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सोमवार, 6 अप्रैल 2026

अभिमान, स्वाभिमान

इतना सुनना था कि चुहिया मुंह बिचका कर वहां से सीधे पहाड़ के पास चली आई और उनसे अपने विवाह की इच्छा जाहिर की। अब आज के युग मे छोटी-छोटी बातें तेज-तेज चैनलों से पल भर में दुनिया मे फैल जाती हैं तो पर्वतराज को चुहिया की इस दौड़-धूप की खबर का तो पता लगना ही था ! वह भी तब जब उनके शिखर पर एक दूर-संचार का टावर भी लगा हुआ था। चुहिया को गिरता-पड़ता वहां तक पहुंचने की खबर मिलते ही पर्वतराज मायूस सा दिखते हुए चेहरे पर दर्द भरे भाव ले आए और इंतजार करने लगे नायिका के सामने आने का................... 

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

एक सुबह एक तपस्वी ऋषि नदी मे स्नान करने के पश्चात सूर्यदेव को अर्ध्य दे रहे थे, तभी आकाशगामी एक चील के चंगुल से छूट कर एक छोटी सी चुहिया उनकी अंजली मे आ गिरी। वह बुरी तरह घायल थी। वे उसे संभाल कर अपने आश्रम ले आए ! उसका इलाज तथा मरहम-पट्टी कर किसी अनजान खतरे को भांपते हुए अपने पास ही रख लिया। समय बीतता गया और उनकी तीमारदारी, पुत्रीवत स्नेह में बदल गई ! इसी मोहवश अपने तपोबल से उन्होंने उसे मानव रूप दे सर्वगुण सम्पन्न कर दिया। 

परामर्श 
कन्या
जब बड़ी हुई तो उसके विवाह के लिए उन्होंने एक योग्य मूषक के बारे में उसकी राय जाननी चाही तो चुहिया ने कहा, मैं इस चूहे जैसे निम्न कोटि के जीव से नहीं, दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति से विवाह करना चाहती हूँ ! ऋषि के बहुत समझाने पर भी जब वह ना मानी तो उन्होंने उसे सबक सिखाने हेतु सबसे तेजस्वी देवता सूर्यदेव के पास भेज दिया। चुहिया ने सूर्यदेव के पास जा कर अपनी इच्छा बताई। सूर्यदेव सारी बात जानते ही थे, उन्होंने उससे कहा कि देवी, मुझसे ताकतवर तो मेघ है, जो जब चाहे मुझे ढ़क लेता है तुम उनके पास जाओ। वे ही तुम्हारी इच्छापूर्ती कर सकते हैं ! 

