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रविवार, 23 नवंबर 2025

अथ "पूले" कथा, सबका विकास, सबका ख्याल 😇

किसी ने भी उनकी वेदना पर कभी ध्यान नहीं दिया और इनके कामों को पुजारियों के कार्यों का एक हिस्सा समझ भूला दिया जाता रहा ! पर एक व्यक्ति ऐसा भी था जो इन्हें नहीं भूला ! उसने बनारस के मंदिरों के पुजारियों के इस कठिन कार्यों को देखा ! विपरीत परिस्थितियों में भी बिना शिकायत अपने कार्य सम्पन्न करते इन श्रद्देय लोगों की सहनशक्ति को नमन किया ! दैनिक कार्यों के प्रति उनके समर्पण, आस्था, निष्ठा को समझा ! पर इसके साथ ही उससे जुड़े कष्टों को भी महसूस किया..............!      

#हिन्दी_ब्लागिंग    

मारे देश में सैकड़ों प्राचीन मंदिर हैं जो आस्था के केंद्र हैं ! लाखों-लाख लोगों का तांता लगा रहता है यहां दर्शनों के लिए ! हर समय श्रद्धालु, भक्त, पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है ! लोग आते-जाते रहते हैं, अपनी इच्छाओं, मनोकामनाओं, अपने अरमानों की पूर्ति के लिए ! पर शायद ही उनका ध्यान कभी उन पुजारियों की तरफ भी जाता हो, जो उनकी कार्यसिद्धि का माध्यम बनते हैं ! जिनके बिना कोई भी पूजा सम्पन्न होना संभव ही नहीं है ! जो हमारी संस्कृति के रक्षक, हमारी सनातन परंपरा के संवाहक और हमारे धर्म के संरक्षक हैं ! जो बिना नागा वर्षों-वर्ष से कठिन व विपरीत परिस्थितियों में, कहीं-कहीं माइनस तापमान में भी, कठिन नियमों का पालन करते हुए, सुबह 3 बजे स्नान करके बर्फ समान ठंडे फर्श पर चलकर मंदिरों में पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं । इन्हें आजीवन कठोर नियमों का पालन करना होता है। 

बर्फ पर नंगे पैर पूजा को जाते बद्रीनाथ मंदिर के पुजारी 
पर किसी ने भी उनकी वेदना पर कभी ध्यान नहीं दिया और इनके कामों को पुजारियों के कार्यों का एक हिस्सा समझ भूला दिया जाता रहा ! पर एक व्यक्ति ऐसा भी था, जिसने इनकी तकलीफों को देखा, कष्टों को समझा तो फिर उन्हें भूला नहीं  ! उसने बनारस के मंदिरों के पुजारियों के कठिन कार्यों को देखा ! विपरीत परिस्थितियों में भी बिना शिकायत अपने कार्य सम्पन्न करते इन श्रद्देय लोगों की सहनशक्ति को नमन किया ! दैनिक कार्यों के प्रति उनके समर्पण, आस्था, निष्ठा को समझा ! पर साथ ही उससे जुड़े कष्टों, कठिनाइयों को भी महसूस किया ! वह व्यक्ति था देश का प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ! 

स्नान-ध्यान 

पूजारत 
पुजारियों की इस तकलीफ को कुछ हद तक दूर करने के लिए उन्होंने हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री श्री जयराम ठाकुर से सम्पर्क कर वहां सर्दियों में पैरों में पहने जाने वाले पूलों की अपनी आवश्यकता के बारे में बताया ! ये पूले भांग के रेशों से बनी खास जूतियां होती हैं, जो पैरों को ठंड से तो बचाती ही हैं, साथ ही वनस्पति से बनी होने के कारण पूरी तरह प्राकृतिक और शुद्ध भी मानी जाती हैं। इसीलिए इन्हें पवित्र स्थानों पर धारण करने की अनुमति होती है ! प्रधानमंत्री मोदी ने यह विशेष जूतियां इसलिए मंगवाईं क्योंकि काशी विश्वनाथ मंदिर के पुजारियों को प्रातः और संध्या पूजा के समय बर्फ समान, रक्त जमा देने वाले ठंडे फर्श पर नंगे पैरों खड़ा होना पड़ता है। सर्द मौसम में यह स्थिति और कठिन हो जाती है। उन्होंने इस बात की कभी शिकायत नहीं की, पर मोदी ने बिना कहे उनके कष्ट को समझा और उसके निवारण की कोशिश की ! ये बात उनके अपने देश और देशवासियों के प्रति कर्तव्य की समझ, चिंता, जागरूकता को तो दर्शाती ही है साथ ही यह भी बताती है कि छोटी-छोटी बातें भी उनसे नजरंदाज नहीं हो पातीं ! 

