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शुक्रवार, 8 मई 2026

मनुष्य एक आशंकित जीव है

हम सब धर्मपरायण लोग हैं ! आस्थावान हैं ! धर्म-भीरु भी हैं ! हम अपने-अपने तरीके से अपने इष्ट की आराधना करते हैं ! पर साथ ही साथ, कहीं ना कहीं मतलबी और स्वार्थी भी हैं ! इसके अलावा एक बहुत बड़ी संख्या उन लोगों की भी है जो अनिष्ट के डर से, किसी अनहोनी की आशंका से ही धर्म का पालन करते हैं ! यह बात दुनिया के सभी धर्मों-पंथों में समान रूप से पाई जाती है और बचपन से ही मन में बिठा दी जाती है कि यदि सर्वोच्च सत्ता की आराधना नहीं की तो अनिष्ट हो जाएगा.........................😞   

#हिन्दी_ब्लागिंग  

म नुष्य एक मतलबपरस्त, स्वार्थी तथा आशंकित जीव है ! उसे हर समय कुछ पाने की लालसा के साथ-साथ किसी न किसी अनहोनी का डर भी लगा रहता है ! इसीलिए उसे एक संबल की तलाश रहती है। उसके पूजा, इबादत या उपासना करने का सबसे बड़ा कारण यही भावनाएं हैं ! पर जहां डर होता है वहां श्रद्धा नहीं होती ! इसीलिए वह विभिन्न धर्मस्थानों की शरण में जाता रहता है ! कुछ महान हस्तियों, दिव्य पुरुषों-महिलाओं को छोड़ दिया जाए तो ऐसी भावनाएं कमोबेश संसार के सभी इंसानों में व्याप्त है !

आशंका 
नहोनी के डर के बाद धार्मिक होने का दूसरा बड़ा कारण है, अपनी विभिन्न कामनाओं की पूर्ति की चाह! हमें लगता है कि अगर हम ईश्वर की आराधना करेंगे तो वे खुश हो कर हमारी मनोकामनाएं पूरी कर देंगे ! यह सोच भी हर धर्म में मौजूद है। कोई मन्नत मांगता है, कोई चढ़ावा चढ़ाता है, कोई दान देता है, कोई विशेष कर्मकांड करता है। हम भूल जाते हैं कि प्रभु सर्वज्ञानी है, निष्पक्ष है, न्यायप्रिय है ! वे हमें हमारे कर्मों के अनुसार फल देंगे नाकि कर्मकांडों की वजह से ! हमारे लिए पूजा या इबादत एक सौदा या व्यापार बन जाते हैं कि हम ये करेंगे तो वो ये कर देगा ! इसी सौदेबाजी में जब हमारी इच्छाएं पूर्ण नहीं होतीं तो हमारा विश्वास भी डगमगाने लगता है तो हमारी अस्थिरता और खुदगर्ज दिलोदिमाग कोई और ठीहा ढूँढ़ने लगते हैं !   

भय 
दमी के धार्मिक होने का एक और बड़ा कारण परिवार की परंपरा भी होती है ! परिवार जैसा करता चला आया है अगली पीढ़ियां भी उस पर सवाल ना उठा, उसी का अनुसरण करने लगती हैं ! इसी के साथ एक बात और भी है कि इंसान कुछ लोगों को किसी पंथ से लाभ होता देख या किसी स्थल विशेष की महत्ता को सुन सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए उधर आकर्षित होता है, ऐसी अस्थिरता वह अपने जीवन में कई-कई बार दोहराता रहता है !

डर 
एक आम धारणा है कि यदि मैंने उपासना नहीं कि तो ईश्वर नाराज हो मुझे और मेरे परिवार को दंडित कर देंगे ! यह डर तो बचपन से इंसान के मन में बैठ जाता है, पर वह यह भूल जाता है कि प्रभु हम सबके पालनहार हैं, न्यायप्रिय हैं, दयालु हैं, बेवजह वे किसी को दंड नहीं देते ! हमारे कर्म ही हमारा भाग्य निर्धारित करते हैं ! पर अनहोनी का डर उसके दिलोदिमाग पर ताउम्र हावी रह उससे कुछ ना कुछ उल्टा-सीधा करवाता ही रहता है ! देखा जाए तो यह भी तो प्रभु की इच्छानुसार ही होता है...!


