जिन्दगी जीने के सबके अपने-अपने फलसफे हैं :-
* जीवन में कामयाब होने के लिए तीन कारखाने लगाने की जरूरत है :-
1) दिमाग में बर्फ का कारखाना।
2) जुबान पर चीनी का कारखाना।
3) दिल में प्यार का कारखाना।
* एक दिन सागर ने नदी से पूछा, "कब तक मिलती रहोगी मुझ खारे पानी वाले से?"
नदी ने जवाब दिया, "जब तक तुझ में मिठास न आ जाये तब तक" !!!
* एक पेड़ से एक लाख माचिस की तीलियां बन सकती हैं। पर सिर्फ एक माचिस की तीली एक लाख पेड़ों को जला कर राख कर सकती है। उसी तरह एक नकारात्मक सोच सैकड़ों सपनों का नाश कर देती है।
इसलिये सदा सकारात्मक सोच को दिमाग में जगह दें।
* एक दोस्त ने मुझसे पूछा ,तुम सबको ई-मेल भेजते हो ? तुम्हे क्या मिलता है? मैंने हंस कर कहा, देना लेना तो व्यापार है, जो देकर कुछ न मांगे, वो ही तो प्यार है।
* अपने गम को अपने चेहरे की मुस्कान के पीछे छुपाओ,
बातें करो पर अपना दुख ना बताओ,
खुद ना रूठो कभी पर सब को मनाओ,
यही राज है जिंदगी का बस ऐसे ही जीते जाओ।
इस ब्लॉग में एक छोटी सी कोशिश की गई है कि अपने संस्मरणों के साथ-साथ समाज में चली आ रही मान्यताओं, कथा-कहानियों को, बगैर किसी पूर्वाग्रह के, एक अलग नजरिए से देखने, समझने और सामने लाने की ! इसके साथ ही यह कोशिश भी रहेगी कि कुछ अलग सी, रोचक, अविदित सी जानकारी मिलते ही उसे साझा कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके ! अब इसमें इसको सफलता मिले, ना मिले, प्रयास तो सदा जारी रहेगा !
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6 टिप्पणियां:
1) दिमाग में बर्फ का कारखाना।
2) जुबान पर चीनी का कारखाना।
3) दिल में प्यार का कारखाना।
अपनी जिंदगी में उतारकर देखेंगे।
बहुत सुंदर शर्मा जी लेकिन यह सब के लिये मुस्किल है जी....
शर्मा जी तीनो कारखाने लग जायें तो ये नही अगला जनम भी सुधर जाये।बहुत सही सलाह,कोशिश करेंगे मानने की,फ़िलहाल तो दिमाग में भट्ठी,ज़ुबान पर मिर्ची पाऊडर का ही कारखाना हैं।हां दिम मे ज़रुर प्यार भरा हुआ है,शायद इसिलिये टिके हुये हैं।
बहुत प्रेरणादायक पोस्ट...पढ़ना अच्छा लगा....बधाई
बहुत ही अच्छी लगी आपकी सब बातें ... सार्थक लेखन है ... काश हम ऐसा कर पाते ...
मुश्किल तो बहुत है। जब दिमाग में गुस्से का धूंआ भरता है तो फिर कुछ नहीं सूझता। पर दिन में एक बार तो कोशीश करी जा सकती है। शायद कोशीशें रंग ले ही आएं।
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