आराधना 
प्रधान मंत्री जी की इस बात का खुलासा, खुद हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री श्री जयराम ठाकुर ने एक विडिओ जारी कर किया है ! उन्होंने जो बात बताई वह जात-पात, भाषा-राजनीती से बहुत ऊपर है ! वह बात है इंसानियत की ! वह बात है दूसरों के कष्टों को समझने की ! वह बात है दूसरों की तकलीफों को दूर करने की चाहत की ! उस विडिओ का लिंक नीचे दिया हुआ है !

https://www.ndtv.com/video/pm-orders-traditional-himachali-poole-slippers-for-kashi-priests-pays-personally-997198

न्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं उन्हें फोन कर इन जूतियों की व्यवस्था करने को कहा था। इसी के तहत उन्होंने अपने इलाके में सक्रिय महिला समूहों से संपर्क कर करीब 250 जोड़ी पूले काशी भेजे। दिलचस्प बात यह रही कि जब बिल नहीं भेजा गया तो प्रधानमंत्री ने दोबारा फोन कर भुगतान की याद दिलाई और बाद में खुद अपने निजी खाते से 24 हजार रुपये महिला समूहों को भेजे। इससे दोहरा फायदा हुआ, पुलों से पुजारियों को ठंड से तो राहत मिली ही साथ ही उन मेहनतकश सक्रीय महिला समूहों की भी आर्थिक सहायता हो गई ! 


पूले 
वैसे देखने में तो यह एक छोटी सी बात लगती है, पर उस तरफ आज तक किसी और का ध्यान क्यों नहीं गया ! बड़े मंदिरों या तीर्थस्थलों को छोड़ दें तो देश के गांव-कस्बों में असंख्य ऐसे मंदिर, पूजास्थल हैं जिनके पुजारी या रख-रखाव करने वाले सिर्फ वहां के चढ़ावे या स्थानीय लोगों की मदद से किसी तरह अपना और अपने परिवार का गुजारा करते हैं ! उनकी तरफ भी ध्यान जाना जरुरी है ! काश, जयराम ठाकुर जी की तरह देश के अन्य मुख्य मंत्री भी बिना किसी द्वेष, कुठां, पूर्वाग्रह के देश-हित में अच्छी बातों का सम्मान कर पाते ! जिससे यह कुछ-कुछ उपेक्षित सा वर्ग भी चिंतामुक्त हो देश-समाज की उन्नति में और भी योगदान दे पाता !

@चित्र तथा विडिओ अंतर्जाल के सौजन्य से 

गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025

असली चेहरा सामने आया, फितरत को भी सामने लाया

दरअसल ऐसे लोग राजनेता हैं ही नहीं ! उन्हें देश, धर्म, जाति, देशवासियों, किसी से भी कुछ लेना-देना नहीं है ! उन्हें मतलब है सिर्फ और सिर्फ अपने हितों से ! और इसके लिए वे कुछ भी करने को आतुर रहते हैं ! वे सिर्फ विदेशी ताकतों के मोहरे हैं जिन्हें येन-केन-प्रकारेण सत्ता हासिल करवा दी गई है और वे अपने आकाओं की बिछाई बिसात पर सिर्फ उनके आदेशानुसार हरकतें करते हैं....!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

