सेनापति भीष्म द्वारा वृहद्वल को एक रथ का यानी रथी का ओहदा दिया गया था ! जो रथियों के ओहदे में अधिरथ और महारथ के बाद तीसरे क्रम का पद था ! जिससे उसकी सामर्थ्य और शक्ति का कुछ आकलन हो जाता है
इस ब्लॉग में एक छोटी सी कोशिश की गई है कि अपने संस्मरणों के साथ-साथ समाज में चली आ रही मान्यताओं, कथा-कहानियों को, बगैर किसी पूर्वाग्रह के, एक अलग नजरिए से देखने, समझने और सामने लाने की ! इसके साथ ही यह कोशिश भी रहेगी कि कुछ अलग सी, रोचक, अविदित सी जानकारी मिलते ही उसे साझा कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके ! अब इसमें इसको सफलता मिले, ना मिले, प्रयास तो सदा जारी रहेगा !
मंगलवार, 26 जुलाई 2022
श्रीराम वंशज बृहदबल ने कौरवों का साथ क्यों दिया
मंगलवार, 19 जुलाई 2022
इंसानियत कभी खत्म नहीं होती
देश में अनगिनत लोग ऐसे हैं जो अपने दायरे में रह कर दूसरों की मदद करना चाहते हैं पर उन्हें समझ नहीं आता कि शुरुआत कैसे करें ! इसलिए शेकर जैसे परोपकारी नजरिया रखने वाले लोगों के उपक्रम का देश के ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचना अति आवश्यक है ! जिससे और लोग भी अपने तरीके से समाज की सेवा कर सकें ! साथ ही उन पराजीवियों व मुफ्तखोरों को भी सबक मिल सके जो अपने जीवनयापन के लिए भी सदा दूसरों के मोहताज रहते हैं ! अपनी जिंदगी का बोझ समाज के कंधों पर लाद देते हैं ! खुद की अक्षमता का दोषारोपण भी सरकार पर करते रहते हैं...........!
#हिन्दी_ब्लागिंग
किसी की भलमनसाहत देख अक्सर सुनने में आता है कि इंसानियत अभी जिन्दा है ! पर सच्चाई तो यह है कि भलमनसी कभी खत्म नहीं होती ! इंसान पर चाहे कैसी भी मुसीबत आ जाए ! परिस्थितियां कितनी भी बिगड़ जाएं ! हताशा-निराशा चाहे कितना भी अँधेरा फैला लें, पर सुजनता या भलमनसत सदा उजास फैलाती रही है ! वह सदा इस दुनिया में बनी रही है और आगे भी बनी रहेगी ! इसके दसियों उदाहरण यदा-कदा सामने आते ही रहते हैं ! जो यह भी बताते हैं कि यदि इंसान में नेकी है, तो पता नहीं कौन सी घटना कब और कैसे उसकी जिंदगी की दशा और दिशा ही बदल दे !
अभी पिछले दिनों दुनिया पर एक भीषण कहर टूटा था कोविड के रूप में ! ना कोई इलाज था, न कोई दवा ! सारी दुनिया में हाहाकार मच गया था ! छोटा-बड़ा, अमीर-गरीब, सक्षम-सर्वहारा सभी इस की चपेट में आ गए थे ! इंसान को संभलने में ही महीनों लग गए थे ! सब कुछ अस्त-व्यस्त हो कर रह गया था ! ऐसे में भी मानवता पीछे नहीं रही ! इस भारी विपदा में भी, बिना अपने हित की चिंता किए, सैंकड़ों लोग सामने आए बिना किसी अपेक्षा-लालच या चाहत के और जुट गए दूसरों को बचाने, उनकी सहायता करने, बावजूद इसके कि उन्हें खुद मदद या सहायता की सख्त जरुरत थी ! उदाहरण तो अनेक हैं पर आज उसकी बात जिसने खुद मुसीबत में रहते हुए, कुछ कर गुजरते हुए, एक लक्ष्य निर्धारित किया, लोगों को राह दिखाई !
