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सोमवार, 27 जुलाई 2026

दिल्ली पुलिस तुम्हें सलाम 🙏

पुलिस जिसका नाम ही काफी है ! उसका एक जवान यदि किसी मरघिल्ले को पांच सेकेंड भी घूर कर देख ले तो उसका वस्त्र गीला-पीला हो जाए ! सिर्फ एक बार सड़क पर यूंही डंडा पटक दे तो हुड़दंगी भागते नजर आएं ! एक बार डपट दे तो किसी की चूँ तक करने की हिम्मत ना हो ! वही जवान, समाज और देश हित खातिर अपनी बेकद्री, अपनी बेइज्जती, अपनी जिल्लत को सहते हुए मौन खड़े रहे ! इतना धीरज, इतनी सहनशीलता, इतना सब्र.........!

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

पु लिस क्या है, कैसी है, क्या करती है, यह सभी जानते हैं ! इसके बिना अवाम, समाज, देश या सरकार एक कदम भी नहीं चल सकते, यह भी सभी को मालूम है ! पर विडंबना कि यह महकमा कितना भी जोर लगा ले, कितनी भी मेहनत कर ले, कितनी भी सफलता पा ले, कितना भी मर-खप जाए, पर ज्यादातर उसके हिस्से में बदनामी ही आती है ! इस बात को, इस प्रथा को, इस परिपाटी को हमें बदलना पडेगा ! वे भी इंसान हैं ! उन्हें भी दर्द-तकलीफ-कष्ट होता है ! उनके भी मनोभाव हैं, जज्बात हैं, वे भी संवेदनशील हैं ! 

मुस्तैदी व सजगता 

अभी जो कुछ पिछले दिनों दिल्ली में हुआ जहां बेकाबू-निरंकुश-पाशविक भीड़ ने दरिंदगी की हद पार कर दी, जहां महिला पुलिस कर्मियों तक को नहीं बक्शा गया ! जहां सुरक्षाकर्मियों की जान पर बन आई ! जहां धक्का-मुक्की, हाथा-पाई, गाली-गलौच, बेइज्जती की सारी सीमाएं लांघ दी गईं ! वहीं माहौल को संभालने में जिस धैर्य, जिस संयम, जिस परिपक्वता का उदाहरण दिल्ली की पुलिस ने दिया वह दुनिया में शायद ही कहीं देखने को मिले ! 

प्रतीक 
पु लिस जिसका नाम ही काफी है ! उसका एक जवान यदि किसी मरघिल्ले को पांच सेकेंड भी घूर कर देख ले तो उसका वस्त्र गीला-पीला हो जाए ! सिर्फ एक बार सड़क पर यूंही डंडा पटक दे तो हुड़दंगी भागते नजर आएं ! एक बार डपट दे तो किसी की चूँ तक करने की हिम्मत ना हो ! वही जवान, समाज और देश हित खातिर अपनी बेकद्री, अपनी बेइज्जती, अपनी जिल्लत को सहते हुए मौन खड़े रहे ! इतना धीरज, इतनी सहनशीलता, इतना सब्र.........! आपकी आज्ञाकारिता तो सेना के समकक्ष हो गई ! नमन है आपको !
गौरव 
रकार से विनम्र निवेदन है कि इन दिनों जंतर-मंतर पर जितने भी महिला-पुरुष पुलिस कर्मियों ने, अपनी जान की परवाह ना कर अपना कर्तव्य निभाया उन्हें सार्वजनिक तौर पर सम्मानित और पुरस्कृत किया जाए! जिससे उनके काम की जटिलता का आभास हो सभी को ! हर अखबार, हर टीवी चैनल, हर सोशल मिडिया पर उनकी चर्चा हो, ताकि लोगों में, समाज में, पुलिस के प्रति गर्व और आदर का भाव पैदा हो ! उनका सम्मान हो ! लोग उनसे मिलें, डर कर नहीं बल्कि प्रेम से !  

जय हिंद ! वंदे मातरम !! 