सूर्यदेव से याचना 
यह सुन मुषिका मेघराज के पास पहुंच गई और अपनी कामना उन्हें बताई। मेघराज ने मुस्कुरा कर कहा बालिके, तुमने गलत सुना है। अरे ! मुझसे तो कहीं शक्तिशाली पवन है जो अपनी मर्जी से मुझे इधर-उधर डोलवाता रहता है। मैं उसके सामने कहीं नहीं टिकता ! इतना सुनना था कि चुहिया ने पवनदेव को जा पकड़ा। पवनदेव ने उसकी सारी बात सुनी और फिर उदास हो बोले कि मैं जरूर तुम जैसी सुंदरी से विवाह कर लेता ! पर मैं तुम्हारे परिक्षण में उत्तीर्ण नहीं हो पा रहा हूँ, क्योंकि सदियों से मैं विशाल पर्वत से पार नहीं पा सका हूँ ! उनके आगे मेरा कोई बस नहीं चलता ! 
मेघदेव से विनय 
इ तना सुनना था कि चुहिया मुंह बिचका कर वहां से सीधे पहाड़ के पास चली आई और उनसे अपने विवाह की इच्छा जाहिर की। अब आज के युग मे छोटी-छोटी बातें तेज-तेज चैनलों से पल भर में दुनिया मे फैल जाती हैं तो पर्वतराज को चुहिया की दौड़-धूप की खबर तो पता लगनी ही थी ! वह भी तब जब उनके शिखर पर एक दूर-संचार का टावर लगा हुअ था। वे तो इंतजार कर ही रहे थे नायिका के आने का ! 
पवनदेव से विनती 
चु हिया को गिरता-पड़ता वहां तक आता देखते ही पर्वतराज मायूस सा दिखते हुए चेहरे पर दर्द भरे भाव ले आए और जब चुहिया ने अपने आने का कारण बताया तो उन्होंने उसे वही बता अपना पीछा छुड़वाया, जो सैकड़ों साल पहले भी एक बार बता चुके थे कि एक जीव मेरे से भी ताकतवर है, जो अपने मजबूत पंजों से मुझमें भी छिद्र कर खोखला बना देता है। देख ही रही हो मुझे अभी भी लगातार वेदना हो रही है ! 
पर्वतराज की शरण में 
इ तना सुन चुहिया ने वापस अपने पितृतुल्य ऋषि के पास जा चूहे से अपने विवाह की स्विकृति दे दी। ऋषि ने उसी समय मूषकराज को खबर भेजी ! वे वहां आए और सारी बातें सुन कर कुछ देर के लिए मौन साध लिया, फिर बोले देवी क्षमा करें। हमारा कभी भी मतैक्य नहीं हो सकता ! इसलिए मैं आपसे विवाह नहीं कर सकता ! सच कटू होता है ! आपकी अस्थिर बुद्धी तथा चंचल मन, इतने महान और सुयोग्य पात्रों की काबलियत और गुण ना पहचान सके ! मैं तो एक अदना सा चूहा हूं ! मेरे साथ आपका निर्वाह कभी भी ना हो सकेगा ! मुझे क्षमा करें ! इतना कह उन्होंने विदा ली ! अपने को सर्वोत्कृष्ट समझने वाली चुहिया को ऐसे परिणाम की आशा नहीं थी ! वह सन्न हो खड़ी रह गई !   

सबक 
सुना है, आजकल मुषिका रानी लेखिका हो गई है और पानी पी-पी कर पुरुष वर्ग के विरुद्ध आग उगलती रचनाएं लिखते हुए महिला संघर्ष समिति की अग्रणी नेता बनी हुई है.......!

@सभी चित्र अंतर्जाल और AI के सौजन्य से 🙏

रविवार, 10 अगस्त 2025

विश्वव्यापी टैरिफ संकट और हम

आज हम इतने सक्षम हैं कि ऐसी चुन्नोतियों से निपट सकें ! थोड़ा-बहुत नुक्सान तो हो सकता है, पर आग में तप कर ही सोना खरा उतरता है ! इसलिए हमें भी उस खर-दिमाग विदेशी के साथ  देसी अहमकों को भी अपना संदेश भेजना जरूरी है ! उसका यही तरीका है कि हमारे यहां जो त्यौहारों का समय शुरू होने जा रहा है, उसमें स्वदेशी या दूसरे देशों की ही खरीददारी करें ! जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके, अमेरिका का बहिष्कार करें ! उसने हमारा प्रतिकार किया है तो हम भी उससे प्रतिशोध लें ! इसलिए देश प्रेम का यह संदेश, यह जज्बात, यह भावना, यह पैगाम, देश के कोने-कोने तक पहुंचना ही चाहिए ............!! 

#हिन्दी_ब्लागिंग 

आज पूरी दुनिया एक सिरफिरे, हठी, अहंकारी, पूर्वाग्रही, मूलत: व्यापारी राजनेता की नासमझी और अड़ियलपन का खामियाजा भुगतने के कगार पर खड़ी है ! अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने हित के लिए  संसार के लगभग सभी देशों के विरुद्ध टैरिफ रूपी युद्ध छेड़ दिया है ! आर्थिक दृष्टि से जिसका असर परमाणु विस्फोट से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है ! पर साथ ही यह भी हो सकता है कि उसकी आर्थिक नीतियां आगे चल कर किसी और रूप में उसी के देश के लिए हानिकारक साबित हो जाएं ! भविष्य में क्या होगा, क्या नहीं, यह तो समय ही बता पाएगा ! 
पिछले दिनों अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने की घोषणा की है ! उसके इस फैसले ने दुनिया भर में हड़कंप सा मचा दिया है। उधर ट्रम्प का मानना है कि उसका यह कदम दूसरे देशों से पैसा ला कर अमेरिका को “ग्रेट अगेन” बनाने में सहायक होगा ! उसे लग रहा है कि जब जापानियों जैसे देशभक्त, स्वाभिमानी लोग उसके सामने झुक गए तो वह सारी दुनिया से अपनी बात मनवा लेगा, पर वैसा होता नजर नहीं आता !  