बड़ी मुश्किल और खींचतान कर कुछ पैसों का जुगाड़ कर तिंडीवनम पुड्डूचेरी हाईवे इलाके में सड़क के किनारे एक छोटे से ठेले, manithaneyam यानी इंसानियत, पर भोजन सामग्री का वितरण शुरू कर दिया ! आहार की कोई कीमत नहीं दर्शाई गई, उनके अनुसार जीवन प्रदान करने वाले अन्न की कोई कीमत नहीं हो सकती ! पर रोज तकरीबन 60-70 लोगों के भोजन की व्यवस्था में पैसा तो लगता ही है इसके लिए शेकर ने पास ही एक बक्सा रखा है, जिस पर लिखा है, पे व्हॉट यू कैन (इच्छानुसार पैसे दीजिए) ! उनके अनुसार रोज का खर्च 1500 रूपए के लगभग होता है पर वापस तीन-चार सौ ही आते हैं ! इसकी भरपाई दोस्तों की और सोशल मीडिया से मिलने वाली मदद से हो जाती है ! उनका सपना अपने इस मॉडल को लोकप्रिय बना जरूरतमंदों की यथासंभव सहायता करने का है, जिससे किसी को भी किसी के सामने भोजन के लिए गिड़गिड़ाना ना पड़े !
सोमवार, 11 जुलाई 2022
सोशल मीडिया की रेशमी अंधियारे पक्ष वाली सुरंग
जाहिर है कि खतरा बहुत बड़ा है ! पर इससे बचाव का एक सीधा-सरल तरीका यह भी है कि हम किसी भी चीज पर अपना मत प्रगट करने में जल्दबाजी से बचें ! सामने आई खबर या जानकारी का धैर्य से मनन करें ! तत्काल प्रतिक्रिया ना दें ! उतावलेपन या हड़बड़ी में कोई प्रतिक्रिया दे, बेवकूफ बनने या किसी के मंतव्य का शिकार होने से बेहतर है, कुछ देर से ही सही, सच जानना..........!
#हिन्दी_ब्लागिंग
तमाम हिदायतों, निर्देशों, चेतावनियों, समझाईशों के बावजूद हम सोशल मीडिया की रेशमी अंधियारे पक्ष वाली सुरंग की अंतहीन गहराइयों में बिना अपने विवेक का सहारा लिए धंसते चले जा रहे हैं ! सम्मोहित अवस्था में हमें अच्छे-बुरे, सही-गलत का भान ही नहीं रह गया है ! उस पर मिली किसी भी उल-जलूल, चकित करने वाली खबर या बात को हम बिना जांचे-परखे आगे धकेलने को आतुर हो जाते हैं ! इसके पीछे एक भावना यह भी रहती है कि दोस्त-मित्र-लोगों में अपने जानकार होने की धाक जमे, जबकि ज्यादातर यह हमें अहमक और गैर जिम्मेदार ही साबित करती रही है !
इन सब की शुरुआत छोटे से पैमाने से हुई थी ! बहुतों को याद होगा कि व्हाट्सएप पर फरवरी में एक मैसेज जंगल की आग की तरह फैला रहता था कि ऐसी फ़रवरी 800 या 1200 या ऐसे ही किसी लम्बे समय के बाद आ रही है, जिसमें सोम से लेकर रवि तक सारे दिन बराबर-बराबर एक ही अंक 4 वाले हैं ! इस अद्भुत योग के बारे में सभी को बताएं इत्यादि... इत्यादि ! अब हम इस बात से चमत्कृत हो बिना सोचे कि भई लीप ईयर को छोड़ हर फरवरी ऐसी ही होती है, दनादन अपने अंगूठों से अपनी विद्व्ता का ढिंढोरा पीटने लग जाते थे ! वैसे ही एक अहमकाना मैसेज में दावा किया जाता था कि स्क्रीन पर दिख रहे अंकों में से आपके द्वारा चयनित अंक, कुछ देर स्क्रीन पर दिख रही आँखों को देखने से गायब हो जाएगा ! अंक गायब होता भी था पर सिर्फ चयन किया हुआ नहीं, स्क्रीन पर पहले दिख रहे सारे के सारे अंकों के साथ ! मैसिजिआए सज्जन अभिभूत हो उसे आगे धकेलने में संलग्न हो जाते थे ! ऐसा ही कुछ कर एक ढोंगी लाल-हरी चटनी खिला कर महीनों लोगों को सामूहिक रूप से बेवकूफ बनाता रहा था ! यह तो एक बानगी भर है !