@चित्र अंतर्जाल से साभार 

मंगलवार, 7 जून 2022

थोड़े से सब्र और समय की जरुरत है

चंद दिनों पहले ही ताली ठोक कर लोगों को खामोश करने का आदेश देने वाले आज कहीं किसी का आदेश मानने पर मजबूर हुए बैठे हैं ! सदा हमारी खैरात, हमारे रहमो-करम पर आश्रित रहने वाले तीनों पड़ोसियों ने जरा सी आँख तरेरी थी, आज आँख उठाने की हैसियत नहीं रह गई है उनकी ! कुछ और दूर जाएं तो पहले हमें बात करने लायक ना समझने वाले आज हमसे बात करने का मौका और बहाना खोज रहे हैं ! जो हमें नाकाबिल, खरीदार समझ कुछ भी बेच, थमा जाते थे, आज हमारी बनाई वस्तुओं को ललचाई नजर से देख रहे हैं ! कहते हैं कि जो समय से सबक नहीं लेता उसे समय सबक जरूर सिखाता है....!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

अपने यहां कई कहावतें बहुत ही मशहूर हैं, जैसे ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती ! न्याय में देर है अंधेर नहीं ! ऊपर वाले से कुछ भी छिपा नहीं रहता ! साँच को आंच नहीं ! सच्चे का बोलबाला, झूठे का मुंह काला ! सब कुछ यहीं भुगतना पड़ता है ! यह सब बातें अपने सच होने का प्रमाण भी देती रहती हैं ! तो इधर जो घटनाक्रम चला या निश्चित षड्यंत्र के तहत चलाया गया, तो उपरोक्त अनुभवों के अनुसार उसका परिणाम भी बहुत जल्द सामने आ जाएगा ! थोड़े से सब्र और समय की जरुरत है !

कुछ कुंठाग्रस्त, पूर्वाग्रही, चाटुकारों के लिए देश की मान-मर्यादा से बढ़ कर उनके आका हैं, क्योंकि वे ही उनकी रोजी-रोटी-आमदनी का जरिया हैं ! वैसे ये लोग भी सब कुछ जानते-समझते हैं ! इसीलिए जब किसी को अपने हित पर लात पड़ती दिखती है वह तुरंत दूसरे दरवाजे पर जा अपना हित सहलवाने लगता है ! जिनको अभी तक मौका नहीं मिला या किसी ने चारा नहीं डाला वह यहां-वहाँ अपनी भड़ास निकालने पर मजबूर हैं ! इनके लिए देश-समाज-नैतिकता जैसे शब्द बेमानी हैं ! इनका एक ही मोटो है कि इनकी जेब के मोटेपन पर कोई असर ना पड़े ! देश के सम्मान की कीमत पर चारणाई भी ऐसे लोगों की करते हैं, जो खुद के धुसरिया गए आभामंडल के साथ अपने आगत से आशंकित, डरते-लरजते छुपने के बहाने और ठौर खोजते फिर रहे हैं !

अभी जो घटनाक्रम चला, उससे ऐसे विघ्नसंतोषियों को जरा सी अफीम की खुराक मिल गई ! जिसकी पिनक में इन्हें अपनी लंतरानियां फिर से छेड़ने का मौका मिल गया ! ये भूल गए कि शेर के शिकार में कभी दो कदम पीछे भी हटना पड़ता है, यह शिकारी की कमजोरी नहीं उसकी रणनीति (कूटनीति) होती है ! जो बड़े-बड़े शेरों का शिकार कर चुका होता है उसका जंगल में अपने अभियान के दौरान चूहे, सियार, लोमड़ी, बिच्छु, सांप इत्यादि से भी पाला जरूर पड़ता है, उसके लिए भी आगे-पीछे होना पड़ता है, इसका मतलब यह नहीं कि वह कीड़े-मकौड़ों, सांप-बिच्छुओं से घबरा गया हो ! भरी दोपहरी में दीपक राग गाने वाले या तो सरस्वती जी के घोर दुश्मन हैं या फिर ''नयनसुख'' ! 

