गुरुवार, 1 जनवरी 2026

कौंडिन्य, जिनके नाम पर नौसेना के पाल-पोत का नामकरण हुआ

जिसने हजारों साल पहले हिंद महासागर से दक्षिण पूर्व एशिया तक की सफल समुद्री यात्राएं ही नहीं कीं थीं, बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया में फुनान साम्राज्य, जो मेकांग डेल्टा क्षेत्र में स्थित था, की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ! जिसने ऐसा अनोखा इतिहास रचने में अपना योगदान दिया था, उसी, अब तक एक तरह से अज्ञात, गुमनाम महान नाविक को सम्मान देते हुए भारतीय नौसेना ने अपने इस नये जहाज का नाम INSV कौंडिन्य रख, देशवासियों को उससे परिचित करवाया है ! इसके लिए नौसेना को साधुवाद..........!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

इस साल के अंत में एक अद्भुत, सुखद घटना घटी ! जब भारतीय नौसेना ने अपना एक खास अग्रणी ''सिला हुआ पाल-पोत,'' INSV कौंडिन्य सोमवार, 29 दिसंबर को गुजरात के पोरबंदर से ओमान के मस्कट तक भारत की प्राचीन समुद्री परंपराओं के परीक्षण तथा प्राचीन समुद्री व्यापार मार्ग का पता लगाने के लिए रवाना किया। 19.6 x 6.5 x 3.3 आयामी इस जहाज में 17 नाविक सवार हैं, जिनका नेतृत्व कमांडर विकास सोरेन तथा उनके सहायक कमांडर वाई हेमंत कुमार संभालेंगे। कौंडिन्य उन 1400 की.मी. लंबे ऐतिहासिक समुद्री मार्गों का प्रतीकात्मक पुनरावलोकन करेगा, जिन्होंने सहस्राब्दियों तक भारत को व्यापक हिंद महासागर क्षेत्र से जोड़े रखा था। 

इतिहास रचने की तैयारी

नौसेना का हिस्सा 
कौंडिन्य की विशेषता यह है कि यह आज के आधुनिक नौसैनिक जहाजों से बिलकुल अलग है। कौंडिन्य में ना कोई इंजन है, नाहीं आधुनिक प्रोपल्शन तकनीक। इसे अजंता की गुफाओं में दर्शाए गए एक जहाज के चित्र के आधार पर, लकड़ी के तख्तों से, 2000 साल से भी अधिक पुरानी जहाज निर्माण पद्धति के अनुसार बनाया गया है। इसमें लोहे या धातु की कीलों का प्रयोग ना कर, नारियल के रेशों, उसकी रस्सियों, मछली के तेल, प्राकृतिक राल, और लाल ईंटों के चूर्ण का उपयोग किया गया है। एक तरह से यह एक सिला हुआ जहाज है। यह समुद्र की लहरों, हवा और अपने पाल के सहारे ही अपनी यात्रा पूरी करेगा !

कौंडिन्य 

पूर्णतया सिला हुआ 
इसका नाम रखा गया है कौंडिन्य ! कौन थे ये ? जिनके नाम पर इस जहाज का नाम रखा गया ! तो यह उस भारतीय व्यक्ति का नाम है, जिसने हजारों साल पहले हिंद महासागर से दक्षिण पूर्व एशिया तक की सफल समुद्री यात्राएं ही नहीं की थीं बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया में फुनान साम्राज्य, जो मेकांग डेल्टा क्षेत्र में स्थित था, की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ! पर जिसके बारे में हमारे छद्म इतिहासकारों ने कभी बताया ही नहीं ! हम तो अब तक कोलंबस, वास्कोडिगामा आदि को ही साहसी नाविक मानते रहे थे ! 
गर्व के पल 
कौंडिन्य का जन्म कलिंग राज्य के एक ब्राह्मण परिवार हुआ था ! वे एक महान विद्वान तथा निडर साहसिक नाविक थे। जो हिंद महासागर से दक्षिण पूर्व एशिया तक की अपनी यात्राओं के लिए जाने जाते रहे हैं। उनकी कहानी ऐतिहासिक तथ्य और पौराणिक कथाओं का मिश्रण है, जो भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच गहरे सांस्कृतिक और समुद्री संबंधों का प्रतीक है। एक कुशल नाविक के रूप में अपनी उपलब्धियों के अलावा, कौंडिन्य वैदिक ज्ञान में और मार्शल आर्ट में भी पारंगत थे। जो हमारे प्राचीन खोजकर्ताओं की बहुआयामी विलक्षणता को दर्शाता है ! 

तब कितनी कठिन रही होगी यात्रा 
कौंडिन्य का विस्तृत विवरण प्राचीन चीनी अभिलेखों में उपलब्ध है, जिनके अनुसार, कौंडिन्य ने बंगाल की खाड़ी के पार, दिव्य स्वप्न द्वारा निर्देशित हो एक यात्रा शुरू की। मेकांग डेल्टा में कौंडिन्य और उनके चालक दल पर समुद्री लुटेरों, जिसका नेतृत्व एक नागा (सर्प) कबीले के मुखिया की बेटी रानी सोमा कर रही थी, ने हमला कर दिया। जिसमें इन्होंने सोमा की सेनाओं को हराया। कौंडिन्य के साहस और कौशल से प्रभावित हो कर रानी सोमा ने उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे कौंडिन्य ने स्वीकार कर लिया।


