मैं अमित जी के ब्लॉग को फॉलो नहीं करता, पर उस दिन उस दिन उन महाशय के आक्षेप के बाद, मैं जिज्ञासावश उनके ''बिग-अड्डे'' पर गया तो वहां उस रचना को भी विचरते पाया ! असमंजस और गहरा गया ! पर तभी मेरी नजर उस रचना के प्रकाशित होने की तारीख पर पड़ी, जो मेरे ब्लॉग के दूसरे यानी अगले दिन की थी ! मन से बोझ सा उतर गया ! लौट कर अमित जी के उस प्रशंसक की टिपण्णी पर टिप्पणी की कि "महोदय वह रचना मेरी नहीं थी, मैंने इस बात को इंगित भी किया है ! पर वह अमित जी की भी नहीं थी, उन्होंने भी उसे मेरे ब्लॉग पर छपने के बाद दूसरे दिन संकलित ही किया है ! तो किसने किस की............😕"
व्यक्ति पूजा का जैसा हाल वर्तमान में है, वैसा शायद ही कभी रहा हो ! आज अधिकांश लोग किसी के भी नाम, दाम या व्यक्तित्व के मायाजाल में फंस कर उसके मुरीद बन जाते हैं ! उन्हें सामने वाले की मानसिकता, उसकी नैतिकता, उसके चरित्र से कोई मतलब नहीं होता, उनके लिए अपने आदर्श के मुख से निकली बात ही ब्रह्म-वाक्य होती है ! ये लोग उसके विरुद्ध कोई सच्ची बात भी सुनना भी गवारा नहीं करते ! इतना ही नहीं अपने अगड़े का प्रतिद्वंद्वी उन्हें दुश्मन सरीखा नजर आने लगता है। यह बात आज चहूं ओर नजर आ रही है !
| पराकाष्ठा |
| परजीवी |
आज के प्रसंग से कुछ-कुछ मेल खाता हुआ अपने ब्लॉगिंग से संबंधित एक प्रसंग याद आ गया ! बहुत समय पहले मैंने एक मित्र द्वारा भेजी गई एक सुंदर रचना को अपने ब्लॉग पर भी डाल दिया था ! दूसरे ही दिन उस पर अमिताभ जी के एक प्रशंसक ने टिप्पणी कर आपत्ति जाहिर कर दी थी कि वह रचना अमित जी की है, उसे आपने कैसे ले लिया ? मैं भी असमंजस में पड़ गया कि ऐसी गलती कैसे हो गई ! हालांकि लेखक का नाम ज्ञात ना होने की वजह से मैंने अंतर्जाल का आभार प्रगट किया भी था !
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| ब्लॉगिंग |
मैं अमित जी के ब्लॉग को फॉलो नहीं करता, पर उस दिन मैंने जिज्ञासावश उनके ''बिग-अड्डे'' पर गया तो वहां उस रचना को भी विचरते पाया, असमंजस और गहरा गया ! पर तभी मेरी नजर उस रचना के प्रकाशित होने की तारीख पर पड़ी, जो मेरे ब्लॉग के दूसरे यानी अगले दिन की थी ! मन से बोझ सा उतर गया ! लौट कर अमित जी के उस प्रशंसक की टिपण्णी पर टिप्पणी की कि "महोदय वह रचना मेरी नहीं थी, मैंने इस बात को इंगित भी किया है ! पर वह अमित जी की भी नहीं थी, उन्होंने भी उसे मेरे ब्लॉग पर छपने के बाद दूसरे दिन संकलित ही किया है ! तो किसने किस की............?
यहां जरा प्रसंगवश मुख्य विषय से भटकना हो गया है ! इसलिए बताता चलूं कि अमित जी का मैं भी प्रशंसक रहा हूँ ! उनकी विद्वता, उनकी हिंदी-अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अद्भुत पकड़, उनकी विनम्रता जैसी खासियतें उनमें तथा अन्य अभिनेताओं में फर्क दर्शाती हैं ! इस प्रसंग से उपरोक्त विषय का भी कोई खास संबंध नहीं है, उनको तो ऐसी बातों का आभास भी नहीं होगा ! पर उनके दीवाने फैन, मुरीद कुछ-कुछ ऊपर वालों जैसे ही हैं, जिन्हें लगता है कि बॉस ने जो लिख दिया, वहीं से लिखाई शुरू होती है 😇😀
@चित्रों के लिए अंतर्जाल का आभार
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