खुशी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
खुशी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 4 नवंबर 2024

दीपक, दीपोत्सव का केंद्र

अच्छाई की बुराई पर जीत की जद्दोजहद, अंधेरे और उजाले के सदियों से चले आ रहे महा-समर, निराशा को दूर कर आशा की लौ जलाए रखने की पुरजोर कोशिश ! चिरकाल से चले आ रहे इस संग्राम में उसी आशा की लौ के स्थापन के लिए अपनी छोटी सी जिंदगी को दांव पर लगा, अपने महाबली शत्रु तमस से जूझती हैं, चिरागों के रूप में, सूर्यदेव की अनुपस्थिति में उनका प्रतिनिधित्व करने वाली रश्मियाँ ! दीपोत्सव के केंद्र में दीपक ही तो होता है.......................!         

#हिन्दी_ब्लागिंग  

दीपोत्सव  फिर आने का वादा कर समय-चक्र पर सवार हो विदा ले गया ! साल की सबसे घनघोर काली रात के भय से उबारने वाला यह त्यौहार सदा याद दिलाता रहता है, अच्छाई की बुराई पर जीत की जद्दोजहद, अंधेरे और उजाले के सदियों से चले आ रहे महा-समर, निराशा को दूर कर आशा की लौ जलाए रखने की पुरजोर कोशिश की ! चिरकाल से चले आ रहे इस संग्राम में उसी आशा की लौ के स्थापन के लिए अपनी छोटी सी जिंदगी को दांव पर लगा, अपने महाबली शत्रु तमस से जूझती हैं, चिरागों के रूप में, सूर्यदेव की अनुपस्थिति में उनका प्रतिनिधित्व करने वाली रश्मियाँ ! दीपोत्सव के केंद्र में दीपक ही तो होता है !   

दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पावन पर्व है। हम भारतवासियों का दृढ विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है, झूठ का नाश होता है ! दीपावली भी यही चरितार्थ करती है, असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय ! अंधकार कितना भी गहरा क्यों ना हो, ये छोटे-छोटे दीपक रौशनी के सिपाही बन, अपनी सीमित शक्तियों के बावजूद, एक मायाजाल रच, विभिन्न रूप धर, अंधकार को मात देने के लिए अपनी जिंदगी को दांव पर लगा देते हैं। ताकि समस्त जगत को खुशी और आनंद मिल सके। 

अपनी छोटी सी पर सार्थक जिंदगी के पश्चात दीपक बुझ तो जरूर जाता है पर उसका बलिदान व्यर्थ नहीं जाता ! इसकी परख निश्छल मन वाले बच्चों के चेहरे पर फैली मुस्कान और खुशी को देख कर अपने-आप हो जाती है। एक बार अपने तनाव, अपनी चिंताओं, अपनी व्यवस्तताओं को दर-किनार कर यदि कोई अपने बचपन को याद कर, उसमें खो कर देखे तो उसे भी इस दैवीय एहसास का अनुभव जरूर होगा। यही है इस पर्व की विशेषता, इसके आतिशी मायाजाल का करिश्मा, जो सबको अपनी गिरफ्त में ले कर उन्हें चिंतामुक्त कर देने की, चाहे कुछ देर के लिए ही सही, क्षमता रखता है। बाहरी संसार को रौशन करने के उसके इस प्रयास के साथ ही कितना अच्छा हो यदि हमारी यह कोशिश रहे कि जगत में उजास बनाए रखने के साथ ही हम अपने अंतस में छिपे राग-द्वेष, ईर्ष्या, क्रोध, वैमनस्य जैसे तमस को भी दूर कर दें ! जिससे मानव मात्र के भले के साथ ही देश-समाज-जगत में भी सुख-शांति-चैन का माहौल स्थापित हो सके ! 

