pub-3648900737756323 कुछ अलग सा: बुजुर्ग
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बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

ताकि बढ़ती उम्र में भी वह दोस्त बना रहे

शरीर की तुलना उस दरवाजे या खिड़की से की जा सकती है, जिस पर रंग-रोगन और सफाई तो खूब की जाती है पर उसे ज्यादतर बंद या जरा सा खोल कर काम चला लिया जाता है ! अब वह दिखने में तो बेहद साफ-सुथरा और चमकदार लगेगा, पर जब उसे पूरा खोलने की आवश्यकता आन पड़ेगी तो उसके कब्जे (Hinge) उसे हिलने-डुलने नहीं देंगें। वह नखरे करेगा, जाम हो जाएगा। चिंचिंयाने लगेगा ! ठीक यही हालत शरीर की भी होती है, दिखने में नहाया-धोया, साफ-सुथरा, चमकदार, पर दस कदम पर ही हांफने और कराहने लगता है। इसीलिए हलके-फुल्के व्यायाम की आवश्यकता बनी रहती है...........!

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

हम सभी कहते-सुनते-जानते आए हैं कि शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए उसकी देख-भाल के साथ-साथ उसे चलायमान रखना भी जरुरी है ! पर जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है वैसे-वैसे बुजुर्गों के मन में एक भय भी जगह बना लेता है कि किसी वर्कआउट से कहीं कोई हड्डी ना चटक जाए, कहीं गिर ही ना जाऊं, कोई मांसपेशी ही जवाब ना दे दे ! ऐसी ही सोच इंसान को व्यायाम से विमुख कर देती है और वह निष्क्रिय और अस्वस्थ होता चला जाता है, जबकि इस उम्र और अवस्था में सक्रियता और व्यस्तता बहुत जरुरी होती है ! 

द्वंद्व 
शरीर की अस्वस्थता की तुलना उस दरवाजे या खिड़की से की जा सकती है, जिस पर रंग-रोगन और सफाई तो खूब की जाती है पर उसे ज्यादतर बंद या जरा सा खोल कर काम चला लिया जाता है ! अब वह दिखने में तो बेहद साफ-सुथरा और चमकदार लगेगा, पर जब उसे पूरा खोलने की आवश्यकता आन पड़ेगी तो उसके कब्जे (Hinge) उसे हिलने-डुलने नहीं देंगें। वह नखरे करेगा, जाम हो जाएगा। चिंचिंयाने लगेगा ! ठीक यही हालत शरीर की भी होती है, दिखने में नहाया-धोया, साफ-सुथरा, चमकदार, पर दस कदम पर ही हांफने और कराहने लगता है। इसीलिए हल्की-फुल्की सक्रियता की आवश्यकता बनी रहती है।  

जंग 
यहां यह भी सही है कि बुजुर्गों को युवाओं की तरह कसरत की जरुरत नहीं होती ! कसरत शब्द अपने आप में ही भारी है ! उन्हें सिर्फ पूरे शरीर को सक्रीय बनाए रखना होता है ! युवाओं की तरह शरीर को थकाना नहीं होता ! नाहीं मांस-पेशियां या पैक्स बनाने होते हैं ! इसीलिए बढ़ती उम्र में सभी को अपने शरीर की क्षमता के अनुसार ही कसरत चुननी चाहिए और उसी के अनुसार रोजाना थोड़ा-थोड़ा व्यायाम करते रहना चाहिए। इस उम्र में जल्दबाजी नहीं, सहजता ज्यादा जरूरी है। बस, शुरुआत छोटी रखनी है और धीरे-धीरे आगे बढ़ना है ! युवावस्था में भले ही वर्जिश ना की हो पर यह बुजुर्गों के लिए बेहद जरुरी है !

सहजता 

स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बहुत से बुजुर्गों ने अपनी समर्थता के अनुसार रोज टहलने का नियम बना रखा होता है, बहुत अच्छी बात है, पर सिर्फ टहलना शरीर के मध्य से निचले हिस्से को तो कार्यरत कर सकता है पर उससे ऊपर के अंगों जैसे सिर, आँखें, गर्दन, कंधे, कलाइयों, हथेलियों के जोड़ इत्यादि बचे रह जाते हैं ! इनकी देखभाल की भी उतनी ही आवश्यकता है, इनके लिए भी बहुत सारी हल्की-फुल्की गतिविधियां उपलब्ध हैं ! 

