बुधवार, 19 मई 2010

क्या पान खाना स्वास्थ्यप्रद है?

पान का सेवन हमारे यहां सैकड़ों वर्षों से होने के प्रमाण मिलते हैं। खास-खास अवसरों पर या आदर-सत्कार में तो इसका चलन तो है ही। किसी बड़े या कठिन काम के लिए भी इसका बीड़ा दिया जाता रहा है। पर कहीं-कहीं यह व्यसन की सीमा तक भी जा पहुंचा है।

आयुर्वेद में भी इसके उपयोग का जिक्र मिलता है जहां इसे "तांबूल या नागरबेल" का नाम दिया गया है। इसके अनुसार इसके खाने से मुख की स्वच्छता, खाने में रुचि तथा मुंह दुर्गंध रहित रहता है।

आजकल तो पान में तरह-तरह के मसाले, तंबाकू, किमाम और ना जाने किन-किन चिजों का इस्तेमाल होने लगा है जिनका दीर्घकाल तक सेवन स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालता है। पान का सेवन बिना किसी नशीले पदार्थ के होना चाहिए। इसमें चूने, कत्थे की उचित मात्रा के साथ-साथ जायफल, सुपारी, इलायची और लौंग का उपयोग किया जा सकता है। इसे मुंह में रख धीरे-धीरे चबाना चाहिए तथा इससे जो रस बने उसे निगलते रहना चाहिए। सुपारी का भी ज्यादा उपयोग ना ही हो तो बेहतर है।

पान का सेवन बेस्वाद मुख को ठीक करता है, जीभ साफ रखता है, दांतों व जबड़ों के लिए फायदेमंद रहता है तथा गले के लिए भी उपयोगी है। इसका उपयोग सुबह मुंह साफ करने के बाद भोजनोपरांत तथा रात के खाने के बाद किया जाना चाहिए।
पर कुछ परिस्थितियों में पान खाना निषिद्ध कहा गया है -
जब नाक, मुंह, कान, गुदा से खून आता हो।
अत्यधिक थकान में।
गश आते हों तो।
गले में या शरीर में सूजन हो तो।
आंखें आयी हुई हों तो।
तथा गरम प्रकृति के व बहुत कृशकाय व्यक्ति को इसके सेवन से बचना चाहिए।

तो चलिए एक पान हो जाए.....

6 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

@पान का सेवन बेस्वाद मुख को ठीक करता है, जीभ साफ रखता है, दांतों व जबड़ों के लिए फायदेमंद रहता है तथा गले के लिए भी उपयोगी है।
--- चलिए एक तो अच्छा काम कर रहा हूं, सालों से।
@ तो चलिए एक पान हो जाए.....
==== क्यों नहीं! ये लीजिए .... अहा!

माधव ने कहा…

पापा ने एक जगह पढ़ा था की पान खाना उच्च भारतीय परम्परा है पर पान खाकर इधर उधर थूक कर असभ्य्यता का परिचय ना दे , पीकदान में ही थूके

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर जानकारी जी. धन्यवाद

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बढ़िया जानकारी!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

लेकिन हमें तो नहीं खाना...

Arshad Ali ने कहा…

पान से सम्बंधित जानकारी के लिए धन्यवाद
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