pub-3648900737756323 कुछ अलग सा: कर्मठ
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शनिवार, 31 मई 2025

बिनोद का मुंगेरी वाला सपना

भइया जी, चाहे ऐसा ना भी हो, पर कम से कम ई तो होइहे सकता है कि विपच्छी दल का अनुभवी और निष्णात लोगन का सलाह, देश हित में जो भी सत्तारूढ़ दल हो, ले लिया करे ! अब देखिए ना, कोई भी सरकार बदल जाता है तो भी पुरनका अफसर लोग तो वहिऐं ना रहता है ! ऊ लोग तो पाटी नहीं देशे का सेवा ना करता रहता है ! वैसा ही नेता लोग काहे नहीं कर सकता है ?" 

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

डोर बेल बजी ! शाम के सात बजा चाह रहे थे, पर अभी भी बहुत गर्मी थी ! कौन आ गया, सोचते हुए दरवाजा खोला तो सामने बिनोद था ! उसे देख अच्छा लगा, बहुत दिनों बाद आया था ! उसके प्रणाम का जवाब देते-देते उसे अंदर लिवा लाया ! चाय बन ही रही थी, उस में थोड़ा सा मटेरियल और बढ़ा दिया गया ! सामयिक विषयों पर बातों के दौरान मुझे लग रहा था कि बिनोद के दिमाग में जरूर कुछ ना कुछ चल रहा है जो वह मुझसे साझा करना चाहता है ! 

मेरा अंदाजा बिलकुल सही था। चाय ब्रेक के तुरंत बाद ही वह शुरू हो गया ! 

भइया जी, अभी जो सिंदूर ऑप्रेशन के बाद अल्हदा-अल्हदा पाटी का नेता लोग को ले कर जो डेलिगेशनवा देश का पच्छ रखने के लिए बाहर भेजा गया है, ऊही से एक सवाल मन में उठता है कि देश का भलाई में जब ऐसा किया जा सकता है, तो फिर अपना देश का राजनीतिक दल एकाकार हो देश की अच्छाई के लिए काम क्यों नहीं कर सकता ? वैसे भी हम सब लोग देखा ही है कि अपना हित के लिए कई राज्य में घोर विरोधी भी आपस में हाथ मिलाता रहता है ! दुनिया की भलाई को देखते हुए अलग-अलग सोच वाला लोग भी मिल कर काम करने लगता है ! तो पाटी अपनी जगह है, अपना विचार अपनी जगह है पर जब देश का बात आता है तो देश का पाटी काहे एक नहीं हो जाता है ? अगर ऐसा हो जाए तो देश का विकास अऊर तेज हो सकता है ! देश का एकता मजबूत हो सकता है ! सबसे पहले तो देशे ही है ना ?"

मैं एकदम चौंक पड़ा ! आज के युवा की ऐसी सकारात्मक सोच देश के उज्जवल भविष्य की द्योतक है। सामान्य होने में कुछ क्षण लगे, फिर कहा, बिलकुल सही सोच रहे हो, बिनोद ! आजादी की शुरुआत में कुछ-कुछ ऐसा माहौल था भी, पर शायद लालसा, अहम या भिन्न विचारधाराओं के चलते नए-नए दल बनते गए और देश पिछड़ता गया !"

हाँ भइया जी, बहुते दिन से हम एही सोच रहे थे कि यदि ऐसा हो जाए तो टुच्ची राजनीति के दिन खत्मे हो जाएंगे ! मउका-परस्तों का दुकाने बंद हो जाएगा ! भयादोहन का नामोनिशान मिट जाएगा, अउर सबसे बड़का बात, पूरण बहुमत हो जाने से देश हित में तुरंत फैसला लिया जा सकेगा जो ओछी राजनीती के कारण टलता चला जाता रहता है !''