निष्फिक्रता 

एक बात और ध्यान में रखनी जरुरी है कि आपको शरीर से जबरदस्ती नहीं करनी है बल्कि उसके साथ मिल कर, उसे दोस्त बना कर काम करना है। इसलिए, छोटी-छोटी गतिविधियां चुनें, जल्दबाजी से बचें। इस उम्र में भारी कसरत करने के बजाय, शरीर की जकड़न दूर करने पर ध्यान दें और अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें ! 

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026

प्रणाम करें और सिखाएं भी

छोटे सदस्य सुबह उठते ही सबसे पहले अपने बड़ों का आशीर्वाद लें, तो विगत रात घर पर चाहे जैसा भी भारी माहौल रहा हो, किसी कारण कटुता फैल गयी हो, कुछ मनमुटाव ही क्यों ना हो गया हो, यदि दूसरी सुबह बच्चे, बड़ों का चरण स्पर्श करते हैं तो ऐसा कोई भी बुजुर्ग सदस्य नहीं होगा जो सब कुछ भूल निर्मल मन से उन्हें आशीर्वाद ना दे ! क्योंकि बड़े-बुजुर्ग कभी भी अपने बच्चों का जरा सा भी अहित नहीं चाहते ! बस इतने से ही सारी कटुता तिरोहित हो जाएगी और सब कुछ ''नार्मल'' भी हो जाएगा। सिर्फ प्रयास करना है, अपनी परंपराओं, अपनी संस्कृति, अपने प्रथाओं के पुनर्जागरण का .............!!

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

प्रणाम का अर्थ होता है विनीत होना ! किसी के सामने सर झुकाना ! अपने से बड़ों को, अपने गुरुजनों को सम्मान देना ! प्राचीन काल से ही यह हमारी परंपरा रही है ! जब हम किसी के सामने झुक कर उसका चरण स्पर्श करते हैं तो हमारे में विनम्रता का भाव आ जाता है और सामने वाले की सकारात्मक ऊर्जा, आशर्वाद के रूप में हमारी नकारात्मक ऊर्जा का स्थान ले लेती है ! पर इसके लिए हमारे मन में सामने वाले के प्रति श्रद्धा और आदर का भाव होना भी जरुरी है !

प्रणाम 

प्रणाम कोई दैनिक मशीनी क्रिया नहीं है ! प्रणाम अनुशासन है, जो हमें विनम्र बनाता है, आदर करना सिखाता है, हमारे अंदर का अहम मिटाता है, सुविचारों को स्थान देता है। घर में सुख-शांति स्थापित करता है, आपसी प्रेम बढ़ाता है ! आज घर-बाहर जो बड़ों के प्रति अवहेलना, तिरस्कार, अपमान जैसी परस्थितियां देखने में आती हैं उसका एक कारण जाने-अनजाने की गयी उनकी उपेक्षा भी है। यदि बचपन से ही बड़ों के पैर छू कर उनका आशीर्वाद लेने के संस्कार बच्चों में डाले जाएं तो घरों में कभी भी अप्रिय स्थिति बनने की नौबत ही नहीं आएगी !

आशीर्वाद 
यदि कोई व्यक्ति रोज बड़े-बुजुर्गों के सम्मान में प्रणाम और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करता है, तो उसकी उम्र, विद्या, यश और शक्ति बढ़ती चली जाती है। पर चरण स्पर्श भी नियमानुसार करना चाहिए ! इसके लिए हमेशा शांत भाव से बिना किसी जल्दीबाजी के दोनों हाथों से अपने श्रद्देय के दोनों पैरों का स्पर्श करना चाहिए ! घुटने तक या एक हाथ से पांव छूने के तरीके को शास्त्रों में गलत बताया गया है। इसके साथ ही जिन्हें प्रणाम किया जा रहा हो, उनका भी फर्ज है कि जब भी कोई चरण स्पर्श करे वे उसे हाथ उठा कर या उसके सर पर हाथ रख कर आशीर्वाद जरूर दें। जब हम भगवान को याद करते हुए किसी को सच्चे मन से आशीर्वाद देते हैं तो उसे तो लाभ प्राप्त होता ही है, आशीर्वाद देने वाले का भी पुण्य बढ़ जाता है। 

