pub-3648900737756323 कुछ अलग सा

बुधवार, 24 सितंबर 2008

प्रभू भी धोखा खा गए

राजजी के युवक को मिले दादी माँ के आशीर्वाद से एक बात याद आ गयी -------
वैसी ही एक दादी मां मरने से बहुत डरती थीं। सो भगवान से सदा प्रार्थना करती रहती थीं। एक बार प्रभू ने तंग आकर उन्हें दर्शन दे ही दिए और बता दिया कि उनकी उम्र अभी चालीस साल और तीन महिने बाकी है। दादी मां खुश। अगले दिन से ही सुखमय जिंदगी की तैयारियां शुरु कर दीं। ब्युटी-पार्लर में जा बाल डाई करवाये, मसाज करवाई, फ़ेशिअल, पैडी और ना जाने क्या-क्या करवा कर जैसे ही बाहर निकलीं एक बस की चपेट में आ स्वर्ग सिधार गयीं। ऊपर जाते ही प्रभू का गला पकड़ लिया, कि तुमने तो मेरी उम्र अभी चालीस साल और बताई थी, तो यह क्या कर दिया। प्रभू भी हड़बड़ा गये, बोले "अरे माई तुम्हें तो मैं पहचान ही नहीं पाया।"

मंगलवार, 23 सितंबर 2008

तारे जमीं पर और आस्कर

कुछ दिन पहले फ़िल्म अभिनेता राजपाल यादव ने एक चुटकुला सुनाया था कि एक बाप अपने संघर्षरत बेटे को टी वी पर एनिमल किंगडम देखते देख पूछता है कि अब तो कुत्ते बिल्लीयां भी पर्दे पर आ गये तुम कब आओगे। पढ़ सुन कर हंसी आती है पर सच यह है कि माता-पिता कि अपनी संतानों से अपेक्षायें काफी बढ़ गयी हैं। जिसका नज़ारा हम आये दिन छोटे पर्दे पर बढ़ते रियाल्टी शोज़ के रूप में देखते हैं। भाग लेने वाले बच्चों से ज्यादा उनके माँ-बाप टेंश्नाए रहते हैं। अपनी जिंदगी के अधूरे सपनों को वह अपनी संतानों द्वारा पूरा होता देखना चाहते हैं उसके लिए चाहे कोई भी कीमत चुकानी पड़े।
तारे जमीं पर मैने भी देखी है, अच्छी भी लगी थी। उस समय भी एक प्रश्न मन में उठा था, आज यह समाचार पढ़ कर फिर उस सवाल ने सर उठाया कि फ़िल्म का नायक बच्चा यदि अच्छा चित्रकार ना होता तो पिक्चर का अंत क्या होता। आज हजारों ऐसे बच्चे हैं जिन्हें डिस्लेक्सिया नाम की बिमारी नहीं है, पर वह सब ना पढ़ने में अच्छे हैं नाही किसी कला में, यहां तक कि उनकी किसी चीज विशेष में रुचि तक नहीं है। पर उनके माता-पिता, पालक, परिवार तारे---, या रियाल्टी शोज़ देख कर सफलता के दिवाने हो कर अपने बच्चों से अपेक्षा करने लग जायें कि पढ़ाई ना सही खेल में, खेल ना सही नाच में, गाने में कहीं तो कुछ करो। आमीर ने बहुत अच्छी फ़िल्म बनाई पर उनकी यह बात गले नहीं उतरती कि हर बच्चे में कुछ विलक्षण प्रतिभा छुपी होती है। उल्टे वह महत्वाकाक्षीं मां-बाप की सुप्त कामनाओं को हवा दे देते हैं। उन्होंने तो जिद पकड़ कर अपने नायक को हीरो बना दिया पर आम जिंदगी में ऐसा होना क्या संभव है।
आस्कर पाने वाली फ़िल्में जिंदगी के काफी करीब होती रही हैं। इसलिए तारे----, क्युंकि हमारी फ़िल्म है, सिर्फ़ इसलिए उससे ज्यादा अपेक्षा करना ठीक नहीं होगा।
मेरे अनुसार अब तक आस्कर के लिए भेजी गयीं फ़िल्मों में सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म "मदर इंडिया" थी। पर उस समय जूरी को यह समझाना मुश्किल हो गया था कि एक माँ अपने भूख से बिलखते बच्चों को बचाने के लिए साहूकार का प्रस्ताव क्यों नहीं मान लेती है।

