गुरुवार, 23 अक्तूबर 2008

टिप्पणीयों को खुले दिल से स्वीकार करें

टिप्पणी देना और पाना किसे अच्छा नहीं लगता। हरेक को अपनी पोस्ट की प्रशंसा पा खुशी होती है। उत्साहित हो वह भी किसी और को भी प्रोत्साहित करना चाहता है। इसी उमंग में किसी अच्छे लेख की प्रशंसा में जब अपने विचार व्यक्त करता है तो वे, टिप्पणी माडरेशन सक्षम किया होने की वजह से, तुरंत प्रकाशित नहीं होते। ऐसा लगता है कि किसी के घर गये हों और चौकीदार अंदर जाने से यह कह कर रोक दे कि पूछ कर आता हूं कि अंदर आने दूं कि नहीं।
ऐसा क्यूं है। क्या लिखने वाला सिर्फ अपनी प्रशंसा सुनना चाहता है, अपनी जरा सी आलोचना उसे पसंद नहीं। क्या यह डर है कि मैंने जो लिखा है उससे बहुत से लोग नाराज हो जायेंगे और उल्टी-सीधी बातें लिख मारेंगे, या और कुछ। यह तो सर्वविदित है कि सब को खुश नहीं किया जा सकता, मुंड़े-मुंड़े मत्रिभिन्ना, और जो लिखा गया है वह वैसा लिखने वाले को ठीक लगा इसलिये लिखा गया, यह पूर्णतया अपने विचार हैं। तो पढ़ने वाले को भी पूरी आजादी होनी चाहिए कि वह भी अपने विचारों से सबको अवगत करा सके, सबको यानी सबको। ऐसा मुझे लगता है।
अक्सर कहा जाता है कि ब्लागर परिवार में संदेशों का आदान-प्रदान होते रहना चाहिये। किसी को प्रोत्साहित करना बहुत अच्छी बात है। नवागत की झिझक मिटती है, हौसला बढ़ता है। पर सिर्फ टिप्पणी देनी है इसलिए टिप्पणी दे देने से लगता है कि सिर्फ औपचारिकता पूरी कर दी गयी हो। पर टिप्पणी निष्पक्ष होनी चाहिए। जरूरी तो नहीं कि कटु आलोचना कर द्वेष पैदा किया जाए। पर लेख के बारे में अपने विचार बिना ठेस पहुंचाए कहे जाएं तो सामने वाले को और अच्छा लिखने में मदद मिलेगी, ऐसा मेरा सोचना है। अपने बारे में सिर्फ अच्छे ही अच्छे कमेंट पा कर अपनी गल्तियों की तरफ ध्यान नहीं जाता। इसलिए दरवाजे हर्रक के लिए खुले होने चाहियें। सबका स्वागत होना चाहिए। ऐसा नहीं कि मीठा-मीठा गप और कड़वा-कड़वा थू।
मैंने अपने विचार रखे हैं, अन्यथा ना लिजियेगा।

10 टिप्‍पणियां:

रचना ने कहा…

हमें कमेन्ट मोदेरेशन की जरुरत इसलिये पड़ती हैं क्युकी लोग महिला के वस्त्र , और उनकी निजी जिंदगी के बारे मे बेहुदे कमेन्ट देते हैं . कंटेंट पर कमेन्ट नहीं होता हैं केवल और केवल नारी और नारी के शरीर पर कमेन्ट होता हैं . उसके विवाहित या अविवाहित होने पर कमेन्ट होता हैं . अगर वो विवाहित हैं और तीखा लिख रही हैं तो उसके पति के प्रति संवेदना का कमेन्ट होता हैं , अगर अविवाहित हैं और लिव इन रिलेशनशिप पर लिखती हैं तो मान लिया जाता हैं की लिव इन रिलेशनशिप मे हैं .
मे कमेन्ट मोदेरेशन के पक्ष मे अपना मत दूंगी और वो कोई भी कमेन्ट जो कंटेंट से जुडा ना हो उसे हटा देने के पक्ष मे हूँ
सादर

