मंगलवार, 25 नवंबर 2008

ग्रहों की कहानी---------------४ :- मंगल

विभिन्न कल्पों में मंगल की उत्पत्ति की विभिन्न कथाएँ हैं। इनमें ज्यादा प्रचलित कथा इस प्रकार है। जब हिरण्यकशिपु का बड़ा भाई हिरण्याक्ष पृथ्वी को चुरा कर ले गया था तब भगवान ने वाराहावतार लिया और हिरण्याक्ष को मार कर पृथ्वी का उद्धार किया था। इस पर पृथ्वी ने प्रभू को पति रूप में पाने की इच्छा की। प्रभू ने उनकी मनोकामना पूरी की। इनके विवाह के फलस्वरूप मंगल की उत्पत्ति हुई। इनकी चार भुजाएँ हैं तथा शरीर के रोयें लाल रंग के हैं। इनके वस्त्रों का रंग भी लाल है। यह भेड़ के वाहन पर सवार हैं और इनके हाथों ने त्रिशूल, गदा, अभयमुद्रा तथा वरमुद्रा धारण की हुई है। पुराणों में इनकी बड़ी महिमा बताई गयी है। ये प्रसन्न हो जायें तो मनुष्य की हर इच्छा पूरी हो जाती है। इनके नाम का पाठ करने से ऋण से मुक्ति मिल जाती है। यदि इनकी गति वक्री ना हो तो यह हर राशि में एक-एक पक्ष बिताते हुए बारह राशियों को ड़ेढ़ वर्ष में पार करते हैं। इनको अशुभ ग्रह माना जाता है। इनकी महा दशा सात वर्षों तक रहती है। इनकी शान्ति के लिए शिव उपासना, मगलवार को व्रत और हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। ये मेष तथा वृश्चिक राशि के स्वामी हैं। इनका सामान्य मंत्र :- “ऊँ अं अंगारकाय नम:” है। इसके जाप का समय प्रात: काल का है। इसका एक निश्चित संख्या में, निश्चित समय में पाठ करना चाहिये। इस विषय में किसी विद्वान का सहयोग और परामर्श ले लेना चाहिये।
* अगला ग्रह :- बुध

8 टिप्‍पणियां:

P.N. Subramanian ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी. मंगल ग्रह पाप ग्रह तो है ही, मंगलवार को भी दक्षिण में अमंगलकारी दिवस माना जाता है. मंगलवार के दिन किसी के घर जाना भी अच्छा नहीं माना जाता. कलह, युद्ध आदि का प्रतीक बना दिया गया है.

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

वाह जी बहुत ही अच्‍छी जानकारी दी है ये सब तो हमें भी पता ही नहीं था धन्‍यवाद अच्‍छी जानकारी देने के लिए

Udan Tashtari ने कहा…

आभार इस जानकारीपूर्ण पोस्ट के लिए. आगे इन्तजार है.

Alpana Verma ने कहा…

bahut achchee aur nayee jaankari--

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

ग्रहोँ की जानकारी दिलचस्प लगी ..जारी रहे
- लावण्या

राज भाटिय़ा ने कहा…

आप ने तो बहुत ही सुंदर जानकारी दे दी,इस बारे हमे कुछ भी नही मालुम था.
धन्यवाद

Unknown ने कहा…

बाकई आपका ब्लाग अलग सा है. अच्छी जानकारी दे रहे हैं आप. धन्यवाद.

NARHARI PRASAD ने कहा…

नमस्कार । मै ज्योतिष का छात्र हुँ, क्या आप मुझे इन ग्रहो की कहानियों के मूल ग्रन्थ के बारे मे बता सकते है।

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