टेंशन है, ना भाई ना

ट्रेन कभी धीमी हो कभी तेज, फिर कभी इतनी धीमी हो जाए कि लगे रुकने वाली है। फिर पता नहीं क्या हुअ कि पूरी गाडी डगमगाने लगी, यात्री एक दूसरे पर गिरने लगे, सारा सामान ऊपर नीचे हो गया, लगा जोर का भूंकंप आ गया हो। फिर अचानक ट्रेन खडी हो गयी। लोगों ने देखा गाडी पटरी से उतर खेतनुमा जगह में खडी है। गुस्से से भरे लोगों ने उतर कर ड़्राईवर को घेर लिया और इस दुर्घटना का कारण पूछने लगे। ड़्राईवर बोला, अरे साहब पता नहीं कहां से एक पागल पटरियों पर आ गया था, कभी चलने लगता, कभी दौड़ने, कभी नाचने। परेशान कर रख दिया। भीड चिल्लाई, तो गाडी चढ़ा देनी थी उसके ऊपर।
ड्राईवर बोला 'वही तो कर रहा था'
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श्रीमतीजी अपने बच्चों को पुराना फ़ोटो-एलबम दिखा रहीं थी। एक फोटो को देख बच्चे ने पूछा, मम्मी, ये बालों वाले अंकल कौन हैं। श्रीमतीजी बोलीं, बेटा ये तुम्हारे पापा हैं। पापा! तो हमारे साथ जो गंजा रहता है, वो कौन है। बेटे ने पूछा।

सोमवार, 22 सितंबर 2008

हिचकी, कारण और निवारण

दूध पीते बच्चे को परेशान करती हिचकी, बड़ों को अचानक शुरु हो तंग करती हिचकी, शराबियों की पहचान बनी हिचकी और कभी-कभी जिंदगी की अंतिम हरकत हिचकी। देखने सुनने में शरीर की एक सामान्य सी हलचल, परन्तु ज्यादा देर तक टिक जाये तो मुसीबत।
सांस अंदर लेने से उतकों की कठोर परतों से बना, वक्षस्थल के निचले हिस्से में स्थित, 'डायाफ़्राम' पेट की ओर संकुचित हो फेफडों में हवा भरने देता है। इससे भोजन को श्वास नली में जाने से रोकने वाला 'एपिग्लाटिस' और वाक तंतुओं का प्रवेशद्वार 'ग्लाटिस' दोनो खुल जाते हैं। इस क्रिया में व्यवधान आने पर हिचकी शुरु हो जाती है। इसके आने पर 'डायाफ्राम' में ऐंठन शुरु हो जाती है जिससे हवा तेजी से ग्लाटिस और एपिग्लाटिस पर पडती है, जिससे दोनों झटके से बंद होते हैं और वही आवाज हिचकी के रूप में सुनाई पड़ती है। जब तक व्यवधान दूर नहीं हो जाता यह क्रिया चलती रहती है।
कुछ क्षण सांस रोकने, चीनी चूसने, ठंडा पानी पीने या गिलास के बाहर वाले किनारे से पानी पीने या एक लिफ़ाफ़े को मुंह से फुलाकर उसमें सांस लेने से राहत मिलती है। कागज़ के थैले में नाक द्वारा सांस लेने से कार्बन डाई आक्साईड के मस्तिष्क में पहुंचने से तंत्रिकाओं की क्रियाशीलता में कमी आने के कारण हिचकी रुक जाती है। यदि मस्तिष्क को भ्रमित या अचंभित कर दिया जाए तो भी फ़र्क पडता है। शायद इसीलिए हमारे देश में हिचकी आने पर कहा जाता है कि कोई याद कर रहा है, इस तरह दिमाग का ध्यान बटाने से फ़र्क पड जाता है।
एलोपैथी में उपचार तब ही किया जाता है, जब हिचकी ना रुकने से मनुष्य तनाव में आ जाता है। इन परिस्थितियों में क्लोरप्रोमेज़िन या एमाइल नाइट्रेट जैसी दवाएं प्रयोग में लाई जाती हैं। इनसे फायदा ना होने पर आप्रेशन द्वारा फ्रेनिक तंत्रिका के डायाफ्राम तक जाने वाले भाग को निकाल दिया जाता है। पर इससे सांस लेने की क्षमता कम हो जाती है।