अब यह खेल बड़े पैमाने पर होने लगा है ! किसी का नाम क्या लेना पर कोई भी अपना हित साधने के लिए यहां कुछ भी चेप रहा है ! असामाजिक तत्वों का तो यह एक हथियार ही बन चुका है ! आम अवाम की लापरवाही, धैर्यहीनता, अज्ञानता, अधकचरी जानकारी का लाभ उठा अपना उल्लू सीधा करना आज का चलन बन गया है ! सुनने में आ रहा है कि जापान के पूर्व प्रधान मंत्री की हत्या करने वाला उनके बारे में फैली एक बेबुनियाद अफवाह के कारण उनसे नाराज हो गया था ! हमारे यहां होने वाले दंगे-फसादों-उपद्रवों-उत्पातों में भी ऐसे ही फैलाई गई आधी-अधूरी, सच्ची-झूठी, असली-नकली जानकारियों का बहुत बड़ा हाथ होता है !
अभी कुछ दिन पहले ही हर जगह बिहार के सहायक प्राध्यापक ललन कुमार के नाम के चर्चे हो रहे थे कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर अपनी तनख्वाह के 23 लाख 82 हजार 228 रूपए बिहार यूनिवर्सिटी को वापस कर दिए ! हर तरफ उनकी नैतिकता, दरियादिली, विवेकशीलता की तारीफ हो रही थी ! तभी असली सच्चाई सामने आई कि वह शख्स अपनी मनपसंद जगह पर तबादले के लिए नौटंकी कर रहा था !
जाहिर है कि खतरा बहुत बड़ा है ! पर सावधानी, सतर्कता, धैर्य बचाव भी है ! इससे बचाव का एक सीधा-सरल तरीका यह भी है कि हम किसी भी चीज पर अपना मत प्रगट करने में जल्दबाजी से बचें ! सामने आई खबर या जानकारी का धैर्य से मनन करें ! तत्काल प्रतिक्रिया ना दें ! उतावलेपन या हड़बड़ी में कोई प्रतिक्रिया दे बेवकूफ बनने या किसी के मंतव्य का शिकार होने से बेहतर है कुछ देर से ही सही, सच जानना !
बुधवार, 6 जुलाई 2022
विडंबना, हमारी........देश की
गुरुवार, 16 जून 2022
मैं ही क्यों..!
इंसान की फितरत है कि उसे कभी संतोष नहीं होता ! किसी ना किसी चीज की चाह हमेशा बनी ही रहती है ! पर एक सच्चाई यह भी है कि हम अपनी जिंदगी से भले ही खुश ना हों पर हजारों ऐसे लोग भी हैं, जो हमारी जैसी जिंदगी जीना चाहते हैं, वैसे जीवन की कामना करते हैं ! इसलिए जो है, उसी में संतुष्ट हो ऊपर वाले को धन्यवाद देना चाहिए.....!