@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 🙏 

रविवार, 1 जनवरी 2023

नीलकंठ धाम, पोयचा, गुजरात

यह विशाल मंदिर और इसका परिसर इतना सुंदर, मनमोहक और आकर्षक है कि इसकी भव्यता को शब्दों में व्यक्त करना बहुत ही कठिन है ! मंदिर का परिसर किसी महल जैसा लगता है। इसकी हर चीज, चाहे वह मूर्तियां हों, चाहे नक्काशी हो, चाहे सजावट हो, चाहे वास्तुशिल्प हो, के के आकर्षण में पर्यटक अचंभित सा अभिभूत हो बंध सा जाता है ! यहां से वापस जाने का मन ही नहीं करता...........!                                                

#हिन्दी_ब्लागिंग 

गुजरात,अपनी परंपरा, संस्कृति तथा धार्मिक स्थलों की वजह से देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है ! फिर चाहे वह द्वारका हो, बेट द्वारका हो, सोमनाथ व नागेश्वर ज्योतिर्लिंग हों, प्रभास क्षेत्र हो, अक्षरधाम हो या फिर सरदार सरोवर ! इंसान देखते-देखते थक जाए पर दिव्य, मनोरम, दर्शनीय स्थलों की गिनती पूरी न हो ! ऐसा ही एक अनुपम धार्मिक स्थल है, नीलकंठ धाम !  

विशाल परिसर 


यह आश्चर्यजनक स्थान राजपीपला नर्मदा जिले के नर्मदा नदी के तट पर पोइचा गाँव में स्थित है। जो अहमदाबाद से 170 किमी, वड़ोदरा से 60 किलोमीटर और सरदार सरोवर बाँध, केवड़िया से तक़रीबन 30 किमी की दूरी पर पोयचा नामक गांव में स्थापित है। यह स्वामीनारायण मंदिर लोगों की आस्था का एक बहुत बड़ा केंद्र है। नर्मदा नदी के तट के समीप,  2013 में 105 एकड़ में बने इस भव्य मंदिर का निर्माण स्वामी नारायण गुरुकुल राजकोट की तरफ से करवाया गया है। इसके मुख्यद्वार का अनूठापन, इसकी वास्तुकला, इसके उद्यान, इसकी मूर्तियों की सजीवता, शांत वातावरण, एक-एक पत्थर पर उकेरी गई इसकी कारीगरी पर्यटकों को बाँध कर रख लेती है ! यह अलौकिक स्थान श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों में भी अत्यंत लोकप्रिय है ! इसीलिए यहां आने वाले लोगों का तांता लगा रहता है। 

भव्य व आकर्षक प्रवेशद्वार 



यह विशाल मंदिर और इसका परिसर इतना सुंदर, मनमोहक और आकर्षक है कि उसकी भव्यता को शब्दों में व्यक्त करना बहुत ही कठिन है ! मंदिर का परिसर किसी महल जैसा लगता है। इसकी हर चीज, चाहे वह मूर्तियां हों, चाहे नक्काशी हो, चाहे सजावट हो, चाहे वास्तुशिल्प हो, के आकर्षण में पर्यटक अचंभित सा अभिभूत हो बंध सा जाता है ! यहां से वापस जाने का मन ही नहीं करता ! सबसे बड़ी बात यहां फोटो खींचने की कोई मनाही नहीं है, जिससे पर्यटक यहां की अद्भुत यादें अपने साथ घर भी ले जा सकता है। 