एक बार फिर आप सब मित्रों, परिजनों और "अनदेखे अपनों" को हृदय की गहराइयों से हार्दिक शुभकामनाएं !परमपिता की असीम कृपा से सब लोग सपरिवार, स्वस्थ, प्रसन्न व सुरक्षित रहें ! सुख-शांति का वास हो ! आने वाला समय सभी के लिए शुभ और मंगलमय हो ! सब का जीवन पथ सदा प्रशस्त व आलोकित रहे ! यही कामना है !    

गुरुवार, 2 मार्च 2023

देर आयद दुरुस्त आयद

पर ऐसे लोगों से जरूर दूरी बना ली है जो खुद को मुझसे ज्यादा महत्वपूर्ण समझते हैं ! यदि ऐसा ही कोई मुझे परास्त ना कर पाने की स्थिति में मानसिक रूप से तोड़ने की खुराफात करता है तो भी मेरी कोशिश ज्यादा से ज्यादा शांत रहने की होती है ! मेरा मानना है कि उसकी करनी खुद उसे सबक सिखाएगी ! अपनी भावनाओं पर काबू पाने की हर संभव कोशिश करने लगा हूँ.............! 

#हिन्दी_ब्लागिंग 

हमारा मष्तिष्क एक बहुत ही जटिल मशीन है ! यह कब, क्या और कैसे काम करेगा इसका शरीर को यानी हमें कोई अंदाज नहीं होता ! होश संभालने से लेकर मृत्यु पर्यंत यह जीवन की दिनचर्या में तरह-तरह के बदलाव लाता रहता है ! बचपन में सोच कुछ होती है ! युवावस्था में कुछ और ! जो परिपक्वावस्था में बिलकुल ही अलग हो जाती है !  

 


ज्यादातर इंसान जब साठोत्तरी की सीमा पार कर लेते हैं तो अचानक वे दुनियादारी की मोहमाया से छिटक कुछ-कुछ आत्मकेंद्रित से होने लगते हैं ! उन्हें एहसास होने लगता है कि उसने दुनिया भर का जिम्मा नहीं ले रखा ! उनका माता-पिता, पत्नी-बच्चों से ज्यादा खुद से लगाव बढ़ जाता है ! अपनी चिंता, अपना ख्याल प्रमुख हो जाता है ! दूसरों पर बोझ ना पड़े कुछ ऐसा भी बर्ताव हो जाता है ! 

सठियाने की उम्र की गिरफ्त में आने के बाद कुछ ऐसे ही बदलाव मैं अपने में महसूस करने लगा हूँ ! खुद का ''हिसाब-किताब'' रखने लगा हूँ ! मुझमे अब कुछ दरियादिली ने भी जगह बना ली है ! अब पांच-दस रुपयों के लिए किसी से भी खिच-खिच करना अच्छा नहीं लगता ! बल्कि कुछ ज्यादा दे सामने वाले के चेहरे पर आई मुस्कान से एक आंतरिक खुशी महसूस होने लगी है ! इसीलिए जब भी मौका मिलता है अपनी तरफ से भले ही छोटी या आंशिक रूप से ही सही, किसी की कुछ सहायता कर उसके तनाव को कुछ हद तक कम करने की कोशिश करना अच्छा लगने लगा है ! अपनी इस छोटी सी भेंट से सामने वाले के चेहरे पर आई मुस्कान मुझे ढेर सा सकून दे जाती है ! 

इसके अलावा एक और बात अपने आप में लक्षित की है कि अब मुझे अपने रहन-सहन की कोई खास फ़िक्र वगैरह नहीं होती ! जो है, जैसा है सब चलता है ! क्योंकि अब मेरे लिए व्यक्तित्व ज्यादा अहमियत अहमियत रखने लगा है ! हाँ, पर ऐसे लोगों से जरूर दूरी बना ली है जो खुद को मुझसे ज्यादा महत्वपूर्ण समझते हैं ! यदि ऐसा ही कोई मुझे परास्त ना कर पाने की स्थिति में मानसिक रूप से तोड़ने की खुराफात करता है तो भी मेरी कोशिश ज्यादा से ज्यादा शांत रहने की होती है ! मेरा मानना है कि उसकी करनी खुद उसे सबक सिखाएगी ! अपनी भावनाओं पर काबू पाने की हर संभव कोशिश करने लगा हूँ !