वि देशी ताकतों द्वारा भारत में अपनी कठपुतलियों की असलियत को अब तक ढक-छुपा कर उनकी आड़ में खुद को सत्ता में सुपर पॉवर बनाए रखने का जो षड्यंत्र सालों से किया जाता रहा था, वह खुल कर सामने आ गया है ! आज के माहौल में उन्हें भी यह बात समझ में आ गई है कि अब भारत में इन प्यादों के बल पर अपने मनोनुकूल सरकार बनाना कतई मुमकिन नहीं है ! तो अब खुला खेल फर्रुखाबादी ! 
प्यादे 
पि छले दसेक वर्षों से कुछ तथाकथित राजनितिक लोग सनातन विरोधी, हिंदू विरोधी, धर्म विरोधी ब्यान पर ब्यान दिए जा रहे हैं, कोई कहता है हिन्दू धर्म ग्रंथ जला दो ! कोई देवी-देवताओं को काल्पनिक बताता है ! कोई लोकप्रिय त्योहारों को खतरनाक बता लोगों को भ्रमित करने की कुचेष्टा करता है ! कोई किसी उत्सव पर सवाल खड़े करने की हिमाकत कर देता है ! कोई देवी-देवताओं के बारे में अभद्र टिप्पणियां कर देता है! कोई अपने पर्वों पर होने वाले खर्च को धन की बर्बादी बता, विदेशी धर्मों से सीख लेने की बात करता है ! वह भी तब जब देश की बहुसंख्यक आबादी सनातन की आस्था से जुड़ी हुई है ! यह सब अकारण नहीं हो रहा, सब सोची-समझी साजिशों के तहत क्रियान्वित किया जा रहा है !
बकैती 

आम इंसान को यह सब वर्षों से सत्ता से दूर विपक्षी दलों की छटपटाहट या आक्रोश लग सकता है ! पर सच्चाई किसी और ही दिशा-दशा की ओर इशारा करती है ! आज के देश के माहौल को देखते हुए कोई भी व्यक्ति जो राजनीती से जुड़ा हो और उसे जरा सी भी राजनितिक समझ होगी तो वह कभी भी ऐसे ब्यान दे कर अपने कैरियर को खत्म नहीं करना चाहेगा ! दरअसल ऐसे लोग राजनेता हैं ही नहीं ! उन्हें देश, धर्म, जाति, देशवासियों किसी से भी कुछ लेना-देना नहीं है ! उन्हें मतलब है सिर्फ और सिर्फ अपने हितों से ! और इसके लिए वे कुछ भी करने को आतुर रहते हैं ! वे सिर्फ विदेशी ताकतों के मोहरे हैं जिन्हें येन-केन-प्रकारेण सत्ता हासिल करवा दी गई है और वे अपने आकाओं की बिछाई बिसात पर सिर्फ उनके आदेश के अनुसार ही हरकतें करते हैं ! 
बिसाती मोहरे 
ऐसा नहीं है कि शतरंज की बिसात बिछा उस पर सिर्फ प्यादों की परेड करवा दी जाती हो ! अपने उद्देश्य की पूर्ती के लिए पूरा ताम-झाम किया जाता है ! अकूत धनराशि खर्च की जाती है ! तरह-तरह के आख्यान-व्याख्यानों का जाल बिछाया जाता है ! प्रचार-प्रसार हेतु सोशल मीडिया का उपयोग-दुरूपयोग किया जाता है ! हर ऐसी शह जो इंसान के ईमान को डगमगा दे उसका उपयोग किया जाता है ! जिस किसी व्यक्ति का जरा सा भी रसूख या पहुँच होती है उसे खरीद कर अपनी दुरभिसंधि का सदस्य बना लिया जाता है ! पैसे का लालच दे कुछ भी बुलवा-लिखवा लिया जाता है ! पैसे को ही सर्वशक्तिमान बना दिया गया है !
सोशल मिडिया 
खरीदफरोख्त 
धन की शक्ति अपरंपार है ! दुनिया का कोई भी कोना उससे सुरक्षित नहीं है ! उसी के बल पर झूठ को सच की शेरवानी पहनवा, सजा-संवार कर उसकी बारात निकाल दी जाती है ! यह तो जग जाहिर है कि जब तक सच अपनी चप्पलें पहनता है, झूठ दुनिया के दस चक्कर लगा आता है और ऐसे लोग तो अपने धन-बल पर झूठ के लिए रॉकेट तक उपलब्ध करवा देते हैं ! लोग बहकावे में आ जाते हैं ! उधर विडंबना यह है कि सच को अपना सच बताने के लिए भी धन की शरण लेनी पड़ती है ! पर समय ने बदलना शुरू कर दिया है !

