pub-3648900737756323 कुछ अलग सा: सेहत
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मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

खौफ बिस्कुटों का 😧

सच मानिए उन बिस्कुटों का खौफ सा छा गया था मेरे दिल-ओ-दिमाग पर ! हफ्ते भर बाद लौटना हुआ तो यह भी संतोष था कि चलो उस रसहीन से पिंड तो छूटा ! पर ''अपने मन कछु और है कर्ता के कछु और'' नियति पर भी शायद उसी बिस्कुट की आत्मा का प्रभाव हावी था, जो मेरा पीछा नहीं छोड़ रही थी.............!

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

क हते हैं कि दुनिया की हर चीज में आत्मा होती है ! सजीव का तो ठीक है पर क्या निर्जीव में भी ? पर यह भी तो हो सकता है कि जो हमारे लिए निर्जीव हो, वह खुद में सजीव हो ! दुनिया में बहुत सारे लोग हैं जो पैरा-नेचुरल या पैरानॉर्मल बातों पर विश्वास करते हैं ! फिल्मों में भी पुतले, पेड़, कार आदि की आत्माओं के कारनामे सभी ने देख ही रखे हैं ! यदि ऐसा है तो क्या निर्जीव बिस्कुटों में भी ऐसा कुछ होता है ? मेरा तो अनुभव है कि ऐसा कुछ जरूर होता है ! आप माने या ना माने, पर भई मैं तो मानता हूँ, भुग्तभोगी जो हूँ !

यही थे वे 

च लिए पूरी बात बताता हूँ ! आजकल बाजार के डराने-धमकाने की वजह से हम सब कुछ ज्यादा ही स्वास्थ्य-जागरूक हो गए हैं ! उसी के निर्देशानुसार खाने-पीने की चीजें घरों में जगह बनाने लगी हैं ! भले ही वह आपको अच्छी लगें या नहीं ! अब बाजार ने बताया कि बाकि बिस्कुटों की बजाय फलानि कंपनी का फलाना डाइजेस्टिव बिस्कुट सेहत के लिए उत्तम है ! उसके बताने की देर थी कि अगली खेप में घर में उसी ब्रांड के ढेर सारे ''पैकेट्स'' आ गए ! अब आप ही बताइए एक ही चीज रोज-रोज कब तक खाई जा सकती है ? मैंने उसके खिलाफ विद्रोह किया और बाजार से अपनी पसंद का उसका दूसरा भाई ले आया ! 

शा यद यह बात पहले वाले को पसंद नहीं आई, हो सकता है कि इससे उसकी भावनाओं और सम्मान को ठेस पहुंची हो ! फिर क्या था उसकी आत्मा ने अपना रंग दिखाया, एक-दो दिन बाद ऑफिस में जो रिफ्रेशमेंट का सामान आया, उसमें वही बिस्कुट भाई साहब मुझे मुंह चिढ़ाते हुए शामिल थे ! मुझे लगा ऐसा संयोगवश हुआ होगा ! पर बंदे को क्या पता था कि यह सब सुपर-नैचुरल पॉवर का खेल है ! और फिर मेरे सिवाय वहां सभी को वे पसंद भी थे ! अपने वश का तो इतना ही था कि उसका सेवन ही ना किया जाए ! ऐसा ही करता भी रहा, या ज्यादा से ज्यादा किसी के अनुरोध पर एक-आध कुतर लिया ! 

इसी बीच अपने छोटे भ्राता निहार के यहां नागपुर जाने का मौका मिला ! अब विडंबना देखिए, झटका यहां जैसे मेरा इंतजार  ही कर रहा था ! अगले दिन सुबह की चाय के साथ बिस्कुटों के डिब्बे का जैसे ही मैंने ढक्कन खोला तो देखा उसी ब्रांड के वही महाशय मुझे देख, आँख मारते हुए वहां भी विराजमान थे ! जैसे कह रहे हों बेटा, कहां-कहां भागोगे, जहां भी जाओगे मुझे ही पाओगे ! एक अदना सा बिस्कुट भी अच्छे-खासे इंसान को जोकर सा बना सकता है ! 

सच मानिए उस बिस्कुट का खौफ सा छा गया था मेरे दिल-ओ-दिमाग पर ! हफ्ते भर बाद लौटना हुआ तो यह भी संतोष था कि चलो उस रसहीन से पिंड तो छूटा ! पर ''तेरे मन कुछ और है कर्ता के कछु और'' नियति पर भी शायद उसी बिस्कुट की आत्मा का प्रभाव हावी था, जो मेरा पीछा नहीं छोड़ रही थी !

