मंगलवार, 14 सितंबर 2010

लागोस से ई-मेल पर मिली एक मार्मिक घटना का ब्योरा. एक नजर जरूर डाल लें

जिस मित्र ने यह ब्योरा भेजा है उनका कहना है कि यह सच्ची घटना है। इसे मैंने कल पोस्ट किया था पर मुझे लगा कि इसे ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहिए इसीलिए आज फिर आपके सामने रख रहा हूँ।
अन्यथा न लें।

शनिवार का दिन था। मैं कुछ सामान लेने ‘बिग बाजार’ गया हुआ था।वहीं एक खिलौने की दुकान पर दुकानदार और एक 6-7 साल के बच्चे की बातचीत सुन कर ठिठक गया। दुकानदार बच्चे से कह रहा था कि बेटा तुम्हारे पास इस गुड़िया को लेने के लिए प्रयाप्त पैसे नहीं हैं। बच्चा उदास खड़ा था। तभी मुझे वहां देख वह मेरे पास आया और अपने पैसे मुझे दिखा पूछने लगा, अंकल क्या यह पैसे कम हैं? मैंने उसके पैसे गिने और उसके हाथ में पकड़ी गुड़िया की कीमत देख उससे कहा, हां बेटा पैसे तो कम हैं। फिर उससे पूछा तुम यह गुड़िया किस के लिए लेना चाहते हो? उसने जवाब दिया इसे मैं अपनी बहन को उसके जन्म दिन पर देना चाहता हूं। मैं इसे ले जा कर अपनी मम्मी को दूंगा जो मेरी बहन के पास जा रही है। बोलते-बोलते उसकी आंखों में आंसू भर आए। वह कहता जा रहा था, मेरी बहन भगवान के पास चली गयी है और मेरे पापा ने बताया है कि मेरी मम्मी भी जल्दी ही उसके पास जा रही है। तो यह गुड़िया अपनी बहन के पास भेजनी है। मैं पापा से कह कर आया हूं कि जब तक मैं वापस ना आऊं, मम्मी को जाने मत देना।
यह सब सुन मैं धक से रह गया। इतने में उसने अपना एक सुंदर सा फोटो निकाला जिसमें उसके हंसते हुए की तस्वीर थी। मुझे दिखा कर बोला इसे भी मैं गुड़िया के साथ भेजुंगा जिससे मेरी बहन मुझे याद रख सके। मैं अपनी मम्मी से बहुत प्यार करता हूं वह मुझे छोड़ कर जा रही है मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा है पर वहां मेरी बहन भी अकेली है। उसने फिर हाथ में पकड़ी गुड़िया को देखा और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। मैंने उससे छिपा कर अपना पर्स निकाल कर कुछ पैसे अपनी मुट्ठी में ले लिए और उससे कहा कि आओ एक बार फिर पैसे गिन कर देखते हैं। उसने अपने पैसे मेरी ओर बढा दिए। मैने अपने पैसे भी उन पैसों में मिला दिए। इस बार गिनने पर रकम गुड़िया की कीमत से कुछ ज्यादा ही निकली। यह देख बच्चा बोला मैं जानता था कि भगवान जरूर पैसे भेजेंगे। कल रात ही मैंने गुड़िया खरीदने के लिए उनसे पैसे भेजने की प्रार्थना की थी। मेरी मम्मी को सफेद गुलाब बहुत अच्छे लगते हैं पर उसके लिए मैंने भगवान से पैसे नहीं मांगे मुझे ड़र था कि ज्यादा मांगने से वे नाराज हो जाएंगे पर उन्होंने अपने आप ही और पैसे भेज दिए।

उस दिन मैं और कोई काम नहीं कर पाया और घर वापस आ गया। तभी मुझे दो दिन पहले स्थानीय अखबार में छपी एक खबर की याद आयी जिसमें बताया गया था कि एक शराबी ट्रक चालक ने हाई-वे पर एक कार, जिसमें एक युवती और एक बच्ची सवार थी, को रौंद ड़ाला था। बच्ची की वहीं मृत्यु हो गयी थी और युवती कोमा की हालत में अस्पताल में दाखिल थी।
क्या यही वह परिवार तो नहीं?

दूसरे दिन की अखबार में उस युवती की मौत का समाचार था। मैं अपने को रोक नहीं पाया और सफेद गुलाबों का एक गुच्छा लेकर अखबार में दिए गये पते पर चला गया। वहां अंतिम यात्रा की तैयारियां हो रही थीं। एक ताबूत में एक युवती का शव अंतिम दर्शनों के लिए रखा हुआ था। युवती के एक हाथ में एक सफेद गुलाब का फूल था, उसकी बगल में एक गुड़िया रखी हुए थी तथा उसके सीने पर उसी बच्चे की हंसती हुई तस्वीर पड़ी थी। मैं अपने आंसू नहीं रोक पा रहा था, पुष्प गुच्छ चढा तुरंत वहां से निकल आया।

सोच रहा था कि कैसे एक लापरवाह शराबी की शराब की लत ने उस मासूम बच्चे, जिसे मौत का अर्थ भी नहीं मालुम, उसका अपनी मां से लगाव अपनी बहन से प्यार और एक हंसते खेलते परिवार को पल भर में बर्बाद कर रख दिया।

कब समझेंगे लोग शराब की बुराईयां?
कम से कम गाड़ी चलाते समय अपने और दूसरों के परिवार का तो ख्याल करें।

7 टिप्‍पणियां:

anshumala ने कहा…

कहानी काफी दर्दनाक है और अफसोसजनक भी लोग गाड़ी चलाते समय इतनी लापरवाही क्यों दिखाते है ये लापरवाही उनकी भी जान ले सकता है |

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

मार्मिक. काश ये झूठ हो.

ajit gupta ने कहा…

मार्मिक घटना। शराब को हमने इतना महिमा मण्डित कर दिया है कि प्रत्‍येक युवा इसकी तरफ आकर्षित हो रहा है फिर विदेश में तो बहुत ही चिन्‍तनीय स्थिति है।

शिवम् मिश्रा ने कहा…


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से, आप इसी तरह, हिंदी ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

arvind ने कहा…

maarmik...kash ye report jhuth hotaa....

Krishna Baraskar ने कहा…

bahut hi sanvedansheel ghatna hai .. aankho me aansu laa gayee..

anjule shyam ने कहा…

kya bolun juban band hai.......
kafi der tak ye mujhe andar hi andar hilati rahegi..