समय के साथ कौंडिन्य ने फुनान साम्राज्य की स्थापना कर, व्याधपुरा (वर्तमान कंबोडिया) में बा फनोम को अपनी राजधानी के रूप में स्थापित किया। कौंडिन्य और रानी सोमा के विवाह को व्यापक रूप से भारतीय और स्थानीय खमेर संस्कृतियों के संबंधों की सुदृढ़ता के रूप में माना जाता है। इस सांस्कृतिक एकीकरण ने एक संपन्न सभ्यता की नींव रखी। समय के साथ, फुनान समुद्री व्यापार के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हुआ।    

सन्नद्ध 

जिसने ऐसा इतिहास रचने में अपना योगदान दिया था, उस, अब तक एक तरह से, अज्ञात, गुमनाम महान नाविक को सम्मान देते हुए भारतीय नौसेना ने अपने इस नये जहाज का नाम INSV कौंडिन्य रख, देशवासियों को उससे परिचित करवाया है ! इसके लिए नौसेना का हार्दिक आभार और साथ ही साधुवाद !

@चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

बुधवार, 31 दिसंबर 2025

प्रॉफेट, जिसका डायरेक्ट कनेक्शन ईश्वर से है

मौत से सभी को डर लगता है ! हजारों आस्थावान लोग अपना टीन-टप्पर बेच कर, जान बचाने खातिर पैगंबर साहब के पास पहुंच गए ! क्रिसमस भी आया और चला गया ! पर ना कोई बरसात हुई ना हीं बाढ़ दिखी, न दुनिया डूबी, न धरती कांपी, न आसमान फटा ! लोग पूछने लगे, नोआ भाई, पानी कहां है ? पैगंबर साहब बोले, मेरी ईश्वर से बात हुई, मैंने उनसे आप लोगों के भले के लिए दुआ की और कहा कि नावें कम पड़ रही हैं, तो उन्होंने मुझे और नावें बनाने का समय देते हुए, फिलहाल बाढ़ को स्थगित कर दिया है ! लोग मान भी गए.............!    

#हिन्दी_ब्लागिंग 

इं सान ने जब से होश संभाला है, शायद तभी से उसका सबसे बड़ा डर अपनी मौत का ही रहा है ! अपनी या अपने प्रियजनों की मृत्यु उसे सदा भयभीत किए रखती है ! आस्था और डर के बीच बहुत ही महीन रेखा होती है, उसी घालमेल का फायदा उठा संसार भर में कुटिल लोग इस भय को अपने हित में भुनाते रहे हैं ! आज के सोशल मीडिया का बवंडर यदि ऐसे लोगों के चेहरे बेनकाब करता है तो दूसरी और उन्हें मशहूर करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ता !   

स्वयंभू पैगंबर, एबो नूह
गस्त 2025 ! अचानक एक  “What will happen and how it will happen” शीर्षक का वीडियो, टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स पर तेजी से वायरल होने लगा ! जिसमें अफ्रीकी देश घाना के कसोआ इलाके का एक टाट (बोरा) धारी, एबो नूह (Ebo Noah) नामक स्वयंभू पैगंबर दावा करता नजर आता है कि उसे ईश्वर से संदेश प्राप्त हुआ है कि आगामी क्रिसमस के दिन से भीषण बरसात होगी, जिसके फलस्वरूप भयंकर बाढ़ आएगी, जिसका प्रकोप तीन साल तक रहेगा। धरती का अधिकतम हिस्सा जलमग्न हो जाएगा ! सारे मनुष्य, जीव-जंतु, पेड़-पौधे नष्ट हो जाएंगे ! आगे वह बताता है कि इस विपदा से बचने के लिए उसने आठ विशाल नावें बनाई हैं ! जो लोग इन नावों में आएंगे, दान देंगे, जगह बुक करेंगे, सिर्फ वही बचेंगे, बाकि सब खत्म हो जाएंगे ! डर बेचने का उसका धंधा चल निकला ! वैसे इस शख्स ने खुद को वर्तमान समय का नोआ यानी नूह घोषित कर रखा है, जो आने वाली हर विपदा से अपने अनुयायियों को बचाता रहेगा ! 
विशालकाय नौका 
निर्माणाधीन 

जा हिर है ! मौत से सभी को डर लगता है ! एबो की भविष्यवाणी से डर कर हजारों आस्थावान लोग अपना टीन-टप्पर बेच कर, जान बचाने खातिर उसकी शरण में पहुंच गए ! क्रिसमस भी आया और चला गया ! पर ना कोई बरसात हुई ना हीं बाढ़ दिखी, न दुनिया डूबी, न धरती कांपी, न आसमान फटा ! लोग पूछने लगे, नूह भाई, पानी कहां है ? पैंगबर साहब बोले, मेरी ईश्वर से बात हुई, मैंने उनसे आप लोगों के भले के लिए दुआ की और कहा कि नावें कम पड़ रही हैं, तो उन्होंने मुझे और नावें बनाने का समय देते हुए, फिलहाल बाढ़ को स्थगित कर दिया है ! लोग मान भी गए !   