मंदिर परिसर के द्वार के समीप विशाल नटराज की मूर्ति स्थापित है, जिसकी भव्यता देखते ही बनती है। परिसर में मौजूद सरोवर मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगाता है। सरोवर में भगवान गणेश, शिवलिंग और हनुमान जी की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इसके अलावा मंदिर परिसर में प्रभु के चौबीस अवतारों के साथ-साथ स्वामी नारायण, शिवलिंग, गणेश जी, हनुमान जी, राधाकृष्ण देव इत्यादि के  32 और छोटे-बड़े मंदिर बने हुए हैं। रोज होने वाली रथ-यात्रा तथा रात का साउंड व लाइट शो अपना अतिरिक्त आकर्षण रखते हैं ! मंदिर में नीचे की ओर बहती नर्मदा नदी में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से ही इकट्ठा हो जाती है। अंधेरा होने पर मंदिर अलग-अलग तरह की लाइट्स से रोशनी में नहा जाता है। जो इस इमारत की खूबसूरती को और भी बढ़ा देती है। 

स्वामी नारायण जी का मंदिर 

सरोवर का निर्मल जल 

मूर्तियों की सजीवता 

स्वामी नारायण रथ 
इसके सहजानंद परिसर में, नीलकंठ हृदय कमल, भारतीय संस्कृति और हिंदू तीर्थयात्रा, विज्ञान नगर, मनोरंजन पार्क, नाव की सवारी, भुल भुलैया इत्यादि का आनंद लिया जा सकता है। इसके खुलने का समय सुबह 11:00 बजे से रात  8:00 बजे तक है। सहजानंद विश्वविद्यालय के 7 भाग हैं। इस सभी भागों में भारतीय संस्कृति और धार्मिक ब्योरों कोआकर्षक ढंग से पेश किया गया है। यदि कभी गुजरात घूमने का सुयोग बने तो कार्यक्रम में नीलकंठ धाम जरूर शामिल होना चाहिए।  

शनिवार, 27 नवंबर 2021

जिसे भी हम पूजते हैं, उसकी ऐसी की तैसी कर डालते हैं

कभी ध्यान गया है किसी मंदिर में लगे किसी अभागे वृक्ष की तरफ ? उसके तने या जड़ के पास अपनी मन्नत पूरी करने के लिए दीया जला-जला कर उसकी लकड़ी को कोयला कर, हमें लगता है कि वृक्ष महाराज हमारी मनोकामनाएं जरूर पूरी करेंगें ! कोई कसर नहीं छोड़ते हम, अपनी आयु बढ़ाने के लिए उसकी जड़ों में अखाद्य पदार्थ डाल-डाल कर उसको असमय मृत्यु की ओर ढकेलने में.............!

#हिन्दी_ब्लागिंग  

हम एक धार्मिक देश के वाशिंदे हैं। हम बहुत भीरू हैं ! इसी भीरुता के कारण हम अपने बचाव के लिए तरह-तरह के टोने-टोटके करते रहते हैं ! हमें जिससे डर लगता है, हम उसकी पूजा करना शुरु कर देते हैं ! हमने अपनी रक्षा के लिए पत्थर से लेकर वृक्ष, जानवर और काल्पनिक शक्तियों को अपना संबल बना रखा है ! पर जैसे-जैसे हमारी सुरक्षात्मक भावना पुख्ता होती जाती है, हम अपने आराध्यों की ऐसी की तैसी करने से बाज नहीं आते !

