pub-3648900737756323 कुछ अलग सा: दर्शक
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शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

जिसने सबसे ज्यादा विभिन्न रोगग्रस्त पात्रों का किरदार निभाया

अनेकों बार Autism, Dyslexia, Progeria, Paraplegia, Alzheimer, Amnesia, Schizophrenia जैसी अनेक बीमारियों पर, जिनका नाम भी आम लोगों ने सुना नहीं होता, फिल्में बनी हैं ! इन चलचित्रों ने इन बिमारियों के प्रति लोगों को जागरूक भी किया है ! यदि ऐसी फिल्मों की और देखा जाए तो एक बेहद दिलचस्प जानकारी सामने आती है कि इस तरह की फिल्मों में सबसे ज्यादा बार मुख्य किरदार अमिताभ बच्चन ने निभाया ही नहीं बल्कि बहुत शिद्दत से उस पात्र को जिया भी है...............!   

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

दु निया भर में अबाल-वृद्ध सभी के पसंदीदा शौक में फिल्में सर्वोपरि हैं ! ये समाज का आइना कहलाती हैं ! जो मनोरंजन के साथ-साथ अभिव्यक्ति का भी बहुत सशक्त माध्यम हैं ! इसीलिए दर्शक उनसे और उनमें काम करने वाले पात्रों से अतीव जुड़ाव महसूस करता है। लोग अपने नेताओं को पहचाने ना पहचाने पर फिल्मों के छोटे-बड़े कलाकारों की बखूबी खबर रखते हैं ! इसलिए अपनी लोकप्रियता को बरकरार रखने के लिए कलाकार भी अपने प्रशंसकों के मनमुताबिक काम करते रहते हैं ! पर कुछ अलग भी होते हैं !



नुष्य की जिंदगी में सुख-दुःख, उतार-चढ़ाव के साथ-साथ हारी-बिमारी भी एक अभिन्न अंग है, इसीलिए अन्य विभिन्न परिस्थितियों के साथ ही बीमारियों पर आधारित बहुत सारी संवेदनशील फिल्में बनी हैं, जिनके समझदार निर्माता-निर्देशकों ने दर्शकों को जागरूक करने के साथ-साथ Autism, Dyslexia, Progeria, Paraplegia, Alzheimer, Amnesia, Schizophrenia और न जाने कितनी ऐसी बीमारियों के बारे में, जिनका नाम भी आम लोगों ने सुना नहीं होता, बताया, चेताया और जागरूक कर उनकी रोक-थाम की बात भी की ! ऐसी फिल्मों को दर्शकों ने भी उनके पात्रों से गहराई से जुड़ फिल्म को सफल भी करवाया है। 



यदि ऐसी फिल्मों की और देखा जाए तो एक बेहद दिलचस्प जानकारी सामने आती है कि इस तरह की फिल्मों में सबसे ज्यादा बार मुख्य किरदार अमिताभ बच्चन ने निभाया ही नहीं बल्कि बहुत शिद्दत से उस पात्र को जीया भी है ! उन्होंने बिना झिझक ऐसी फिल्मी स्वीकारीं और उन्हें सफल भी बनवाया।


पने अभिनय के शुरूआती दौर में ही उनको एक ऐसी फिल्म ''रेशमा और शेरा" मिली जिसमें उन्होंने एक गूंगे-बहरे का किरदार निभाया था। उसके बाद उनकी अनेक ऐसी फिल्में आईं  जिसका मुख्य किरदार किसी न किसी असाध्य बीमारी से पीड़ित था ! जैसे वे फिल्म मजबूर में ब्रेन टयृमर से ग्रस्त रोगी के रूप में दिखाई दिए। फिल्म ब्लैक में अल्जीमर्स के रोगी के रूप में, ''पा'' में प्रोजेरिया नामक बीमारी से ग्रस्त दिखे, यह उनकी  बेहतरीन यादगार फिल्मो में भी सर्वोपरि है !



कि तनी फिल्में याद की जाएं, ''दिवार'' में ब्रोंकाइटिस से ! ''वक्त'' में कैंसर से ! ''पीकू'' में कॉन्स्टिपेशन से ! फिल्म ''पिंक'' में बाइपोलर डिसऑर्डर से ! ''वजीर'' में विकलांग !  ''शमिताभ'' में ईर्ष्या, द्वेष, मूक ! ''आँखें'' में तेज मिजाज, गुस्सैल का किरदार निभाने के अलावा टी. वी. धारावाहिक युद्ध में भी हंगरीस्टन नामक रोग से पीड़ित दिखे !