ऐसा लगता है कि मैं कुछ परिपक्व हो गया हूँ क्योंकि अब मुझे दूसरों की गलतियां भी परेशान नहीं करतीं और ना हीं मैं अब किसी की गलती को पहले की तरह सुधारने की चेष्टा करता हूँ ! जीवन के अनुभवों ने मुझे यह जता दिया है कि दुनिया में कोई भी सम्पूर्ण या पूर्णतया निपुण नहीं होता ! जिंदगी को निपुणता से ज्यादा शांति की जरुरत होती है ! वैसे भी किसी को सुधारने का काम मेरा तो नहीं ही है ! पर एक दूसरा विलक्षण बदलाव अपने आप में महसूसने लगा हूँ कि अब मैं पहले की तरह किसी की प्रशंसा या बड़ाई करने से नहीं कतराता ! उदारता से सबकी तारीफ़ करता हूँ और ऐसी हौसला अफजाई से सामने वाले को मिलने वाली खुशी मुझे भी आह्लादित कर जाती है ! 

मैंने अब लोगों की बातों में दखल देना और टोका-टाकी करना भी बंद कर दिया है ! खासकर उन उम्रदराज लोगों से जो रोज ही अपने अतीत के किस्सों को बार-बार सुनाना शुरू कर देते हैं और एक ही बात को दसियों बार दोहराने लगते हैं ! इससे अब मुझे पहले जैसी खीझ भी नहीं होती बल्कि ऐसा लगता है कि ये बुजुर्गवार इस तरह अपना समय बिता, अपना मन और गम हल्का कर अपने अतीत को याद कर जीने का हौसला बनाए रख पा रहे हैं ! मैं उनकी बातें सुन उन्हें ख़ुशी देने की कोशिश करने लगा हूँ !

आज के युग में जब अहंकार की वजह से रिश्तों में दरारें आनी शुरू हो गई हैं, रिश्ते बिखरने लगे हैं ! इंसान अकेला पड़ता जा रहा है ! तो मेरा उपक्रम रहता है कि अहंकार को किसी तरह छोड़ टूटते रिश्तों की तुरपाई की जा सके ! रिश्ते रहेंगे तभी अकेलापन दूर होगा ! क्योंकि आज की विभीषिकाओं में अकेलेपन का भी अहम स्थान है ! आने वाले दिनों में अकेलापन युवा पीढ़ी के तनाव-हताशा-निराशा का मुख्य कारण बन सकता है ! इसलिए रिश्तों का पुनर्स्थापन बहुत जरुरी है !  

हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने यह नसीहत दी थी कि हर इंसान को रोज ऐसा मान कर चलना चाहिए, जैसे आज का दिन ही उसका आखिरी दिन हो ! सही भी तो है, हमारी जिंदगी का पल भर का भी तो भरोसा नहीं है ! इसीलिए अब मैं वही करता हूँ जिस काम से मैं खुश रह सकूँ ! वैसे यह मेरी जिम्मेवारी भी है अपने मष्तिष्क के प्रति ! खुश रहूँगा तो दिमाग भी दुरुस्त रहेगा ! दिमाग दुरुस्त रहेगा तो शरीर भी स्वस्थ रह पाएगा !  शरीर स्वस्थ रहेगा तो............अब यह तो सबको पता ही है 🙏