रविवार, 21 सितंबर 2008

द्वादस ज्योतिर्लिंग, एक यात्रा

पुराणों के अनुसार शिवजी जहां-जहां खुद प्रगट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है।  
     
सौराष्ट्रे सोमनाथ च श्री शैले मल्लिकार्जुनम, उज्जयिन्या महाकाल, मोंधारे परमेश्वरम, केदार हिमवत्पृष्ठे, डाकिन्या भीमशंकरम वारासास्था च विश्वेश, त्र्यम्बक गौतमी तीरे, वैद्यनाथ चिता भूमौनागेश द्वारका वने। सेतुबन्धे च रामेशं घुश्मेशं च शिवाल्ये। द्वादशेतानिनामानि प्रातरुत्थायय: पठेत, सर्व पापैर्विनिर्मुक्त: सर्व सिद्धि फल लभत्।
1, सौराष्ट्र में सोमनाथ :- काठियावाड के प्रभाष क्षेत्र में विराजमान हैं। दक्ष के श्राप से चंद्रमा को क्षय रोग से मुक्त करने के लिए यहां प्रगट हुए थे।
2, श्री शैल :- नारदजी के भ्रमित करने से नाराज, अपने पुत्र कार्तिकेय को, मनाने के लिए, दक्षिण भारत में मल्लिकार्जुन के रूप में प्रगट हुए थे।
3, महाकालेश्वर :- दूषण नामक दैत्य द्वारा अवन्तीनगर (उज्जैन) पर आक्रमण करने पर काल रूप में भगवान शिव ने सारे दैत्यों का नाश कर जहां से उजागर हुए थे उसी गड्ढे में अपना स्थान बना लिया।
4, ओंकारेश्वर :- मध्य प्रदेश के मांन्धाता पर्वत पर नर्मदा नदी के उद्गम स्थल पर पर्वतराज विंध्य की कठोर तपस्या से खुश हो, वरदान देने हेतु, यहां प्रगट हुए थे।
5, केदारेश्वर :- हिमालय के केदार नामक स्थान पर विराजमान हैं। यह स्थान हरिद्वार से 150मील दूर है। विष्णुजी के अवतार नर-नारायण की प्रार्थना पर यहां स्थान ग्रहण किया था।
6, भीमशंकर :- यह स्थान मुंबाई से 60मील दूर है। यहां कुंभकर्ण के पुत्र भीम का वध करने के लिये अवतरित हुए थे।
7, विश्वेश्वर :- विश्वेश्वर महादेव काशी में विराजमान हैं। प्रभू ने माँ पार्वती को बताया कि मनुष्यों के कल्याण के लिये उन्होंने इस जगह पर निवास किया है।
8, त्र्यम्बकेश्वर :- महाराष्ट्र में नासिक रोड स्टेशन से 25किमी की दूरी पर स्थित हैं। गौतम ऋषी और उनकी पत्नी अहिल्या की तपस्या से प्रसन्न हो कर यहां विराजमान हुए थे।
9, वैद्यनाथेश्वर :- बिहार में वैद्यनाथधाम में विराजमान हैं। रावण को लंका ले जाकर स्थापित करने के लिए शिवजी ने एक शिवलिंग दिया था, जिससे वह अजेय हो जाता। पर विष्णुजी ने उसको अजेय ना होने देने के कारण शिवलिंग को यहां स्थापित करवा लिया था।
10, नागेश्वर :- द्वारका के समीप दारुकावन मेँ स्थित हैं। यहां शिवजी तथा पार्वतीजी की पूजा नागेश्वर और नागेश्वारी के रूप में होती है।
11, रामेश्वर :- दक्षिण भारत के समुंद्र तट पर पाम्बन स्थान के निकट स्थित है। लंकाविजय के समय भगवान राम ने इनकी स्थापना की थी।
12, घुश्मेश्वर :- महाराष्ट्र के मनमाड से 100किमी दूर दौलताबाद स्टेशन से 20किमी की दूरी पर वेरुल गांव में स्थित हैं। घुश्मा नाम की अपनी भक्त की पूजा से प्रसन्न हो कर यहां प्रगट हुए और घुश्मेश्वर कहलाये।
* पूरी कथाएं फिर कभी।