पूजा-अर्चना कर ली, कार्य सिद्ध हो गया तो फिर तुम कौन तो मैं कौन
घर से ही शुरु करें ! जब तक मतलब निकलना होता है, हमें अपने माँ-बाप से ज्यादा प्यारा और कोई नहीं होता ! पर जैसे ही, उन्हीं कि बदौलत, अपने पैरों पर खड़े होने की कुव्वत आ जाती है, तो उनके लिए वृद्धाश्रम की खोज शुरु हो जाती है !
हमारे यहां यह बात काफी ज्यादा प्रचलित है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवता वास करते हैं ! देख लीजिए जहां देवता वास करते हैं, वहां नारी का क्या हाल है ! अरे देवता ही जब नारी की कद्र नहीं कर पाए, तो हम तो गल्तियों के पुतले, इंसान हैं ! कभी सुना है कि देवताओं ने अपना मतलब सिद्ध हो जाने पर किसी देवी को इंद्र का सिंहासन सौंप दिया हो ? 
हम नदियों को देवी या माँ का दर्जा देते आए हैं ! पर क्या हमने किसी एक भी नदी के पानी को पीने लायक छोड़ा है ! कहीं पीना पड़ जाता है, तो वह मजबूरी वश ही होता है ! प्रकृति द्वारा मुफ्त में प्रदान इस जीवनदाई द्रव्य की हमने कभी कद्र नहीं की ! उसी का परिणाम है जो उस पर हजारों रूपए खर्चने पड़ रहे हैं ! जल देवता कहते-कहते हमारा मुंह नहीं थकता ! पर आज जैसी इस देवता की दुर्दशा कर दी गई है, तो लगता है जैसे इसके भी देवता कूच कर चुके हैं !
यही हाल वायुदेव का है ! आम इंसान की तो क्या ही कहें, खुद उनकी भी सांस हमारे यहां आ कर फूलने लगती है ! पर हमें और हमारे तथाकथित नेताओं को कोई परवाह नहीं है ! ना हीं चिंता है ! एक आश्वासन देते नहीं थकता दूसरा अपनी करनियों से बाज नहीं आता ! 
गाय को सदा माँ के समकक्ष माना गया है ! उसकी नेमतों का तो कोई सानी ही नहीं है ! ना हीं उसके उपकारों का कोई बदला है ! पर क्या कभी उनके जिस्म को निचोड़ने के अलावा उनकी सेहत का ख्याल रखा है, किसी ने ? जगह-जगह घूमती, कूड़ा खाती मरियल सी गायें, शायद ही दुनिया में कहीं और दिखती हों !
पेड़-पौधों,  लता-गुल्मों की तो बात ही ना की जाए तो बेहतर है ! जीवन देने वाली इस प्रकृति की नेमत की कैसी पूजा आज कल हो रही है जग जाहिर है ! कभी ध्यान गया है किसी मंदिर में लगे किसी अभागे वृक्ष की तरफ ? उसके तने या जड़ के पास अपनी मन्नत पूरी करने के लिए दीया जला-जला कर उसकी लकड़ी को कोयला कर, हमें लगता है कि वृक्ष महाराज हमारी मनोकामनाएं जरूर पूरी करेंगें ! कोई कसर नहीं छोड़ते हम, अपनी आयु बढ़ाने के लिए उसकी जड़ों में अखाद्य पदार्थ डाल-डाल कर उसको असमय मृत्यु की ओर ढकेलने में ! 

समय-समय पर देव प्रतिमाओं की तो और भी बुरी गत हमारे द्वारा बना दी जाती है ! पूजा-अर्चना के बाद मूर्ति और उसमें इस्तमाल हुई सामग्री, किसी पेड़-पार्क या झाड़ियों में पड़ी अपनी दुर्गत पर आँसू भी नहीं बहा पाते ! किसी बड़े-विशाल पूजा समारोह के बाद नदी-नालों, झीलों-तालाबों की हालत देख लीजिए, हमारे भक्तिभाव की सारी पोल खुल कर रह जाती है !   

यानी कि हम इतने खुदगर्ज हैं कि मतलब निकल जाने के बाद किसी भी पूज्य की ऐसी की तैसी करने में कोई कसर नहीं छोड़ते ! पूजा-अर्चना कर ली, कार्य सिद्ध हो गया तो फिर तुम कौन तो मैं कौन !  

विशिष्ट पोस्ट

जिसने सबसे ज्यादा विभिन्न रोगग्रस्त पात्रों का किरदार निभाया

अनेकों बार  Autism, Dyslexia, Progeria, Paraplegia, Alzheimer, Amnesia, Schizophrenia जैसी अनेक  बीमारियों पर, जिनका नाम भी आम लोगों ने सुना...