वा पसी मद्रास-निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस से थी ! ट्रेन में सुबह जब वेंडर चाय लाया तो उसके साथ भी वही दो नामुराद फिर किसी साये की तरह मेरे सामने उपस्थित थे ! लगने लगा था कि एक तरह से ''मिडास'' हो गया हूँ, जिस बिस्कुट को छूता हूँ वही ''वह'' बन जाता है ! समझ नहीं आ रहा था कि रोऊं या उस बिस्कुटिया आत्मा से माफी मांगू ............!

अब आप बताएं, आपको क्या लगता है ! क्या यह सब संयोग था, या फिर......................😨

शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025

ड्राई फ्रूट्स और सूखे मेवे ! फर्क है जरा सा दोनों में

जो भी हो, हैं तो सभी पौष्टिक आहार ही ! इन दोनों श्रेणियों में ही विटामिन, मिनरल तथा अन्य पोषक पदार्थ भरपूर मात्रा में होते हैं, जो हम सब को सेहतमंद तो बनाते ही हैं ना ! तो सर्दियों में इन सब का संतुलित मात्रा में उपयोग जरूर करें ! ध्यान यह भी रहे कि ''अति सर्वत्र वर्जयेत्''..............! 

#हिन्दी_ब्लागिंग  

वैसे तो इनकी बारहों महीने मांग रहती है पर सर्दियों में पूछ कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है ! पर इधर मीडिया पर आई पोषण, खान-पान संबंधित सलाहकारों की बहार के डराने-धमकाने पर आम इंसान मिठाइयां, केक, चॉकलेट छोड़ इनकी तरफ कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो गया है ! जी हाँ, ड्राई फ्रूट ! जिनका नाम सामने आते ही काजू, बादाम, किसमिस, अखरोट आदि की तस्वीरें सामने आ जाती हैं ! पर क्या नाम के अनुसार ये सभी ड्राई फ्रूट हैं ?   

नट्स 

ड्राई फ्रूट्स 

देखा जाए तो ड्राई फ्रूट का अर्थ होता है, सूखे फल, जैसे किसमिस, खजूर, अंजीर, खुबानी इत्यादि। ऐसे फल जिन्हें धूप में या व्यावसायिक ड्रायर मशीनों में सुखा कर तैयार किया जाता है। काजू, बादाम वगैरह तो नट्स या बीज होते हैं। यहां भी हमारी भाषा की समृद्धि सामने आती है ! जहां इन्हें मेवा कहा जाता है ! इन सभी का अपना-अपना पौष्टिक महत्व है और इन्हें आहार में शामिल भी किया जाता है, लेकिन इनकी परिभाषा अलग-अलग है। 

 

प्रकृति की नेमत 
इनमें मुख्य अंतर यह है कि ड्राई फ्रूट्स वो फल होते हैं जिनकी नमी हटा, सुखा कर तैयार किया जाता है, जैसे अंजीर, खजूर, किसमिस, खुबानी इत्यादि ! दूसरी तरफ बादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता आदि कठोर छिलके वाले फल के अंदर के बीज या उनका हिस्सा होते हैं ! इस तरह देखा जाए तो काजू, बादाम औरअखरोट इत्यादि तकनीकी रूप से मेवे हैं, जो अक्सर ड्राई फ्रूट्स के साथ ही खाए जाते हैं, लेकिन सूखे फल मेवों की श्रेणी में नहीं आते, पर सभी को सुविधा के लिए ड्राई फ्रूट्स कह दिया जाता है। 

पौष्टिकता 

जो भी हो, हैं तो सभी पौष्टिकता से भरपूर आहार ही ! इन दोनों श्रेणियों में ही विटामिन, मिनरल तथा अन्य पोषक पदार्थ भरपूर मात्रा में होते हैं, जो हम सब को सेहतमंद तो बनाते ही हैं ना ! तो सर्दियों में इन सब का संतुलित मात्रा में उपयोग जरूर करें ! ध्यान यह भी रहे कि ''अति सर्वत्र वर्जयेत् !'' 

स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें !

@अंतर्जाल का हार्दिक आभार 

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