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| मंदिर का विहंगम दृश्य |
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| गोपुरम |
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| स्तंभ |
इस ब्लॉग में एक छोटी सी कोशिश की गई है कि अपने संस्मरणों के साथ-साथ समाज में चली आ रही मान्यताओं, कथा-कहानियों को, बगैर किसी पूर्वाग्रह के, एक अलग नजरिए से देखने, समझने और सामने लाने की ! इसके साथ ही यह कोशिश भी रहेगी कि कुछ अलग सी, रोचक, अविदित सी जानकारी मिलते ही उसे साझा कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके ! अब इसमें इसको सफलता मिले, ना मिले, प्रयास तो सदा जारी रहेगा !
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| मंदिर का विहंगम दृश्य |
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| गोपुरम |
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| स्तंभ |
माता के समान कोई छाया नहीं, माता के समान कोई सहारा नहीं, माता के समान कोई रक्षक नहीं, माता के समान कोई शिक्षक नहीं और माता के ममत्व के समान कोई चीज नहीं है। उसके बारे में जितना भी कहा जाए कम है, उसका ऋण कभी भी नहीं चुकाया जा सकता ! ऐसा कहा गया है कि भगवान हर स्थान पर मदद करने नहीं पहुंच सकते, इसलिए उन्होंने माँ को बनाया। इसीलिए माँ को भगवान का स्वरुप माना गया है 🙏🙏
#हिन्दी_ब्लॉगिंग
माँ ! जो सिर्फ देना जानती है, लेना नहीं ! उसकी ममता का, निस्वार्थ प्रेम का कोई ओर-छोर नहीं होता। सागर से गहरे, धरती से सहनशील और आकाश से भी विशाल उसके स्नेहसिक्त आँचल में तो तीनों लोक समाए रहते हैं। माँ इस धरती पर ईश्वर का प्रत्यक्ष रूप है। जिस घर में माँ खुश रहती है, वहां खुशियों का खजाना कभी खाली नहीं होता। कोई कष्ट, कोई व्याधि, कोई मुसीबत नहीं व्यापति ! अपने बच्चों को खुश देख खुश रह लेने वाली माँ अपनी खुशी के एवज में भी बच्चों की खुशी ही मांगती है !
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| ममत्व तो ईश्वर को भी चाहिए |
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| ममता |
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| एना जार्विस |
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| मातृदिवस का ऐतिहासिक चिन्ह |
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| ममत्व |
@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से
हम सब धर्मपरायण लोग हैं ! आस्थावान हैं ! धर्म-भीरु भी हैं ! हम अपने-अपने तरीके से अपने इष्ट की आराधना करते हैं ! पर साथ ही साथ, कहीं ना कहीं मतलबी और स्वार्थी भी हैं ! इसके अलावा एक बहुत बड़ी संख्या उन लोगों की भी है जो अनिष्ट के डर से, किसी अनहोनी की आशंका से ही धर्म का पालन करते हैं ! यह बात दुनिया के सभी धर्मों-पंथों में समान रूप से पाई जाती है और बचपन से ही मन में बिठा दी जाती है कि यदि सर्वोच्च सत्ता की आराधना नहीं की तो अनिष्ट हो जाएगा.........................😞
#हिन्दी_ब्लागिंग
म नुष्य एक मतलबपरस्त, स्वार्थी तथा आशंकित जीव है ! उसे हर समय कुछ पाने की लालसा के साथ-साथ किसी न किसी अनहोनी का डर भी लगा रहता है ! इसीलिए उसे एक संबल की तलाश रहती है। उसके पूजा, इबादत या उपासना करने का सबसे बड़ा कारण यही भावनाएं हैं ! पर जहां डर होता है वहां श्रद्धा नहीं होती ! इसीलिए वह विभिन्न धर्मस्थानों की शरण में जाता रहता है ! कुछ महान हस्तियों, दिव्य पुरुषों-महिलाओं को छोड़ दिया जाए तो ऐसी भावनाएं कमोबेश संसार के सभी इंसानों में व्याप्त है !
| आशंका |
| भय |
| डर |
@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 🙏
नाउरू की अपनी कोई राजधानी नहीं है, उसका सारा प्रशासनिक काम यहां के यारेन (Yaren) नाम के कस्बे से संचालित होता है ! उसे ही प्रशासनिक केंद्र माना जाता है। कुछ जिलों में विभक्त इस कस्बे में संसद भवन, हवाई अड्डा, सरकारी कार्यालय और विदेशी दूतावास मौजूद हैं। इसीलिए इस कस्बे को इस देश का “डि फैक्टो कैपिटल” कहा जाता है। यह अनोखी व्यवस्था नाउरू के छोटे आकार, प्रशासनिक सुविधा और उसकी अपनी अलग पहचान को दर्शाती है...............!
