pub-3648900737756323 कुछ अलग सा: जंतर-मंतर
जंतर-मंतर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
जंतर-मंतर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 27 जुलाई 2026

दिल्ली पुलिस तुम्हें सलाम 🙏

पुलिस जिसका नाम ही काफी है ! उसका एक जवान यदि किसी मरघिल्ले को पांच सेकेंड भी घूर कर देख ले तो उसका वस्त्र गीला-पीला हो जाए ! सिर्फ एक बार सड़क पर यूंही डंडा पटक दे तो हुड़दंगी भागते नजर आएं ! एक बार डपट दे तो किसी की चूँ तक करने की हिम्मत ना हो ! वही जवान, समाज और देश हित खातिर अपनी बेकद्री, अपनी बेइज्जती, अपनी जिल्लत को सहते हुए मौन खड़े रहे ! इतना धीरज, इतनी सहनशीलता, इतना सब्र.........!

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

पु लिस क्या है, कैसी है, क्या करती है, यह सभी जानते हैं ! इसके बिना अवाम, समाज, देश या सरकार एक कदम भी नहीं चल सकते, यह भी सभी को मालूम है ! पर विडंबना कि यह महकमा कितना भी जोर लगा ले, कितनी भी मेहनत कर ले, कितनी भी सफलता पा ले, कितना भी मर-खप जाए, पर ज्यादातर उसके हिस्से में बदनामी ही आती है ! इस बात को, इस प्रथा को, इस परिपाटी को हमें बदलना पडेगा ! वे भी इंसान हैं ! उन्हें भी दर्द-तकलीफ-कष्ट होता है ! उनके भी मनोभाव हैं, जज्बात हैं, वे भी संवेदनशील हैं ! 

मुस्तैदी व सजगता 

अभी जो कुछ पिछले दिनों दिल्ली में हुआ जहां बेकाबू-निरंकुश-पाशविक भीड़ ने दरिंदगी की हद पार कर दी, जहां महिला पुलिस कर्मियों तक को नहीं बक्शा गया ! जहां सुरक्षाकर्मियों की जान पर बन आई ! जहां धक्का-मुक्की, हाथा-पाई, गाली-गलौच, बेइज्जती की सारी सीमाएं लांघ दी गईं ! वहीं माहौल को संभालने में जिस धैर्य, जिस संयम, जिस परिपक्वता का उदाहरण दिल्ली की पुलिस ने दिया वह दुनिया में शायद ही कहीं देखने को मिले ! 

प्रतीक 
पु लिस जिसका नाम ही काफी है ! उसका एक जवान यदि किसी मरघिल्ले को पांच सेकेंड भी घूर कर देख ले तो उसका वस्त्र गीला-पीला हो जाए ! सिर्फ एक बार सड़क पर यूंही डंडा पटक दे तो हुड़दंगी भागते नजर आएं ! एक बार डपट दे तो किसी की चूँ तक करने की हिम्मत ना हो ! वही जवान, समाज और देश हित खातिर अपनी बेकद्री, अपनी बेइज्जती, अपनी जिल्लत को सहते हुए मौन खड़े रहे ! इतना धीरज, इतनी सहनशीलता, इतना सब्र.........! आपकी आज्ञाकारिता तो सेना के समकक्ष हो गई ! नमन है आपको !
गौरव 
रकार से विनम्र निवेदन है कि इन दिनों जंतर-मंतर पर जितने भी महिला-पुरुष पुलिस कर्मियों ने, अपनी जान की परवाह ना कर अपना कर्तव्य निभाया उन्हें सार्वजनिक तौर पर सम्मानित और पुरस्कृत किया जाए! जिससे उनके काम की जटिलता का आभास हो सभी को ! हर अखबार, हर टीवी चैनल, हर सोशल मिडिया पर उनकी चर्चा हो, ताकि लोगों में, समाज में, पुलिस के प्रति गर्व और आदर का भाव पैदा हो ! उनका सम्मान हो ! लोग उनसे मिलें, डर कर नहीं बल्कि प्रेम से !  

जय हिंद ! वंदे मातरम !! 