मौत का खौफ 

इस आदमी के करीब 35000 पिच्छलगु हैं ! ये सदा टाट, बोरा पहने रहता है ! खुद को जमीन से जुड़ा बताता है ! मंहगे फोन को ईश्वर से कांटेक्ट के लिए जरुरी बताता है ! ईश्वर की राह पर चलते हुए इसने खुद को ही कॉन्ट्रैक्टर भी बना लिया, प्रॉफ़ेट भी और टिकट चेकिंग क्लर्क भी, सब कुछ एक साथ ! फिर भी लोग उस पर भरोसा कर रहे हैं ! वे यह नहीं देख पाते कि उन्हें प्रलय का दिन बताने वाला एक लाख डॉलर की नई गाड़ी खरीद रहा है ! जिसे वह उन्हीं के प्रेम की भेंट बताता है ! कोई यह नहीं पूछता कि बाढ़ आ ही क्यों रही थी ? यदि आनी जरुरी थी तो रुक क्यों गई ? हमने जो अपना घर-बार बेच दिया उसका क्या होगा ? वही डर, वही भय, वही आशंका, इन सभी लोगों को चुप रखे हुए है ! छोड़ दिया है सबको अपनी नियति पर !

शौक 
धर एबो के खिलाफ  काफी  कुछ लिखा भी  जा रहा है ! कई धार्मिक  नेताओं ने भी साफ कहा है कि ये बाइबल की कहानी को तोड़-मरोड़कर अपने  फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है ! कानून अपने ही दायरे में कैद है ! उधर पब्लिक है कि  मानती ही नहीं कि उसके साथ  कुछ गलत हुआ है, उसे सिर्फ  अपनी जान बचाने की पड़ी है और इसके लिए वो इंतजार कर रही है बाकि नावों के बनने का !
हश्र 
हा लांकि खबर यह है कि फिलहाल पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है, पर इससे उसकी ''पूंछ'' और भी बढ़ गई है और उसे अपने पुराने गेट-अप में तरह-तरह के समारोहों में शामिल होने का न्योता मिल रहा है,  जिनमें Sarcodie's Concert भी एक है ! जय हो ! 

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025

ड्राई फ्रूट्स और सूखे मेवे ! फर्क है जरा सा दोनों में

जो भी हो, हैं तो सभी पौष्टिक आहार ही ! इन दोनों श्रेणियों में ही विटामिन, मिनरल तथा अन्य पोषक पदार्थ भरपूर मात्रा में होते हैं, जो हम सब को सेहतमंद तो बनाते ही हैं ना ! तो सर्दियों में इन सब का संतुलित मात्रा में उपयोग जरूर करें ! ध्यान यह भी रहे कि ''अति सर्वत्र वर्जयेत्''..............! 

#हिन्दी_ब्लागिंग  

वैसे तो इनकी बारहों महीने मांग रहती है पर सर्दियों में पूछ कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है ! पर इधर मीडिया पर आई पोषण, खान-पान संबंधित सलाहकारों की बहार के डराने-धमकाने पर आम इंसान मिठाइयां, केक, चॉकलेट छोड़ इनकी तरफ कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो गया है ! जी हाँ, ड्राई फ्रूट ! जिनका नाम सामने आते ही काजू, बादाम, किसमिस, अखरोट आदि की तस्वीरें सामने आ जाती हैं ! पर क्या नाम के अनुसार ये सभी ड्राई फ्रूट हैं ?   

नट्स 

ड्राई फ्रूट्स 

देखा जाए तो ड्राई फ्रूट का अर्थ होता है, सूखे फल, जैसे किसमिस, खजूर, अंजीर, खुबानी इत्यादि। ऐसे फल जिन्हें धूप में या व्यावसायिक ड्रायर मशीनों में सुखा कर तैयार किया जाता है। काजू, बादाम वगैरह तो नट्स या बीज होते हैं। यहां भी हमारी भाषा की समृद्धि सामने आती है ! जहां इन्हें मेवा कहा जाता है ! इन सभी का अपना-अपना पौष्टिक महत्व है और इन्हें आहार में शामिल भी किया जाता है, लेकिन इनकी परिभाषा अलग-अलग है। 

 

प्रकृति की नेमत 
इनमें मुख्य अंतर यह है कि ड्राई फ्रूट्स वो फल होते हैं जिनकी नमी हटा, सुखा कर तैयार किया जाता है, जैसे अंजीर, खजूर, किसमिस, खुबानी इत्यादि ! दूसरी तरफ बादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता आदि कठोर छिलके वाले फल के अंदर के बीज या उनका हिस्सा होते हैं ! इस तरह देखा जाए तो काजू, बादाम औरअखरोट इत्यादि तकनीकी रूप से मेवे हैं, जो अक्सर ड्राई फ्रूट्स के साथ ही खाए जाते हैं, लेकिन सूखे फल मेवों की श्रेणी में नहीं आते, पर सभी को सुविधा के लिए ड्राई फ्रूट्स कह दिया जाता है। 

पौष्टिकता 

जो भी हो, हैं तो सभी पौष्टिकता से भरपूर आहार ही ! इन दोनों श्रेणियों में ही विटामिन, मिनरल तथा अन्य पोषक पदार्थ भरपूर मात्रा में होते हैं, जो हम सब को सेहतमंद तो बनाते ही हैं ना ! तो सर्दियों में इन सब का संतुलित मात्रा में उपयोग जरूर करें ! ध्यान यह भी रहे कि ''अति सर्वत्र वर्जयेत् !'' 

स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें !

@अंतर्जाल का हार्दिक आभार 

गुरुवार, 18 दिसंबर 2025

धोनी के राम बाबू , भारतीय क्रिकेट के सुपरफैन (2)

धोनी बेहतरीन खिलाडियों में से एक हैं, इसमें कोई शक नहीं, पर उनका ईगो भी बहुत बड़ा है ! इसी ईगो के चलते कई बार सही-गलत अफवाहें भी सामने आती रही हैं ! अपने सीनियर खिलाडियों से उनकी ''तनातनी'' कोई दबी-छुपी बात भी नहीं है ! हो सकता है कि सुधीर को देख उन्हें भी अपने लिए भी वैसे ही किसी प्रशंसक की जरुरत महसूस होने लगी हो और सामने राम बाबू को पा कर सुधीर की एक रेप्लिका अपने नाम से क्रिकेट जगत में प्रोजेक्ट कर दी  हो ! हो सकता है कि यह गलत हो, पर लगता तो है.......!  

#हिन्दी_ब्लागिंग 

पि छले अंक में भारतीय क्रिकेट के एक तरह से सबसे बड़े फैन सुधीर कुमार चौधरी की बात की थी ! जिनके क्रिकेट के प्रति जुनून ने उनकी जिंदगी बदल दी ! आज इस खेल से जुड़ा हुआ तकरीबन हर खेल प्रेमी उनका नाम जानता है ! आज वैसे ही एक और व्यक्ति की बात ! ये भी सुधीर की तरह ही मैदान की दर्शक दीर्घा में तिरंगा फहराते नजर आते हैं ! ये हैं मोहाली, पंजाब के राम बाबू ! धोनी के प्रशंसक हैं,  उनके द्वारा प्रायोजित किए गए हैं, इसीलिए इनके शरीर पर धोनी का नाम और जर्सी नंबर पेंट किया दिखता है ! 

राम बाबू 

सुधीर कुमार चौधरी 

दु निया में बहुत से लोग, सफल और विख्यात लोगों की सफलता से प्रेरित हो उसी तरह का काम या पेशा अपना लेते हैं ! कुछ सफल भी हो जाते हैं, पर शायद ही ऐसा कभी हुआ हो कि प्रेरित व्यक्ति अपने प्रेरक से भी आगे निकल गया हो ! कुछ ऐसा ही यहां भी है ! सुधीर और राम बाबू में कुछ समानताएं भी हैं ! दोनों ने गरीबी का दंश झेला है ! दोनों के परिवार इनके इस ''शौक'' के खिलाफ  रहे हैं ! दोनों को अपना जुनून पूरा करने के लिए दोस्तों-मित्रो से आर्थिक सहायता लेनी पड़ी है ! दोनों क्रिकेट के सबसे मशहूर खिलाडियों के फैन हैं ! पर सुधीर, राम बाबू से बहुत आगे हैं ! शायद इसलिए कि उन्हें BCCI की स्पॉन्सरशिप हासिल है। साथ ही उनके आदर्श साफ-सुथरी-अविवादित छवि वाले सचिन तेंदुलकर हैं ! दूसरी ओर राम बाबू धोनी द्वारा प्रायोजित हैं, जिन पर कई बार विभिन्न तरह की शंकाएं उठ चुकी हैं ! 

राम बाबू 

ऐसा लगता है कि सुधीर को हर मैच में तिरंगा फहराते, लोगों को उनकी बात करते, खिलाड़ियों के साथ उनकी फोटो को देख, राम बाबू के मन में भी आशा जगी होगी कि इस तरह वह भी मशहूरी प्राप्त कर सकते हैं ! क्रिकेट से उनका लगाव था ही ! कई बार, मैदान के बाहर, प्लेयरों को ले जाने वाली बस के नजदीक या अन्य मौकों पर वह धोनी के नारे लगाते उनका ध्यान अपनी रंगी-पुती आकृति की ओर खींच भी चुके थे ! एक बार धोनी के बुलावे पर उनके घर भी जा चुके थे !

मुलाकात 

क्रि केट के बेहतरीन खिलाडियों में से धोनी एक हैं, इसमें कोई शक नहीं ! पर उनका ईगो भी बहुत बड़ा है ! इसी ईगो के चलते कई बार सही-गलत अफवाहें भी सामने आती रही हैं ! अपने सीनियर खिलाडियों से उनकी ''तनातनी'' कोई दबी-छुपी बात भी नहीं है ! हो सकता है कि सुधीर को देख उन्हें भी अपने लिए भी वैसे ही किसी प्रशंसक की जरुरत महसूस होने लगी हो और सामने राम बाबू को पा कर सुधीर की एक रेप्लिका अपने नाम से क्रिकेट जगत में प्रोजेक्ट कर दी  हो ! हो सकता है कि यह गलत हो, पर लगता तो है। 

उपलब्धि 
राम बाबू और सुधीर को कई और बातें भी अलग करती हैं ! सुधीर ने खेल के प्रति लगाव के कारण शादी तक नहीं की ! उधर राम बाबू ने पत्नी और सातवीं में पढ़ने वाले बेटे तथा उससे एक साल छोटी बिटिया को उनके भाग्य के सहारे छोड़ दिया ! उनकी पत्नी किसी तरह घर चलाती रही हैं ! अपनी अलग पहचान बनाने के बावजूद राम बाबू की किसी तरह की कोई कमाई नहीं है, वह अपनी यात्रा, ठहरना और अन्य जरूरतों के लिए लोगों की सहायता पर निर्भर है ! उनके अनुसार मैच देखने के अलावा जीवन में और कोई योजना नहीं है ! अब धोनी उनको स्पांसर कर रहे हैं, तो यथा संभव कभी-कभी परिवार की सहायता कर देते हैं ! 

