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गुरुवार, 11 दिसंबर 2025

भाषाएं, हमें गर्व है इन पर

हर स्कूल में शुरूआती दौर से ही उस क्षेत्र की स्थानीय भाषा के अलावा दो अन्य क्षेत्रों की भाषाएं सीखाने का भी प्रावधान निश्चित तौर पर हो ! देशवासी जितना हो सके अपनी भाषा के अलावा दूसरे प्रांतों की भाषा को भी सीखें ! इंसान तो जितनी भाषाएं सीख सके उतना ही अच्छा है ! हिंदी भाषी तमिल सीखे ! कन्नड़ भाषी पंजाबी जाने ! बांग्ला बोलने वाला पंजाबी समझे ! ओड़िसा में रहने वाले के लिए भोजपुरी समझना मुश्किल ना हो, तो एक दूसरे को समझने का मौका और भाईचारा बढ़ने के साथ-साथ रोजगार के अवसरों में भी निश्चित तौर पर बढ़ोत्तरी होगी.............! 

#हिन्दी_ब्लागिंग 

संस्कृत ! हजारों साल पुरानी भाषा ! जिसका अभी भी अस्तित्व है ! पर विडंबना है कि उसी के बारे में तमिलनाडु के उप-मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने कह दिया कि ''संस्कृत एक मृत भाषा है !'' उस कथन को लेकर व्यर्थ सर खपाने से कोई फायदा नहीं है, ऐसे कुंठित और पूर्वाग्रही लोग अपने हित, अपने स्वार्थ के लिए देश, समाज, धर्म, भाषा को बदनाम करते ही रहते हैं ! इनके अलावा दसियों भाषाएं और भी हैं, यदि उनको बोलने वाले भी अपनी-अपनी भाषा को श्रेष्ठ तथा दूसरी को हीन बताने लग जाएं तो ?  उलटे हमें तो गर्व होना चाहिए कि हमारे पास इतनी समृद्ध और सक्षम भाषाएं हैं, जिनमें संसार की सबसे पुरानी तथा जीवित भाषाएं भी सम्मिलित हैं ! 

बात संस्कृत की, जो एक ऐसी “परिमार्जित” भाषा है जिसे भारत के प्राचीन ऋषियों ने अपने विचारों को बेहद सटीक और परिष्कृत तरीके से लोगों तक पहुंचाने के लिए विकसित किया था। संस्कृत वेदों, उपनिषदों और भगवद गीता सहित भारतीय साहित्य के कई महान कार्यों की भाषा रही है। आज वैज्ञानिक इसे कम्प्यूटर और AI के लिए सबसे उपयुक्त भाषा मानते हैं ! ऐसा भी नहीं है कि लोगों ने इसका उपयोग करना बिलकुल बंद कर दिया है, 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में हजारों लोग अभी भी संस्कृत को अपनी मातृभाषा के रूप में प्रयोग करते हैं तथा इसे मुख्य भाषा भी मानते हैं ! 


संसार की सबसे पुरानी दो भाषाएं हैं, पहली संस्कृत तथा दूसरी तमिल ! शोध बताते हैं कि संसार में हाल के वर्षों में संस्कृत के अध्ययन में लोगों की रुचि और ध्यान बढ़ रहा है, क्योंकि दुनिया भर के लोगों में इसके सांस्कृतिक महत्व में दिलचस्पी बढ़ी है। इससे संस्कृत बोलने वालों का एक नया वर्ग उभरा है जो भाषाओं को संरक्षित और बढ़ावा देने का काम कर रहा है ! दूसरी सबसे पुरानी जीवित भाषा है तमिल, जो आज भी करोड़ों लोगों द्वारा उपयोग में लाई जा रही है ! हमें तो इन दोनों पर तो क्या, अपनी हर भाषा पर गर्व है, होना भी चाहिए, इतनी विविधता तथा व्यापकता और कहां है ! 