सच्चाई 
इसी सब के बीच अचानक देश की आजादी से भी पहले से रचा जा रहा, पर अब तक दबा-ढका, एक ऐसा कुचक्र सामने आया है जिससे सभी अचंभित से हो गए हैं ! कोई खुद पाक-साफ रह कर, वर्षों से किसी को किसी और के विरुद्ध बरगला कर, किसी और से मतभेद करवा कर, किसी और  मुद्दे को भड़का कर लोगों को भ्रमित कर, उनका ध्यान कहीं और भटकवा कर, अपना उल्लू सीधा करता रहा ! उसका तरीका इतना प्रेममय,  दोस्ताना,  सौहार्दपूर्ण और स्नेहयुक्त था कि लोग  उसके इरादों  को कभी  भांप ही नहीं पाए ! परंतु वक्त सब का हिसाब करता और रखता है, उसका भी हुआ और उसके क्रियाकलापों की नग्नता सामने आ ही गई और जब आ ही गई तो वह भी खुल कर अब तक छुपे अपने गुर्गों, गणों के साथ सामने आ गया ! उसका नतीजा सबके सामने है और अब हमारी बारी है कि हमें किससे कैसे निपटना है !  
वन्देमातरम।। 

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

गुरुवार, 25 सितंबर 2025

''जेन-जी'', इस में भी सनातन सबसे आगे है

हमारे यहां तो लम्बी कतार है उदाहरणों की, श्री कृष्ण, नचिकेता से शरू करें तो आधुनिक युग में भी  लक्ष्मी बाई, चंद्रशेखर, खुदीराम बोस, विवेकानंद, जतिंद्र नाथ, भगत सिंह, उमाकांत कड़िया, करतार सिंह सराभा, गिनते-गिनते थक जाएंगे पर इन शूरवीरों के नाम खत्म नहीं होंगे.........!

#हिन्दी_ब्लागिंग  

युवा वर्ग को ले कर अचानक एक गढ़ा गया शब्द ''जेन-जी'' उमड़ता है और दुनिया भर पर वितान सा छा जाता है ! ऐसे शब्द पहले भी बनते-बिगड़ते रहे हैं, तरह-तरह के बदलावों से उन्हें जोड़ा जाता  रहा है ! आज इसे यदि युवाओं की क्रांति से जोड़ा जा रहा है तो, युवा तो हर युग में हुआ है ! क्रांतियां तो युवाओं द्वारा ही होती हैं ! उन्हीं के द्वारा सदा गलत के विरोध में विद्रोह और प्रतिरोध हुए हैं !

सत्ता के विरुद्ध पहली क्रांति 

हमारे यहां तो यह चिर काल से होता आया है ! यदि अपने पूर्वाग्रह और कुंठा छोड़, सभी लाल-नीले-पीले, गोल-चपटे-तीरछी विचारधारा वाले, श्री कृष्ण चरित्र को पढ़ें तो ज्ञात हो जाएगा कि इस बारे में भी सनातन सबसे आगे है और उसका कोई सानी, कोई उदाहरण, कोई दृष्टांत, कोई मिसाल दुनिया में और कहीं नहीं मिलती ! 

जन-क्रांति 
श्री कृष्ण, जिनके विराट व्यक्तित्व को दुनियावी परिभाषाओं में नहीं बांधा जा सकता, हजारों-हजार साल पहले उन्होंने तो बाल्यकाल से ही अन्यायी, जन-विरोधी व्यवस्था का प्रतिरोध किया था ! युवा होते-होते इंद्र जैसी सत्ता को चुनौती दे डाली थी ! कंस जैसे महा शक्तिशाली राजा और उसके आतंक को खत्म कर डाला था ! 