दर्शक दीर्घा में 
राम बाबू के धोनी के अलावा किसी और खिलाड़ी से कोई दोस्ताना संबंध नहीं हैं। नाहीं किसी से किसी तरह की आर्थिक सहायता मिलती है ! कभी-कभी मैच का टिकट जरूर मिल जाता है ! दोस्तों और शुभचिंतकों की सहायता से इस 40 वर्षीय क्रिकेट फैन के रहने-खाने-यात्रा संबंधित काम पूरे हो जाते हैं ! यह पूछने पर कि टीवी पर आपको देख क्या परिवार खुश होता है, राम बाबू चुप्पी साध लेते हैं ! फिर मायूसी के साथ बतलाते हैं कि सभी का कहना है कि जब इससे परिवार को कोई सहायता नहीं मिलती तो इस सब का क्या मतलब !

चिंतामग्न 

नको इसका भी कहीं मलाल तो है कि सुधीर को एक ट्रैवल एजेंसी के साथ-साथ और भी कई तरह की स्पांसरशिप मिल चुकी है। पर पता नहीं क्यों उनकी तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता ! पर उन्हें इस बात का गर्व भी है कि धोनी उन्हें जानते हैं और मैदान में मैचों के दौरान उनको नजरंदाज नहीं किया जाता ! इसीलिए जब तक शरीर साथ देगा तब तक वे भारतीय टीम के मैचों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते रहेंगे, आगे ऊपर वाले की मर्जी !

@अंतर्जाल का आभार 

सोमवार, 15 दिसंबर 2025

भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सुपरफैन, (1)

देखा जाए तो यह भी एक साधना ही है ! मैच देखने जाने एक एक दिन पहले वह अपने शरीर को भारतीय ध्वज के रंगों से रंग लेते हैं और उस रात को सोते नहीं हैं कि कहीं रंग खराब ना हो जाएं ! वह आमतौर पर अपनी छाती पर तेंदुलकर का नाम लिखते हैं और पीठ पर उनकी जर्सी का नंबर ! वह अपने साथ एक शंख भी रखते हैं, जिसे मैच के खास-खास मौकों पर मैदान में बजाते हैं ! सुद्या के उपनाम से जाने जाने वाले अविवाहित चौधरी सनातनी हिन्दू हैं। अयोध्या राम मंदिर अभिषेक में भी उन्होंने भाग लिया था.......... ! 

#हिन्दी_ब्लागिंग 

क्रिकेट से लगाव रखने वाले लोगों ने विदेशी टीमों के साथ हो रहे तकरीबन हर मैच में, तिरंगे रंग में रंगे दो युवकों को बड़ा सा तिरंगा फहराते देखा होगा ! एक की पीठ पर 10 नंबर, जो कभी सचिन की जर्सी का नंबर होता था, और आगे सीने पर तेंदुलकर लिखा होता है। उसी तरह दूसरे की पीठ पर धोनी की जर्सी  का नंबर 7 और आगे धोनी लिखा होता है ! अब तो ये दोनों क्रिकेट के हर मैच  का अभिन्न अंग सा बन गए हैं ! दर्शकों को भी अब इनको देखने की आदत पड़ गई है ! कौन हैं ये दोनों ? इतना जुनून क्यों है इन दोनों का इस खेल के प्रति ? 

 

सुधीर कुमार चौधरी 

राम बाबू 
बिहार के मुज्जफरपुर शहर के ग्रामीण इलाके में 20 फरवरी 1981 में एक अत्यंत गरीब परिवार में एक बालक का जन्म होता है ! नाम रखा गया, सुधीर कुमार चौधरी ! पता नहीं कैसे और क्यों छह साल की छोटी सी उम्र में ही उस पर क्रिकेट का जुनून सवार हो गया और वह सचिन का दीवाना बन गया ! इसी दीवानगी में उसने 14 वर्ष की उम्र में पढ़ाई छोड़ दी। कहा तो यह भी जाता है कि क्रिकेट के सभी मैच देख सके, इसके लिए उसने अपनी शादी तक स्थगित करवा दी थी ! 
सुद्या 

क्रिकेट की दीवानगी ऐसी थी कि उसके सिवा युवा सुधीर को और कुछ भी ना सूझता था, ना हीं भाता था !भारतीय टीम देश में जहां भी जाती, ये महाशय किसी ना किसी युक्ति से वहां पहुंच ही जाते थे ! अपनी इन सब हरकतों से उसने अपने माता-पिता को बहुत ही नाराज कर दिया था। रोक-टोक जब कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी तो सुधीर ने धमकी तक दे डाली कि अगर उसे मैच देखने से रोका गया तो वह आत्मदाह कर लेगा ! उसने कहा कि उसका जीवन भारतीय क्रिकेट मैच देखने के लिए समर्पित है ! इसके धनार्जन के लिए उसने क्रिकेट प्रेमियों की सहायता ली ! 