#हिन्दी_ब्लागिंग
समय के साथ-साथ मनुष्य के जीवन में तरह-तरह के उतार-चढ़ाव आते रहते हैं ! कभी ख़ुशी कभी गम, कभी ज्यादा कभी कम, कुछ ना कुछ घटता ही रहता है ! इंसान को सदा यही लगता है कि जो कुछ वह कर रहा है वह सही है ! अपने अनुचित कार्यों को भी सही ठहराने का तर्क वह खोज लेता है ! कभी-कभार अंतरात्मा के चेताने पर अपनी तसल्ली या अपराधबोध से उबरने के लिए, दान-पुण्य के नाम पर कुछ खर्च वगैरह भी करता है ! धर्मस्थलों का पर्यटन या दर्शन तो आम बात है ही ! पर यह सब सतही तौर पर ही होता है ! असल में वह कभी भी खुद को प्रभु के चरणों में पूरी तरह समर्पित नहीं करता ! उसके मन में एक अविश्वास, एक संदेह बना ही रहता है !
ऐसे में यदि उस पर कोई विपत्ति आन पड़ती है या किसी बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ता है तो वह शिकायत स्वरूप अपने इष्ट की ओर मुखातिब हो यही पूछता है कि ऐसा मेरे साथ ही क्यों ? क्योंकि उसे तो लगता है कि वह सदा नेक काम करता रहा है ! भगवान की पूजा-अर्चना, उनके दर्शन, दान-पुण्य-दक्षिणा भी भरपूर देता रहा है, फिर उसे दुःख-तकलीफ कैसे साल सकते हैं ? वो तो सदा सुख पाने का अधिकारी है !
"किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार,
किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार, जीना इसी का नाम है.."
@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से
शनिवार, 11 जून 2022
लगता है 'फिनिक्स' बन गया हूं
शिकायत उससे भी नहीं करता ! उसकी यही इच्छा है तो यही सही ! उसी का अंश हूँ ! उसी की कृति हूँ ! इंतजार करता हूं, अगली सुबह का, जो फिर ले कर आएगी एक नया जोश, नया विश्वास मेरे लिए ! लगता है "फीनिक्स' बन गया हूँ ! रोज झोंक देता हूँ, खुद को जिंदगी के अलाव में ! तप कर, जल कर, शायद निखर कर फिर उठ खड़ा होता हूँ, अन्यायों का, आरोपों का, मिथ्या वचनों का, प्रपंचों का सामना करने हेतु ! पर कितने दिन.......नहीं जानता !
#हिन्दी_ब्लागिंग
थक जाता हूंँ ! हो जाता हूँ मायूस ! घेर लेते हैं निराशा के अंधेरे ! भीतर ही भीतर कहीं एक भय डेरा जमाने लगता है ! हो जाता हूं पस्त ! हताश-निराश ! पसर जाता हूं, बिस्तर पर एक घायल सैनिक की तरह ! पर हार नहीं मानता, परास्त नहीं होता ! कोशिश करता हूँ जिजीविषा को बचाए रखने की
इसीलिए इंतजार करता हूं फिर अगली सुबह का, जो फिर ले कर आएगी एक नया जोश, नया विश्वास, एक नई आशा मेरे लिए ! स्थावर तो कुछ भी नहीं है...... समय भी नहीं ! लगता है फीनिक्स बन गया हूँ ! रोज झोंक देता हूँ खुद को जिंदगी के अलाव में ! तप कर, जल कर, शायद निखर कर फिर उठ खड़ा होता हूँ, अन्यायों का, आरोपों का, मिथ्या वचनों का, प्रपंचों का सामना करने हेतु ! पर कितने दिन.......नहीं जानता !!!
