शनिवार, 22 मई 2010

अंडे, अजीब पर गरीब नहीं

पहले मुर्गी आई कि अंड़ा यह सवाल वर्षों से लोगों को सर खुजलाने पर मजबूर करता रहा है। अपन इस पचड़े में ना पड़ आज सिर्फ अंड़ों की बात करते हैं जो अपने-आप में बहुत सारे अजूबे समेटे रहते हैं।

कुछ सालों पहले एक वैज्ञानिक ने कौतुहलवश एक अंडे के चार टुकड़े कर फिर उसे जोड़ कर रख दिया। कुछ दिनों बाद उसे सुखद आश्चर्य का सामना करना पड़ा, जब उसने उस अंड़े से एक चूजे को बाहर निकलते देखा।

एक अंड़े में तकरीबन 1500 छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जो उसे (चूजे) आवश्यक आक्सीजन लेने में सहायता करते हैं।

सहारा के रेगिस्तान में एक मक्खी पायी जाती है जो उड़ते-उड़ते ही अंड़े देती है। इन अंड़ों के जमीन पर गिरते ही मक्खियां जन्म ले लेती हैं।

चिली में एक ऐसी मुर्गी की प्रजाति पाई जाती है जो चितकबरे अंड़े देती है।
आस्ट्रेलिया में एक लुप्तप्राय शतुर्मुर्ग का अंड़ा 40 साधारण मुर्गियों के अंड़ों के बराबर होता है, जिसे उबालने में ढाई से तीन घंटे लग जाते हैं तथा इतना मजबूत होता है कि 150 कि.ग्रा. का वजन आसानी से सह लेता है।

अंड़े सिर्फ गोलाई लिए ही नहीं होते। केलिफोर्निया की "हार्नशार्क" नामक मछली के अंडे स्क्रू की तरह के होते हैं।

@ अंड़ों से जुड़ी एक सोलह आने सच्ची घटना :-)
चार सौ मुर्गियों के पौल्ट्री फार्म में रोज अंड़ों की कम होती संख्या से गुस्साए रिटायर्ड़ मेजर ने एलान कर दिया कि कल से किसी भी मुर्गी ने दो अंड़ों से कम दिए तो उसे ही काट कर बेच दिया जाएगा। दूसरे दिन मेजर ने अपने सामने अंड़े गिनवाए तो आठ सौ एक अंड़े मिले। उसने नौकरों से पूछा किस मुर्गी ने एक अंड़ा कम दिया उसे बाहर निकालो। एक नौकर ने जवाब दिया, मालिक सभी मुर्गियों ने दो-दो ही अंड़े दिये हैं यह आठसौ एकवां तो अपने एकलौते मुर्गे ने आपके ड़र के मारे दे दिया है।

6 टिप्‍पणियां:

दिलीप ने कहा…

anda puraan bahut badhiya raha...

महफूज़ अली ने कहा…

बहुत बढ़िया...व जानकारीपूर्ण पोस्ट....

Udan Tashtari ने कहा…

मुर्गे को भी जान प्यारी है जी!!

बढ़िया जानकारी.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बढ़िया पोस्ट!

नीरज जाट जी ने कहा…

मुर्गे ने भी अण्डा दे दिया। जान प्यारी है भाई।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बेचारा मुर्गा, अजी जान किसे नही प्यारी होती?

विशिष्ट पोस्ट

कोई तो कारण होगा, धर्म स्थलों में प्रवेश के प्रतिबंध का !!

अभी कुछ दिनों पहले कुछ तथाकथित आधुनिक महिलाओं ने सोशल मिडिया पर गर्व से यह  स्वीकारा था कि माह के उन  कुछ ख़ास दिनों में भी वे मंदिर जात...