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शुक्रवार, 13 जून 2025

मे-डे ! मे-डे !! मे-डे !!!

अंतरराष्ट्रीय तौर पर मान्य यह एक रेडियो सिग्नल है जिसे फ्रेंच शब्द 'M'aidez' से लिया गया है,  जिसका मतलब होता है "मेरी मदद करो।" यह  शब्द एविएशन और मैरिटाइम इमरजेंसी के लिहाज से बहुत ही अहम होता है ! इसे तभी प्रयोग में लाया जाता है, जब कोई हवाई जहाज या पानी का जहाज बहुत ही गंभीर खतरे में हो ! इसीलिए ऐसे कॉल को सबसे ज्यादा गंभीरता से लिया जाता है............!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

12 जून 2025 की दोपहर करीब डेढ़ बजे, गुजरात के अहमदाबाद एयरपोर्ट पर एक भीषण और दर्दनाक दुर्घटना में सिर्फ एक यात्री को छोड़ प्लेन में सवार सभी यात्रियों और क्रू मेंबर की मौत हो गई थी ! इसके अलावा प्लेन के गिरने और उसमें आग लगने से बाहर भी कुछ लोगों की असमय मृत्यु हो गई थी ! उन सभी दिवंगत आत्माओं को समस्त देशवासियों की तरफ से अश्रुपूरित श्रद्धांजलि !!

उस हादसे की खबरों के साथ उन्हीं दिनों जिसकी बहुत चर्चा हुई, वह था एक शब्द, "मे-डे" ! जिसे दुर्घटना के ठीक पहले यान के पायलट ने रेडियो संदेश के रूप में वायु यातायात नियंत्रण केंद्र (ATC) को भेजा था। यह एक इमरजेंसी कॉल थी, जिसका किसी विमान के पायलट या जलयान के कैप्टन के द्वारा सिर्फ तभी इस्तेमाल किया जाता है, जब संकट बहुत ही गंभीर हो और बचने की गुंजाइश बिलकुल कम हो ! इस कॉल के जरिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और नजदीकी यानों को संदेश दिया जाता है कि हम संकट में हैं और हमें मदद की  तुरंत जरूरत है। इसे यान के रेडियो पर तीन बार Mayday, Mayday, Mayday बोला जाता है, ताकि स्थिति साफ हो जाए और किसी तरह की गलतफहमी की गुंजाइश न रहे !

अं तरराष्ट्रीय तौर पर मान्य यह एक रेडियो सिग्नल है जिसे फ्रेंच शब्द 'M'aidez' से लिया गया है, जिसका मतलब होता है "मेरी मदद करो।" यह शब्द एविएशन और मैरिटाइम इमरजेंसी के लिहाज से बहुत ही अहम होता है ! इसे तभी प्रयोग में लाया जाता है, जब कोई हवाई जहाज या पानी का जहाज बहुत ही गंभीर खतरे में हो ! इसीलिए ऐसे कॉल को सबसे ज्यादा गंभीरता से लिया जाता है। 

मे-डे शब्द 1920 के दशक के आरंभ में लंदन के क्रॉयडन एयरपोर्ट के रेडियो अधिकारी फ्रेडरिक स्टेनली मॉकफोर्ड द्वारा गढ़ा गया था। उन्होंने इसे फ्रांसीसी फ्रेज m'aider "मेरी मदद करो" से लिया। 1923 तक यह पायलटों और नाविकों के लिए अंतरराष्ट्रीय रेडियो संचार का हिस्सा बन गया। 1927 में मोर्स "SOS" के साथ इसे औपचारिक रूप से अपना लिया गया। आज इसका उपयोग  पूरी दुनिया में विमान से जुड़ी इमरजेंसी के समय किया जाता है। इसमें भाषा की भी कोई बाधा नहीं है, 'मेडे' कॉल सुन कर ही खतरे की खबर मिल जाती है। इसका मई दिवस से कोई संबंध नहीं है।

