभाजन होने और पाकिस्‍तान बनने के बाद नागपुर भारत का केंद्र नहीं रहा है। उन रि‍पोर्ट के मुताबि‍क भारत का केंद्र अब मध्‍यप्रदेश के एक छोटे से गांव करैन्‍दी में आ गया है, जो मध्‍यप्रदेश के जबलपुर जिले के सिहोरा से करीब 40 किमी दूर है। जो भी हो नागपुर की इस जगह की ऐतिहासिकता तो है ही ! वैसे भी नागपुर देश के चार महानगरों (दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, चेन्नई) के केंद्र में स्थित है ! इस जगह को अब लाल नियोन की रौशनी से सजे एक तिकोने पार्क का स्वरूप दे दिया गया है, जहां बलुआ पत्थर से बना, लगभग 25 फिट का एक स्तंभ, एक मील का पत्थर, जिस पर विभिन्न शहरों की दूरियां अंकित हैं और प्लास्टर से बने चार घोड़े, जिन्हें बाद में जोड़ा गया, स्थापित हैं ! 



देश के विभिन्न भागों से आने वाले लोगों के लिए नागपुर का जीरो माइल सेंटर, अब आकर्षण का केंद्र बन गया है या यूं कह लीजिए कि पर्यटकों के लिए यहां का जीरो माइल अब उनके लिए एक ''माइल स्टोन'' बन गया है ! जिसे देखना अपने आप में एक अनोखा अनुभव है !

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