pub-3648900737756323 कुछ अलग सा: टी.वी.
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मंगलवार, 10 मार्च 2026

क्रिकेट कंमेट्री भोजपुरी में, जिया हो बिहार के लाला 😍

भोजपुरी को 2023 के IPL के दौरान आजमाया गया ! लोगों ने इसका तहे दिल से स्वागत किया। इसी से प्रोत्साहित हो 2025 की चैंपियन ट्रॉफी और उसकी अभूतपूर्व लोकप्रियता के चलते इसने हालिया T-20 में भी अपना स्थान बना लिया ! भोजपुरी की सफलता को देखते हुए साल 2024 के IPL में हरियाणवी ने भी प्रवेश ले लिया और अब अगले IPL में क्रिकेट के दीवाने राजस्थानी भाषा के लिए कहेंगे ''पधारो म्हारे घर'', जी हाँ अब राजस्थानी भाषा भी अपना जलवा बिखेरेगी क्रिकेट कमेंट्री के जरिए ! स्वागत के लिए तैयार रहें..........!

#हिन्दी-ब्लॉगिंग 

क्रि केट ! 1877 में शुरू हुए इस अजीबोगरीब नाम वाले खेल को आँखों देखा हाल मिलने करीब पचास साल लग गए ! वह ऐतिहासिक दिन था 14 मई 1927 का ! इंग्लैंड के एक क्रिकेट खिलाड़ी कम चर्च के पादरी  फ़्रैंकगिलिंगहैम से इंग्लैण्ड के लेटन शहर में चल रहे न्यूजीलैंड और मेजबान एसेक्स काउंटी के बीच चल रहे क्रिकेट मैच की कमेंट्री करने को कहा गया ! कारण यह महाशय एक लोकप्रिय वक्ता थे और उनका सेन्स ऑफ ह्यूमर शानदार था ! जब वे अपना भावहीन चेहरा लेकर प्रवचन करते थे तो सुननेवाले लोटपोट हो जाते थे। बीबीसी पर यह पहली क्रिकेट कमेंट्री थी जो चार किस्तों में आधे घंटे के लिए प्रसारित हुई ! कुछ लोगों ने इसका काफी मजाक बनाते हुए इसका काफी मजाक बनाते हुए शतरंज और बिलियर्ड्स की कमेंट्री शुरू करने की बात भी कह दी। 

शुरुआत हुई 

जो भी हो यहां से शुरू हुई क्रिकेट कंमेंट्री ने एक बहुत लंबा सफर तय किया है ! साठ के दशक के हमारे श्रोताओं को टेस्ट मैचों के दौरान उसका ब्यौरा देने वाले विवरण प्रसारकों, सुरेश सरैया, आनंद सीतलवाड़, ए.एफ.एस. तल्यारखान, पियर्सन सुरिटा, विजी, सुभाष मशरूवाला, नरोत्तम पुरी  जैसे नाम भूले नहीं होंगे ! फिर धीरे से यहां प्रवेश हुआ हिंदी का ! इसको लोकप्रिय बनाने में सुशील दोषी और जसदेव सिंह जी को पूरा श्रेय जाता है ! 

आवाज के जादूगर 
स समय रेडिओ पर सुनाया जाने वाला आँखों देखा हाल अलग तरीके का था ! प्रस्तोता को खेल के साथ-साथ ही मैदान पर चल रही एक-एक बात बतानी पड़ती थी, धन्य थे वे लोग, जो सुनने वालों को एक तरह से अपने साथ मैदान में ले आते थे ! समय बदला टी.वी. की सहायता से श्रोता दर्शक बन गए ! अब कथा वाचकों को अपना ढंग बदलना पड़ा, क्योंकि जो वहां हो रहा है, वह सभी देख पा रहे हैं, इसलिए कमेंटेटर को, अपने प्रस्तुतिकरण में इतिहास, कीर्तिमान, हल्की-फुल्की बातें, व्यंग्य जैसी और बहुत कुछ अन्य विषयों का समावेश करना पड़ता है !

मैदान का विकल्प 

इनकी बिक्री बढ़ जाती थी 
स खेल की शुरुआत से अब तक, करोड़ों रन, लाखों चौके, हजारों छक्के लग चुके हैं ! तीन-तीन स्वरूप आ चुके हैं ! नियम-कायदों-पोशाकों, खेलने के समय, तरीकों, उसके उपकरणों, सब में अभूतपूर्व बदलाव आ गए हैं ! तो जाहिर है कमेंट्री में भी कुछ नयापन आना ही था ! हिंदी और बंगला भाषा में तो तकरीबन पचास के दशक में ही शुरुआत हो चुकी थी। पर खेल की निरंतर बढ़ती लोकप्रियता ने इसका आँखों देखा हाल क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध करवा दिया !

