हमारे देश की यह बदनसीबी है कि यहां अपने स्वार्थ, अपने वर्चस्व, स्वहित के लिए किसी भी हद तक जाने वालों की कभी कमी नहीं रही है ! अभी कुछ दिनों से दुनिया के शायद सबसे घृणित जीव के नाम पर एक तथाकथित आंदोलन चलाने की असफल कोशिश की जा रही है ! आश्चर्य होता है ऐसी मानसिकता पर ! संसार का ऐसा कौन सा माँ-बाप होगा जो अपने बच्चों को कॉकरोच के रूप और रंग-ढंग में देखना चाहेगा ! क्या इस मुहीम के आयोजकों ने अपने बच्चों का नाम स्कूलों में कॉकरोच लिखवाया है ? यदि नहीं, तो क्यों नहीं............??
#हिंदी_ब्लॉगिंग
क्रांति यानी किसी संरचना में आमूलचूल परिवर्तन ! यदि ऐसा परिवर्तन समाज में लाना हो तो वह अवाम और देश के हित में होना चाहिए ! यह तभी संभव है जब जनमानस में राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक या किसी मनोवैज्ञानिक कारकों से उत्पन्न कोई ठोस वजह हो और साथ ही उनमें दृढ इच्छाशक्ति, अदम्य साहस, सच का दामन, अटूट धैर्य, देशप्रेम और देशहित की भावना कूट-कूट कर भरी हो ! ऐसी पहल का मुख्य घटक सदा से समाज का युवा वर्ग ही रहा है ! पर इधर इतिहास भुला कर, कुछ स्वार्थी, मक्कार, सत्ता लोलूप तत्वों द्वारा अपने हित-साधन के लिए, विदेशों से आयातित शब्द ''जेन-जी'' से युवाओं को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास किया गया है !
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| आदर्श |
जेन-जी ! वह पीढ़ी जो डिजिटल दुनिया में जन्मी और पली-बढ़ी है। इसकी सूचना प्राप्त करने की आदतें पिछली पीढ़ियों से अलग हैं। समाचार पत्र पढ़ने या लंबी बहस सुनने की बजाय यह छोटे वीडियो, मीम, रील और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से जानकारी प्राप्त करती है। इस कारण यह नई सूचनाओं को तेजी से ग्रहण करती है, लेकिन कई बार उनकी सत्यता की जांच करने को पर्याप्त समय नहीं देती। इसीलिए कभी-कभी गलत सूचनाएं और अतिवादी विचार भी लोकप्रिय हो जाते हैं और लोगों को क्रोधित, भयभीत, उत्साहित या भावुक कर विशाल सार्वजनिक बहस का रूप ले लेते हैं। परिणामस्वरूप कई बार वास्तविक समस्याओं को किनारे कर छद्म भावनात्मक शोर कुछ देर के लिए सच का स्थान ले लेता है !
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| प्रेरणा |
ह मारे देश की यह बदनसीबी है कि यहां अपने स्वार्थ, अपने वर्चस्व, स्वहित के लिए किसी भी हद तक जाने वालों की कभी कमी नहीं रही है ! ऐसे लोग सत्ता, अधिकार और प्रभुत्व के लिए देश को भी दांव पर लगाने पर नहीं झिझकते ! यदि वे संविधानिक तरीके से सफल नहीं हो पाते तो देश में आंतरिक कलह उत्पन्न करने हेतु किसी बेहद निम्नस्तरीय अभियान का सहारा ले लेते हैं ! अभी कुछ दिनों से दुनिया के शायद सबसे घृणित जीव के नाम पर एक तथाकथित आंदोलन चलाने की असफल कोशिश की जा रही है ! आश्चर्य होता है ऐसी मानसिकता पर ! संसार का ऐसा कौन सा माँ-बाप होगा जो अपने बच्चों को कॉकरोच के रूप और रंग-ढंग में देखना चाहेगा ! क्या इस मुहीम के आयोजकों ने अपने बच्चों का नाम स्कूलों में कॉकरोच लिखवाया है ? यदि नहीं, तो क्यों नहीं !
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| भविष्य |
अ पना हित साधने वाले कई लोग अपने साथ उस शहीद भगत सिंह की तस्वीर रख, लोगों को गुमराह करने की कुचेष्टा भी करते हैं, जिन्होंने इस देश के लिए सिर्फ 23 साल की उम्र में अपना बलिदान दे दिया था ! भगत सिंह ही की तरह ऐसे सैकड़ों हजारों नाम हैं जो देश की खातिर हंसते-हंसते फांसी चढ़ गए थे ! ऐसे अनगिनत किशोर हैं जिनका नाम भी लोगों को मालूम नहीं है, पर धन्य हैं उन शहीदों के माता-पिता और परिवार जिन्होंने उनके नाम पर देश से अपने लिए कभी कुछ नहीं चाहा ! इधर ये लोग हैं जो अपने स्वार्थ के लिए देश, समाज, नागरिकों में भेद-भाव पैदा कर जब घर लौटते हैं तो इनकी आरती उतारी जाती है, जैसे दिग्विजय कर लौटे हों ! इनकी तुलना उन शहीदों से करना भी बहुत बड़ा अपराध है।
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| सुरक्षा का एहसास |
ऐसे में बात संस्कारों पर आ जाती है ! भले ही पाश्चात्य सभ्यता ने हमारे यहां घुसपैठ कर ली हो, पर अभी भी एक बहुत बड़े वर्ग में माता-पिता व बड़े-बुजुर्गों द्वारा छुटपन में ही बच्चों में संस्कार के बीज रोपित कर दिए जाते हैं ! इसलिए किशोरावस्था भले ही पूर्ण रूप से परिपक्व ना हो पर उसे बहका-फुसला कर गुमराह नहीं किया जा सकता ! बच्चे तो कच्ची मिटटी की तरह होते हैं ! यह तो कुम्हार पर निर्भर करता है कि वह चिलम बनाता है या सुराही ! उसके हाथ की जरा सी जुंबिश पूरे आकार को बेकार कर सकती है ! हमें उन सभी युवाओं के माता-पिता का ऋणी होना चाहिए जिन्होंने अपने बच्चों को सुसंस्कृत किया, दिलों में देश प्रेम की लौ जगाई और एक कुत्सित प्रयास को विफल करने में अहम भूमिका निभाई 🙏
@चित्रों के लिए अंतर्जाल का आभार
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