अपने देश में तो लम्बी कतार है उदाहरणों की, श्री कृष्ण, नचिकेता से शरू करें तो आधुनिक युग में भी लक्ष्मी बाई, चंद्रशेखर, खुदीराम बोस, विवेकानंद, जतिंद्र नाथ, भगत सिंह, उमाकांत कड़िया, करतार सिंह सराभा गिनते-गिनते थक जाएंगे पर इन शूरवीरों के नाम खत्म नहीं होंगे ! 

पर इतिहास इस बात का भी गवाह रहा है कि यदि भौतिक बदलावों को छोड़ दें तो जो क्रांतियां, तानाशाही, भ्रष्टाचार, वंश, भाई-भतीजावाद के विरोध में की गईं वे तात्कालिक रूप से तो सफल रहीं, परंतु समय के साथ फिर उनके परिणामों में बदलाव आता चला जाता है ! फिर वही पुरानी बुजुर्वा ताकतें हावी होती चली जाती हैं ! पर अब अच्छी बात यह है कि आज का युवा तकनिकी तौर पर पहले से ज्यादा सक्षम ज्ञानवान तथा जागरूक है, उसे ना तो ''नेरेटिवों'' से बहकाया जा सकता है ना हीं उससे सच्चाई छिपाई जा सकती है ! देश का भविष्य सुरक्षित है और रहेगा ! 

