एक खबर ने वर्षों पहले बचपन में देखी एक स्टंट फिल्म की धुंधली सी याद ताजा कर दी। उसमें नायक का दोहरा रोल था। एक को चोट लगती थी तो दुसरे को भी तकलीफ होती थी। एक को दर्द होता था तो दुसरा भी बेचैन हो उठता था। यह खबर भी कुछ वैसी ही है। मध्य-प्रदेश के विदिशा शहर में रहने वाली दो जुड़वां बहनों में अजीबो-गरीब तारतम्य है। एक का नाम चांदनी है और दूसरी का रोशनी। पांचवीं कक्षा में एक साथ पढने वाली दोनों बहनों की पसंद-नापसंद, खान-पान, कपड़े वगैरह की रुचि एक जैसी ही हैं। पर सबसे ज्यादा चौंकाने की बात यह है कि अगर एक के शरीर में दर्द होता है तो दूसरी बहन भी उसे महसूस करती है। एक को जुकाम होता है तो दूसरी की नाक भी बहने लगती है। एक को बुखार आता है तो दूसरी का शरीर भी तपने लगता है। एक को ड़ांट पड़ती है तो दूसरी भी उदास हो जाती है। उनकी मां के अनुसार दो-तीन घटनाएं ऐसी हुई हैं कि यदि उनके सामने ना हुई होतीं तो वह भी विश्वास नहीं करतीं। उन्होंने बताया कि एक बार चांदनी अपने रिश्तेदार के यहां गयी हुई थी वहां उसे उल्टियां होने लगीं तो घर पर रोशनी को भी उबकाई आने लगीं थी। फिर एक बार साइकिल से गिरने पर रोशनी के पैर में मोच आ गयी तो उसी समय चांदनी के भी उसी पैर में दर्द शुरु हो गया। सबसे आश्चर्यजनक बात तो तब हुई जब साईकिल से गिरने पर चांदनी के आगे का दांत टूट गया तो उसी दिन रोशनी को भी ठोड़ी पर उसी जगह चोट लग गयी।
वैसे भी दोनों बहनों में इतनी समानता है कि दोनों को पहचानना बहुत मुश्किल है। रिश्तेदारों की बात जाने दें, जिनसे रोज मिलना नहीं होता है, परन्तु उन्हें रोज पढानेवाली शिक्षिकाएं भी भ्रम में पड़ जाती हैं। बचपन से उनका इलाज करने वाले डा. माहेश्वरी भी बताते हैं कि जब भी इलाज करवाना होता है तो दोनों साथ ही आती हैं। वे बताते हैं कि मैं इन्हें बचपन से देखता आ रहा हूं, दोनों को एक जैसी ही बिमारी या तकलीफ होती है। यह पूछने पर कि दोनों के शरीर में इतना ताल-मेल क्यूं और कैसे है, वे भी इसे विचित्र संयोग कह कर चुप हो जाते हैं। मेडीकल सांईस के अनुसार जुड़वां बच्चों का स्वभाव, बिमारियां, बनावट एक जैसी हो सकती हैं, पर एक को चोट लगने पर दूसरे को भी चोट लगना, वह भी उसी अंग और जगह पर, समझ से परे की बात है।
केरल का एक गांव, कोड़िन्ही, जो अपने 250 से भी ज्यादा जुड़वों के कारण जगत प्रसिद्ध है, जिसका जिक्र कुछ दिनों पहले मैंने अपनी एक पोस्ट किया था, वहां भी ऐसी कोई बात कभी नहीं सुनी गयी कभी। वैसे आज के युग में जब नाम व शोहरत की चाहत में मां-बाप अपने नौनीहालों से कहीं भी कुछ भी ऐंड़-बैंड करवाने से गुरेज नहीं करते तो चोट वाली बातें क्या शक पैदा नहीं करतीं ?