मंगलवार, 7 जून 2022
थोड़े से सब्र और समय की जरुरत है
चंद दिनों पहले ही ताली ठोक कर लोगों को खामोश करने का आदेश देने वाले आज कहीं किसी का आदेश मानने पर मजबूर हुए बैठे हैं ! सदा हमारी खैरात, हमारे रहमो-करम पर आश्रित रहने वाले तीनों पड़ोसियों ने जरा सी आँख तरेरी थी, आज आँख उठाने की हैसियत नहीं रह गई है उनकी ! कुछ और दूर जाएं तो पहले हमें बात करने लायक ना समझने वाले आज हमसे बात करने का मौका और बहाना खोज रहे हैं ! जो हमें नाकाबिल, खरीदार समझ कुछ भी बेच, थमा जाते थे, आज हमारी बनाई वस्तुओं को ललचाई नजर से देख रहे हैं ! कहते हैं कि जो समय से सबक नहीं लेता उसे समय सबक जरूर सिखाता है....!
#हिन्दी_ब्लागिंग
अपने यहां कई कहावतें बहुत ही मशहूर हैं, जैसे ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती ! न्याय में देर है अंधेर नहीं ! ऊपर वाले से कुछ भी छिपा नहीं रहता ! साँच को आंच नहीं ! सच्चे का बोलबाला, झूठे का मुंह काला ! सब कुछ यहीं भुगतना पड़ता है ! यह सब बातें अपने सच होने का प्रमाण भी देती रहती हैं ! तो इधर जो घटनाक्रम चला या निश्चित षड्यंत्र के तहत चलाया गया, तो उपरोक्त अनुभवों के अनुसार उसका परिणाम भी बहुत जल्द सामने आ जाएगा ! थोड़े से सब्र और समय की जरुरत है !
कुछ कुंठाग्रस्त, पूर्वाग्रही, चाटुकारों के लिए देश की मान-मर्यादा से बढ़ कर उनके आका हैं, क्योंकि वे ही उनकी रोजी-रोटी-आमदनी का जरिया हैं ! वैसे ये लोग भी सब कुछ जानते-समझते हैं ! इसीलिए जब किसी को अपने हित पर लात पड़ती दिखती है वह तुरंत दूसरे दरवाजे पर जा अपना हित सहलवाने लगता है ! जिनको अभी तक मौका नहीं मिला या किसी ने चारा नहीं डाला वह यहां-वहाँ अपनी भड़ास निकालने पर मजबूर हैं ! इनके लिए देश-समाज-नैतिकता जैसे शब्द बेमानी हैं ! इनका एक ही मोटो है कि इनकी जेब के मोटेपन पर कोई असर ना पड़े ! देश के सम्मान की कीमत पर चारणाई भी ऐसे लोगों की करते हैं, जो खुद के धुसरिया गए आभामंडल के साथ अपने आगत से आशंकित, डरते-लरजते छुपने के बहाने और ठौर खोजते फिर रहे हैं !
अभी जो घटनाक्रम चला, उससे ऐसे विघ्नसंतोषियों को जरा सी अफीम की खुराक मिल गई ! जिसकी पिनक में इन्हें अपनी लंतरानियां फिर से छेड़ने का मौका मिल गया ! ये भूल गए कि शेर के शिकार में कभी दो कदम पीछे भी हटना पड़ता है, यह शिकारी की कमजोरी नहीं उसकी रणनीति (कूटनीति) होती है ! जो बड़े-बड़े शेरों का शिकार कर चुका होता है उसका जंगल में अपने अभियान के दौरान चूहे, सियार, लोमड़ी, बिच्छु, सांप इत्यादि से भी पाला जरूर पड़ता है, उसके लिए भी आगे-पीछे होना पड़ता है, इसका मतलब यह नहीं कि वह कीड़े-मकौड़ों, सांप-बिच्छुओं से घबरा गया हो ! भरी दोपहरी में दीपक राग गाने वाले या तो सरस्वती जी के घोर दुश्मन हैं या फिर ''नयनसुख'' !