इन लोगों के सामने चंद दिनों पहले ही ताली ठोक कर लोगों को खामोश करने का आदेश देने वाले आज कहीं किसी का आदेश मानने पर मजबूर हुए जा बैठे हैं ! देश में तो ऐसे दसियों उदाहरण हैं ! पड़ोस में ही झाँक लीजिए, सदा हमारी खैरात, हमारे रहमो-करम पर आश्रित रहने वाले तीनों पड़ोसियों ने जरा सी आँख तरेरी थी, आज आँख उठाने की हैसियत नहीं रह गई है ! कुछ और दूर जाएं तो पहले हमें बात करने लायक नहीं समझते थे, आज हमसे बात करने का मौका और बहाना खोजते हैं ! जो हमें नाकाबिल, खरीदार समझ कुछ भी बेच, थमा जाते थे, आज हमारी बनाई वस्तुओं को ललचाई नजर से देखते हैं ! कहते हैं कि जो समय से सबक नहीं लेता, समय उसे सबक जरूर सिखाता है ! 

ज्ञातव्य है कि कुछ साल पहले कोई भी सूचना या विवरण इत्यादि अंग्रेजी, हिंदी व उर्दू में दिया जाता था ! जिससे जनता जो भाषा उसे आती है उस में समझ सके ! आज फिर कुछ डिग्रीधारी अनपढ़ों के लिए कहीं-कहीं वैसी व्यवस्था की जरुरत दिख पड़ रही है ! अभी पिछले घटनाक्रम के चलते कुछ मौकापरस्त लोग भारत द्वारा ओ आई सी से तथाकथित माफीनामे की बात को अपने  गढ़, अनपढ़ लोगों के सामने उछाल, अपनी दुकान चलाने की कोशिश कर रहे हैं ! इसीलिए लगता है कि सरकार को विवादास्पद मामलों से संबंधित विज्ञप्तियां अब जनसाधारण की भाषा में भी देनी चाहिए ! जिससे लोग सच से वाकिफ हो सकें ! तत्कालीन घटनाक्रम से जुडी सरकारी विज्ञप्ति को जिसने भी पढ़ा और समझा है वह अच्छी तरह जानता है कि यह कोई माफीनामा नहीं है ! ये जो पढ़े-लिखे अनपढ़, गैर जिम्मेदार लोग बात का बंतगढ़ बना रहे हैं क्या वे बता सकते हैं कि अंग्रेजी में लिखी इस विज्ञप्ति के किस वाक्य से माफी माँगने का अर्थ निकलता है ! उल्टा यह तो विनम्रता से चेतावनी देने जैसा है ! सभी जानते है कि आज भारत सिर्फ चेतावनी देता ही नहीं, स्ट्राइक भी करता है !  

“It is regrettable that OIC Secretariat has yet again chosen to make motivated, misleading and mischievous comments. This only exposes its divisive agenda being pursued at the behest of vested interests,” said Bagchi. He urged the OIC Secretariat to stop pursuing its communal approach and show due respect to all faiths and religions.

जिन देशों का नाम ले कर तेल की कमी का डर दिखाया जा रहा है, देखा जाए तो तेल का अलावा उनके पास और है क्या ! हमें तेल नहीं मिलेगा तो कुछ मुश्किलात सामने आएँगे, पर उनका क्या होगा ! क्या वे उसी तेल को पी कर जिन्दा रहेंगे ! जीवन-यापन की हर जरुरी चीज के लिए दूसरों का मुंह जोहने वाले ऐसी जुर्रत करने की सोच भी नहीं सकते ! इस पर तेल का खेल है कितने दिन ! सारा संसार आज उसके विकल्प की खोज में जुटा हुआ है ! देर-सबेर ऊर्जा का स्रोत मिल ही जाएगा ! फिर.....ना तेल रहेगा नाहीं उस की धार ! 

आशा है भगवान की लाठी, समय का चक्र, दुष्कर्मों का परिणाम अब जल्दी ही सबक सिखाने हेतु किसी ना किसी रूप में अवतरित होंगे, ताकि आगे भी लोग कहावतों पर विश्वास करते रहें !   

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