गुरुवार, 2 जुलाई 2009

जगह-जगह लिखे निर्देशों या चेतावनियों पर ध्यान न दें, बिंदास रहें

हमारे देश में जगह-जगह तरह-तरह की सलाहें, चेतावनियां और निर्देश लिखे मिल जाते हैं। चतुर सुजान लोग उनपर ध्यान दिये बगैर अपना काम करते रहते हैं। हम जैसे उन सब से घबड़ा कर अपनी ऐसी की तैसी करवाते रह जाते हैं। समय के साथ कुछ सोचने समझने लायक हुए तो सोचा कि जनता जनार्दन भी हमारे तजुर्बे का फायदा उठा ले।
जब कभी आप कहीं घूमने जायें और किसी होटल में ठहरें तो वहां लिखे नाश्ते या लंच के समय पर बिल्कुल ध्यान ना दें। जैसा कि अक्सर लिखा रहता है कि सबेरे का नाश्ता 7 से 10.30 तक। दोपहर का खाना 11.30 से 3 बजे तक। शाम की चाय 4 से 6.30 तक और रात का खाना 7.30 से 10 बजे तक। आप तो इस समय के चक्कर वक्कर में ना पड़ें, नहीं तो घूमने कब जायेंगे मेरे भाई।
छोटे बड़े शहरों में दिवारों पर आप को यह लिखा मिल जायेगा "यहां ..... मना है"। अब सोचिये सरकार प्रकृति की पुकार के निवारण के लिये प्रयाप्त सुविधायें तो मुहैया करवाती नहीं, ऊपर से ऐसे निर्देश। अब आप निवृत होने के लिये बैचैन हैं, तो क्या करेंगे? सीधी सी बात है भाई उस लिखावट वाली जगह के दस बारह फुट दायें-बायें तो कोई रुकावट नहीं होती ना !! लगे हाथ इसी के साथ एक बिल्कुल सच्ची घटना आप को बताता हूं। कलकत्ते में कालेज के जमाने की बात है। उन दिनों सड़क किनारे निवृत होने पर पुलिस पकड़ कर जुर्माना वगैरह कर देती थी। पर प्रकृति की पुकार को कोई कहां रोक पाता है। सो कालेज का एक लड़का दिवार की तरफ मुंह कर शुरु हो गया। तभी उसके पीछे से एक पुलिस वाला अपना ड़ंडा फटकारते हुए दौड़ा। मामला संगीन था पर लड़के की त्वरित बुद्धी ने उसे बचा ही नहीं लिया पुलिस वाले की भी ऐसी की तैसी करवा दी। हुआ यह कि लड़के ने निवृत होते होते ही अपनी जगह बदल ली। जब पुलिस वाले ने उसे डांटा तो लड़के ने कहा तुम भी तो यहीं कर रहे थे। अभी भी दिवाल पर निशान हैं। बेचारा पुलिस वाला हतप्रभ रह गया उपर से कालेज का इलाका उसने भागने में ही भलाई समझी।
अस्पतालों में लिखा रहता है कि महिलाओं को देखने का समय सुबह 8 से 11 तक। अब यदि कोई शाम को जा कर घूरे तो कोई क्या कर लेगा।
एक डाक्टर ने अपनी क्लिनिक नीचे से हटा पहले माले पर खोल ली और नीचे अपने मरीजों की सुविधा के लिये लिखवा दिया उपर जाने का रास्ता। लो इस पर तो उसके मरीज ही आने बंद हो गये। उन्हें कौन समझाता कि भाई उसने अपने पास आने का रास्ता बताया है ना कि एकदम उपर जाने का!!
यह तो सिर्फ एक बानगी है। ऐसी बहुत सी उल्टी सीधी नसीहतें दी रहती हैं जिन पर ध्यान न ही दें तो बेहतरी है।

14 टिप्‍पणियां:

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

भाई शर्माजी कलकत्ते मे न्यु मार्केट के सामने वाली सडक पर हम भी जुर्माना भर चुके हैं. कालेज के मस्ती भरे दिनों मे .:)

बहुत सही लिखा है आपने.

रामराम.

P.N. Subramanian ने कहा…

भाई मजा आ गया. आभार

राज भाटिय़ा ने कहा…

महिलाओं को देखने का समय सुबह 8 से 11 तक।
शर्मा जी बाकी समय घुरने का है सिर्फ़ ऊपर वाला समय अच्छी तरह देखने का.
मजा आ गया जी,
धन्यवाद

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

मजा आ गया. आभार

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

mahilaon wali baat to bahut majedaar hai.

संगीता पुरी ने कहा…

अच्‍छा लिखा है ।

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

शिक्षाप्रद लेख के लिए आभार स्वीकार करें.....:)

विवेक सिंह ने कहा…

अजी जहाँ नो पार्किंग लिखा होता है असल में वही तो पार्किंग की जगह होती है :)

Udan Tashtari ने कहा…

हा हा!! आगे से बिंदास रहेंगे.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आदर्श वाक्य प्रकाशित करने के लिए बधाई।

नितिन व्यास ने कहा…

मजा आ गया. आभार

Vivek Rastogi ने कहा…

भारत के नागरिक होने का प्रमाण यही है कि जहां जो लिखा हो ठीक उसका उल्टा करो।

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

bindaas

sanjay vyas ने कहा…

आनंद दायक !

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