मे-डे के अलावा एमरजेंसी में एक और शब्द का प्रयोग भी किया जाता है और वह है पैन-पैन ! इस कॉल का मतलब है कि कहीं तात्कालिक रूप से सहायता की जरुरत है ! पर इस कॉल का स्तर मे-डे से कुछ कम होता है, हालांकि बाकी सभी कम्युनिकेशन और कॉल्स पर इसे प्राथमिकता दी जाती है।

@चित्रों और संदर्भ हेतु अंतर्जाल का आभार 

शनिवार, 25 सितंबर 2021

यातायात ! कहीं दाएं, कहीं बाएं ! ऐसा क्यूं

एक वक्त था जब दुनिया में सड़क मार्ग पर दोनों तरह से चलने वालों की संख्या तक़रीबन बराबर थी ! पर समय के साथ दाईं ओर से चलने वालों की संख्या बढ़ती चली गई ! इसकी एक वजह ब्रिटेन भी है ! एक समय था जब यह कहा जाता था कि ''इसके साम्राज्य में सूरज कभी नहीं डूबता !'' पर इसकी गिरफ्त से जैसे-जैसे अन्य देश आजाद होते चले गए, वैसे-वैसे उन्होंने गुलामी की निशानियां मिटाने के लिए नियम-कानून भी बदलने शुरू कर दिए।उसी की जद में आ यह यातायात नियम भी बदलता चला गया 

#हिन्दी_ब्लागिंग 

हमारे देश में वाहन और यातायात बाईं तरफ से प्रवाहमान होता है बावजूद इसके कि दुनिया के ज्यादातर देशों में यह दाहिने हाथ की तरफ से चलता है ! इसका एक प्रमुख कारण बताया जाता है कि अंग्रेजो का जहां-जहां राज था वहां-वहां यह रवायत पड़ी, जैसे ऑस्ट्रेलया, न्यूजीलैंड, भारत, पकिस्तान या कुछ अफ़्रीकी देश ! पर मिस्र अंग्रेजी शासन के बावजूद सदा दाहिनी ओर ही चलता रहा ! इसके अलावा जापान कभी भी  ब्रिटिश हुकूमत के नीचे नहीं रहा पर वहां भी बाएं हाथ पर चलने का चलन है ! पर साथ ही सवाल यह भी है कि अंग्रेज ही क्यों बाएं-बाएं चले  ?

जाहिर है ! जब इंसान ने बस्तियां बनाईं, एक जगह से दूसरी जगह आना-जाना शुरू किया तो भी उसे मार्ग के बाईं या दाईं ओर से ही चलने की जरुरत नहीं होती होगी ! पर जैसे-जैसे लोगों में आपसी वैमन्यस्कता, विद्वेष, झगड़े इत्यादि पनपे होंगे तो उसने मार्ग के बाईं ओर से चलना ज्यादा सुरक्षित समझा होगा, क्योंकि ज्यादाताए लोग अपने दाएं हाथ का उपयोग प्रमुखता से करते हैं और वह हाथ ही हथियार वगैरह के संचालन में ज्यादा काम आता है सो सुरक्षा और बचाव की दृष्टि से मानव ने बाएं हो कर चलना ठीक समझा होगा !


फिर एक समय आया संयुक्त राज्य अमेरिका में “टीमस्टर्स” की शुरुआत हुई थी। यह एक बड़ा वैगन होता था, जिसे घोड़ों की एक टीम खींचती थी। इन वैगनों पर चालकों के बैठने हेतु सीट नहीं होती थी। अतः इसका संचालन करने वाला सबसे बाईं तरफ वाले घोड़े पर बैठता था और दाएं हाथ में चाबुक ले कर सभी घोड़ों को नियंत्रित करता था। इन भारी गाड़ियों के कारण ही अमेरिकी लोगों को सड़क पर बायीं ओर चलने के नियम में बदलाव करना पड़ा और वे सड़क पर दायीं ओर चलने के नियम का अनुसरण करने लगे इस बदलाव का एक कारण यह भी था कि इससे सामने से आने वाले वाहन इत्यादि से टकराव से बचाव हो जाता था। यही नियम रेवड़ों को हांकते समय भी काम में आता था, सो इस तरह दाईं ओर से चलने का चलन शुरू हुआ ! इस तरह अपनी-अपनी जरुरत के हिसाब से और अलग-अलग वजहों से मार्ग पर चलने के दो-दो तरीके चलन में आ गए। 

