ट्रक ड्राइवर ब्लॉगर राजेश रवानी आज जहां अपने ब्लॉग से अच्छी-खासी आमदनी कर रहे हैं वहीं कांग्रेस का कुंठित मानस पुत्र जो इंजीनिरिंग करने के बाद ऑटो रिक्शा चला रहा है, समाज व सरकार को कोस रहा है ! यहां बात है, इस किरदार के सोच की ! वह अपने काम को, जो उसे रोजी-रोटी दे रहा है, घटिया समझता है और अपने ऑटो चालक होने की बात को समाज से छुपाने के लिए घर से टाई वगैरह पहन कर निकलता है ! कैसी सोच है यह ? कौन हैं ऐसे किरदार को गढ़ने वाले ? कैसी मानसिकता है उनकी ! जिस काम से घर की रोजी-रोटी चल रही हो, उसी को घटिया समझना ! अपनी नाकामियों का दोष दूसरों के सर मढ़ना ! उस युवक के चेहरे पर दूसरों के प्रति रोष, आवाज का तीखापन, विद्रूपता यह सब मिल कर उसके प्रति सहानुभूति नहीं नफरत ही पैदा करते हैं ..............!
सफलता पाने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती ! ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं ! ताजातरीन है झारखंड राज्य के जामताड़ा जिले के निवासी श्री राजेश रवानी ! जो 25 वर्षों से भी अधिक समय से ट्रक चला कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं ! एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि कैसे कठिन आर्थिक स्थिति के कारण बेहद विकट परिस्थितियों में उन्होंने अपना समय गुजारा ! अपने अब तक के पूरे जीवन में हमेशा किराए के घर में रहे ! पर समय के अनुसार, बढ़ती उम्र में भी वे अपने में बदलाव ले आए !
![]() |
| यात्रा के दौरान पाक क्रिया |
अपनी ट्रक ड्राइवर की नौकरी के दौरान, देश भर में घूमते हुए सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह के वीडियो वगैरह देख उनको भी लगा कि मैं भी ऐसा कुछ नया कर सकता हूँ ! परिवार के बच्चों से आयडिया लिया और अपनी ट्रक यात्राओं के दौरान, अपना खुद का खाना बनाने के वीडियो ''ट्रक ड्राइवर ब्लॉगर'' के नाम से बना, यू ट्यूब पर ड़ाल दिए ! वीडियो इतना लोकप्रिय हुआ कि उनके फॉलोअर्स का आंकड़ा 15 लाख की संख्या को छूने जा रहा है ! राजेश जी ने अभी हाल ही में अपनी कमाई से एक नया घर खरीदा है. उन्होंने दुनिया को यह दिखाया है कि आपकी उम्र या आपका पेशा कितना भी मामूली क्यों न हो, खुद को स्थापित करने में कभी देर नहीं होती !
इसके ठीक विपरीत आजकल कांग्रेस पार्टी का एक विज्ञापन मीडिया पर एक ऐसे कुंठित युवक को दिखा रहा है जो इंजीनिरिंग करने के बाद ऑटो रिक्शा चला रहा है ! बात रिक्शा चलाने की नहीं है बात है इस किरदार के सोच की ! वह अपने काम को, जो उसे रोजी-रोटी दे रहा है, घटिया समझता है और अपने ऑटो चालक होने की बात को समाज से छुपाने के लिए घर से टाई वगैरह पहन कर निकलता है ! कैसी सोच है यह ? कौन हैं ऐसे किरदार को गढ़ने गढ़ने वाले ? कैसी मानसिकता है उनकी ! जिस काम से घर की रोजी-रोटी चल रही हो, उसी को घटिया समझना ! अपनी नाकामियों का दोष दूसरों के सर मढ़ना ! उस युवक के चेहरे पर दूसरों के प्रति रोष, आवाज का तीखापन, विद्रूपता यह सब मिल कर उसके प्रति सहानुभूति नहीं नफरत ही पैदा करते हैं !
जहां परिस्थितियों ने राजेश रवानी को आजीविका के लिए ट्रक चलाने के लिए मजबूर किया, वहीं खाना पकाने के प्रति उनके जुनून और उस प्यार को दुनिया के साथ साझा करने की उनकी इच्छा ने उन्हें एक ब्रेकआउट स्टार बना दिया है। दूसरी ओर वह नवयुवक अपनी असफलता का जिम्मेदार समाज व सरकार को समझता है ! यह भी तो हो सकता है उसने किसी ऐसी जगह से डिग्री हासिल की हो जिसकी मान्यता ही ना हो ! या फिर किसी तरह सिर्फ डिग्री हासिल कर ली हो और काम की कसौटी पर खरा ही ना उतर पा रहा हो ! जो भी हो यह विज्ञापन अपने निर्माता की ओछी सोच को बेपर्दा कर रहा है !
भले ही यह रियल और रील की बात है पर सोच की दिशा तो साफ दिखाई पड़ रही है ! वैसे भी कोई भी सरकार, वादे भले ही करती रहे, देश के सभी युवाओं को नौकरी दे सकती है ? यदि ऐसा कहा जाता है तो वह सिर्फ और सिर्फ झूठ है ! युवाओं को खुद अपने पैरों पर खड़ा होना होगा ! किसी का मुंह ना जोहते हुए, किसी के आश्वासनों पर इन्तजार ना करते हुए, जो भी काम हो उससे शुरुआत करनी होगी ! अपने पर विश्वास करना होगा ना कि नेताओं के खोखले वादों पर !