आँखों देखा हाल 
भी हाल में ही क्रिकेट के T-20 विश्व कप की कीर्तिमान जीत के साथ ही दर्शकों-श्रोताओं को एक नया अनुभव देते हुए, देश की सात भाषाओं में इस खेल का विवरण सुनने को मिला ! पर जहां अन्य पांच भाषाओं के वक्ता एक चले आ रहे दायरे में ही बात करते थे, जहां गंभीरता कुछ ज्यादा होती है, वहीं हरियाणवी और भोजपुरी ने एक सुखद बयार की तरह इस माध्यम को अपने चुटीले अंदाज में एक नया आयाम दे और भी मनोरंजक बना दिया ! 
रवि किशन 
भो जपुरी को 2023 के IPL के दौरान आजमाया गया, जिसे प्रस्तुत किया भोजपुरी सिनेमा और भाजपा के सांसद रवि किशन के साथ सौरभ यानी रोबिन सिंह, रवि किशन, शिवम सिंह, सत्य प्रकाश, गुलाम अली, मोहम्मद सैफ ! लोगों ने इसका तहे दिल से स्वागत किया। भोजपुरी में कहें तो इसमें सौरभ सिंह ने गर्दा उड़ा कर रख दिया है ! इसी से प्रोत्साहित हो 2025 की चैंपियन ट्रॉफी और उसकी अभूतपूर्व लोकप्रियता के चलते इसने हालिया T-20 में भी अपना स्थान बना लिया ! भोजपुरी की सफलता को देखते हुए साल 2024 के IPL में हरियाणवी ने भी प्रवेश ले लिया और अब अगले IPL में क्रिकेट के दीवाने राजस्थानी भाषा के लिए कहेंगे ''पधारो म्हारे घर'', जी हाँ अब राजस्थानी भाषा भी अपना जलवा बिखेरेगी क्रिकेट कमेंट्री के जरिए ! स्वागत के लिए तैयार रहें !
सौरभ सिंह 
भो जपुरी व हरियाणवी की कंमेट्री का उद्भव न केवल क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक सुखद, आनंदप्रद व रोमांचक अनुभव है, बल्कि दोनों भाषाओं और संस्कृति के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है। इनको लोकप्रिय बनाने में सबसे बड़ा योगदान इसके प्रस्तुतकर्ताओं का है ! जिस तरह वे जिंदादिली, सकारात्मकता, अपने खिलाडियों के प्रति सम्मान और विश्वास को ले कर चल रहे खेल का वर्णन करते हैं वह अद्भुत है ! किसी विधा के विभिन्न आयामों की आपस में तुलना करना सही नहीं होता ना हीं न्यायोचित ! पर अभी देखा जाए तो #भोजपुरी की प्रस्तुति सबका मन मोह, सबसे लोकप्रिय हो रही है ! जिसका सारा श्रेय इसके प्रस्तुतकर्ताओं को जाता है।  जिया हो बिहार के लाला 😍

@अंतर्जाल का हार्दिक आभार 🙏

मंगलवार, 15 जून 2021

मेरी शेव को तो आपकी भाभी तक नोटिस नहीं करतीं

हमें लगता है कि मुझे देख लोग क्या कहेंगे ! अरे कौन से लोग ? दुनिया में कौन है जो पूरी तरह से देवता का रूप ले कर पैदा हुआ है ? हरेक इंसान में कोई ना कोई कमी होती है ! यह जो निर्माता से पैसा लेकर, मीडिया पर अवतरित हो, हमें उल्टी-सीधी चीजें बेचने की कोशिश करते हैं, वे खुद तरह-तरह की पच्चीसों बिमारियों-व्याधियों से घिरे हुए हैं। दुनिया में गोरों की संख्या से कहीं ज्यादा काले, पीले, गेहुएं रंग वालों की आबादी है। एक अच्छी खासी तादाद नाटे लोगों की है। करोंड़ों लोगों का वजन जिंदगी भर पचास का आंकड़ा नहीं छू पाता ! लाखों लोग मोटापे की वजह से ढंग से हिल-ड़ुल नहीं पाते ! गंजेपन से तंग-हार कर उसे फैशन ही बना दिया गया है ........................!!