बिनोद ! भगवान करे तुम्हारी यह सोच निकट भविष्य में साकार हो जाए परंतु आज तो यह विचार मुंगेरी लाल के सपने की तरह ही है, क्योंकि आज हमारे देश के हर दल में कुछ ऐसे पूर्वाग्रही लोग विराजमान हैं जो अपने मतलब के ऊपर और कुछ नहीं देखते ! अपनी वर्षों पुरानी लीक छोड़ना नहीं चाहते ! अपनी सोच ही उन्हें सर्वोपरि लगती है ! उनके लिए देश गौण है !"

पर भइया जी, चाहे ऐसा ना भी हो, पर कम से कम ई तो होइहे सकता है कि विपच्छी दल का अनुभवी और निष्णात लोगन का सलाह देश हित में जो भी सत्तारूढ़ दल हो, ले लिया करे ! अब देखिए ना, कोई भी सरकार बदल जाता है तो भी पुरनका अफसर लोग तो वहिऐं ना रहता है ! ऊ लोग तो पाटी नहीं देशे का सेवा ना करता रहता है ! वैसा ही नेता लोग काहे नहीं कर सकता है ?" 

बिनोद ! यह सब कहने-सुनने में बहुत अच्छा लगता है ! पर यदि ऐसा होने लगेगा तो सत्तारूढ़ दल के अच्छे कामों के कारण उसकी लोकप्रियता बढ़ती ही चली जाएगी और यह बात विरोधी दलों को बिलकुल अच्छी नहीं लगेगी क्योंकि इसीके चलते उनका सत्ता में आने का अवसर कम होता चला जाएगा और आज के समय में सत्ता-विहीन रहना कौन पसंद करता है ! इसके अलावा मौकापरस्तों के द्वारा दल-बदल की संभावना भी बढ़ सकती है !"

(गहरी सांस).....आप बिलकुल ठीक कह रहे हैं, भइया जी ! अच्छाई के साथ दस ठो बुर्रइये भी साथे चला आता है। पर बुड़बक लोग ई नहीं समझता है कि देश है तभी इनका पाटी है !'' 

वही कह रहा हूँ ! रेगिस्तान में तो फिर भी पानी मिलने की उम्मीद हो सकती है पर फिलहाल इस विचार के फलीभूत होने की कोई भी संभावना अभी तो नहीं दिखती ! उस पर खेद इस बात का है कि जागरूकता बढ़ने के बावजूद हमारे स्वभाव, हमारी फितरत में कोई ज्यादा फर्क नहीं आ पाया है। 

जकल तो चलन ही हो गया है किसी के अच्छे काम में भी बुराई ढूंढना, मौका तलाशते रहना दूसरे की टांग खिंचाई का, चाहे इसके चलते खुद की ही  स्थिति हास्यास्पद क्यों ना हो जाए, चाहे देश की प्रतिष्ठा ही दांव पर क्यों ना लग जाए ! ऐसे परिवेश में वैसी एकता की बात तो दूर की क्या कहीं की कौड़ी भी नहीं लगती ! 

आज समय की मांग है कि हमें और सजग हो, समाज को जागरूक करना है ! अपने समर्पित, कर्मठ, योग्य, देश-हितकारी नायकों को पहचानने और उनका साथ देने और खड़े होने की जरुरत है ! आजके अधिकांश एक्सीडेंटल या छप्पर फाडू उपलब्धि वाले लोग नेता होने या कहलाने के लायक ही नहीं हैं ! जरुरत है ऐसे धूर्त और मक्कार लोगों की सच्चाई सामने लाने और उन्हें उनकी वाजिब औकात दिखा उन्हें दरकिनार करने की ! जरुरी नहीं है कि अपराधी को मार ही दिया जाए, उसकी जलालत, उसकी बेकद्री, उसकी अवहेलना, उसके लिए मौत से ज्यादा बदतर साबित हो सकती है !"

मु झको अपने अंदर एक तीखी सी कसमसाहट, एक छटपटाहट, जल्द कुछ ना कर पाने की बेचैनी, दिमाग पर एक अजीब सा बोझ महसूस हो रहा था, जो मेरी साँसों के साथ बाहर निकल कमरे में पसर कर वहां के माहौल में भी एक भारीपन तारी करने लगा था..........!  