परंपरा 
प्रणाम की महत्ता का तो रामायण हो या महाभारत सभी ग्रंथों में विवरण उपलब्ध है ! रामायण में तो खुद प्रभू ही गुरुजनों को आगे बढ़ प्रणाम कर एक आदर्श हमारे सामने रखते हैं। यहां तक की अपने सबसे बड़े बैरी रावण के अंतिम समय में लक्ष्मण जी को उसके पास ज्ञान-अर्जन के लिए, पहले प्रणाम करने की सीख दे कर भेजते हैं।  महाभारत में जब भीष्म अगले दिन पूरे पांडवों के वध की कसम लेते हैं तो श्री कृष्ण द्रौपदी को उनके पास ले जाकर प्रणाम करवा, उसे अखंड सौभाग्यवती होने के वरदान दिलवा, पांडवों की रक्षा करवाते हैं। साथ ही अत्यंत दुःख के साथ कहते हैं कि यदि दोनों परिवारों की स्त्रियां अपने और एक-दूजे के वरिष्ठ व गुरुजनों को प्रणाम किया करतीं, तो यह युद्ध कभी भी नहीं होता ! इसी प्रणाम की क्रिया के प्रभाव से ऋषि मार्कण्डेय जी का अल्पायु योग खत्म हो गया था। ऐसे असंख्य उदाहरण सर्व-सुलभ हैं !

नियम 
इसीलिए यदि हर घर का नियम बन जाए कि छोटे सदस्य सुबह उठते ही सबसे पहले अपने बड़ों का आशीर्वाद लेंगे, तो विगत रात घर पर चाहे जैसा भी भारी माहौल रहा हो, किसी कारण कटुता फैल गयी हो, कुछ मनमुटाव ही क्यों ना हो गया हो, यदि दूसरी सुबह बच्चे, बड़ों का चरण स्पर्श करते हैं तो ऐसा कोई भी बुजुर्ग सदस्य नहीं होगा जो सब कुछ भूल निर्मल मन से उन्हें आशीर्वाद ना दे ! बड़े-बुजुर्ग कभी भी अपने बच्चों का अहित नहीं चाहते ! बस इतने से ही सारी कटुता तिरोहित हो जाएगी और सब कुछ ''नार्मल'' भी हो जाएगा। अब सिर्फ जरुरत है अपनी परंपराओं, अपनी संस्कृति, अपने प्रथाओं के पुनर्जागरण की !

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

गुरुवार, 17 सितंबर 2026

सैर कर दुनिया की, ये जिंदगानी फिर कहां

उम्र कितनी भी हो, जिंदादिल इंसानों में नई जगहें, पुरानी यादें ताजा करने और सुकून के पलों की चाहत जीवन में कभी खत्म नहीं होती ! पर बढ़ती आयु कई आशंकाएं भी साथ ले आती है ! पर यदि  भ्रमण की सही जगह चुन, कुछ जरूरी तैयारियां कर और किसी भी परिस्थिति का हल सोच कर यात्रा की जाए तो उसे काफी सुरक्षित बनाया जा सकता है। इसलिए जब तक शरीर इजाजत देता है तब तक घूमिए, खूब घूमिए ! क्योंकि यही समय है जब जिंदगी की जिम्मेदारियों से उबर कर खुद अपने लिए कुछ करने का अवसर हासिल हुआ होता है.................🥰  

#हिन्दी_ब्लॉगिंग   

इं सान की जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हालंकि इसमें तकरीबन रोज ही कई तरह की अड़चनों, दवाबों, पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ता है ! जैसे किसी बुजुर्ग को नई तकनीक इस्तेमाल करने में थोड़ी परेशानी हो, तो तुरंत मान लिया जाता है कि वह इसे सीख नहीं सकता। किसी उम्रदराज व्यक्ति को लेकर यह आम धारणा होती है कि उसमें अब पहले जैसी ऊर्जा या काम करने की शक्ति नहीं है ! समस्या यह है कि ये सिर्फ ऐसी धारणाएं हैं, जो सभी उम्रदराज लोगों पर लागू नहीं होतीं ! दुनिया में ऐसे असंख्य उदाहरण हैं जहां बढ़ती उम्र में भी अपनी दृढ इच्छाशक्ति के चलते बुजुर्गों ने कीर्तिमान स्थापित किए हैं !