@चित्र अंतर्जाल से साभार 

शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

सोनम चौबे ->छब्बे = दुबे

यह तथाकथित वैज्ञानिक जिसका अपने नाम का एक भी पेंटेंट नहीं है ! जिसने सरकार से सवा सौ एकड़ से ज्यादा जमीन हथिया रखी है ! जो पर्यावरण के नाम पर विदेशों से करोड़ों डॉलर उगाहता है ! जो चीन की खुल कर तरफदारी करता है ! जो कश्मीर को अलग करने का सुझाव देता है ! वही जो कभी लद्दाख को कश्मीर से अलग किए जाने पर मोदी जी के कसीदे पढ़ा करता था ! जब तक धर्मेंद्र प्रधान से अनुदान मिलता रहा, तब तक ये उनका मुरीद बना रहा ! जो ''नीट'' के नाम पर, अपने स्वार्थ के लिए, नौटंकीबाजों के साथ खड़ा हो गया ! क्या इसने कभी परीक्षाओं को सफल बनाने के लिए सुझाव दिए ? क्या इसने कभी इस बारे में सरकार से कभी कोई बात की ? क्या इसने कभी उस समस्या को हल करने की कोशिश की ? नहीं ! यदि इसने ऐसा किया होता तो आज देश की जनता भी इसके साथ भूख हड़ताल पर बैठी होती ! .....................!

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

हुत दिनों पहले एक फिल्म आई थी ''बीस साल बाद'' ! उस रहस्यात्मक फिल्म में खलनायक की भूमिका एक ऐसे अभिनेता ने निभाई थी, जिनकी छवि सदा नेक, प्रेमल, दयावान पात्र की रही थी। इसीलिए उन पर दर्शकों को शक नहीं होता है और फिल्म का रहस्य अंत तक बना रहता है ! पिछले दिनों सोशल मीडिया पर भी कुछ ऐसा ही हुआ और उसने एक माहौल की दशा और दिशा ही बदल कर रख दी !

नैरेटिव स्थल 

नै रेटिव गढ़ने में विपक्ष सदा दो कदम आगे रहा है और यह सदा उसका अमोघ अस्त्र भी रहा है ! पर पिछले पखवाड़े बाजार में एक खबर चल पड़ी कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में बहुत जल्द फेर-बदल होने वाला है, जिसमें दो-तीन वरिष्ठ मंत्रियों के साथ-साथ विवादित शिक्षा मंत्री की विदाई भी तय है ! सबसे पहले यह खबर एक ऐसे चैनल से आई, जिसकी विश्वसनीयता पर कभी किसी को कोई संदेह नहीं रहा ! फिर यह खबर कुछ अन्य यू-ट्यूब चैनलों पर भी वायरल हो गई ! ऐसा माहौल बन गया कि फेर-बदल अब हुआ ही हुआ !

अभिशप्त ?

ऐसे सुनहरे मौके पर चूक न हो जाए, इसलिए वांग, सारा श्रेय लेने के लिए दिल्ली आ धमका और बिना किसी के कहे खुद ही आमरण अनशन का ऐलान कर दिया ! उसे लगा था कि उधर ''वह'' हटा और इधर ''ये'' अन्ना बना ! अपनी अति मत्वाकांक्षाओं, अहम और विदेशी आकाओं की शह से भ्रमित हो वह अपनी पिछली करतूतों, बयानों, कारस्तानियों को तो भूला ही, साथ ही दस-बारह सालों में देश में चली जा रही सटीक शतरंजी चालों से भी सबक ना ले, उन्हें बिलकुल नजरंदाज कर बैठा ! नतीजा सामने था ! अब ना उगलते बन रहा था, ना हीं निगलते ! वह चौबे जी वाली कहावत चरितार्थ हो गई !