#हिन्दी_ब्लागिंग      

मेरे  मित्र त्यागराजनजी बहुत सीधे, दुनियादारी से परे एक सरल ह्रदय और खुशदिल इंसान हैं। किसी पर भी शक, शुबहा, अविश्वास करना तो उन्होंने जैसे सीखा ही नहीं है। अक्सर अपने-अपने काम से लौटने के बाद हम संध्या समय चाय-बिस्कुट के साथ अपने सुख-दुख बांटते हुए दुनिया जहान को समेटते रहते हैं। पर कल जब वह आए तो कुछ अनमने से लग रहे थे ! जैसे कुछ बोलना चाहते हों पर झिझक रहे हों ! मैंने पूछा कि क्या बात है ? कुछ परेशान से लग रहे हैं ! वे बोले, नहीं ऐसी कोई बात नहीं है ! मैंने कहा, कुछ तो है, जो आप मूड़ में नहीं हैं। वे धीरे से मुस्कुराए और बोले, कोई गंभीर बात नहीं है, बस ऐसे ही कुछ उल्टे-सीधे, बेतुके से विचार बेवजह भरमाए हुए हैं। सुनोगे तो आप बोलोगे कि पता नहीं आज कैसी बच्चों जैसी बातें कर रहा हूं ! मैंने कहा, अरे, त्यागराजन जी हमारे बीच ऐसी औपचारिकता कहां से आ गई ! जो भी है खुल कर कहिए ! क्या बात है। 

थोड़ा सा प्रकृतिस्ठ हो वे बोले, टी.वी. में दिन भर इतने सारे विज्ञापन आते रहते हैं, तरह-तरह के दावों के साथ ! जिनमें से अधिकतर गले से नहीं उतरते ! जबकि उनमें से अधिकांश को कोई सेलेब्रिटी या समाज के शिखर पर बैठी बड़ी-बड़ी हस्तियां पेश करती हैं। अपने दावों का सच तो प्रस्तुत करने वाले भी जानते ही होंगे ! फिर उनकी क्या मजबूरी है जो आम आदमी को गलत संदेश दे उसे भ्रमित करते रहते हैं ! ना उन्हें पैसे की कमी है, ना हीं शोहरत की ! फिर क्यूं वे ऐसा करते हैं ? अब जैसे मैं एक क्रीम शाहरूख के समझाने से वर्षों से लगा रहा हूँ ! पर मेरा रंग वैसे का वैसा ही सांवला है। मुझे लगा कि इतना बड़ा हीरो है, झूठ थोड़े ही बोलेगा मेरी स्किन में ही कोई गड़बड़ी होगी ! 

क्या कभी आपने परफ्यूम लगाए किसी ऐंड़-बैंड़ छोकरे के पीछे बदहवास सी कन्याओं को दौड़ते देखा है ? अरे, महिलाएं बेवकूफ नहीं होतीं, उनमें पुरुषों से ज्यादा शऊर, सलीका व मर्यादा होती है ! अच्छे-बुरे की पहचान युवकों से ज्यादा होती है  

मैं अपनी हंसी दबा कर बोला, क्या महाराज, आप भी किसकी बातों में आ गए ! अरे, वहां सब पैसों का खेल है ! उनकी कीमत चुकाओ और कुछ भी करवा या बुलवा लो ! उसकी बातों में सच्चाई होती तो उस क्रीम के निर्माता अपनी फैक्टरी अफ्रीका में लगाए बैठे होते, जहां चौबिसों घंटे बारहों महीने लगातार उत्पादन कर भी वे वहां की जरूरत पूरी नहीं कर पाते, पर करोंड़ों कमा रहे होते। 

त्यागराजन जी कुछ उत्साहित हो बोले, वही तो ! मैं समझ तो रहा था, पर ड़ाउट क्लियर करना चाहता था। जैसे मैं एक बहु-विज्ञापित ब्लेड़ से दाढी बनाते आ रहा हूं ! शेव करने के बाद बाहर किसी कन्या की तो बात ही छोड़िए, आपकी भाभी तक ने भी कभी नोटिस नहीं किया कि मैंने शेव बनाई भी है कि नहीं ! पर उधर इस ब्लेड के विज्ञापन में शेव बनने की देर है, कन्या हाजिर। वैसे आप तो मुझे जानते ही हैं कि यदि ऐसा कोई हादसा मेरे शेव करने पर होता तो मैं तो शेव बनाना ही बंद कर देता।  

मैं बोला, यह सब बाजार की तिकड़में हैं ! जिनमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं होने पर भी लोग बेवकूफ बनते रहते हैं। इनका निशाना खासकर युवा वर्ग होता है। आप ही एक बात बताईए, आप अपने काम के सिलसिले में इतना घूमते हैं ! हर छोटे-बड़े शहर में आपका आना-जाना होता है, पर क्या कभी आपने परफ्यूम लगाए किसी ऐंड़-बैंड़ छोकरे के पीछे बदहवास सी कन्याओं को दौड़ते देखा है ? अरे, महिलाएं बेवकूफ नहीं होतीं, उनमें पुरुषों से ज्यादा शऊर, सलीका व मर्यादा होती है ! अच्छे-बुरे की पहचान भी युवकों से कहीं ज्यादा होती है ! मुझे तो आश्चर्य है कि महिलाओं की प्रगति की बात करने वाले किसी भी संगठन ने ऐसे घटिया विज्ञापनों और उनके बनाने वालों पर तुरंत कार्यवाही क्यों नहीं की ! 