जय हिन्द 🙏

@चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2025

महाकुंभ की सफलता का श्रेय इन्हें भी जाता है

 इस महाकुंभ की अपार सफलता के पीछे उन विपक्षी नेताओं का भी बहुत बड़ा सहयोग है, जिन्होंने अपने राजनीतिक करियर को दांव पर लगा, अपने भविष्य को अंधकार में धकेल, लोगों की भावनाओं, उनकी आस्थाओं को दरकिनार कर लगातार विष-वमन करते हुए इस आयोजन की बुराई की ! किसी भी तरह इस आयोजन को रोकने-बदनाम करने के लगातार षड्यंत्र रचे ! वे खुद बर्बाद होने, उपेक्षित होने, बदनाम होने के बावजूद अपने मिशन पर लगे रहे ! उनके इसी उद्यम के कारण पूरा सरकारी तंत्र सदा सचेत, मुस्तैद तथा सतर्क रहा ! जनता को ऐसे लोगों की कद्र करते हुए, उन्हें सदा-सदा के लिए विपक्ष में बैठाए रखना चाहिए जिससे वे भविष्य में भी ऐसे ही सरकार की सतर्कता बनाए रख सकें..................!  
#हिन्दी_ब्लागिंग 
पैंतालीस दिन यानी डेढ़ महीने तक चले महाकुंभ का, हिमालय जैसा अभूतपूर्व कीर्तिमान बना कर, समापन हो गया ! पर जाते-जाते उसने दुनिया को सनातन की विशालता, उसकी गहराई, उसकी आस्था, उसकी व्यापकता का ऐसा परिचय करवा दिया, जिसको सारा विश्व वर्षों-वर्ष याद रखेगा ! इतने बड़े आयोजन का सफलता पूर्वक निर्वहण ही अपने-आप में ही एक कीर्तिमान है ! एक मील का पत्थर है ! एक ऐसा उच्चमान जिसे सालों-साल याद रखा जाएगा ! भविष्य में कहीं भी होने वाले हर बड़े समागम का ऐसा प्रतिस्पर्धी, जिसके प्रत्यक्ष उपस्थित ना होते हुए भी उसकी तुलना उस समय के आयोजन की सफलता से की जाएगी ! एक ऐसी उपलब्धि जिसका उल्लेख आज संसार के हर देश में हो रहा है ! दुनिया अचंभित है ! विकसित देश अपने लोगों को भेज रहे हैं, ऐसे भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) को समझने, उसकी कार्यशैली, उसकी विधि को जानने के लिए ! 
सफलता के सिपहसालार 
कोई भी विशाल-विराट अभियान तभी सफल होता है जब उससे जुड़े सभी लोग अपनी पूरी क्षमता से, पूरी तन्मयता से, पूरे समर्पण से अपने आप को उसमें झोंक दें ! योगी जी के नेतृत्व में यहां यही हुआ ! इसमें कोई शक नहीं कि यदि योगी जी ने इस असंभव से काम को ना संभाला होता तो इसकी सफलता अनिश्चित ही थी ! इसके लिए उनकी प्रशंसा करना सूर्य को दीपक दिखाने जैसा ही होगा ! वे ही इस अकल्पनीय, अद्भुत, अभूतपूर्व, अद्वितीय सफलता के कारक रहे ! उनको तथा उन के लिए पूरे सरकारी तंत्र को अनेकानेक साधुवाद। वहां कार्यरत एक-एक कर्मी का, चाहे वह सफाई से जुड़ा हो, चाहे सुरक्षा से, चाहे व्यवस्था से, पूरा देश दिल से आभारी है और रहेगा ! 
सफल आयोजन के हकदार 
भार तो प्रयागराज के प्रत्येक निवासी का भी है, जिन्होंने अपनी चिंता ना कर, अपनी असुविधाओं को दरकिनार कर, अपनी परेशानियों की शिकायत ना कर करोड़ों-करोड़ लोगों का अपने परिवार सदृश समझ उनका स्वागत किया ! यदि इस पूरे आयोजन के दौरान वहां के हर मेहमान को खाना-पानी-चाय-नाश्ते-यातायात या अन्य किसी मूलभूत सुविधा की कमी महसूस नहीं हुई तो इसका श्रेय वहां के स्थानीय लोगों को जाता है ! इस भागीरथ प्रयास की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है। इससे जुड़े सभी व्यक्ति सम्मान पाने के हकदार हैं !
 गंगा पूजन 
परंतु इसके अलावा वहां जाने वाले पैंसठ करोड़ से भी ज्यादा श्रद्धालुओं को भी कोटि-कोटि धन्यवाद, क्योंकि उनके गिलहरी सहयोग के बिना कुंभ की सफलता शायद संदिग्ध हो जाती ! वैयक्तिक व्यवहार, नैतिकता या सामान्य शिष्टाचार को लेकर हमारे बारे में कोई अच्छी राय नहीं है ! हम अपनी हितानुसार नियम-कानून का पालन करते आए हैं ! अपनी सुविधा को उन पर तरजीह देते हैं ! पर महाकुंभ में भाग लेने वाले श्रद्धालुजन मर्यादित रहे, सयंमित रहे, धैर्यवान रहे, जागरूक रहे ! कभी भी उच्छृंखलता नहीं दर्शाई ! यदि ऐसा ना होता तो 15-20 हजार सफाई कर्मियों के लिए हर समय सफाई बनाए रखना लगभग असंभव था ! यदि यह जन-सैलाब जरा सा भी अमर्यादित हो जाता तो बीसियों हजार सुरक्षा कर्मियों की हालत सागर में तिनके के मानिंद हो जाती ! इसलिए महाकुंभ के सुखद समापन का श्रेय तीर्थ यात्रियों को भी जाता है। 
 
जन सैलाब 
यदि देखा जाए तो इस महाकुंभ की अपार सफलता के पीछे उन विपक्षी नेताओं का भी बहुत बड़ा सहयोग है, जिन्होंने अपने राजनीतिक करियर को दांव पर लगा, बिना अपने भविष्य को ध्यान में रखे, लोगों की भावनाओं, उनकी आस्थाओं को दरकिनार कर लगातार विष-वमन करते हुए इस आयोजन की बुराई की ! किसी भी तरह इस आयोजन को रोकने-बदनाम करने के लगातार षड्यंत्र रचे ! खुद और अपने लगे-बंधों से लोगों को डराने-धमकाने की चेष्टा की ! इस महा पर्व को बदनाम करने के लिए धर्म, संस्कृति, परंपरा, समाज सभी के विरोधी बन गए ! वे खुद बर्बाद होने, उपेक्षित होने, बदनाम होने, जनता द्वारा नकार दिए जाने के बावजूद अपने मिशन पर लगे रहे ! यही कारण था कि पूरा सरकारी तंत्र सदा सचेत रहा ! किसी भी अनहोनी, आपदा, विपदा या षड्यंत्र का सामना करने के लिए मुस्तैद रहा ! सरकार को उनका आभार मानना चाहिए तथा जनता को ऐसे लोगों की कद्र करते हुए उन्हें सदा-सदा के लिए विपक्ष में बैठाए रखना चाहिए, जिससे वे भविष्य में भी ऐसे ही सरकार की सतर्कता बनाए रख सकें !  