भ्रमजाल 

जं तर-मंतर के जादूई मायाजाल में फंसे इस बंदे को यह नहीं दिखा और ना हीं समझ आया कि क्यों दसियों विपक्षी पार्टियां इस तथाकथित नौटंकी रूपी मुहिम से किनारा किए हुए हैं ? क्यों नहीं तिकड़म में महारत हासिल किए हुए नेतागणों ने इस मौके का फायदा उठाने के लिए, खुद ना सही, अपने सौ-पचास कार्यकर्ता ही यहां भेज, भीड़ बढ़ाने का छद्म प्रयास किया ? यदि इस मुद्दा-विहीन जमावड़े के प्रति जनमानस की लेश मात्र भी सहानुभूति होती,  तो अभी तक तो हारे-थके, हाशिए पर धकेल दिए गए लोगों ने इस अवसर को हथियाने के लिए कब का अपना झंडा-डंडा यहां गाड़ दिया होता ! 

गुबार देखते रहे 

पने मद में चूर, सारा श्रेय खुद हड़पने और सत्ता की लालसा में इस इंसान को यह भी नहीं दिखा कि सिर्फ उसे ही झाड़ पर क्यों चढ़ाया गया है ! वहां मौजूद कोई भी रंग-बिरंगा जीव, पाव दिन के लिए भी उसके साथ खड़ा होने को तैया नहीं था ! उलटे वहां दिन-रात पिकनीक मनाई जाती रही, नाच-गाना होता रहा ! सुबह-शाम दावतें उड़ती रहीं ! वह भी ठीक उसकी नाक के नीचे ! उन्हें रोज तरह-तरह के व्यंजनों को भकोसता देख वह उन्हें कोसता रहा, बेबस हो गरियाता रहा,  यहां तक कि शाप भी देता रहा, पर उधर किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा ! आम जनता की भी कोई सहानुभूति नहीं जगी ! 

सत्ता की लालसा 

यह तथाकथित वैज्ञानिक जिसका अपने नाम का एक भी पेंटेंट नहीं है ! जिसने सरकार से सवा सौ एकड़ से ज्यादा जमीन हथिया रखी है ! जो पर्यावरण के नाम पर विदेशों से करोड़ों डॉलर उगाहता है ! जो चीन की खुल कर तरफदारी करता है ! जो कश्मीर को अलग करने का सुझाव देता है ! वही जो कभी लद्दाख को कश्मीर से अलग किए जाने पर मोदी जी के कसीदे पढ़ा करता था ! जब तक धर्मेंद्र प्रधान से अनुदान मिलता रहा, तब तक ये उनका मुरीद बना रहा ! जो ''नीट'' के नाम पर, अपने स्वार्थ के लिए, नौटंकीबाजों के साथ खड़ा हो गया ! क्या इसने कभी परीक्षाओं को सफल बनाने के लिए सुझाव दिए ? क्या इसने कभी इस बारे में सरकार से कभी कोई बात की ? क्या इसने कभी उस समस्या को हल करने की कोशिश की ? नहीं ! यदि इसने ऐसा किया होता तो आज देश की जनता भी इसके साथ भूख हड़ताल पर बैठी होती  !  

बचा लो ! 
फिर जब कोई चारा नहीं बचा, हालत हद से गुजर गई और जान के लाले पड़ने लगे, तो किसी तरह इज्जत बचाने और यहां से छुटकारा पाने के लिए विभिन्न पार्टियों के नेताओं से दुहाई की गई ! उनके कारकुनों से सोशल मीडिया पर अपील करवाई जाने लगी ! कुछ फुंके कारतूसों और भीगी दियासलाइयों ने उपस्थिति भी दर्ज भी करवाई ! पर ऐसे प्रयास अवाम के लिए प्रहसन जैसे ही रहे ! क्योंकि आज तो इसके खुद के पढ़ाए हुए बच्चे भी इसका साथ देते नजर नहीं आ रहे ! खैर ! सुनने में आया है कि जल्द ही उन्हें उन्हीं जैसे लोगों द्वारा उबार लिया जाएगा ! प्रभु उन्हें सेहत प्रदान करें !

@चित्रों के लिए अंतर्जाल का आभार 

विशिष्ट पोस्ट

राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत, फर्क क्या है

इन दोनों देशभक्ति से ओत-प्रोत संगीत रचनाओं में एक समानता यह है कि इनकी रचना बंगाल में, वहां की दो महान विभूतियों के द्वारा की गई है ! हमारा ...