रविवार, 30 मई 2010

यकीन नहीं होता कि नूरा जैसे लोग होते हैं ?

आज रवीवार है। आज आपको एक प्यारे से भोले से बंदे के बारे में बताता हूं। इनका नाम है नूरा। ये बड़े पिंड के रहने वाले हैं। इनकी खासीयत है कि ये जो भी काम हाथ में लेते हैं उसे पूरा करते हैं। चाहे कुछ भी हो जाए। चाहे लोग मजाक बनाएं या हसीं उड़ाएं ये मस्त रहते हैं।

आपको यह जान कर आश्चर्य होगा कि इनके भोलेपन से एक ऐसा चुटकुला बन गया जिसको भाई लोगों ने जगह और किरदार बदल-बदल कर सैंकड़ों बार सैंकड़ों जगह फिट कर दिया है। पर असल में हुआ यह था कि ये जहां रहते हैं वहां अभी भी यात्री बस दिन में चार बार ही गुजरती है तो लोग उनके नंबर वगैरह से नहीं उनके क्रम से ही उन्हें अपनी सुविधानुसार काम में लेते हैं। पहली, दूसरी, तीसरी ईत्यादि के रूप में।

तो जनाब एक बार नूराजी के कोई संबंधी दिल्ली के मूलचंद अस्पताल में भर्ती थे। इन्हें आना पड़ा था। ये नई दिल्ली स्टेशन से पूछते पूछाते क्नाट प्लेस आए और वहां से एक आफिस जाते इंसान ने इन्हें बताया कि 342 नं की बस मूलचंद अस्पताल जाएगी। शाम को उसी आदमी ने अपने दफ्तर से लौटते हुए इनकी खास भेषभूषा की वजह से इन्हें पहचान और वहीं खड़े देख पूछा कि आप अभी तक यहीं खड़े हो तो तो इन्होंने खुश हो कहा कि बस 340 बसें निकल गयी हैं मेरी वाली भी आती होगी।

और यह पहली बार नहीं हुआ था। युवावस्था का सूर्य उदय होते-होते इन्हें एक कन्या अच्छी लगने लगी थी। पर वह इन्हें टरकाती रहती थी। इनके भोलेपन का फायदा उठा अपनी जरूरतें पूरी करती रहती थी। पर जब इनके प्रस्ताव बढने लगे तो उसने एक फरमाइश रख दी कि मुझे "क्रोकोडाइल बूट" ला कर दो तब मैं तुम्हारी बात सुनुंगी। अब क्या था नूराजी चल दिए जंगल के दलदल की ओर। एक दिन, दो दिन हफ्ता बीत गया। घर में हड़कंप मच गया कि लड़का गया तो कहां गया। खोज खबर हुई तो बात का पता चला। सब लोग जंगल पहुंचे तो देखते क्या हैं कि आठ-दस मगरमच्छ मरे पड़े हैं और नूरा एक और पर निशाना साधे बैठा है। लोगों ने कहा अरे तू कर क्या रहा है ? तो पता है इन्होंने क्या जवाब दिया, अरे मुझे इनके बूट चाहिये थे और ये सारे के सारे नंगे पैर ही घूम रहे हैं।
अब बताइये इतना भोला इतना लगन का पक्का इंसान आपने देखा है कभी। क्या ! देखा नहीं सिर्फ सुना है। ऐसा, तो चलिए इस बार चलते हैं बड़े पिंड।

6 टिप्‍पणियां:

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

वाह!! यह भी खूब रही!....रोचक पोस्ट।

दिलीप ने कहा…

ha ha ha ishq ho ar insaan bhola ho to jaane kya kya ho jaaye

मो सम कौन ? ने कहा…

ना जी, पहले नहीं देखा सुना ऐसा बंदा, मजा आ गया जानकर।
और किस्से सुनाओ जी इनके।

राज भाटिय़ा ने कहा…

वल्ले वल्ले कर दी आप के नूरा ने जी, बोतल जितना मजा आ गया

Udan Tashtari ने कहा…

वाह रे नूरा...गजब कर डाला.

पलक ने कहा…

सच ! अभी पुरुष में इतनी ताकत नहीं, जो मेरा सामना करे, किसमें है औकात ? http://pulkitpalak.blogspot.com/2010/05/blog-post_31.html मुझे याद किया सर।

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