सोमवार, 31 जनवरी 2011

यह एवरेस्ट कौन थे ?

माउंट एवरेस्ट, दुनिया की सबसे ऊंची पहाड़ी चोटी। पर यह एवरेस्ट कौन थे जिनके नाम पर इस चोटी का नाम रखा गया ?

1830 से 1843 तक भारत के सर्वेयर जनरल रहे थे कर्नल सर जार्ज एवरेस्ट। आधुनिक भूगणितीय सर्वेक्षण की नींव भारत में उन्होंने ही रखी थी। दक्षिण की कन्याकुमारी से लेकर उत्तर की मसूरी तक हिमालयी पर्वत श्रेणी के वृत्तांश (meridional ark)को मापने जैसा असंभव सा कार्य सर्वप्रथम उन्होंने ही किया था। उनके इसी बहुमूल्य तथा मौलिक कार्य के कारण हिमालय के सर्वोच्च शिखर का नाम उनके नाम पर रखा गया था।

9 टिप्‍पणियां:

शोभा ने कहा…

wah, nai jankari

Patali-The-Village ने कहा…

जानकारी के लिए धन्यवाद|

anshumala ने कहा…

कही पढ़ा था की उनके भारतीय शिष्य ने ही एवरेस्ट का सही माप किया था क्या मेरी ये जानकारी सही है |

राज भाटिय़ा ने कहा…

हम आज तक इस कर्नल सर जार्ज एवरेस्ट के नाम से क्यो चिपके बेठे हे, कोई ओर देश होता तो आज तक इस अग्रेजॊ के नाम को सभी जगह से हटा देता, आप के लेख से एक अच्छी जानकारी मिली, ्धन्यवाद

अरूण साथी ने कहा…

achhi jankari

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

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दो प्रश्न :
क्या 'एवरेस्ट' नामकरण से पहले वह ऊँची पर्वत शृंखला बेनाम थी?
गगनचुम्बी यह चोटी किसी भारतीय की दृष्टि बची कैसे रह गयी?

जबकि भारतीयों की प्रवर्त्ति रही कि वे अपने आस-पास की जड़ वस्तुओं तक का नाम पहले रखते है उपयोग बाद में करते हैं.

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Ashish Shrivastava ने कहा…

माउंट एवरेस्ट को स्थानीय नेपाली लोग सागरमाथा कहते है! यह पर्वत भारत में नहीं, नेपाल चीन सीमा पर है !

प्रतुल वशिष्ठ ने कहा…

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आशीष श्रीवास्तव जी,
'सागरमाथा' नाम जानकार बहुत खुशी हुई.
शब्द से ध्वनि निकल रही है : सागर जब मथा [समुद्र-मंथन] तब ही इसकी उत्पत्ति हुई.
आज के भू-शास्त्री भी मानते हैं कि कभी यहाँ विशाल सागर हुआ करता था.
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जानकारी देने के लिये आभारी हूँ.

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शिवम् मिश्रा ने कहा…


बेहतरीन पोस्ट लेखन के लिए बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है - पधारें - ठन-ठन गोपाल - क्या हमारे सांसद इतने गरीब हैं - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा