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| स्कूल की ईमारत का पृष्ठ भाग |
इस ब्लॉग में एक छोटी सी कोशिश की गई है कि अपने संस्मरणों के साथ-साथ समाज में चली आ रही मान्यताओं, कथा-कहानियों को, बगैर किसी पूर्वाग्रह के, एक अलग नजरिए से देखने, समझने और सामने लाने की ! इसके साथ ही यह कोशिश भी रहेगी कि कुछ अलग सी, रोचक, अविदित सी जानकारी मिलते ही उसे साझा कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके ! अब इसमें इसको सफलता मिले, ना मिले, प्रयास तो सदा जारी रहेगा !
मंगलवार, 22 जुलाई 2025
उपेक्षित जन्मस्थली, रानी लक्ष्मीबाई की (विडिओ सहित)
गुरुवार, 17 जुलाई 2025
सीधी पर अबूझ, शिवशक्ति रेखा
हमारे देश की मिटटी के कण-कण में धार्मिकता व्याप्त है ! जल-थल-पवन-गगन सभी जगहों पर देवत्व की रहस्यमय पर अलौकिक उपस्थिति महसूस की जाती है ! ऐसी ही एक रहस्यमय उपस्थिति है, शिवशक्ति रेखा ! यह कोई भौगोलिक रेखा नहीं है, पर यदि उत्तर के उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ मंदिर से सुदूर दक्षिण के तमिलनाडु में स्थित रामेश्वरम तक 79* देशांतर की एक रेखा की कल्पना की जाए तो आश्चर्यजनक रूप से उस पर शिव जी के सात मंदिर एक सीध में बने नजर आते हैं, जो सिर्फ संयोग नहीं है.................!
#हिन्दी_ब्लागिंग
जब-जब अपने देश की वे उपलब्धियां जिन्हें हमारे विद्वानों ने प्राचीन काल में ही हासिल कर लिया था, सामने आती हैं तो गर्व से पूरी देह उमग उठती है ! पर इसके साथ ही जब उन मुठ्ठी भर लोगों की कारस्तानियां उजागर होती हैं, जिन्होंने षड्यंत्रवश, अपने छद्म इतिहास में उन खूबियों को स्थान ना दे या उन्हें कल्पित बता, देश के जनमानस को गुमराह किया, हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा रचित ग्रंथों को झुठला कर पीढ़ी-दर-पीढ़ी गलत जानकारियां दीं, तब ऐसा आक्रोश उमड़ता है कि ऐसी हरकत करने वालों को तो सरे राह दंडित किया जाना चाहिए ! दंड भी ऐसा कि उनकी पीढ़ियां याद रखें !
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| शिव और शक्ति |
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| नम: शिवाय |
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| शिवशक्ति रेखा |
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| महाकालेश्वर |
कुछ लोगों का यह भी मानना है कि प्राचीन काल में जब जगहों को जानने का या दिशा बोध का कोई सुगम उपाय नहीं था, तब इन मंदिरों को एक सीध में इसीलिए बनाया गया था, जिससे दर्शनार्थी बिना मार्ग भटके, एक ही दिशा में चलते हुए ज्यादा से ज्यादा मंदिरों के दर्शन कर सकें ! वैसे यह तर्क सही नहीं लगता क्योंकि हमारे देश में कई ऐसी विलक्षण, रहस्यमयी बातें हैं, जिन्हें समझ पाना लगभग नामुमकिन है। उन्हीं में से एक है शिव शक्ति रेखा, गहन रहस्यों से भरी हुई ! भले ही हम उसका रहस्य अभी ना समझ पा रहे हों पर हमें उस पर, उसकी विलक्षणता पर गर्व तो होना ही चाहिए ! .jpeg)
पंचभूत
।। ॐ नम: शिवाय ।।
@चित्र तथा संदर्भ हेतु अंतर्जाल का आभार
सोमवार, 7 जुलाई 2025
कांवड़ यात्रा, सृष्टि रूपी शिव की आराधना
इस पवित्र पर कठिन यात्रा में भाग लेने वाले कांवड़िए अपनी पूरी यात्रा के दौरान नंगे पांव, बिना कावंड को नीचे रखे, अपने आराध्य को खुश करने के लिए सात्विक जीवन शैली अपनाए रखते हैं ! यात्रा में तामसिक भोजन, दुर्व्यवहार, कदाचार पूर्णतया निषेद्ध होता है ! यहां तक कि एक-दूसरे का नाम तक नहीं लेते ! सब ''बोल बम'' हो जाते हैं ! शिवमय हो जाते हैं ! उनके बीच का फर्क मिट जाता है ! आपसी एकता, सहयोग, समानता की भावना मजबूत होती है ! पहचान, जाति, वर्ग सब तिरोहित हो जाते हैं ! हर कांवड़िया एक दूसरे का भाई बन जाता है...........!