इससे छुटकारा पाने का एक ही उपाय था ! सो फिर अंदर गुहार लगाई एक कड़क चाय के लिए   

शनिवार, 29 अक्टूबर 2022

शिव वाहन नंदी

जिस तरह गायों में कामधेनु श्रेष्ठ मानी जाती हैं वैसे ही बैलों में नंदी को श्रेष्ठ माना गया है। आम तौर पर बल और शक्ति के प्रतीक, शांत और खामोश रहने वाले बैल का चरित्र उत्तम और समर्पण भाव वाला माना जाता है। पर मोह-माया और भौतिक इच्छाओं से परे रहने वाला यह प्राणी जब क्रोधित होता है तो शेर से भिड़ने में भी नहीं कतराता ! शिवजी का वाहन नंदी पुरुषार्थ अर्थात परिश्रम का साक्षात प्रतीक है...........!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

जितने विलक्षण हमारे देवाधिदेव शिव जी हैं, उतना ही अनोखा उनका परिवार भी है ! फिर वो चाहे मूषक हो ! चाहे सिंह हो ! मयूर हो या फिर शिव जी के प्रमुख गण नंदी ही क्यों ना हो ! परिवार का हर सदस्य अपने आप में अद्वितीय है ! हो भी क्यों ना ! देवों के भी देव का सानिध्य, उनकी कृपा, उनका सदा का साथ यूं ही तो नहीं मिल जाता ! इन सब के साथ अपनी-अपनी अद्भुत कथाएं भी जुडी हुई हैं ! इनमें सब से शक्तिशाली गण नंदी जी हैं ! संस्कृत में 'नन्दि' का अर्थ प्रसन्नता या आनन्द है। नंदी को शक्ति-संपन्नता और कर्मठता का प्रतीक माना जाता है ! इनके प्रादुर्भाव की कथा भी बहुत अनोखी है !

शिवपुराण की एक कथा के अनुसार जब शिलाद मुनि ने योग और तप के लिए ब्रह्मचर्य का व्रत अपना लिया तो उनके पितर अपना वंश समाप्त होते देख चिंतित हो गए ! आपसी परामर्श के बाद, वंश वृद्धि के लिए उन्होंने शिलाद मुनि को इंद्र देव से वरदान स्वरुप पुत्र की कामना करने को कहा। अपने पितरों की आज्ञानुसार शिलाद मुनि ने संतान की कामना के लिए इंद्र देव को प्रसन्न कर ऐसे पुत्र का वरदान तो मांगा, साथ ही यह शर्त भी जोड़ दी कि वह बालक जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्त हो। इस पर इंद्र देव ने अपनी असमर्थता जाहिर कर उन्हें भगवान शिव के पास जाने की सलाह दी। इंद्रदेव की आज्ञा के अनुसार  शिलाद मुनि ने भगवान शंकर की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने शिलाद के पुत्र के रूप में अपने अंश के प्रकट होने का वरदान दिया। इसके कुछ समय के पश्चात ही हल जोतते हुए शिलाद मुनि को धरती से एक बालक की प्राप्ति हुई, जिसे शिव जी का वरदान मान उन्होंने उसका नाम नंदी रखा।   
जब नंदी कुछ बड़े हुए तब मित्र और वरुण नाम के दो ऋषि शिलाद मुनि के आश्रम आए ! उन्होंने नंदी के अल्पायु होने की बात बताई ! इससे शिलाद चिंतित हो गए ! उनकी चिंता का कारण जान नंदी हंसने लगे और कहा कि शिव जी की कृपा से आपने मुझे प्राप्त किया था, वही मेरी रक्षा करेंगे। इसके बाद नंदी ने भुवन नदी के किनारे शिव जी की कठिन तपस्या की। उनकी कठोर तपस्या और भक्तिभाव से प्रभु द्रवित हो गए और वर मांगने को कहा ! नंदी ने उम्र भर उनके सानिध्य में रहने की इच्छा जाहिर की। उनके समर्पण से शिवजी प्रसन्न हुए और उन्होंने नंदी जी को मृत्यु भय के साथ ही अन्य विभीषिकाओं से भी मुक्ति प्रदान कर माता पार्वती की सम्मति से गणों के अधिपति के रूप में अभिषेक कर नंदीश्वर का पद प्रदान कर उन्हें अपना वाहन और कैलाश पर अपने निवास का द्वारपाल नियुक्त कर दिया। 