#हिन्दी_ब्लॉगिंग
रा जधानी किसी भी देश, प्रदेश या राज्य का प्रमुख शहर तथा राजनीतिक केंद्र होता है। यह विशेष दर्जा उसे उस देश के संविधान द्वारा प्रदत्त किया जाता है। यह एक ऐसा शहर होता है, जहां केंद्र सरकार के सारे दफ्तर होते हैं और जहां से सरकार चलती है, कानून बनते हैं, कानून और संविधान का निर्धारण किया जाता है और देश की दिशा तय होती है। आज दुनिया में करीब 195 देश हैं। हर देश की अपनी राजधानी है। लेकिन इसी दुनिया में एक देश ऐसा भी है, जिसकी कोई राजधानी नहीं है, फिर भी वह संयुक्त राष्ट्र का सदस्य है। उसका अपना संविधान है, अपना झंडा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी मौजूदगी भी है। इस देश का नाम है नाउरू (Nauru).
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| नाउरू |
| द्वीपीय देश |
| प्राकृतिक सौंदर्य |
ना उरू की अपनी कोई राजधानी नहीं है, उसका सारा प्रशासनिक काम यहां के यारेन (Yaren) नाम के कस्बे से संचालित होता है ! उसे ही प्रशासनिक केंद्र माना जाता है। कुछ जिलों में विभक्त इस कस्बे में संसद भवन, हवाई अड्डा, सरकारी कार्यालय और विदेशी दूतावास मौजूद हैं। इसीलिए इस कस्बे को इस देश का “डि फैक्टो कैपिटल” कहा जाता है। यह अनोखी व्यवस्था नाउरू के छोटे आकार, प्रशासनिक सुविधा और उसकी अपनी अलग पहचान को दर्शाती है।
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| हवाई पट्टी |
ना उरू की अर्थ व्यवस्था को संभालने वाले खनिज पदार्थ लगभग समाप्त हो चुके हैं। इस छोटे से देश में जहां सिर्फ दो घंटे में सारा क्षेत्र नाप लिया जा सकता है ! जहां खूबसूरत समुद्री तट और शांत वातावरण भी है ! पर घूमने के लिए ज्यादा जगहें ना होने के कारण यहां पर्यटन विकसित नहीं हो पाया है ! इसीलिए यहां के वाशिंदों की जीविका नारियल की उपज और समुद्री मछलियों के सहारे ही चलती है ! आर्थिक रूप से यह ऑस्ट्रेलिया पर निर्भर है और उसका संरक्षण इसे प्राप्त है ! इसकी आधिकारिक मुद्रा भी आस्ट्रेलियाई डॉलर ही है। वैसे अपने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से यह बाकी दुनिया से भी जुड़ा हुआ है।
| संतुष्ट, खुशहाल जिंदगी |
छोटे-बड़े द्वीपों से मिलकर बने नाउरू की खासियत यह है कि अपनी बेहद छोटी आबादी के बावजूद इसने अपने प्रमुख खेल वेटलिफ्टिंग के जरिए ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिर्फ अपनी उपस्थिति ही दर्ज नहीं करवाई, बल्कि वहां पदक भी जीते हैं। जो यहां के नागरिकों के लिए गर्व का विषय है !