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

गुरुवार, 23 मई 2024

क्यों.....?

पर जब देशभगतों की जगह देशद्रोहियों को तरजीह दी जाने लगे ! जिस देश की आजादी के लिए लोगों ने अपने परिवार के परिवार होम कर दिए, उसी देश के टुकड़ों की कामना करने वालों को जब नेता बनाया जाने लगे ! सनातन धर्म को ही जब गालियां दी जाने लगें ! अपने ही देवी-देवताओं पर सवाल उठाए जाने लगें ! देश की मान-मर्यादा को विदेशों में उछाला जाने लगे ! अपने मतलब के लिए अपने धुर विरोधियों के सामने समर्पित होने की नौबत आने लगे ! तो भईया जी बताइए कौन उस पार्टी का साथ देगा और क्यों...........??

#हिन्दी_ब्लागिंग 

बेतहाशा गर्मी की अपरान्ह बेला में घंटी की ध्वनि पर दरवाजा खोला, तो सामने बिनोद खड़ा था ! बहुत दिनों पर आया था ! अंदर बुला, बैठाया और पूछा, अरे बिनोद ! कहां थे इतने दिनों तक ? नजर नहीं आए !''

गांव गया था, भईया !'' 

गांव ! कहां पर ! इतनी गर्मी में ? 

गिरिडीह, झारखंड ! ऊ का है कि.........वोट देने खातिर गया था !''

सिर्फ वोट देने ! इतनी दूर ! पर पहले तो तुम ...........!''

नहीं ! इस बार सोचे कि वोट देना जरुरी है ! आपहिं तो बताए थे कि कइसे एक ठो वोट से भी केतना फर्क पड़ जाता है ! 

मैं आश्चर्य से उसका चेहरा देख रहा था ! जो अपने परिवार की हारी-बिमारी में भी तीन बार सोचता था घर जाने को, वह इस बार चुनाव में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का, मौसम की विपरीत परिस्थितियों में भी, मन बना गया ! ठीक है इसी बहाने घर-परिवार से मिलना-जुलना भी हो गया पर वह प्राथमिकता नहीं थी ! सच कहूं तो यह बदलाव यह जागरूकता सुखद भी लगी ! 

चलो बहुत अच्छा किया, सबसे मिल भी आए ! पर यह तो बताओ किसको वोट दिए ? अब तो दे ही आए हो छिपाने की कोई बात ही नहीं है, बता सकते हो !''

नहीं छिपाने का कोनो बात ही नहीं है इसमें भईया जी, भाजपा को दिए हैं !''     

भाजपा को ? पर तुम और तुम्हारा परिवार तो कट्टर कांग्रेस समर्थक रहे हो सदा से !''

बिनोद मुंह नीचे किए बैठा रहा ! जैसे भीतर चल रहे अंतर्द्वंद्व से जूझ रहा हो ! फिर गहरी सांस ली, बोला- 

हम जैसे लोगों के लिए बहुत मुश्किल होता है भईया जी, इस तरह का बदलाव ! किसी परंपरा को, किसी चलन को, किसी आस्था को झटके से बदलना आसान नहीं होता ! हम लोग आजकल के नेताओं की तरह तो हैं नहीं ! जिनकी आत्मा सुबह किसी के, तो शाम किसी और के प्रति समर्पित हो जाए ! जो सिर्फ अपने व्यक्तिगत मतलब या स्वार्थ के कारण अपनी वफादारी बदल लें ! हम जुड़े होते हैं अपने अतीत से, अपने अनुभवों से, अपनी सच्चाई से ! मेरा परिवार देश के अनगिनत लोगों की तरह देश की आजादी की लड़ाई का हिस्सा रहा है ! मेरे दादा-दादी दुन्नो अंग्रेजों की जेल में रहे थे ! हमारे बुजुर्गों ने देखा है, लोगों को आजादी के यज्ञ में होम होते ! विभाजन का दर्द भोगा है ! जीया है उन पलों को ! पैबस्त हैं वे दर्दनाक लम्हें हमारे जिगर में ! उस समय कांग्रेस ही सामने थी, उसीका संघर्ष दिखलाई पड़ता था ! देश का हर बड़ा नेता उसी से जुड़ा हुआ था ! इसीलिए हमारी पिछली पीढ़ियां उसके प्रति समर्पित हो गईं ! समर्पण भी ऐसा कि यदि सत्य भी शरीर धारण कर सामने आ, उसके विरुद्ध कुछ बोले तो किसी को स्वीकार्य नहीं था !  किसी नेता के निधन हो जाने पर घर में खाना नहीं बनता था ! हमारे बुजुर्गों के लिए पार्टी की बात धर्म वाक्य की तरह होती थी ! अपने जीवन के अंत तक उन्होंने उसका दामन थामे रखा था !''

