गुरुवार, 3 अप्रैल 2025

मच्छरदानी, इंसान की एक छुद्र कीट से मात खाने की निशानी

एक तरफ दुनिया भर में जंगली, खतरनाक, दुर्लभ, मासूम, हर तरह के जानवरों को पिंजरों में बंद कर विश्व के सबसे खतरनाक जानवर इंसान के दीदार के लिए रखा जाता है ! दूसरी तरफ वही इंसान एक अदने से कीड़े से बचने के लिए खुद को मसहरी नुमा पिंजरे में बंद कर अपनी जान की हिफाजत करने पर मजबूर हो जाता है ! वह भले ही ग्रहों के पार जाने की जुगत भिड़ा चुका हो, पर मच्छर भाऊ ने उसके ग्रहों की दशा अभी भी दिशाहीन ही कर के रखी हुई है.................!  

#हिन्दी_ब्लागिंग 

कुछ सालों पहले तक बंगाल के भद्र-लोक के व्यक्तित्व का, रहन-सहन का जिक्र होते ही धोती-कुर्ता, छाता, सिगरेट, चाय, घर का अपना पोखर जैसी चीजों का उल्लेख भी प्रमुख रूप से हो ही जाता था ! परंतु ऐसी चर्चा करने वाले पता नहीं क्यों उस एक चीज को भुला देते थे जो वहां के तकरीबन हर घर में पाई जाती थी, जिसका नाम है मसहरी ! हो सकता है कि एक छुद्र कोटि के निम्न कीट से अपनी हार की निशानी को ज्यादा मशहूरी दे कर हम अपनी बची-खुची नाक की और बेइज्जती नहीं होने देना चाहते हों ! इसलिए उसका जिक्र ना करते हों !

मसहरी 

म सहरी, मच्छरदानी, मशारी, मॉस्किटो नेट ! एक अति छुद्र-कीट, मच्छर से बचने का एकमात्र फुलप्रूफ साधन ! मच्छर, विश्व भर में तकरीबन हर साल करीब 20-25 करोड़ लोगों को अपने खूनी पंजे में फंसा, उनमें से अधिकतर को जहन्नुम रसीद कर देता है ! और अब तो यह बात जग-जाहिर सी हो चुकी है कि इंसान माने या ना माने उससे एक तरह से हार स्वीकार कर चुका है ! इंसानी ईजाद की कोई भी चीज धुंआ, स्प्रे, केमिकल कुछ भी उस अस्थि विहीन, तकरीबन भार हीन कीट से पार नहीं पा सकी है ! उलटे यह अभी भी जमीनी आत्माओं का मिलन परमात्मा से बेहिचक करवाए जा रहा है ! इसने इतने लोगों को ऊपर पहुंचा दिया है, जितने मनुष्य के आपसी युद्ध भी नहीं कर पाए हैं ! इस खतरनाक बला के खौफ का आलम तो यह है कि इससे मुक्ति की परिकल्पना को साकार करने के लिए हमें वैश्विक स्तर पर हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाना पड़ता है !

 खतरनाक कीट 
ऐसे में यह मसहरी ही है जो हमें इस दुर्दांत शत्रु से किसी हद तक बचाती आ रही है ! मनुष्य जाति को तो इसके आविष्कारक के नाम कोई नोबल पुरुस्कार जैसा कुछ घोषित कर देना चाहिए ! वैसे इसका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है ! कहते हैं कि क्लियोपेट्रा के शयन कक्ष में भी इसका उपयोग होता था ! भारत तथा ग्रीस के पुराने दस्तावेजों में भी इसका उल्लेख मिलता है ! समय के साथ-साथ इसके रूप-रंग-आकार-प्रकार में भी तरह-तरह के बदलाव आए हैं ! फैशन के अनुसार इसने भी अपने को ढाल लिया है !

डिजायनर 
एक तरफ दुनिया भर में जंगली, खतरनाक, दुर्लभ, मासूम, हर तरह के जानवरों को पिंजरों में बंद कर विश्व के सबसे खतरनाक जानवर इंसान के दीदार के लिए रखा जाता है ! दूसरी तरफ वही इंसान एक अदने से कीड़े से बचने के लिए खुद को मसहरी नुमा पिंजरे में बंद कर अपनी जान की हिफाजत करने पर मजबूर हो जाता है ! कहते हैं ना कि भगवान सभी को ठिकाने से लगाए रखता है !

बिना भेदभाव सुरक्षा 
जो भी हो मसहरी का तो हमें सदा अहसानमंद रहना होगा ! जो बिना भेदभाव अमीर-गरीब, आबालवृद्ध, स्त्री-पुरुष सभी को बीमार पड़ने से बचाती है ! एक बार घर आ जाए तो वर्षों साथ निभाती है। सोने के पहले इसको लगाने की जरा सी जहमत जरूर होती है पर उसके बाद इसके अंदर परिवार ऐसे निश्चिंत हो सोता है, जैसे किसी किले में सुरक्षा प्राप्त हो

बेफिक्री की नींद 
सो चता हूँ, इंसान को मसहरी में सुरक्षित सोता देख मच्छर क्या सोचता होगा ? जाल की दीवारों पर सर पटक-पटक कर भिनभिनाता होगा, अरे मेरे पेट पर लात मार चैन से सो रहा है ! अच्छा बेटा अभी तो सो ले ! सुबह तो बाहर आएगा ! बहुत शौक है ना शाम को टहल कर सेहत बनाने का, तब देखूंगा तुझे ! देखता हूँ उस बराबर की जंग में कौन जीतता है !

कुछ भी हो इंसान भले ही ग्रहों के पार जाने की जुगत भिड़ा चुका हो, पर मच्छर भाऊ ने उसके ग्रहों की दशा अभी भी दिशाहीन ही कर के रखी हुई है !  

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से  

@मशक में कौन सा खतरनाक होता है, सभी जानते हैं 😀 

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