Suresh Chiplunkar ने कहा…

रचना जी कमेण्ट्स हटाने का अधिकार तो ब्लॉग स्वामी के पास ही होता है, फ़िर कैसा डर? जो आपत्तिजनक लगे उसे हटा दीजिये… मैं भी मॉडरेशन के पक्ष में नहीं हूं, मैं तो "वर्ड वेरिफ़िकेशन" के पक्ष में भी नहीं हूँ, पता नही क्या-क्या टाइप करवाने के बाद टिप्पणी करने देते हैं, मानो हम प्रधानमंत्री के घर में घुसने वाले हों और हमारे कारण वायरस फ़ैल जायेगा…… मैं सिर्फ़ "अनानिमस" (बेनामी) के खिलाफ़ हूं, क्योंकि तब यह पता नहीं होता कि गालियाँ देने वाला कौन है, वरना अपन तो हर टिप्पणी का स्वागत करते हैं, जो भी गाली देगा उसे पूरे ब्याज के साथ लौटाई जायेंगी इस वादे के साथ… जो भी करना हो खुल्लमखुल्ला करो, हिजड़ो की तरह Anonymous बनकर नहीं…

रचना ने कहा…

जो भी गाली देगा उसे पूरे ब्याज के साथ लौटाई जायेंगी इस वादे के साथ… bahut khub mae bhi is neeti ko maantee hun issae saffi bahut rehtee haen suresh ji

mae is prakaar ki post par paksh/vipaksh ae mat dene kae favour mae hun jissaey saarthak bloging ho aur agar blog maalik chaaye to dusraee din dusri post mae paksh /vipaks mae milae mat ki suchna dae

saadar

COMMON MAN ने कहा…

bilkul theek likha hai sir, baat kadwi ho meethi sunani chahiye aur agar aap apne liye theek mahsoos karte hain to apni taraf se pratiyuttar dijiye, rahi baat mahilaon ki, jo log sharir par comment karte hain, unhe poora jawab diya jaana chahiye, anuja ji tatha kuchh anya mahilaon ke blog par koi moderation nahin hai, lekin maine unke blog par abhi tak koi abhadra tippani nahi padhi

Paliakara ने कहा…

हम सब का स्वागत करते हैं. लेकिन आएँ तो सही. आभार.

रौशन ने कहा…

हम रचना जी की बात से सहमत हैं कमेन्ट मोडरेशन की जरुरत इसीलिए पड़ती है कि कुछ लोग कुछ भी लिख देना चाहते हैं. सभ्यता की सीमा में रह कर लिखा जाए तो कोई क्यो परेशां हो पर ब्लॉग जगत में काफ़ी बुरे तत्व भी हैं.

Alag saa ने कहा…

रौशन जी,
अच्छे-बुरे लोग तो सभी जगह होते हैं। उनके डर से, कोई और जो आपकी प्रशंसा करने, आपकी बात से मिली खुशी को आप से बांटने आ रहा हो, उसी को परखना क्या ठीक लगता है। आप उसे आने तो दें, साथ पसंद ना आये तो टिप्पणी हटा दें। वह भी आप का इशारा समझ जायेगा और गैरतमंद होगा तो फिर कभी उधर का रुख नहीं करेगा। रही बात सिर-फिरों की, तो उनसे डर कर छुपने से तो उनके हौसले और बढ़ेंगे। उनका सामना कर उन्हें हतोत्साहित करने की जरूरत है नकि बचने की।

राज भाटिय़ा ने कहा…

शर्मा जी मुझे लोग कई बार गालिया भी लिख कर जाते है, लेकिन मेने कभी उन्हे हटाया नही, ओर ना ही गालियो का जबाब गलियो से दिया. क्योकि दुसरे पढने वाले भी तो देखे ... ओर इन अनामी का नाम ( जो मुझे अनमी बन कर टिपण्णीया करते है)भी मुझे पता है, लेकिन मुझे फ़र्क नही पडता, धन्यवाद

Alag saa ने कहा…

भाटिया जी,
तभी तो आप राज करते हो।

श्रीकांत पाराशर ने कहा…

Theek kahte hain aap. Aisi apeksha hi nahin karni chahiye ki hamesha tippani men prashansa hi hogi. Jhooti sarahna se bhi konsa bhala hone wala hai. yah baat jyada sahi lagi ki agar kisi ki koi post pasand nahin aayee to sahjta se, bina kisi ke man ko thes pahunchaye bhi apni baat tippani ke madhyam se kahi ja sakti hai. Ladies ke blogs par unt sunt likh dene walon ke bare men common man ne shayad sahi likha hai ki tippani agar abhadra ho yaa jyada kashtdayak ho to use blogger khud hatane ki samarthya rakhta hai. Shararti tippanikaron ke chalte agar mahilayen moderation ka option pasand karti hain to yah un par chhod dena chahiye ki ve jo uchit samjhen karen.