शनिवार, 25 सितंबर 2010

कहते हैं तस्वीरें बोलती हैं, पर कौन सी भाषा :-)

कहते हैं तस्वीरें बोलती हैं। लो कर लो बातआप तो आनंद लीजिए इन बेंगलुरू तस्वीरों का। समझ में आए तो समझाने का कष्ट करें :-)





आज इतनी ही पचाईये कल कुछ और गरीष्ट का इंतजाम करता हूँ।



12 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

डॉक्टर हो साथ में थे कुछ भी पच सकता है। अब तो आकुलता बढ गई है। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
फ़ुरसत में ….बड़ा छछलोल बाड़ऽ नऽ, आचार्य परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पढिए!

P.N. Subramanian ने कहा…

काबुल में भी गधे पाए जाते हैं.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

गरीष्ठ के साथ कुछ हाजमौला की शीशी भी दे देते तो पचाने में आसानी होती.:)

रामराम

राज भाटिय़ा ने कहा…

मेरा तो सर चकरा गया, वेसे गधे तो हमारे देश मै भी बहुत है:)

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बढ़िया है ..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत खूब!

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

SAARE CHITR KAMMAL KE HAIN AUR BAHUT KUCH BOL RAHE HAIN.....

ललित शर्मा ने कहा…


हा हा हा , ये मेरा इंडिया

बेहतरीन बधाई

तेरे जैसा प्यार कहाँ????
आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

अजय कुमार ने कहा…

ईश्वर सद्बुद्धी दे

kase kahun?by kavita. ने कहा…

bahut khoob.....ab aur kya kahe??kam to chal hi raha hai na....

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

तस्वीरें तो अपना काम कर रही है..मेरी ही समझ में कुछ नही आया...

अन्तर सोहिल ने कहा…

NO ENTERY
DISTANCE ME
PROGRESS IN WORK

हा-हा-हा
ही-ही-ही
सचमुच बोलती हैं जी

प्रणाम