संदर्भ, व्हाट्सएप विश्वविद्यालय 

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2022

लम्बी उम्र और हुस्न का हुक्का

भगवान ने आज तक ऐसी कोई महिला नहीं बनाई जो अपनी प्रशंसा सुन अभिभूत ना हो जाए ! आपको बस इसी कमजोरी कहें या खूबी का लाभ उठाना है ! इसके लिए आपको अपने दिल पर पत्थर रख अपनी पत्नी की रोज प्रशंसा करनी है ! यदि, ''चौदहवीं का चाँद हो या आफताब हो, जो भी हो तुम खुदा की कसम लाजवाब हो,'' यह गीत गा सकें तब तो आपकी खुशी घुटने मोड़ कर आपके घर बैठी रहेगी ! फिर ना रोटी जलेगी, ना दाल में नमक ज्यादा होगा, ना चाय फीकी रहेगी, ना नाश्ता बेस्वाद होगा ! घर का माहौल उत्सव भरा, बच्चे हंसते-खेलते-खिलखिलाते रहेंगे ! गमलों में फूल लहलहाते रहेंगे ! घर के दर ओ दीवार पर खुशी सदा नए पेंट की तरह चिपकी रहेगी......!

#हिन्दी_ब्लागिंग 
कुछ दिनों पहले मुझे एक समारोह शिरकत करने का मौका मिला ! मैं जब वहाँ पहुंचा तो मंच पर एक दिव्य पुरुष की वाणी से उम्रदराज होने का नुस्खा अवतरित हो रहा था ! वक्ता, महानुभाव कुछ ज्यादा ही दिव्य होने की कोशिश में थे ! वे बाजार में उपलब्ध सारे उम्र बढ़ाऊ टोटकों का घालमेल कर बनाए गए नुस्खे पर अपने नाम का ठप्पा लगा, सामने लंबी उम्र की आकांक्षा में बैठे मूढ़ श्रोताओं के कानों में उड़ेले जा रहे थे ! लोग ऐसे भाव विभोर हो सुन रहे थे जैसे हॉल से निकलते ही उनकी उम्र तीस साल बढ़ जाएगी ! भाषण तो कुछ देर बाद खत्म हो गया पर उपकृत लोग अपनी तालियां रोके ना रोक पा रहे थे ! उनके बाद ही मुझे उवाचना था !   

इतने हो-हल्ले के बाद मुझे लग रहा था कि अब मुझे कौन सुनेगा या अब कोई सुनना चाहेगा भी या नहीं ! पर वह लेखक, कवि या नेता ही क्या जो मंच पर खड़े हो माइक संभालने का लोभ संवरण कर जाए ! वैसे भी उपस्थितों की कमजोर नस मेरे हाथ लग ही गई थी ! तो अपन भी जा खडे हुए मंच पर ! मेरा सबसे पहला उद्देश्य था पूर्ववर्ती वक्ता के प्रभाव से श्रोताओं को मुक्त कर अपने वाक्जाल में उलझाना !

मैंने बिना किसी लाग-लपेट-भूमिका के अपना प्रवचन शुरू कर श्रोताओं से कहा कि मेरे मंच पर आने के पहले जरा सी भी करतल ध्वनि नहीं हुई, पर मेरा चैलेंज है कि मेरे जाते समय आपकी तालियां रुकेंगी नहीं ! इतना सुनते ही सारा जमघट शांत हो मेरी ओर मुखातिब हो गया ! मेरी आधी जीत हो चुकी थी ! बस स्टेज लूटना बाकी था !

मैंने कहा कि मैं भी आज आपको लम्बी उम्र जीने का ही राज बताने जा रहा हूँ, पर इसमें कोई हींग या फिटकरी नहीं लगती, बस आपकी कार्य कुशलता और क्षमता की जरुरत पड़ेगी ! इतना सुनते ही लोग उत्सुक हो अपनी सीटों पर कुछ आगे खिसक आए ! माहौल  बन चुका था ! मैंने कहा मेरे नुस्खे का राज है खुश रहना ! खुश रहिए और लम्बा जीवन पाइए ! पर यहां एक पेंच है ! शादी-शुदा इंसान के लिए खुश रह पाना इतना आसान नहीं होता ! इसके लिए खुद के बजाए आपको अपनी श्रीमती जी को खुश रखना पडेगा ! जो कि हर पुरुष के लिए टेढ़ी खीर है ! पर यहीं मेरा उपाय काम आता है !  