लोगों का असीम प्यार, लगाव, शुभकामनाएं पाने के बावजूद ऐसा लगता है कि उनका और हारी-बिमारियों का आपस में कुछ ज्यादा ही लगाव है तभी तो इतने सारे रोगग्रस्त किरदार निभाने के अलावा भी ऐसी कई फिल्मों में काम किया, जिनमें वे खुद तो बीमार नहीं थे, पर उनके सहयोगी पात्र बिमारी से जूझ रहे थे जैसे ''आनंद'', "मिली", ! इसके अलावा वे खुद अपने जीवन में भी किसी न किसी कष्ट का सामना करते ही रहे हैं। पर लगता है कि उनके अंदर का "102 नॉट-आउट" का जिंदादिल, खुशी और जिंदगी से भरपूर किरदार सदा उनकी प्रेरणा, शक्ति और उत्साह बनाए रखता है ! 


मिताभ का कोई कितना बड़ा भी आलोचक हो, वह उनकी जिजीविषा, उनके काम के प्रति समर्पण, उनकी निष्ठा, उनकी मेहनत, बिना थके-हारे अपने काम को करने की लगन के ऊपर प्रश्न चिन्ह नहीं लगा सकता ! हिंदी फिल्मों के इतिहास में नायकों के पहले दस नामों में उनका जिक्र शामिल रहेगा !

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 🙏

मंगलवार, 10 मार्च 2026

क्रिकेट कंमेट्री भोजपुरी में, जिया हो बिहार के लाला 😍

भोजपुरी को 2023 के IPL के दौरान आजमाया गया ! लोगों ने इसका तहे दिल से स्वागत किया। इसी से प्रोत्साहित हो 2025 की चैंपियन ट्रॉफी और उसकी अभूतपूर्व लोकप्रियता के चलते इसने हालिया T-20 में भी अपना स्थान बना लिया ! भोजपुरी की सफलता को देखते हुए साल 2024 के IPL में हरियाणवी ने भी प्रवेश ले लिया और अब अगले IPL में क्रिकेट के दीवाने राजस्थानी भाषा के लिए कहेंगे ''पधारो म्हारे घर'', जी हाँ अब राजस्थानी भाषा भी अपना जलवा बिखेरेगी क्रिकेट कमेंट्री के जरिए ! स्वागत के लिए तैयार रहें..........!

#हिन्दी-ब्लॉगिंग 

क्रि केट ! 1877 में शुरू हुए इस अजीबोगरीब नाम वाले खेल को आँखों देखा हाल मिलने करीब पचास साल लग गए ! वह ऐतिहासिक दिन था 14 मई 1927 का ! इंग्लैंड के एक क्रिकेट खिलाड़ी कम चर्च के पादरी  फ़्रैंकगिलिंगहैम से इंग्लैण्ड के लेटन शहर में चल रहे न्यूजीलैंड और मेजबान एसेक्स काउंटी के बीच चल रहे क्रिकेट मैच की कमेंट्री करने को कहा गया ! कारण यह महाशय एक लोकप्रिय वक्ता थे और उनका सेन्स ऑफ ह्यूमर शानदार था ! जब वे अपना भावहीन चेहरा लेकर प्रवचन करते थे तो सुननेवाले लोटपोट हो जाते थे। बीबीसी पर यह पहली क्रिकेट कमेंट्री थी जो चार किस्तों में आधे घंटे के लिए प्रसारित हुई ! कुछ लोगों ने इसका काफी मजाक बनाते हुए इसका काफी मजाक बनाते हुए शतरंज और बिलियर्ड्स की कमेंट्री शुरू करने की बात भी कह दी। 

शुरुआत हुई 

जो भी हो यहां से शुरू हुई क्रिकेट कंमेंट्री ने एक बहुत लंबा सफर तय किया है ! साठ के दशक के हमारे श्रोताओं को टेस्ट मैचों के दौरान उसका ब्यौरा देने वाले विवरण प्रसारकों, सुरेश सरैया, आनंद सीतलवाड़, ए.एफ.एस. तल्यारखान, पियर्सन सुरिटा, विजी, सुभाष मशरूवाला, नरोत्तम पुरी  जैसे नाम भूले नहीं होंगे ! फिर धीरे से यहां प्रवेश हुआ हिंदी का ! इसको लोकप्रिय बनाने में सुशील दोषी और जसदेव सिंह जी को पूरा श्रेय जाता है ! 