युचीरो मिउरा, 80, एवरेस्ट फतह 
फौजा सिंह, 100 +, दौड़ते ही रहे 
सारा ब्रुअर, 64, महासागर पार 

वैसे भी उम्र कितनी भी हो, जिंदादिल इंसानों में नई जगहें, पुरानी यादें ताजा करना और सुकून के पल बिताने की चाह जीवन में कभी खत्म नहीं होती ! जरुरत है सिर्फ हौसले और आत्म-विश्वास की ! हालांकि घर-परिवार के अन्य सदस्यों में घबराहट होना भी स्वाभाविक है, मन में यह सवाल बना रहता है कि अगर रास्ते में कोई परेशानी आ गई, तो क्या होगा  ? पर बढ़ती उम्र में भी घूमने की सही जगह चुन, कुछ जरूरी तैयारियां कर और किसी भी परिस्थिति का हल सोच कर यात्रा को काफी सुरक्षित बनाया जा सकता है। इसलिए जब तक शरीर इजाजत देता है तब तक घूमिए, खूब घूमिए ! क्योंकि यही समय है जब जिंदगी की जिम्मेदारियों से उबर कर खुद अपने लिए कुछ करने का अवसर हासिल हुआ होता है !  

आह्लाद 

सुखद पल 

पर कहीं भी घूमने जाने की इच्छा हो तो बेहतर होगा कि किसी ग्रुप से जुड़ जाएं ! जहां कोई ट्रैवल एजेंसी वरिष्ठ नागरिकों के लिए टूर आयोजित करती हो। इनके शेड्यूल में आमतौर पर भागदौड़ कम और आराम के लिए पर्याप्त समय होता है। ऐसे ट्रैवल ऑपरेटरस को यात्रा के दौरान हो सकने वाली किसी भी समस्या से निपटने का अनुभव होता है ! यदि पूर्णरूपेण ट्रिप बुजुर्गों के लिए हो तो उनकी हर छोटी-बड़ी जरुरत का ध्यान रखा जाता है ! ठहरने, खाने, घूमने, यातायात का पहले से ही प्रबंध किया हुआ होता है ! जिससे आपको किसी बात की चिंता नहीं करनी पड़ती ! इसके अलावा एक सुरक्षा का एहसास बना रहता है, जिससे पूरी यात्रा तनावमुक्त रहती है !  

सिर्फ खुद 

संतुष्टि 
यदि अकेले ही यात्रा करनी हो तो उसके पहले कुछ जरुरी एहतियात बरतना बहुत आवश्यक है ! सबसे पहले अपने स्वास्थ्य का आकलन जरूर करें। हो सके तो अपने डॉक्टर की सलाह भी ले लें, इससे मनोबल में बढ़ोत्तरी होगी ! अपनी दवाइयों के साथ अपनी एक छोटी सी मेडिकल इन्फॉर्मेशन शीट भी रख लें ! ऐसी जगह चुनें, जहां आवागमन सुगम हो, जहां जा रहे हैं वहां के माहौल, मौसम की जानकारी भी जरूर ले लें !  एक दिन में कम जगहें, आराम से देखें, ताकि बिना थके यात्रा का आनंद ले सकें। अपने साथ एक छोटा कार्ड रखें, जिस पर आपका नाम, दो मोबाइल नंबर, जिनसे आपात स्थिति में संपर्क किया जा सके ! जहां ठहरें हैं उस होटल का नाम व पता लिखा हो। इसके अलावा घर के सदस्यों से फोन पर संपर्क बनाए रखें ! यदि छोटी-छोटी सावधानियां, सही तैयारी और थोड़ी सतर्कता बरत ली जाए तो उम्र के किसी पड़ाव पर भी सफर को सुरक्षित, सुकूनभरा और यादगार बनाया जा सकता है। तो देर किस बात की !
अरे भाई निकल के आ घर से, आ घर से ! 
दुनिया की रौनक देख फिर से, देख ले फिर से...................! 

@चित्रों के लिए अंतर्जाल का आभार   

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Welcome to kuchhalagsa 🙏   इस ब्लॉग में कोशिश की गई है, देश, समाज में चली आ रही मान्यताओं, कथा-कहानियों को, बगैर किसी पूर्वाग्रह के, एक अलग...