#हिन्दी_ब्लागिंग
हर साल सावन के पवित्र महीने में शिव भक्त पदयात्रा कर, सुदूर स्थानों से नदियों का जल ला कर अपने निवास के पास के शिव मंदिर में स्थित शिवलिंग का इस माह की चतुर्दशी के दिन जलाभिषेक करते हैं ! कंधे पर जल ला कर भगवान शिव को चढ़ाने की पारम्परिक यात्रा को कांवड़ यात्रा बोला जाता है। कांवड़ का मूल शब्द कांवर है जिसका अर्थ कंधा होता है ! बांस की बनी जिस बंहगी के दोनों सिरों पर जलपात्र लटका कर लाया जाता है उसे कांवड़ तथा जल लाने वाले भक्तों को कांवड़िया कहा जाता है ! इस पूरी यात्रा में कांवड़ को भूमि पर नहीं रखा जाता है ! मुख्यता यह यात्रा हरिद्वार से शुरू होती है ! इस साल यह यात्रा ग्यारह जुलाई से प्रारम्भ हो कर नौ अगस्त तक चलेगी !
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| हर की पौड़ी, हरिद्वार |
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| यात्रा विश्राम |
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| हर-हर महादेव |
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| बम-बम भोले |
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| गंतव्य के पहले रुकना नहीं |
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| भक्ति की शक्ति |
@सभी चित्र और संदर्भ अंतर्जाल के सौजन्य से
रविवार, 22 जून 2025
बुड़बक समझ लिए हो ? कोउनो दिन माथा फिरा गिया ना, तो फिर.......😡
बुधवार, 18 जून 2025
गुरूजी, छतरपुर वाले
छतरपुर के मंदिर में गुरूजी का समाधिस्थल आज भी लोगों को सम्बल प्रदान कर रहा है ! वहां भक्तों की एक परिवार के रूप में रोज ही भीड़ लगी रहती है, जिसका मानना है कि उनके जीवन में कोई भी कठिनाई या संकट आए, गुरुजी की दया और आशीर्वाद हमेशा उन्हें सही रास्ता दिखाएंगे। मंदिर के भव्य परिसर में लगने वाले रोजाना के लंगर में लोगों का आपसी सौहार्द्र और सभी का एक ही परिवार का सदस्य होने का भाव साफ परिलक्षित होता है............!
#हिन्दी_ब्लागिंग
अपने देश में समय-समय पर महान विभूतियों का जन्म होता रहा है। जिन्होंने समाज में पसरी बुराइयों को दूर करने और आम इंसान में चेतना जगाने, उनमें ज्ञान का बीजारोपण करने और जीवन का सही मार्ग दिखाने काम किया है। समय के साथ उनमें से कुछ विलक्षण हस्तियों को उनके अनुयायिओं ने अपना गुरु मान ईश्वर स्वरूप सम्मानित पद पर आसीन कर दिया ! ऐसे ही संतों में एक आध्यात्मिक, सम्मानित तथा अपने भक्तों में अत्यंत लोकप्रिय संत थे, छतरपुर वाले गुरूजी ! जिन्हें डुगरी वाले गुरुजी और शुक्राना गुरुजी के नाम से भी जाना जाता है। उनके अनुयायी तो उन्हें शिव जी का अंश मानते हैं !
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| गुरु जी |
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| आश्रम, छतरपुर |
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| शिव जी की भव्य प्रतिमा |
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| समाधी |
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| भीतरी कक्ष |
@संदर्भ व चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से
रविवार, 15 जून 2025
बाबूजी मैं आपसे बहुत प्यार करता था, पर कभी कह नहीं पाया
आज जब आपकी बेपनाह याद आती है और मैं आपसे एकतरफा बात करता हूँ ! तब आँखें फिर किसी भी तरह काबू में नहीं रहतीं ! बाबूजी मैं आपसे बहुत प्यार करता था, पर कभी कह नहीं पाया ! मैं यह भी जानता हूँ कि आप भी मुझसे बहुत स्नेह करते थे, पर आपने भी कभी खुल कर उसका इजहार नहीं किया ! शायद पीढ़ियों की दूरी या उस समय के समाज की मर्यादा सदा आड़े आती रही होगी, कुछ भी रहा हो ! पर जब कुछ-कुछ कोहरा छंटने लगा था, तभी आप मुझे छोड़ गए.....................😢
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| मेरे, सबके बाबूजी |
जब भी पुरानी यादें मुखर होती हैं, तो बहुत से ऐसे वाकये भी याद आते हैं जब आप मुझसे नाराज हुए ! पर सही मायनों में बताऊँ तो आज तक समझ नहीं पाया कि जिस बात को मैं सोच भी नहीं सकता वैसा कैसे और क्यूँ हुआ ! सब गैर-इरादतन होता चला गया ! किसी दुष्ट ग्रह की वक्र दृष्टि और कुछ विघ्नसंतोषी लोगों का षड्यंत्र, कुछ का कुछ करवाता चला गया ! याद आता है तो बहुत दुःख और अजीब सा लगता है, अपने को सही साबित ना कर पाना और दूसरों के कुचक्र को ना तोड़ सकना ! पर जब कुछ-कुछ कोहरा छंटने लगा था तभी आप मुझे छोड़ गए !