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| देश का गौरव |
@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 🙏
भारतीय सिनेमा के संगीत के स्वर्ण काल का आखिरी रौशन चिराग, देश की सबसे पसंदीदा, लोकप्रिय, चहेती, पार्श्वगायिका आशा ताई ! कल ही उनके हृदयाघात की खबर आई थी ! आज वे देश के सभी संगीत प्रेमियों को गम में डूबा छोड़, अलविदा कह गयीं ! एक युग का अंत ! किसी भी दिवंगत के लिए सदा कहा जाता है कि प्रभु उसकी आत्मा को शांति प्रदान करें, पर ऐसी विभूतियां जब परमपिता के पास वापस पहुंचती होंगी तो मेरा यह विश्वास है कि उनकी उपस्थिति से देवलोक को ही एक दैवीय शांति और उनकी उपस्थिति का सुखद एहसास होता होगा ! ........अश्रुपूरित श्रद्धांजलि 🙏🙏
#हिन्दी_ब्लॉगिंग
भारतीय फिल्मों का यदि उनके संगीत के नजरिए से आकलन किया जाए तो 1950 से लेकर तकरीबन 1980 तक का समय स्वर्णिम काल रहा। एक से एक बढ़ कर दिग्गज संगीत निदेशक, लेखक, गायक कलाकार इस समय में हुए ! किसी की किसी से कोई तुलना नहीं ! सबकी अपनी-अपनी खासियत, सबका अपना-अपना अलग अंदाज, सबकी अपनी-अपनी विशेषता ! परंतु एक-दूसरे से अलग अंदाज रखते हुए भी एक-दूसरे के पूरक ! हर दिल अजीज ! खुली किताब ! उनके बारे में इतना सब जाना जाता है कि अलग से और कुछ भी कहने, लिखने, बताने के लिए कुछ भी नया नहीं है !
| सदा याद रहेंगी |
पर क्या समय ने कभी किसी को बक्शा है ? एक-एक कर सभी इस लोक में अपना कर्म पूरा कर विधाता के चरणों में जा विराजे ! आज आशा जी भी वहां अपनी बहनों, भाइयों, साथी कलाकारों के पास अपने निर्धारित स्थान पर जा विराजीं ! वे सब भले ही भौतिक शरीर के साथ हमारे बीच ना हों, पर उनकी कला की उपस्थिति, समय को भी मात देते हुए सदा-सदा के लिए हमारे बीच बनी रहेगी !
किसी भी दिवंगत के लिए सदा कहा जाता है कि प्रभु उसकी आत्मा को शांति प्रदान करें, पर ऐसी विभूतियां जब परमपिता के पास वापस पहुंचती होंगी तो मेरा यह विश्वास है कि उनकी उपस्थिति से देवलोक को ही एक दैवीय शांति और उनकी उपस्थिति का सुखद एहसास होता होगा !
प्रभु भूलोक पर हृदयनाथ जी, उषा जी सहित उनके परिवार, उनके परिजनों को इस दुखद घड़ी को सहन करने हेतु संबल प्रदान करें !
ॐ शांति 🙏
यूट्यूब पर अक्सर किसी मीम या फनी शॉर्ट्स के अंत में चाय का कप पकड़े, एक लड़का खुल कर स्वाभाविक हंसी हँसते हुए दिख जाता है ! कौन है ये ? ये वो है, जो बताता है कि यदि नीयत साफ हो और साथ देने वाला, मित्र नेक और सच्चा हो, तो मंजिल मिल ही जाती है। गरीबी के कारण इसके जिन हाथों ने कलम छोड़ सफाई का कपड़ा थामा था, आज उन्हीं हाथों में कामयाबी की चाबी है। आज वो लाखों दिलों पर राज कर रहा है ! यह उपलब्धि अरुण जैसे हजारों बालक-बालिकाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है................!
#हिन्दी_ब्लॉगिंग
त कदीर कब किस पर मेहरबान हो जाए, कब रूठ जाए, शायद देवता भी नहीं जानते ! घर से अपने विशाल व्यवसाय को संभालने निकला करोड़पति शाम को कंगाल हो लौट सकता है ! वहीं एक अनजान, गुमनाम व्यक्ति रातों-रात दुनिया में मशहूर हो सकता है ! ऐसे अनगिनत उदाहरण अक्सर सामने आते रहते हैं ! ऐसा ही उस लड़के के साथ हुआ जो दो जून की रोटी के जुगाड़ के लिए ट्रक के सहायक के रूप में काम किया करता था !
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| संक्रामक हंसी |
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| अरुण कुमार |
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| नेक इंसान, नेहरू |
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| मेहनत के साथ भाग्य भी जरुरी है |
@अंतर्जाल का हार्दिक आभार 🙏
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| परामर्श |
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| सूर्यदेव से याचना |
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| मेघदेव से विनय |
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| पवनदेव से विनती |
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| पर्वतराज की शरण में |
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| सबक |
मकड़ी शिवलिंग पर अपना जाल बना देती थी, जिससे वहां साफ- सफाई बनी रहे ! सांप मणियों को अर्पित कर लिंग से लिपट कर आराधना करता था और हाथी नदी से...