इन लोगों के सामने चंद दिनों पहले ही ताली ठोक कर लोगों को खामोश करने का आदेश देने वाले आज कहीं किसी का आदेश मानने पर मजबूर हुए जा बैठे हैं ! देश में तो ऐसे दसियों उदाहरण हैं ! पड़ोस में ही झाँक लीजिए, सदा हमारी खैरात, हमारे रहमो-करम पर आश्रित रहने वाले तीनों पड़ोसियों ने जरा सी आँख तरेरी थी, आज आँख उठाने की हैसियत नहीं रह गई है ! कुछ और दूर जाएं तो पहले हमें बात करने लायक नहीं समझते थे, आज हमसे बात करने का मौका और बहाना खोजते हैं ! जो हमें नाकाबिल, खरीदार समझ कुछ भी बेच, थमा जाते थे, आज हमारी बनाई वस्तुओं को ललचाई नजर से देखते हैं ! कहते हैं कि जो समय से सबक नहीं लेता, समय उसे सबक जरूर सिखाता है !
ज्ञातव्य है कि कुछ साल पहले कोई भी सूचना या विवरण इत्यादि अंग्रेजी, हिंदी व उर्दू में दिया जाता था ! जिससे जनता जो भाषा उसे आती है उस में समझ सके ! आज फिर कुछ डिग्रीधारी अनपढ़ों के लिए कहीं-कहीं वैसी व्यवस्था की जरुरत दिख पड़ रही है ! अभी पिछले घटनाक्रम के चलते कुछ मौकापरस्त लोग भारत द्वारा ओ आई सी से तथाकथित माफीनामे की बात को अपने गढ़, अनपढ़ लोगों के सामने उछाल, अपनी दुकान चलाने की कोशिश कर रहे हैं ! इसीलिए लगता है कि सरकार को विवादास्पद मामलों से संबंधित विज्ञप्तियां अब जनसाधारण की भाषा में भी देनी चाहिए ! जिससे लोग सच से वाकिफ हो सकें ! तत्कालीन घटनाक्रम से जुडी सरकारी विज्ञप्ति को जिसने भी पढ़ा और समझा है वह अच्छी तरह जानता है कि यह कोई माफीनामा नहीं है ! ये जो पढ़े-लिखे अनपढ़, गैर जिम्मेदार लोग बात का बंतगढ़ बना रहे हैं क्या वे बता सकते हैं कि अंग्रेजी में लिखी इस विज्ञप्ति के किस वाक्य से माफी माँगने का अर्थ निकलता है ! उल्टा यह तो विनम्रता से चेतावनी देने जैसा है ! सभी जानते है कि आज भारत सिर्फ चेतावनी देता ही नहीं, स्ट्राइक भी करता है !
“It is regrettable that OIC Secretariat has yet again chosen to make motivated, misleading and mischievous comments. This only exposes its divisive agenda being pursued at the behest of vested interests,” said Bagchi. He urged the OIC Secretariat to stop pursuing its communal approach and show due respect to all faiths and religions.
जिन देशों का नाम ले कर तेल की कमी का डर दिखाया जा रहा है, देखा जाए तो तेल का अलावा उनके पास और है क्या ! हमें तेल नहीं मिलेगा तो कुछ मुश्किलात सामने आएँगे, पर उनका क्या होगा ! क्या वे उसी तेल को पी कर जिन्दा रहेंगे ! जीवन-यापन की हर जरुरी चीज के लिए दूसरों का मुंह जोहने वाले ऐसी जुर्रत करने की सोच भी नहीं सकते ! इस पर तेल का खेल है कितने दिन ! सारा संसार आज उसके विकल्प की खोज में जुटा हुआ है ! देर-सबेर ऊर्जा का स्रोत मिल ही जाएगा ! फिर.....ना तेल रहेगा नाहीं उस की धार !
आशा है भगवान की लाठी, समय का चक्र, दुष्कर्मों का परिणाम अब जल्दी ही सबक सिखाने हेतु किसी ना किसी रूप में अवतरित होंगे, ताकि आगे भी लोग कहावतों पर विश्वास करते रहें !
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