कंपनी को ऐसे विज्ञापन ही बनवाने चाहिए जिनमें यह संदेश हों कि आपकी अत्यधिक व्यस्तता के समय हम आपकी भोजन संबंधी परेशानियों को दूर करते हैं.........!
#हिन्दी_ब्लागिंग
आज कंप्यूटर गेम, फ़ास्ट फूड, मोबाईल फोन की लत बच्चों और युवाओं में उस हद तक जा पहुंची है जिसके बहुत ही गंभीर परिणाम हो सकते हैं। विशेषज्ञों तथा डाक्टरों का मानना है कि समय रहते इससे छुटकारा पाना बहुत जरुरी है नहीं तो बात हाथ से निकल सकती है ! पर एक तरफ जहां लोगों में जागरूकता लाने की कोशिश की जा रही है, वहीं कुछ ऐसे लोग और कंपनियां हैं, जो इस बात को गंभीरता से नहीं ले रहे ! ऐसी ही एक कंपनी है #SWIGGY.
#हिन्दी_ब्लागिंग
आज कंप्यूटर गेम, फ़ास्ट फूड, मोबाईल फोन की लत बच्चों और युवाओं में उस हद तक जा पहुंची है जिसके बहुत ही गंभीर परिणाम हो सकते हैं। विशेषज्ञों तथा डाक्टरों का मानना है कि समय रहते इससे छुटकारा पाना बहुत जरुरी है नहीं तो बात हाथ से निकल सकती है ! पर एक तरफ जहां लोगों में जागरूकता लाने की कोशिश की जा रही है, वहीं कुछ ऐसे लोग और कंपनियां हैं, जो इस बात को गंभीरता से नहीं ले रहे ! ऐसी ही एक कंपनी है #SWIGGY.
इसे अपने विज्ञापनों पर जरूर गौर करना कीजिए -
1) एक माँ अपने बेटे के साथ अपने घर में मोबाइल गेम खेल रही है। दोनों के हाव-भाव ऐसे हैं जैसे कोई जंग लड़ रहे हों ! खेलते-खेलते बेटा कहता है कि "माँ भूख लगी है !'' माँ स्विगी को फोन करती है और कुछ ही देर में किसी रेस्त्रां से उनके यहां खाना पहुँच जाता है।
2) एक कुछ ओवरवेट माँ टी.वी. के सामने खड़े हो बेतरतीब तरीके से उसमें दिखाई जा रही कसरत को दोहरा रही है ! इतने में उसकी बेटी आ पूछती है "माँ खाने में क्या है ?'' महिला दसियों आयटम गिना कर कहती है ''कुछ भी मंगा लो !'' वहाँ भी कुछ ही देर में स्विगी से खाना पहुंच जाता है। एक तरफ तो मोहतरमा अपनी सेहत को ले चिंतित हैं पर दूसरी ओर उनको बाहर के खाने का चस्का भी है।
3) इसी के एक विज्ञापन में तीन पीढ़ियां अपने सर में तेल लगवा रही हैं और ख़ास व्यंजन की याद आते ही स्विगी हाजिर हो जाता है। यह कुछ-कुछ युक्तिसंगत लगता है कि यदि समय कम है तो हमें याद करें। मेरे ख्याल से कंपनी को ऐसे विज्ञापन ही बनवाने चाहिए जिनमें यह संदेश हों कि आपकी अत्यधिक व्यस्तता के समय हम आपकी भोजन संबंधी परेशानियों को दूर करते हैं।
ऐसे विज्ञापनों से ऐसा भी लगता है जैसे हिदायतें सिर्फ आम जनता को देने की एक खानापूर्ति है ! उसको गंभीरता से कोई नहीं लेता और ना हीं उसे प्रभावी तौर पर लागू करवाने की किसी की कोई मंशा होती है ! जबकि देश के हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी का अहसास, समाज के प्रति अपना उत्तरदायित्व तथा आने वाली पीढ़ी की भी चिंता होनी चाहिए !
ऐसे विज्ञापनों से ऐसा भी लगता है जैसे हिदायतें सिर्फ आम जनता को देने की एक खानापूर्ति है ! उसको गंभीरता से कोई नहीं लेता और ना हीं उसे प्रभावी तौर पर लागू करवाने की किसी की कोई मंशा होती है ! जबकि देश के हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी का अहसास, समाज के प्रति अपना उत्तरदायित्व तथा आने वाली पीढ़ी की भी चिंता होनी चाहिए !















