लाल, दाएं हाथ का चलन 

फिर दुनिया की बढ़ती आबादी के कारण परिवहन में आने वाली समस्याओं से निपटने के लिए अलग-अलग देशों में अपनी सुविधानुसार नियम बनाए जाने लगे ! जैसे रूस में सड़क के दाहिनी ओर चलना सुनिश्चित किया गया ! वहीं फ्रांस में कुछ और ही कहानी बनी ! वहां अभिजात्य वर्ग सड़क के बाईं ओर चला करता था जबकि सर्वहारा वर्ग को मार्ग के सिर्फ दाईं ओर से ही चलने की इजाजत थी ! पर फ्रांस की क्रांति के दौरान जब वहां अभिजात्य वर्ग के लोगों का बड़े पैमाने पर कत्लेआम हुआ तब वहां के धनी-मानी, रसूखदार लोगों ने भी अपनी जान बचाने की खातिर, कहीं आने-जाने के लिए सड़क की दाईं ओर चलना शुरू कर दिया, जिससे सफर के दौरान वे आम आदमी की भीड़ में मिल कर खुद को सुरक्षित रख सकें। क्रांति के बाद फ्रांस में दाईं तरफ से चलने का नियम ही बना दिया गया।  

पर योरोप ने तय कर रखा था कि वह बाईं तरफ से ही आवागमन जारी रखेगा पर वहां भी दशा और दिशा बदलती चली गई, जहां-जहां नेपोलियन जीता ! हिटलर ने भी अपने शासितों को अपनी इच्छानुसार दाएं-दाएं चलवाया ! इस तरह विभिन्न परिस्थितियों, मानसिकताओं, जरूरतों या मजबूरीवश अलग-अलग देशों में परिवहन के आवागमन का परिचालन दाएं-बाएं होता रहा ! विजेता, विजित पर अपने नियम-कानून लागू करता चला गया ! कुछ मजबूरियोंवश बदले ! कुछ पूर्वाग्रहों के चलते ! कुछ देखा-देखी ! 

एक वक्त था जब दोनों तरह से चलने वालों की संख्या तक़रीबन बराबर थी। पर समय के साथ दाईं ओर से चलने वालों की संख्या बढ़ती चली गई ! इसकी एक वजह ब्रिटेन भी है ! एक समय था जब यह कहा जाता था कि ''इसके साम्राज्य में सूरज कभी नहीं डूबता !'' पर इसकी गिरफ्त से जैसे-जैसे अन्य देश आजाद होते चले गए, वैसे-वैसे उन्होंने गुलामी की निशानियां मिटाने के लिए नियम-कानून भी बदलने शुरू कर दिए।उसी की जद में आ यह यातायात नियम भी बदलता चला गया ! उधर अपनी आजादी के बाद बाएं से दाएं हुए अमेरिका ने सस्ती गाड़ियों से दुनिया के बाजार को पाट दिया ! जाहिर है वे सब सड़क के दाएं ओर चलने की दृष्टि से बनाई गईं थीं सो उन्होंने भी सड़क पर अपना प्रभाव दिखाया ! 

वैसे जो थोड़ा-बहुत बाएं हाथ वाला चलन बचा हुआ है उसमें भी इंग्लैण्ड का ही योगदान है ! भारत-जापान जैसे देशों में अंग्रेजों ने रेलवे लाइन बिछाई तो अपने देश के चलन के अनुसार ही उसका सिग्नल सिस्टम भी बनाया ! जो कि उनके यहां पटरी के बांई ओर होता है। सो इन देशों में परिवहन बाएं से ही चलता है। पर जापान में इस चलन के बावजूद ''राइट हैण्ड ड्राइव'' वाली 'मंहगी कारें भी देखने को मिल जाती हैं। 

बाएं से दाएं या दाएं से बाएं होने की कुछ रोचक वजहें भी हैं :-       

स्वीडन ! वहां बाईं तरफ चलने का नियम बना हुआ था।  लेकिन यह चारों ओर से दाएं चलने वाले देशों से घिरा हुआ था, तो यहां लेफ्ट-राइट में से एक विकल्प को चुनने के लिए वोटिंग कराई गई जिसमें करीब 83% लोगों ने कहा कि वो बाएं चलकर खुश हैं ! पर फिर भी वहां की सरकार ने दाएं चलने का नियम बना दिया !