अच्छा एक बात बताईए ! आप भाभीजी के साथ साड़ी वगैरह तो लेने गये होंगे ? कभी किसी भी दुकान में विक्रेता को इन विज्ञापनों की तरह लटके-झटकों के साथ साड़ी बेचते देखा है ? कभी किसी बीमा एंजेंट को बस या ट्रेन में बीमा पालिसी बेचते देखा है ? किसी भी पैथी की दवा खा कर कोई शतायू हो सका है ? किसी पेय को पी कर किसी बच्चे को ताड़ सा लंबा, बलवान या कुशाग्र बनते देखा है ? किसी भी डिटर्जेंट से नए कपडे जैसी सफाई हो पाती है ? सारे कीट नाशक, साबुन, हैण्ड वाश अपने 99.9 वाले दावे से कानून से क्यूँ और कैसे बचे रह जाते हैं ? यह सब सिर्फ बाजार के इंसान के दिलो-दिमाग में घर किए बैठे किसी अनहोनी के डर का फायदा उठा अपने अस्तित्व को बचाए रखने की तिकड़में भर हैं !  

हमें सदा अपनी कमजोरियां दिखती हैं ! इसीलिए हम अपनी खूबियों को नजरंदाज करते रहते हैं। हमें लगता है कि मैं ऐसा हूं तो लोग क्या कहेंगे ! अरे कौन से लोग ? किसे फुरसत है किसी को देखने, आंकने की ! वैसे भी दुनिया में कौन ऐसा है जो पूरी तरह से देवता का रूप ले कर पैदा हुआ हो बिना किसी खामी के ? हरेक इंसान में कोई ना कोई कमी होती ही है ! यह जो निर्माता से पैसा लेकर, मीडिया पर अवतरित हो, उल्टी-सीधी चीजें हमें बेचने की कोशिश करते हैं, वे खुद तरह-तरह की पच्चीसों बिमारियों-व्याधियों से घिरे हुए हैं ! दुनिया में गोरों की संख्या से कहीं ज्यादा काले, पीले, गेहुएं रंग वालों की तादाद है। एक अच्छी खासी तादाद नाटे लोगों की है। करोंड़ों लोगों का वजन जिंदगी भर पचास का आंकड़ा नहीं छू पाता। लाखों लोग मोटापे की वजह से ढंग से हिल-ड़ुल नहीं पाते ! गंजेपन से तंग-हार कर उसे फैशन ही बना दिया गया है........! 

अब आप जरा अपनी ओर देखिए ! इस उम्र में आज भी आप पांच-सात कि.मी. चलने के बावजूद थकान महसूस नहीं करते ! किसी शारीरिक व्याधि से कोसों दूर हैं। छूट-पुट समस्या को छोड़ दें तो दवा-दारु और उसके खर्चों से बचे हुए हैं ! अपने सारे काम बिना सहायक के पूरे करने में सक्षम हैं ! यह भी तो भगवान की अनमोल देन है आपको ! आप जो हैं खुद में एक मिसाल हैं, अपने लिए ! इन टंटों में ना पड़ मस्त रहिए ! खुश और बिंदास होकर प्रभू द्वारा दी गई जिंदगी का आनंद लीजिए। 

मेरे इतने लंबे भाषण से त्यागराजनजी को कुछ-कुछ रिलैक्स होता देख मैंने अंदर की ओर आवाज लगाई कि क्या हुआ भाई, आज चाय अभी तक नहीं आई ? तभी श्रीमतीजी चाय की ट्रे लिए नमूदार हो गयीं। चाय का पहला घूंट लेते ही त्यागराजनजी बोल पड़े, भाभीजी यह टीवी पर दिखने वाली वही ताजगी वाली चाय है ना, जिसमें पांच-पांच जड़ी-बूटियां पड़ी होती हैं ?

बहुत रोकते, रोकते भी मेरा ठहाका निकल ही गया ! 


@करीब ग्यारह साल पुरानी रचना, आज भी सामयिक 

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