अति तो आक्सीजन की भी खतरनाक है

आक्सीजन मिलना यानि नयी जिंदगी मिलना। यह एक मुहावरा ही बन गया है। परंतु वैज्ञानिकों के अनुसार वही आक्सीजन जिसके बिना जिंदा नहीं रहा जा सकता, प्राणियों के लिए खतरनाक भी हो सकती है। सौ साल के भी पहले वैज्ञानिक पाल बर्ट ने यह चेतावनी दी थी कि शुद्ध आक्सीजन में सांस लेना जानलेवा हो सकता है। ज्यादा खोज करने पर वैज्ञानिकों ने पाया कि हम ज्यादा से ज्यादा 24 घंटे तक शुद्ध आक्सीजन सहन कर सकते हैं, उसके बाद निमोनिया हो जाता है। यह भी पाया गया है कि मनुष्य सिर्फ़ दो घंटों तक ही दो-तीन वायुमंडलीय दवाब सहन कर सकता है, इसके बाद आक्सीजन की अधिकता से उसका मानसिक संतुलन बिगडने लगता है, उसकी यादाश्त लुप्त हो जाती है। अगर यह दवाब और बढ़ जाए तो दौरे पड़ने शुरु हो जाते हैं। अंत में मृत्यु हो जाती है।
शुद्ध आक्सीजन ऐसे प्राणियों के लिए भी हानिकारक होती है जो प्राकृतिक तौर पर कम आक्सीजन वाली दशाओं में रहते हैं। इस बात का उपयोग हमारी आंतों में रहनेवाले बहुत से खतरनाक कृमियों को खत्म करने में किया जाता है।
क्या तमाशा है भाई, हो तो मुसीबत और नहो तब तो है ही। सब प्रभू की माया है।

शनिवार, 20 सितंबर 2008

टेंशन मुक्त होने के लिए

दो चलाकू टाईप के आदमी दिल्ली से, रात में कहीं जाने के लिए ट्रेन के डिब्बे में चढ़े, तो पाया कि कहीं बैठने तक की जगह नहीं है। तभी उनमें से एक चिल्लाने लगा, सांप-साप, भागो-भागो। इतना सुनना था कि सारे यात्री सर पर पैर रख भग लिए। दोंनो ने एक दूसरे को मुस्करा कर देखा और ऊपर की बर्थ पर चादर बिछा कर सो गये। सबेरे नींद खुलने पर उन्होने पाया कि गाड़ी कहीं खड़ी है, उन्होनें बाहर झाड़ु देते आदमी से पूछा कि भाई कौन सा स्टेशन है? उसने जवाब दिया, दिल्ली। अरे दिल्ली तो कल रात में थी, इन्होंने पूछा। तो जवाब मिला, साहब, कल रात इस डिब्बे में सांप निकल आया था तो इस डिब्बे को काट कर अलग कर बाकी गाडी चली गयी थी।
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संताजी का स्टेशन रात दो बजे आता था, सो वे अटैंडेंट को रात में उठाने को कह सो गये। पर जब आंख खुली तो सबेरा हो चुका था। इनका पारा गरम, जा कर अटैंडेंट का गला पकड लिया और दुनिया भर की सुना उस की ऐसी की तैसी कर दी। अटैंडेंट को चुप देख संताजी दहाडे कि बोलता क्यूं नहीं कि मुझे क्यों नहीं जगाया? अटैंडेंट बोला क्या बोलुं सर, आप तो फिर भी ट्रेन में हैं, मैं तो उस बेचारे का सोच कर परेशान हूं, जिसको मैने जबरदस्ती रात को सुनसान स्टेशन पर उतार दिया है।

विशिष्ट पोस्ट

दिल्ली पुलिस तुम्हें सलाम 🙏

पुलिस जिसका नाम ही काफी है ! उसका एक जवान यदि किसी मरघिल्ले को पांच सेकेंड भी घूर कर देख ले तो उसका वस्त्र गीला-पीला हो जाए ! सिर्फ एक बार स...