बर्मा ! यहां ट्रैफिक के बाईं ओर चलने का नियम था। लेकिन वहां के तानाशाह जनरल ''ने विन'' ने एक ओझा के कहने पर ट्रैफिक बाएं से दाएं कर दिया ! एक तो जनरल ऊपर से तानाशाह ! कौन विरोध करता ! पर गाड़ियां भी तो नहीं बदली जा सकतीं ! सो लोग अपनी राइट हैंड ड्राइव गाड़ी को ही दाईं ओर चलाने लग गए ! वहां आज भी अधिकतर गाड़ियां राइट हैंड ड्राइव ही हैं। 

समोआ ! ऑस्ट्रेलिया के पास एक छोटा सा देश। जर्मनी की गुलामी के तहत यहां ट्रैफिक दाईं तरफ चलता था। इसलिए इसे लेफ्ट हैंड ड्राइव कारें चाहिए थीं जो आसपास बनती नहीं थीं।  इसके सारे पड़ोसी, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में ट्रैफिक बाईं तरफ चलता है सो इसने भी वही तरिका अपनाया जिससे देश में सस्ती कारें उपलब्ध हो सकें ! 

चीन ! यहां दाईं ओर से चला जाता है पर इसके आधिपत्य वाले हांगकांग और मकाऊ में यातायात बाईं तरफ से चलता है !  

पाकिस्तान ! भारत से अलग दिखने की चाह में यह भी बाएं से दाएं होने जा रहा था ! पर ऊँटों ने ऐसा होने नहीं दिया ! ऊँटों को बाईं तरफ से चलने का प्रशिक्षण दिया जाता है ! रात में भले ही उनका सवार सो गया हो वे अपनी बांईं तरफ से ही चलते रहते हैं ! अब उन्हें फिर से नई पट्टी पढ़ाना टेढ़ी खीर थी सो पड़ोसी ने इरादा बदल लिया !

इन सबके बीच ब्रिटेन और उसके नागरिक, जो कुछ ज्यादा ही परंपरावादी होते हैं, अपनी छोटी-छोटी गाड़ियों और कोचवान युक्त बग्घियों से जुड़े रहे ! उन्हें बाएं से दाएं जाने की नाही जरुरत पड़ी नाहीं इच्छा ! उल्टे 18 शताब्दी में लंदन पुल पर लगे एक भीषण यातायात अवरोध के कारण पूरे ब्रिटिश साम्राज्य में बाएं हाथ की तरफ से चलने का कानून पारित कर दिया गया ! जो ''हाई वे एक्ट ऑफ 1835'' के नाम से जाना जाता है ! ऐसा नहीं है कि इस बारे में वहां बात नहीं उठी ! पर इस विचार को रूढ़िवादी सरकार ने शुरू में ही दफन कर दिया ! वैसे भी इस बदलाव पर करोड़ों पाउंड्स का खर्च सबसे बड़ी चुन्नौती थी और इस बदलाव से कोई फर्क भी नहीं पड़ने वाला था ! सो इसे स्थगित कर दिया गया। आज योरोप के सिर्फ चार देश, यूके, माल्टा, साइप्रस और आयरलैंड ही इस बाएं हाथ चलने के चलन को थामे हुए हैं।

आज संसार के करीब 65% देशों में मार्ग पर दाईं ओर से चलने का नियम है। यानी विश्व की ज्यादातर आबादी दाईं तरफ को प्रमुखता देती है और कुछ देश आज भी अपने बाएं हाथ की तरफ से चल कर अंग्रेजी परंपरा को जीवित रख रस्में निभाए जा रहे हैं ! वैसे इसे बदलना इतना आसान भी तो नहीं है !

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