समर्पण 

सन 2003 से, चौधरी भारत द्वारा खेले गए हर क्रिकेट मैच को देखते और समर्थन करते आ रहे हैं ! पर यह सब इतना आसान नहीं रहा था ! 28 अक्टूबर 2003 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सचिन का खेल देखने के लिए उन्होंने 21 दिनों तक साइकिल चलाकर मुजफ्फरपुर से मुंबई तक का सफर तय किया था, और यह त्रिकोणीय सीरीज का पहला मैच था, जहां उन्होंने भारतीय तिरंगा लहराकर भारत का समर्थन करना शुरू किया। पैसों की तंगी के कारण कई बार खतरा मोल लेते हुए ट्रेनों में बिना टिकट यात्रा भी की ! पर मुख्यत: स्टेडियम तक ले जाने के लिए इनकी सायकिल ही साथ निभाती रही ! जैसे कि 2006 में लाहौर और 2007 में बांग्लादेश तक उसी पर चले गए थे ! 2015 में, मीरपुर में इंडिया-बांग्लादेश सीरीज के दौरान, भारत का स्पोर्ट करने खातिर उनकी जान पर बन आई थी, बड़ी मुश्किल से बांग्ला देश की पुलिस ने वहां के उन्मादी दर्शकों से इन्हें बचाया था ! 

वंदे मातरम 

एक बार टीम की जीत का जश्न मनाने के लिए बाड़ फांदने की कोशिश में पुलिस के तेवर झेलने पड़े थे ! ऐसा ही कुछ हुआ, मार्च 2010 में, कानपुर में एक प्रैक्टिस सेशन के दौरान तेंदुलकर से हाथ मिलाने की कोशिश में पुलिस से मार खानी पड़ी ! तेंदुलकर के दखल के बाद उन्हें छोड़ दिया गया, बाद में उन्हें पहचान कर पुलिस ऑफिसर ने उनसे माफी मांगते हुए इस घटना पर अफसोस जताया। अब तक उनकी पहचान बन चुकी थी, लोग जूनून का लोहा मान चुके थे !  इस घटना के बाद, BCCI ने उन्हें इंडियन टीम के हर होम मैच के लिए स्पॉन्सर कर दिया। 

जय हो 
अविस्मरणीय पल 

चौधरी का सपना तब जा कर पूरा हुआ, जब 2, अप्रैल 2011 में, भारत ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में फाइनल में श्रीलंका को हराया। तेंदुलकर ने खुद उन्हें, भारतीय ड्रेसिंग रूम में आने और टीम के जश्न में शामिल होने के लिए बुलाया । उन्होंने चौधरी से हाथ मिलाया, उन्हें गले लगाया और अंत में अपने साथ विश्व कप उठाने और फोटो खिंचाने का स्वर्णिम मौका भी दिया ! यह सुधीर के जीवन का सबसे खास समय था।आज भी सचिन उनके ट्रैवल और मैच के टिकट के लिए आर्थिक सहयोग करते हैं ! 

रोहित के साथ 

जीत का जश्न 
देखा जाए तो यह भी एक साधना ही है ! मैच देखने जाने एक एक दिन पहले वह अपने शरीर को भारतीय ध्वज के रंगों से रंग लेते हैं और उस रात को सोते नहीं हैं कि कहीं रंग खराब ना हो जाएं ! वह आमतौर पर अपनी छाती पर तेंदुलकर का नाम लिखते हैं और पीठ पर उनकी जर्सी का नंबर ! वह अपने साथ एक शंख भी रखते हैं, जिसे मैच के खास-खास मौके पर बजाया जाता है ! सुद्या के उपनाम से जाने जाने वाले अविवाहित चौधरी सनातनी हिन्दू हैं। अयोध्या राम मंदिर अभिषेक में उन्होंने भी भाग लिया था ! 

सचिनमय 
सुधीर ने अपनी ज़िंदगी सचिन तेंदुलकर को समर्पित कर दी है ! 2011 के ICC वर्ल्ड कप ट्रॉफी के साथ उनकी और सुपरस्टार की तस्वीरें भारतीय क्रिकेट इतिहास में अपनी जगह बना चुकी हैं। उनकी यात्राएं मशहूर हैं। उन्होंने तेंदुलकर का मैच देखने के लिए 12,000 मील से ज़्यादा साइकिल चलाई है ! फिल्म निर्माता सुश्रुत जैन द्वारा निर्मित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ''बियॉन्ड ऑल बाउंड्रीज'' के तीन प्रमुख किरदारों में से सुधीर भी एक हैं। यह फिल्म भारतीय क्रिकेट के तीन अलग-अलग उन व्यक्तित्वों के निजी जीवन के बारे में जानकारी देती है, जो इस खेल के सबसे बड़े प्रशंसक माने जाते हैं !

@अंतर्जाल का हार्दिक आभार 

गुरुवार, 11 दिसंबर 2025

भाषाएं, हमें गर्व है इन पर

हर स्कूल में शुरूआती दौर से ही उस क्षेत्र की स्थानीय भाषा के अलावा दो अन्य क्षेत्रों की भाषाएं सीखाने का भी प्रावधान निश्चित तौर पर हो ! देशवासी जितना हो सके अपनी भाषा के अलावा दूसरे प्रांतों की भाषा को भी सीखें ! इंसान तो जितनी भाषाएं सीख सके उतना ही अच्छा है ! हिंदी भाषी तमिल सीखे ! कन्नड़ भाषी पंजाबी जाने ! बांग्ला बोलने वाला पंजाबी समझे ! ओड़िसा में रहने वाले के लिए भोजपुरी समझना मुश्किल ना हो, तो एक दूसरे को समझने का मौका और भाईचारा बढ़ने के साथ-साथ रोजगार के अवसरों में भी निश्चित तौर पर बढ़ोत्तरी होगी.............! 