शुक्रवार, 13 जून 2025
मे-डे ! मे-डे !! मे-डे !!!
अंतरराष्ट्रीय तौर पर मान्य यह एक रेडियो सिग्नल है जिसे फ्रेंच शब्द 'M'aidez' से लिया गया है, जिसका मतलब होता है "मेरी मदद करो।" यह शब्द एविएशन और मैरिटाइम इमरजेंसी के लिहाज से बहुत ही अहम होता है ! इसे तभी प्रयोग में लाया जाता है, जब कोई हवाई जहाज या पानी का जहाज बहुत ही गंभीर खतरे में हो ! इसीलिए ऐसे कॉल को सबसे ज्यादा गंभीरता से लिया जाता है............!
#हिन्दी_ब्लागिंग
12 जून 2025 की दोपहर करीब डेढ़ बजे, गुजरात के अहमदाबाद एयरपोर्ट पर एक भीषण और दर्दनाक दुर्घटना में सिर्फ एक यात्री को छोड़ प्लेन में सवार सभी यात्रियों और क्रू मेंबर की मौत हो गई थी ! इसके अलावा प्लेन के गिरने और उसमें आग लगने से बाहर भी कुछ लोगों की असमय मृत्यु हो गई थी ! उन सभी दिवंगत आत्माओं को समस्त देशवासियों की तरफ से अश्रुपूरित श्रद्धांजलि !!
उस हादसे की खबरों के साथ उन्हीं दिनों जिसकी बहुत चर्चा हुई, वह था एक शब्द, "मे-डे" ! जिसे दुर्घटना के ठीक पहले यान के पायलट ने रेडियो संदेश के रूप में वायु यातायात नियंत्रण केंद्र (ATC) को भेजा था। यह एक इमरजेंसी कॉल थी, जिसका किसी विमान के पायलट या जलयान के कैप्टन के द्वारा सिर्फ तभी इस्तेमाल किया जाता है, जब संकट बहुत ही गंभीर हो और बचने की गुंजाइश बिलकुल कम हो ! इस कॉल के जरिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और नजदीकी यानों को संदेश दिया जाता है कि हम संकट में हैं और हमें मदद की तुरंत जरूरत है। इसे यान के रेडियो पर तीन बार Mayday, Mayday, Mayday बोला जाता है, ताकि स्थिति साफ हो जाए और किसी तरह की गलतफहमी की गुंजाइश न रहे !अं तरराष्ट्रीय तौर पर मान्य यह एक रेडियो सिग्नल है जिसे फ्रेंच शब्द 'M'aidez' से लिया गया है, जिसका मतलब होता है "मेरी मदद करो।" यह शब्द एविएशन और मैरिटाइम इमरजेंसी के लिहाज से बहुत ही अहम होता है ! इसे तभी प्रयोग में लाया जाता है, जब कोई हवाई जहाज या पानी का जहाज बहुत ही गंभीर खतरे में हो ! इसीलिए ऐसे कॉल को सबसे ज्यादा गंभीरता से लिया जाता है। मे-डे शब्द 1920 के दशक के आरंभ में लंदन के क्रॉयडन एयरपोर्ट के रेडियो अधिकारी फ्रेडरिक स्टेनली मॉकफोर्ड द्वारा गढ़ा गया था। उन्होंने इसे फ्रांसीसी फ्रेज m'aider "मेरी मदद करो" से लिया। 1923 तक यह पायलटों और नाविकों के लिए अंतरराष्ट्रीय रेडियो संचार का हिस्सा बन गया। 1927 में मोर्स "SOS" के साथ इसे औपचारिक रूप से अपना लिया गया। आज इसका उपयोग पूरी दुनिया में विमान से जुड़ी इमरजेंसी के समय किया जाता है। इसमें भाषा की भी कोई बाधा नहीं है, 'मेडे' कॉल सुन कर ही खतरे की खबर मिल जाती है। इसका मई दिवस से कोई संबंध नहीं है।मे-डे के अलावा एमरजेंसी में एक और शब्द का प्रयोग भी किया जाता है और वह है पैन-पैन ! इस कॉल का मतलब है कि कहीं तात्कालिक रूप से सहायता की जरुरत है ! पर इस कॉल का स्तर मे-डे से कुछ कम होता है, हालांकि बाकी सभी कम्युनिकेशन और कॉल्स पर इसे प्राथमिकता दी जाती है।@चित्रों और संदर्भ हेतु अंतर्जाल का आभार
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