बुधवार, 27 जुलाई 2011

अजीब जरूर हैं, पर गरीब बिल्कुल नहीं हैं।

कुछ बातें ऐसी होती हैं जो हमारे आस-पास होती रहती हैं, हम उपयोग में भी लाते हैं पर उनकी "अजीबोगरीबियत" का हमें अंदाजा भी नहीं लग पाता। ऐसे ही कुछ नमूने पेश हैं :-

1, बताईये यह क्या लिखा गया है -
Taumatawhakatangihangakoauauotamateapokaiwhenuakitanatahu
यह न्यूजीलैंड की एक पहाड़ी का नाम है, जो संसार के किसी भी स्थान का सबसे लम्बा नाम है।

2, अंग्रेजी का 15 अक्षरों का अकेला शब्द uncopyrightable है जिसमें कोई भी अक्षर दोहराया नहीं जाता।

3, धन-दौलत-पैसा, जैसे शब्द सुनने में मधुर तथा कर्ण प्रिय लगते हैं। पर कर्ण प्रियता यानि संगीत का बाजार विश्व भर में करीब 40 खरब डालर का है।

4, आजकल नोट सिर्फ कागज के ही नहीं बनते बल्कि उनमें सूती और लिनेन जैसे कपडों की कतरने भी मिलाई जाती हैं।

5, अंग्रेजी भाषा के "set' शब्द के सबसे ज्यादा अर्थ मिलते हैं।

6, अमेरिकन और यूरोपियन लोग हर साल अपने पालतुओं पर करीब 17 बिलियन डालर खर्च कर डालते हैं।

7, " i " शब्द के ऊपर की बिंदी tittle कहलाती है।

13 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

ज्ञानवर्धक पोस्ट!

SANDEEP PANWAR ने कहा…

भाई अंग्रेजी में कौन सा शब्द सबसे लम्बा है,
मुझे बता देना। उसका अर्थ भी

Sunil Kumar ने कहा…

अच्छी जानकारी आभार ....

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत ज्ञानवर्धक और उपयोगी जानकारी मिली, आभार.

रामराम.

Pinkey ने कहा…

काम का ब्लॉग है भाई जी.के.से भरपूर लग रहा है.अब तो आना ही पडेगा...पूरा पढ़ना चाहूंगी शायद बहुत कुछ ले के जाऊं.भाई मैं तो बड़ी स्वार्थी औरत हूँ जहाँ से कुछ मिलता है वहीँ जाती हूँ हा हा हा यहाँ से मिलेगा ये पक्का.पोस्ट को जरा बड़ा लिखो भाई.
झगड़ा करूंगी वरना.
ऐसिच हूँ मैं तो.

Roshi ने कहा…

sunder jankari mili

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़े रोचक तथ्य हैं।

नीरज मुसाफ़िर ने कहा…

इसीलिये तो कहते हैं- कुछ अलग सा

vidhya ने कहा…

अच्छी जानकारी आभार ..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

रोचक तथ्य ... अच्छी जानकारी ...

दिलबागसिंह विर्क ने कहा…

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

इंदुजी, स्वागत है आपका

Abhay Sharma ने कहा…

bahut sunder evam prernadayi

विशिष्ट पोस्ट

हिंदी, अपनाना है तो दिल से अपनाएं

ठीक है अंग्रेजी का महत्व अपनी जगह है। पर उसके कारण, अकारण ही हम अपनी भाषा को हीन समझते हैं, उसे दोयम दर्जे की मान लेते हैं ! दुःख तो तब होता...