आवाज के जादूगर 
स समय रेडिओ पर सुनाया जाने वाला आँखों देखा हाल अलग तरीके का था ! प्रस्तोता को खेल के साथ-साथ ही मैदान पर चल रही एक-एक बात बतानी पड़ती थी, धन्य थे वे लोग, जो सुनने वालों को एक तरह से अपने साथ मैदान में ले आते थे ! समय बदला टी.वी. की सहायता से श्रोता दर्शक बन गए ! अब कथा वाचकों को अपना ढंग बदलना पड़ा, क्योंकि जो वहां हो रहा है, वह सभी देख पा रहे हैं, इसलिए कमेंटेटर को, अपने प्रस्तुतिकरण में इतिहास, कीर्तिमान, हल्की-फुल्की बातें, व्यंग्य जैसी और बहुत कुछ अन्य विषयों का समावेश करना पड़ता है !

मैदान का विकल्प 

इनकी बिक्री बढ़ जाती थी 
स खेल की शुरुआत से अब तक, करोड़ों रन, लाखों चौके, हजारों छक्के लग चुके हैं ! तीन-तीन स्वरूप आ चुके हैं ! नियम-कायदों-पोशाकों, खेलने के समय, तरीकों, उसके उपकरणों, सब में अभूतपूर्व बदलाव आ गए हैं ! तो जाहिर है कमेंट्री में भी कुछ नयापन आना ही था ! हिंदी और बंगला भाषा में तो तकरीबन पचास के दशक में ही शुरुआत हो चुकी थी। पर खेल की निरंतर बढ़ती लोकप्रियता ने इसका आँखों देखा हाल क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध करवा दिया !

आँखों देखा हाल 
भी हाल में ही क्रिकेट के T-20 विश्व कप की कीर्तिमान जीत के साथ ही दर्शकों-श्रोताओं को एक नया अनुभव देते हुए, देश की सात भाषाओं में इस खेल का विवरण सुनने को मिला ! पर जहां अन्य पांच भाषाओं के वक्ता एक चले आ रहे दायरे में ही बात करते थे, जहां गंभीरता कुछ ज्यादा होती है, वहीं हरियाणवी और भोजपुरी ने एक सुखद बयार की तरह इस माध्यम को अपने चुटीले अंदाज में एक नया आयाम दे और भी मनोरंजक बना दिया ! 
रवि किशन 
भो जपुरी को 2023 के IPL के दौरान आजमाया गया, जिसे प्रस्तुत किया भोजपुरी सिनेमा और भाजपा के सांसद रवि किशन के साथ सौरभ यानी रोबिन सिंह, रवि किशन, शिवम सिंह, सत्य प्रकाश, गुलाम अली, मोहम्मद सैफ ! लोगों ने इसका तहे दिल से स्वागत किया। भोजपुरी में कहें तो इसमें सौरभ सिंह ने गर्दा उड़ा कर रख दिया है ! इसी से प्रोत्साहित हो 2025 की चैंपियन ट्रॉफी और उसकी अभूतपूर्व लोकप्रियता के चलते इसने हालिया T-20 में भी अपना स्थान बना लिया ! भोजपुरी की सफलता को देखते हुए साल 2024 के IPL में हरियाणवी ने भी प्रवेश ले लिया और अब अगले IPL में क्रिकेट के दीवाने राजस्थानी भाषा के लिए कहेंगे ''पधारो म्हारे घर'', जी हाँ अब राजस्थानी भाषा भी अपना जलवा बिखेरेगी क्रिकेट कमेंट्री के जरिए ! स्वागत के लिए तैयार रहें !
सौरभ सिंह 
भो जपुरी व हरियाणवी की कंमेट्री का उद्भव न केवल क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक सुखद, आनंदप्रद व रोमांचक अनुभव है, बल्कि दोनों भाषाओं और संस्कृति के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है। इनको लोकप्रिय बनाने में सबसे बड़ा योगदान इसके प्रस्तुतकर्ताओं का है ! जिस तरह वे जिंदादिली, सकारात्मकता, अपने खिलाडियों के प्रति सम्मान और विश्वास को ले कर चल रहे खेल का वर्णन करते हैं वह अद्भुत है ! किसी विधा के विभिन्न आयामों की आपस में तुलना करना सही नहीं होता ना हीं न्यायोचित ! पर अभी देखा जाए तो #भोजपुरी की प्रस्तुति सबका मन मोह, सबसे लोकप्रिय हो रही है ! जिसका सारा श्रेय इसके प्रस्तुतकर्ताओं को जाता है।  जिया हो बिहार के लाला 😍

@अंतर्जाल का हार्दिक आभार 🙏

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