शनिवार, 21 नवंबर 2009

जब पैसा आता है, तो दिमाग कहाँ चला जाता है ?

पैसा, शोहरत या सत्ता के आते ही उससे मिली ताकत को लोग संभाल नहीं पाते। पता नहीं दिमाग में कैसा "लोचा" आ जाता है कि वह अजीबोगरीब हरकतें करवाने लग जाता है। इस तरह मिले मद को पचा नहीं पाता। शोहरतिये की तो छोड़िये उसके साथ के लगे-बंधे ही अपने आप को दूसरी दुनिया का समझने लगते हैं। उनके और उनके चाहने वालों के बारे में अखबारों में अक्सर कुछ ना कुछ छपता रहता है, वहीं से कुछ "नमूने" देखिये :-
एक मंत्रीजी हवाई दौरे पर थे। एक जगह नीचे उन्हें कुछ लोग नज़र आए तो उन्होंने वहीं अपना हेलीकाप्टर उतरवाने की जिद की। चालक के लाख समझाने पर भी उन पर कोई असर नहीं हुआ, तो सबकी जान जोखिम में डाल खेतों में काप्टर उतारना पड़ा। लदा हुआ इंसान जनता का सेवक जो था।

एक ऐसे ही सेवक के लिये उनके पिच्छलगू हाथी ही ले आये थे, हेलीपैड तक। पायलट पर क्या बीती होगी।

एक बार अपने आराध्य महोदय के लिये उनके चमचों ने हेलीपैड पर कालीन ही बिछा दिया था, कि कहीं प्रभू के पैर गंदे ना हो जायें (मन का क्या है) वह तो चालक ने दूर से देख लिया नहीं तो कालीन ने धरा का भार कुछ हल्का कर ही देना था।

ऐसा नहीं है कि हमारे देश में ही धन मति फेर देता हो, दुनिया भर में ऐसे असंयमियों के किस्से सुने जा सकते हैं।
स्पेन में सागर के सामने खड़े एक भव्य होटल में एक भद्र पुरुष को समुंद्र की आवाज से इतनी परेशानी हुई कि उन्होंने वहां के स्टाफ को बुला उसकी आवाज बंद करवाने का आदेश दे डाला।

स्पेन में ही एक सज्जन को अपने होटल का बिस्तर कुछ ऊंचा लगा तो उन्होंने पलंग के पाये ही कटवाने का हुक्म दे दिया। यह अलग बात है कि प्रबंधन ने शालिनता से ऐसा कर पाने में अपनी असमर्थता जाहिर कर दी।

7 टिप्‍पणियां:

Chetan ने कहा…

ghaas charane. ha ha ha ha

Dr. Shreesh K. Pathak ने कहा…

ताले में....जी...!!!

राज भाटिय़ा ने कहा…

अजी दुनिया मै पागलो की कमी थोडे है, आज कल तो मंत्रियो की कुर्सी पर भी बेठे है कुछ

दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

वो फाइवस्टार में लंच करने जाता है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

"जब पैसा आता है,
तो दिमाग पर उल्लू सवार हो जाता है!"

अविज्ञात परमहंस ने कहा…

तो मुझे इश्वर की कृपा की याद आती है

Batangad ने कहा…

पैसा बोलता है तो, दिमाग की आवाज दब जाती है

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