#हिन्दी_ब्लागिंग 

संस्कृत ! हजारों साल पुरानी भाषा ! जिसका अभी भी अस्तित्व है ! पर विडंबना है कि उसी के बारे में तमिलनाडु के उप-मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने कह दिया कि ''संस्कृत एक मृत भाषा है !'' उस कथन को लेकर व्यर्थ सर खपाने से कोई फायदा नहीं है, ऐसे कुंठित और पूर्वाग्रही लोग अपने हित, अपने स्वार्थ के लिए देश, समाज, धर्म, भाषा को बदनाम करते ही रहते हैं ! इनके अलावा दसियों भाषाएं और भी हैं, यदि उनको बोलने वाले भी अपनी-अपनी भाषा को श्रेष्ठ तथा दूसरी को हीन बताने लग जाएं तो ?  उलटे हमें तो गर्व होना चाहिए कि हमारे पास इतनी समृद्ध और सक्षम भाषाएं हैं, जिनमें संसार की सबसे पुरानी तथा जीवित भाषाएं भी सम्मिलित हैं ! 

बात संस्कृत की, जो एक ऐसी “परिमार्जित” भाषा है जिसे भारत के प्राचीन ऋषियों ने अपने विचारों को बेहद सटीक और परिष्कृत तरीके से लोगों तक पहुंचाने के लिए विकसित किया था। संस्कृत वेदों, उपनिषदों और भगवद गीता सहित भारतीय साहित्य के कई महान कार्यों की भाषा रही है। आज वैज्ञानिक इसे कम्प्यूटर और AI के लिए सबसे उपयुक्त भाषा मानते हैं ! ऐसा भी नहीं है कि लोगों ने इसका उपयोग करना बिलकुल बंद कर दिया है, 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में हजारों लोग अभी भी संस्कृत को अपनी मातृभाषा के रूप में प्रयोग करते हैं तथा इसे मुख्य भाषा भी मानते हैं ! 


संसार की सबसे पुरानी दो भाषाएं हैं, पहली संस्कृत तथा दूसरी तमिल ! शोध बताते हैं कि संसार में हाल के वर्षों में संस्कृत के अध्ययन में लोगों की रुचि और ध्यान बढ़ रहा है, क्योंकि दुनिया भर के लोगों में इसके सांस्कृतिक महत्व में दिलचस्पी बढ़ी है। इससे संस्कृत बोलने वालों का एक नया वर्ग उभरा है जो भाषाओं को संरक्षित और बढ़ावा देने का काम कर रहा है ! दूसरी सबसे पुरानी जीवित भाषा है तमिल, जो आज भी करोड़ों लोगों द्वारा उपयोग में लाई जा रही है ! हमें तो इन दोनों पर तो क्या, अपनी हर भाषा पर गर्व है, होना भी चाहिए, इतनी विविधता तथा व्यापकता और कहां है ! 

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पर कुछ लोग इन्हीं बातों को विवादित बना समाज में द्वेष फैलाने का काम करते हैं ! ऐसे लोगों का षड्यंत्र खत्म करने का एक सटीक उपाय यह है कि हर स्कूल में शुरूआती दौर से ही उस क्षेत्र की स्थानीय भाषा के अलावा दो अन्य क्षेत्रों की भाषाएं सीखाने का भी प्रावधान निश्चित तौर पर हो ! देशवासी जितना हो सके अपनी भाषा के अलावा दूसरे प्रांतों की भाषा को भी सीखें ! 

भाषाएं 
इंसान तो जितनी भाषाएं सीख सके, उतना ही अच्छा है ! हिंदी भाषी तमिल सीखें ! कन्नड़ भाषी पंजाबी जाने ! बांग्ला बोलने वाला पंजाबी समझे ! ओड़िसा में रहने वाले के लिए भोजपुरी समझना मुश्किल ना हो ! ऐसा हो जाए तो एक दूसरे को समझने का मौका और भाईचारे के बढ़ने के साथ-साथ रोजगार के अवसरों में भी निश्चित तौर पर बढ़ोत्तरी होगी ! सरकार और शिक्षा विभाग यदि इस बात पर गौर कर कोई ठोस कदम उठाए, तो कई परेशानियां अपने आप खत्म हो जाएंगी !

जय हिंद 
आज भाषा की बात उठी है, तो क्या किसी का ध्यान एक ऐसी विदेशी भाषा की तरफ भी गया है जिसे हमारे देश में कोई नहीं जानता, फिर भी उसका उपयोग धड़ल्ले से डॉक्टरों के नुस्खों में होता है ! जिसे समझना आम इंसान के वश की बात ही नहीं है ! जिसे तकनीकी रूप से एक मृत भाषा मान लिया गया है ! जिसे अब कोई भी अपनी पहली भाषा (mother tongue) के रूप में नहीं बोलता ! जी हाँ ! लैटिन ! इस भाषा का अपने देश में क्या औचित्य है, कोई नहीं बता सकता ! फिर भी जो चला आ रहा है, वह चला आ रहा है ! स्टालिन जैसे लोग इसका विरोध क्यों नहीं करते ? या फिर अपनी भाषा को दूसरे राज्यों में पढ़वाने के लिए उद्यम क्यों नहीं करते ? 