🙏🙏

पर कुछ लोग इन्हीं बातों को विवादित बना समाज में द्वेष फैलाने का काम करते हैं ! ऐसे लोगों का षड्यंत्र खत्म करने का एक सटीक उपाय यह है कि हर स्कूल में शुरूआती दौर से ही उस क्षेत्र की स्थानीय भाषा के अलावा दो अन्य क्षेत्रों की भाषाएं सीखाने का भी प्रावधान निश्चित तौर पर हो ! देशवासी जितना हो सके अपनी भाषा के अलावा दूसरे प्रांतों की भाषा को भी सीखें ! 

भाषाएं 
इंसान तो जितनी भाषाएं सीख सके, उतना ही अच्छा है ! हिंदी भाषी तमिल सीखें ! कन्नड़ भाषी पंजाबी जाने ! बांग्ला बोलने वाला पंजाबी समझे ! ओड़िसा में रहने वाले के लिए भोजपुरी समझना मुश्किल ना हो ! ऐसा हो जाए तो एक दूसरे को समझने का मौका और भाईचारे के बढ़ने के साथ-साथ रोजगार के अवसरों में भी निश्चित तौर पर बढ़ोत्तरी होगी ! सरकार और शिक्षा विभाग यदि इस बात पर गौर कर कोई ठोस कदम उठाए, तो कई परेशानियां अपने आप खत्म हो जाएंगी !

जय हिंद 
आज भाषा की बात उठी है, तो क्या किसी का ध्यान एक ऐसी विदेशी भाषा की तरफ भी गया है जिसे हमारे देश में कोई नहीं जानता, फिर भी उसका उपयोग धड़ल्ले से डॉक्टरों के नुस्खों में होता है ! जिसे समझना आम इंसान के वश की बात ही नहीं है ! जिसे तकनीकी रूप से एक मृत भाषा मान लिया गया है ! जिसे अब कोई भी अपनी पहली भाषा (mother tongue) के रूप में नहीं बोलता ! जी हाँ ! लैटिन ! इस भाषा का अपने देश में क्या औचित्य है, कोई नहीं बता सकता ! फिर भी जो चला आ रहा है, वह चला आ रहा है ! स्टालिन जैसे लोग इसका विरोध क्यों नहीं करते ? या फिर अपनी भाषा को दूसरे राज्यों में पढ़वाने के लिए उद्यम क्यों नहीं करते ? 

@सभी चित्र अंतर्जाल के सौजन्य से 

मंगलवार, 21 फ़रवरी 2023

लो, कर लो बात ! मेरी आय बढ गई और मुझे पता ही नहीं

एक वातानुकूलित कमरा होता है ! जिसमें अंदर का बाहर और बाहर का अंदर कुछ पता नहीं चलता ! उस कमरे की एक दिवार पर एक बोर्ड़ लगा रहता है। उस पर एक आड़ी-टेढ़ी-वक्र सी लकीर बनी होती है जिसके आगे एक तीर लगा होता है। उस लकीर को ही ऊपर-नीचे कर यह पता लगा लिया जा सकता है कि लोगों की कितनी आमदनी बढ़ी, कितनी मंहगाई कम हो गई, बेरोजगारी कितनी घट गई, भ्रष्टाचार कितना कम हो गया, आदि-आदि। निष्णात विशेषज्ञ बिना बाहर झांके या जायजा लिए, वहां बैठे-बैठे इस लकीर की मार्फ़त यह सब प्रतिशत और आंकड़ों में बता देते हैं, समझे........?


#हिन्दी_ब्लागिंग

आज ठंड़ कुछ ज्यादा ही थी। चाय की दुकान पर अपने वही पुराने गुरु शिष्य मिल गए, जिनको हम सुविधानुसार ज्ञानी और अज्ञानी के रूप में जानते रहे हैं ! आपस में मिलते ही आदत के अनुसार जन्मजात अज्ञानी शिष्य फिर शुरु हो गया।

अज्ञानी : गुरु, ये सरकार समिति, कमेटी वगैरह क्यूं बनाती रहती है, जब-तब, वह भी बाहर से लोगों को लेकर ? सरकार में तो ऐसे ही काम करने वालों की बहुत भरमार होती है !