एक बार शिव पार्वती के विहार के समय ऋषि भृगु उनके दर्शन करने आए तो नंदी जी ने बिना उनके क्रोध से डरे, निर्विकार रूप से उन्हें बाहर ही रोक दिया क्योंकि शिव-पार्वती जी की ऐसी ही आज्ञा थी। इससे ऋषि भृगु भी उनसे काफी प्रभावित हो गए ! इसी तरह जब रावण अपने अहम के चलते कैलाश पर्वत को उठाने की हिमाकत की थी तब भी नंदी ने क्रुद्ध होकर रावण को ऐसा जकड़ा कि लाख कोशिशों के बावजूद वह छूट नहीं पाया ! उसे मुक्ति तभी मिली जब उसने शिव जी की आराधना कर नंदी जी से क्षमा मांग अपनी गलती स्वीकार कर ली ! एक और कथा के अनुसार जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था, उस वक्त भगवान शिव ने हलाहल विष पीकर इस संसार को बचाया था ! उस समय विष की कुछ बूंदे जमीन पर गिर गई थीं, जिसे नंदी ने बिना अपनी  परवाह किए जगत की रक्षा हेतु जीभ चाट लिया था ! नंदी का ये समर्पण देखकर भगवान शिव ने उन्हें अपने सबसे बड़े भक्त की उपाधि दी और ये आशीर्वाद दिया कि उनके दर्शन से पहले लोग नंदी के दर्शन करेंगे। 
                                           
कुछ समय पश्चात नंदी जी का विवाह मरुतों की पुत्री सुयशा के साथ सम्पन्न करवा दिया गया ! उसी समय भगवान शिव ने उनको वरदान दिया कि जहां भी नंदी का निवास होगा, उसी स्थान पर मैं भी निवास करूंगा ! यही कारण है कि हर शिव मंदिर में नंदी की स्थापना की जाती है। जहां भी देवों के देव महादेव पूजे जाते हैं या उनका मंदिर होता है वहां नंदी का होना अवश्यम्भावी है। शिव की मूर्ति के सामने या मंदिर के बाहर शिव के वाहन नंदी की मूर्ति सदैव स्थापित होती है, जिसके नेत्र सदैव अपने इष्ट को देखते हुए उनका स्मरण करते रहते हैं। जिसका अर्थ है कि भक्ति के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्राणी को क्रोध, अहम, दुर्गुणों को पराजित करने का सामर्थ्य होना चाहिए। नंदी पवित्रता, विवेक, बुद्धि और ज्ञान के प्रतीक माने जाते हैं।


जिस तरह गायों में कामधेनु श्रेष्ठ मानी जाती हैं वैसे ही बैलों में नंदी को श्रेष्ठ माना गया है। आम तौर पर बल और शक्ति के प्रतीक, शांत और खामोश रहने वाले बैल का चरित्र उत्तम और समर्पण भाव वाला माना जाता है। पर मोह-माया और भौतिक इच्छाओं से परे रहने वाला यह प्राणी जब क्रोधित होता है तो शेर से भिड़ने में भी नहीं कतराता ! शिवजी का वाहन नंदी पुरुषार्थ अर्थात परिश्रम का साक्षात प्रतीक है।

नंदी जी का इस जगत को एक संदेश यह भी है कि जिस तरह वह भगवान शिव के वाहन है। ठीक उसी तरह हमारा शरीर आत्मा का वाहन है। जैसे नंदी की दृष्टि शिव की ओर होती है, उसी तरह हमारी दृष्टि भी आत्मा की ओर ही होनी चाहिए। हर व्यक्ति को अपने दोषों को देखना चाहिए। हमेशा दूसरों के लिए अच्छी भावना रखनी चाहिए ! तभी जीवन की सार्थकता है। 

@संदर्भ तथा चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

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