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025

नाम में बहुत कुछ रखा है 😇

संयोगवश, कांग्रेस के प्रतिनिधित्व वाले इस इलाके में 9 और 11 दिसंबर को होने वाले केरल के पंचायत चुनावों में कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में से एक श्रीमती सोनिया गाँधी का नामधारी BJP का उम्मीदवार बन सीधे कांग्रेस के उम्मीदवार से ही मुकाबला कर रहा है। उधर हमारे बंगाल में TMC के दो विधायकों का एक ही नाम, हुमायूं कबीर होने से वहां अफरा-तफरी का माहौल है, लोग असमंजस में हैं, क्योंकि नाम में बहुत कुछ रखा है भाई ............!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

नाम में क्या रखा है ! ऐसा लिखने-कहने वाला भी अपनी हर रचना के नीचे अपना नाम जरूर लिखता था ! नाम में बहुत कुछ रखा है, इसीलिए हमारे यहां इसे संस्कारों में स्थान दिया गया है ! अभी भी बहुत से स्थानों में नामकरण संस्कार बड़े समारोह से किए-मनाए जाते हैं ! पर समय भी तो बदल रहा है, उसके साथ ही मान्यताएं, आस्थाए, परम्पराएं भी बदल रही हैं ! नामकरण भी इनसे अछूता नहीं रह पाया है ! अब अजीबोगरीब, अर्थहीन, परिस्थिति, प्रेरणा मूलक नाम रखे जाने लगे हैं ! जो आगे चल कर कभी-कभी नामधारक के लिए भी असामान्य या हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न कर देते हैं ! 

आज आ कर देखो  
अभी एक खबर आई कि श्रीमती सोनिया गांधी बीजेपी की टिकट पर केरल के मुन्नार जिले के नल्लथन्नी इलाके से पंचायत का चुनाव लड़ेंगी ! सभी को लगा कि ऐसे ही भ्रामक या पीत पत्रकारिता के तहत अफवाह होगी ! फिर खोज-खबर ली जाने लगी और जब सच्चाई सामने आई तो पता चला कि खबर में नाम तो सही है पर व्यक्ति कोई और है ! 
मुन्नार की सोनिया गाँधी 
हुआ क्या कि केरल के आगामी पंचायत चुनावों में BJP ने केरल के मुन्नार में पंचायत चुनाव के लिए नल्लथन्नी वार्ड से जिसे प्रत्याशी बनाया है उनका नाम भी सोनिया गांधी है, जो कांग्रेस और CPI(M) के खिलाफ लोकल पंचायत चुनाव लड़ रही हैं। उनके पिता, स्वर्गीय दुरे राज, जो एक समर्पित कांग्रेसी कार्यकर्त्ता थे तथा तत्कालीन कांग्रेस प्रेसिडेंट श्रीमती सोनिया गांधी से बहुत प्रभावित थे, उन्होंने अपनी बेटी का नाम सोनिया गांधी रख दिया ! जो वहां के लोगों के लिए बहुत दिनों तक कौतुक का विषय भी बना रहा !
प्रचार 
मय का खेल, इन सोनिया जी की शादी सुभाष जी से हुई जो BJP पंचायत जनरल सेक्रेटरी हैं ! धीरे-धीरे सोनिया जी खुद भी BJP की विचारधारा से सहमत होती हुईं उसमें शामिल हो गईं। अब उन्हीं नल्लथन्नी कल्लर की 34 साल की सोनिया गांधी को BJP ने मुन्नार पंचायत के नल्लथन्नी वार्ड 16 से नॉमिनेट किया है। एक ही झटके में वे पूरे देश में प्रसिद्ध हो गईं ! किस्मत का खेल !
बताओ भला 
संयोगवश, कांग्रेस के प्रतिनिधित्व वाले इस इलाके में 9 और 11 दिसंबर को होने वाले केरल के पंचायत चुनावों में कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में से एक श्रीमती सोनिया गाँधी का नामधारी, BJP का उम्मीदवार बन, सीधे कांग्रेस के ही उम्मीदवार से मुकाबला कर रहा है। अब देखने वाली रोचक बात यह है कि क्या सोनिया गांधी का नाम BJP के लिए फायदेमंद साबित होगा या वोटरों को सिर्फ भ्रमित करेगा ! परिणाम जो भी हो पर इस चुनाव ने एक ऐसे नाटिका का मंचन कर दिया है जिसके रिजल्ट का सभी को इंतजार रहेगा !
सच है 
परोक्त चुनाव के रिजल्ट के प्रतीक्षा के बीच ही एक और नाम में बहुत कुछ रखा है वाली बात हो गयी ! अपने बंगाल में दो-दो हुमायूं कबीरों को लेकर अफरा-तफरी मच गई ! मजे की बात यह कि दोनों TMC पार्टी के विधायक हैं ! एक मुर्शिदाबाद जिले से तो दूसरा डेबरा इलाके से ! कुछ दिनों पहले मुर्शिदाबाद वाले विधायक हुमायूं कबीर ने अपना एक धर्मस्थल बनवाने की घोषणा कर दी ! लोगों और समाज की ओर से पैसे और सहायता आनी शुरू हो गई !  
वही हो ना 
रेशानी तब शुरू हुई जब डेबरा वाले हुमायूं कबीर के फोन की घंटी इसी बाबत लगातार बजने लगी ! दूर-दूर से, अन्य परदेशों से लोग पैसा भेजने के लिए उससे बैंक एकाउंट न. या क्यू.आर कोड मांगने लगे ! वह बताते-बताते परेशान हो गया कि भाई मैं वो वाला हुमायूं कबीर नहीं हूँ ! वो मुर्शिदाबाद वाला हुमायूँ है, जिसे आप खोज रहे हैं ! पर फोन की घंटी है कि बजे जा रही है, बजे जा रही है ! क्योंकि उसके लिए तो नाम ही  कुछ रखा है ! 

@आभार अंतर्जाल 

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