कभी-कभी कुछ अजीब सी स्थिति बन जाती है हमारी। उस समय तो कोफ्त ही होती है। पर ऐसा क्यों होता है कि :-
* जब आप घर में अकेले हों और नहा रहे हों तभी फ़ोन की घंटी बजती है।
* जब आपके दोनों हाथ तेल आदि से सने हों तभी आपके नाक में जोर की खुजली होती है।
* जब भी कोई छोटी चीज आपके हाथ से गिरती है तो वहाँ तक लुढ़क जाती है जहाँ से उसे उठाना कठिन होता है।
* जब भी आप गर्म चाय या काफ़ी पीने लगते हैं तो कोई ऐसा काम आ जाता है जिसे आप चाय के ठंडा होने केपहले पूरा नहीं कर पाते।
* जब आप देर से आने पर टायर पंचर का बहाना बनाते हैं तो दूसरे दिन सचमुच टायर पंचर हो जाता है।
* जब आप यह सोच कर कतार बदलते हैं कि यह कतार जल्दी आगे बढेगी तो जो कतार आपने छोडी होती हैवही जल्दी बढ़ने लगती है।
मर्फी के "ला" को छोडिये। यह बताईये ऐसा होता है क्या ? :-)
* जब आप घर में अकेले हों और नहा रहे हों तभी फ़ोन की घंटी बजती है।
* जब आपके दोनों हाथ तेल आदि से सने हों तभी आपके नाक में जोर की खुजली होती है।
* जब भी कोई छोटी चीज आपके हाथ से गिरती है तो वहाँ तक लुढ़क जाती है जहाँ से उसे उठाना कठिन होता है।
* जब भी आप गर्म चाय या काफ़ी पीने लगते हैं तो कोई ऐसा काम आ जाता है जिसे आप चाय के ठंडा होने केपहले पूरा नहीं कर पाते।
* जब आप देर से आने पर टायर पंचर का बहाना बनाते हैं तो दूसरे दिन सचमुच टायर पंचर हो जाता है।
* जब आप यह सोच कर कतार बदलते हैं कि यह कतार जल्दी आगे बढेगी तो जो कतार आपने छोडी होती हैवही जल्दी बढ़ने लगती है।
मर्फी के "ला" को छोडिये। यह बताईये ऐसा होता है क्या ? :-)