अभी तक जो बातें सामने आई हैं, उससे तो यही लगता है कि बड़े देश किसी भी प्रकार का समझौता करने की मन:स्थिति में नहीं हैं ! उलटे वे ट्रम्प को सबक सिखाने की ठान चुके हैं ! अमेरिका के पड़ोसी देश कनाडा ने एक एप बना लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया कि कौन सा प्रोडक्ट अमेरिका का है और कौन सा स्वदेशी ! इसके साथ ही उन्होंने छोटी-बड़ी हर दुकान पर घरेलू उत्पादों की संख्या बढ़वा दी है ! जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग अपने देश में बनी चीजें खरीदें ! 

फ्रांस ने अमेरिका का बहिष्कार अपने तरीके से शुरू कर दिया है ! वहां सोशल मीडिया पर वीडियो बनाए जा रहे हैं ! कहा जा रहा है कि अपने देश की चीजें अमेरिका से बेहतर हैं, उनका उपयोग कीजिए। इससे अमेरिकन कंपनियों को झटका लग रहा है !

डेनमार्क, स्पेन और आयरलैंड की किसान यूनियनों ने अमेरिकन बीज, खाद, सोयाबीन, पशु-आहार लेना बंद कर दिया है और लोगों को स्थानीय सामान खरीदने का आव्हान कर रहे हैं ! इसका असर वहां आयातित सामान पर पड़ा है, जो वैसे ही धरा का धरा पड़ा है, कोई लेने वाला नहीं है ! इससे वैकल्पिक स्थानीय उपज की मांग बढ़ी और किसानों को भी फायदा हो गया ! ऊपर से अमेरिका पर निर्भरता भी कम हो गई। 

र्मनी को देखें वहां अमेजन जैसी अमेरिकन ऑनलाइन कंपनियों से काम लेना बंद कर दिया गया है ! यहां तक कि अमेरिका के पेट्रोल तक का बहिष्कार शुरू हो चुका है ! उन्होंने भी दिखा दिया कि आज दुनिया आधे दशक पहले जैसी नहीं रह गई है कि कोई बाहुबली उससे जबरन अपनी बात मनवा ले !

नीदरलैंड के विश्वविद्यालयों में भी विरोध की लहर उठ चुकी है ! वहां से अमेरिकन प्रोडक्ट हटा दिए गए हैं ! छात्रों ने अमेरिका के कंप्यूटर, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनक सामान और दूसरे गैजेट्स  वगैरह खरीदने बंद कर दिए हैं ! वे कहते हैं कि दुनिया के किसी भी देश का सामान ले लेंगे पर अमेरिका का नहीं लेंगे !

इंग्लैण्ड में खुदरा व्यापारियों से कहा जा रहा है कि वे अमेरिका में बने सामान को हटा उस जैसे यूरोपियन या दूसरे देशों के सामान को बेचें। वहां जिस देश का बना है उस देश का लेबल लगाना भी आवश्यक कर दिया गया है। यह बात वहां के पार्ल्यामेंट तक गई। वहां की जनता ने भी सरकार का साथ दे कर कहा कि हम आपके साथ हैं और ट्रम्प को उसी की भाषा में जवाब देना चाहिए ! काश ! हमारे यहां की एक प्रजाति को भी  ब्रिटिश दासता-बोध से मुक्ति मिले ! 

स्ट्रेलया व न्यूजीलैंड ने भी अमेरिका से आने वाली डिब्बा बंद खाद्य सामग्री का बहिष्कार कर राष्ट्रपति ट्रम्प को नसीहत देने की कोशिश की है ! वहां कहा जा रहा है कि अपने खाने में अमेरिकन फ्रोजन प्रोडक्ट को हटा कर अपने देश का ताजा खाना खाएं ! इससे कैलोग जैसे सिरिअल डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों की बिक्री बहुत ज्यादा गिर गई है ! 