ऐसी मान्यता है कि दुनिया में एक चेहरे जैसे कम से कम तीन लोग होते हैं ! पर यह निर्विवाद सत्य है कि करोड़ों बीवियों में कोई भी एक सी नहीं होती ! सबका अपना अलग ही स्वभाव होता है ! पर एक बात ऐसी भी है जो तमाम बीवियों में बिना अपवाद, निश्चित रूप से जरूर पाई जाती है और वह है प्रशंसा ! भगवान ने आज तक ऐसी कोई महिला नहीं बनाई जो अपनी प्रशंसा सुन अभिभूत ना हो जाए ! आपको बस इसी कमजोरी कहें या खूबी का लाभ उठाना है ! इसके लिए आपको अपने दिल पर पत्थर रख अपनी पत्नी की रोज प्रशंसा करनी है ! यदि, ''चौदहवीं का चाँद हो या आफताब हो, जो भी हो तुम खुदा की कसम लाजवाब हो,'' यह गीत गा सकें तब तो आपकी खुशी घुटने मोड़ कर आपके घर बैठी रहेगी ! फिर ना रोटी जलेगी, ना दाल में नमक ज्यादा होगा, ना चाय फीकी रहेगी, ना नाश्ता बेस्वाद होगा ! घर का माहौल उत्सव भरा, बच्चे हंसते-खेलते-खिलखिलाते रहेंगे ! गमलों में फूल लहलहाते रहेंगे ! घर की दीवारें सदा आपके स्वागत को आतुर मिलेंगी ! घर के दर ओ दीवार पर खुशी सदा नए पेंट की तरह चिपकी रहेगी ! 

पर आपको तो पता रहेगा कि चाँद चौदहवीं का नहीं दूज का है ! मन कचोटेगा रोज-रोज झूठ बोलने पर ! ग्लानि से सर झुका रहेगा ! अपनी ही नजरों में आप मुजरिम बन जाओगे ! पर साथ ही खुश भी रहना है, लम्बी उम्र भी पानी है और नकारात्मकता से भी छुटकारा पाना है ! मुख्य बात भी यही है ! तो इसका भी उपाय लेकर ही मैं आपके सामने आया हूँ ! इसके लिए आपको रोज सोने के पहले, अकेले में एक मंत्र पढ़ना है जो आपको आपकी सारी दुश्चिंताओं से मुक्ति भी दिला देगा और आप ''वीर भोग्या वसुंधरा'' बन जाओगे ! अमोघ मंत्र के तीन बार का जाप आपको हर दुविधा से छुटकारा दिला सुबह फिर चापलूसी के लिए तैयार करवा देगा !  

तुम्हारे हुस्न का हुक्का तो बुझ चुका है जानम,                          
वह तो हम ही हैं, जो गुड़गुड़ाए जाते हैं ! 

जाहिर है, मैं उस दिन अपना चैलेंज जीत चुका था ! तालियों की गड़गड़ाती हुई तड़तड़ाहट हॉल के बाहर तक गूँज रही थी ! मैं स्वर्गीय के.पी. सक्सेना जी को मन ही मन नमन कर, बाग-बाग होते दिल को संभालते, सर झुकाए अपने स्थान को ग्रहण करने बढ़ा जा रहा था !

विशिष्ट पोस्ट

जिसने सबसे ज्यादा विभिन्न रोगग्रस्त पात्रों का किरदार निभाया

अनेकों बार  Autism, Dyslexia, Progeria, Paraplegia, Alzheimer, Amnesia, Schizophrenia जैसी अनेक  बीमारियों पर, जिनका नाम भी आम लोगों ने सुना...