pub-3648900737756323 कुछ अलग सा: तस्वीरें, जो दिखता है उसके अलावा भी बहुत कुछ कहती हैं.

रविवार, 26 सितंबर 2010

तस्वीरें, जो दिखता है उसके अलावा भी बहुत कुछ कहती हैं.

पर मुझे कुछ नहीं कहना है ।









8 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

सुभान अल्लाह जी, सच मे तसवीरे बोलती है:)

anshumala ने कहा…

तस्वीरे बता रही है लिखने वाले का ज्ञान

P.N. Subramanian ने कहा…

काबुल की कहानी ही तो है. .

आचार्य ललित मुनि ने कहा…

ये तो बोलती तश्वीरें हैं
राज खोलती तश्वीरे हैं

आभार

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

आज मैं खुद ही हाजमौला लेकर बैठा हूं.:)

रामराम

Rohit Singh ने कहा…

हाहाहाहाहा ये तो राजधानी से लेकर देश के हर इलाके में फैले हुए हैं। इससे हास्य का परिवेश बनता है। इसलिए ऐसा लिखा जाता है हहाहाहहाहाहा

Chetan ने कहा…

mere pas bhi kuchh hai aisi hi photo. bhejata hun apko

अन्तर सोहिल ने कहा…

मजा आ गया जी
धन्यवाद

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