रविवार, 9 नवंबर 2008

ये पत्नियां

संता की माँ और बीवी में पटती नहीं थी । एक दिन बात ज्यादा बढ गयी तो माँ ने पूछा, अच्छा बेटा बता , यदि मैं और तेरी ये डूबने लगे तो तू पहले किसे बचायेगा? संता को पेशोपेश में पडा देख उसकी बीवी बोली, ज्यादा सोचो मत, अपनी माँ को बचा लेना। मुझे बचाने वाले बहुत मिल जायेंगे।

13 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

अरे क्या बात है.
धन्यवाद

Udan Tashtari ने कहा…

हा हा!! स्मार्ट बीबी!!

भवेश झा ने कहा…

sach, dhnyabad

शोभा ने कहा…

baat to sahi hi kahi hai. :)

mehek ने कहा…

ha ha bahut badhiya

अल्पना वर्मा ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
अल्पना वर्मा ने कहा…

ye to mazaak hua --lekin ek baat aap ko batayen--ek baar serious discussion ho raha tha--kuchh arab[egyptian/iraqi friends bhi thin hamare saath ---
un sey yah jaan kari mili--[yah ek SACH hai]---ki agar un ke culture mein biwi -maa-ya phir biwi aur bahan mein se kisi ek ko bachaana ho to wo sirf maa-aur bahan ko bachayengey-
-is ka kaaran detey hain--'they are blood related -if lost -one will not get them again'--whereas wife is from other family--one will get again[any other]'wife'----
-Ye Sach hai-'seriously sach' --mazaak nahin--

लोकेश ने कहा…

बढ़िया

जितेन्द़ भगत ने कहा…

:)

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

अच्छा िलखा है आपने ।
http://www.ashokvichar.blogspot.com

विष्‍णु बैरागी ने कहा…

हमारा वर्तमान अत्‍यधिक तनावग्रस्‍त हो गया है । हंसने के लिए भी हमें बहाने चाहिए । ऐसे में में आप सचमुच में नेक और बडा काम कर रहे हैं ।

makrand ने कहा…

bahut khub sir
kabhi humari dustbin me jhanke
regards

Abhishek ने कहा…

Vakai alag sa. Swagat mere blog par bhi.

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