क्षिणी कोरिया के युवकों ने अमेरिकन वस्तुओं की लिस्ट बना अपने लोगों को उन्हें ना खरीदने के लिए आगाह किया है ! उन्होंने तो पिज्जा हट, अमेजन, मैकडोनाल्ड, बर्गर किंग जैसी कंपनियों के साथ-साथ अमेरिकन फिल्मों और नेटफ्लिक्स जैसे चैनलों तक के बहिष्कार का आह्वान कर डाला है ! यह आंदोलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है !

यूरोप से इतर मिडिल ईस्ट ने भी अमेरिका और उसकी वस्तुओं के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। नतीजतन सभी जगह अमेरिकन वस्तुओं की बिक्री 30% तक घट गई है ! इससे कारों, अमेजन, कॉस्मेटिक कंपनियों सहित मैक्डोनाल्ड, कोकाकोला, डिब्बा बंद खाद्यों की आमदनी पर भी गहरा असर पड़ रहा है ! यहां तक कि अमेरिका के मनोरंजन जगत पर भी खतरा मंडराने लगा है !

यह तो हुई विदेशों की बात ! इस विपत्ति पर हम क्या करेंगे ? हमारा क्या रुख रहेगा ? भारत की जनता क्या करेगी ? भारत के छोटे-बड़े व्यापारी क्या करेंगे ? हमारे मॉल और रिटेल आउटलेट इस ओर कौन सा कदम उठाएंगे ?  क्या हम अभी भी अमेरिकन उत्पादों के माया जाल में फंस अपने देश का अहित करते रहेंगे ?  यह सारे सवाल मुंह उठाए खड़े हैं ! ऐसे सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कुछ विदेशी ताकतों की कठपुतलियां, मतलबपरस्त, सत्ता-लोलूप, दासत्वबोध से ग्रसित, देश-द्रोही लोग हमें गुमराह करने के लिए प्राणपण से जुटे हुए हैं ! वे नहीं चाहते कि अपना देश, दुनिया में एक ताकत बन कर उभरे ! पर उन्हें और उनके आकाओं को यह आभास तक नहीं है कि जब हमारी विशाल सागर सदृश आबादी उनके विरोध में उठ खड़ी होगी तो उनका क्या हश्र होगा ! 

मारी विडंबना यह है कि हमें अपने देश-हित के लिए सदा से दो तरफा आक्रमणों का सामना करना पड़ता तहा है ! विदेशी और अंदरूनी ! विदेशी तो खुल कर सामने आते रहे हैं, पर ज्यादा खतरा हमें सदा से मुखौटा धारी भीतर घातियों से रहा है ! पर समय के बदलाव और अवाम की जागरूकता के कारण अब इनके मंसूबे सभी को पता चल चुके हैं ! शक्लें पहचानी जाने लगी हैं ! इसका असर भी दिखने लगा है !

वैसे भी आज हम इतने सक्षम तो हो ही गए हैं कि ऐसी चुन्नोतियों से निपट सकें ! थोड़ा-बहुत नुक्सान तो हो सकता है, पर आग में तप कर ही सोना खरा उतरता है ! इसलिए हमें भी उस खर-दिमाग विदेशी के साथ-साथ देशी अहमकों को भी अपना संदेश भेजना जरूरी है और उसका यही तरीका है कि हमारे यहां जो त्योहारों का समय शुरू होने जा रहा है उसमें स्वदेशी या दूसरे देशों की ही खरीददारी करें ! जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके, उसका बहिष्कार करें ! उसने हमारा प्रतिकार किया है तो हम भी उससे प्रतिशोध लें ! 

देश में लाखों लाख ऐसे मासूम लोग हैं, जो झूठ के बहकावे में आ जाते हैं ! दस बार उनके सामने बोला गया असत्य उन्हें सत्य लगने लगता है ! उन्हें सच्चाई बताना जरुरी है ! उन्हें जागरूक करने की जरुरत है ! उनके सामने मक्कारों की पोल खोलना आज की सर्वोपरि आवश्यकता है ! इसलिए देश प्रेम का यह संदेश, यह जज्बात, यह भावना, यह पैगाम, देश के कोने-कोने तक पहुंचना ही चाहिए ! 

जय हिंद ! वंदेमातरम !!

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