कुछ उदास हो उसको चुप होते देख मैंने पूछ ही लिया, 

फिर यह बदलाव कैसे ?''

बिनोद ने सर उठाया ! सीधे मेरी आँखों में देखा ! उसकी दृष्टि से एक बार तो मैं भी असहज हो गया ! उसकी धीर-गंभीर आवाज ऐसे लगी जैसे किसी गहरे कुएं से आ रही हो !

भईया जी ! वह देश प्रेम था जिसके लिए लोगों ने बेपरवाह हो अपनी जानें कुर्बान कर दीं ! अपने परिजनों को खो दिया ! फिर उसी देश के टुकड़े हो गए ! जैसे किसी ने माँ को बांट दिया हो ! पिछली पीढ़ियों में वह घाव कभी भरा नहीं ! फिर भी वे पुराने नेताओं को याद कर इस दल के साथ ही बने रहे ! समय बदला, नेता मतलबपरस्त होने लगे ! देश पीछे छूटता गया व्यक्ति व परिवार व उसका अहम हावी होते चले गए ! आजादी की लड़ाई लड़ने वाली पार्टी अपनी अंदरूनी लड़ाई में लिप्त हो गई ! पुराने लोगों का मोहभंग होने लगा, कार्यकर्त्ता दल छोड़-छोड़ कर जाने लगे !  फिर भी बहुत से लोगों ने धैर्य बनाए रखा कि शायद कुछ सुधार हो ही जाए ! 

पर जब देशभगतों की जगह देशद्रोहियों को तरजीह दी जाने लगे ! जिस देश की आजादी के लिए लोगों ने अपने परिवार के परिवार होम कर दिए, उसी देश के टुकड़ों की कामना करने वालों को जब नेता बनाया जाने लगे ! सनातन धर्म को ही जब गालियां दी जाने लगें ! अपने ही देवी-देवताओं पर सवाल उठाए जाने लगें ! और तो और श्री राम तक को सम्मान देने से कतराने लगें! देश की मान-मर्यादा को विदेशों में उछाला जाने लगे ! अपने मतलब के लिए अपने धुर विरोधियों के सामने समर्पित होने की नौबत आने लगे ! तो भईया जी बताइए कौन उस पार्टी का साथ देगा और क्यों...........??

बिनोद चुप हो गया ! उसका यह रूप मैंने पहली बार देखा था ! आजतक उसको अपनी रोजी-रोटी के लिए जूझते एक युवा के तौर पर ही तवज्जो दी थी ! पर ऐसी सोच ! ऐसा विश्लेषण ! इतना आक्रोश पहली बार देखा था ! वह पहचान बन रहा था, आजकी युवा पीढ़ी का ! वह मिसाल का रूप ले रहा था, आज की पीढ़ी की जागरूकता का ! और सबसे बड़ी बात यह उद्घोष था, हर उस नेता के विरुद्ध, चाहे वह किसी भी पार्टी या दल का हो, जो खुद को देश, देश के संविधान और उसकी व्यवस्था के ऊपर खुद को रख, अवाम को नासमझ मान, अपना उल्लू सीधा करने की फिराक और गलतफहमी में रह किसी भी तरह सत्ता को हथियाने का उपक्रम करता रहता है !

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