ज्ञानी : अरे पगले, कभी किसी मामले को वर्षों लटकाने के लिये, कभी विवादास्पद मुद्दे से अपना सर बचाने के लिये और कभी जनता का ध्यान बंटाने के लिये यह सब करना पड़ता है, तू नहीं समझेगा !

अज्ञानी : गुरु ! पर इसके लिये ज्यादातर लोग अवकाश प्राप्त ही क्यों चुने जाते हैं ?

ज्ञानी : तू जब करेगा, मूर्खता की बातें ही करेगा ! सरकार को बहुतों को उपकृत करना पड़ता है। जिंदगी भर वफादार रह कर भी जो ढंग का कुछ नही पा सका उसे ऐसे काम दे दिए जाते हैं। इधर आम लोगों की धारणा रहती है कि सारी उम्र सरकारी काम में रहने से यह तजुर्बेदार तो होगा ही, इसीलिए इसे चुना गया ! अब यह मत कहना कि सरकारी काम तो..............!

अज्ञानी : पर गुरु अभी एक बहुते जिम्मेदार आदमी ने एलाउंस किया है कि देशवासियों की आय बढ गई है ! पर मेरी तो वहीं की वहीं है ! यह कैसी बात हुई कि मेरी आय बढ़ी और मुझे ही पता नहीं चला....!

ज्ञानी : अरे, तू रहा मूर्ख का मूर्ख ! वैसे भी यह सब समझना इतना आसान भी नहीं होता ! खैर बताता हूँ ! कुछ तथाकथित विशेषज्ञ होते हैं ! जो समय और परिस्थिति अनुसार एक और एक, एक ! एक और एक, दो या फिर एक और एक ग्यारह, सिद्ध करने और उस ओर विश्वास दिलवाने में सिद्धहस्त होते हैं ! उन पर यह मंहगाई-वंहगाई की कोई गति नहीं व्यापति ! उनका एक वातानुकूलित कमरा होता है ! जिसमें अंदर का बाहर और बाहर का अंदर कुछ पता नहीं चलता ! उस कमरे की एक दिवार पर एक बोर्ड़ लगा रहता है। उस पर एक आड़ी-टेढ़ी-वक्र सी लकीर बनी होती है जिसके आगे एक तीर लगा रहता है। उस लकीर को ही ऊपर-नीचे कर यह लोग पता लगा लेते हैं कि लोगों की कितनी आमदनी बढ़ी, कितनी मंहगाई कम हो गई, स्वास्थ्य सेवाओं में कितनी बढोत्तरी हुई, मृत्यु दर में कितनी कमी आई, बेरोजगारी कितनी कम हो गई, शिक्षित लोगों का कितना ईजाफा हो गया, भ्रष्टाचार कितना घट गया, अपराध कितने कम हो गए, आदि-आदि। 

निष्णात विशेषज्ञ बिना बाहर झांके या जायजा लिए, वहां बैठे-बैठे इस लकीर की मार्फ़त यह सब प्रतिशत और आंकड़ों में बता देते हैं ! समझे कि नाहीं......!


अज्ञानी (मुंह बाए हुए) : गुरुजी, एक लकीर से इतना कुछ पता चल जाता है ! गजब है ! फिर भी उनकी बात मान भी लें तो, मेरी ना भी सही औरों की तो आमदनी बढी होगी ! पर उसके साथ-साथ मंहगाई भी तो पिछले वर्षों की तुलना में आसमान छू रही है। अब गैस और पेट्रोल के मासिक खर्च के अलावा जो ट्रकों की ढूलाई से कीमतें बढेंगी उसकी तुलना में कितनी आय बढ़ी होगी, आम आदमी की। कोई दुगनी या तिगुनी तो बढ नही गई होगी ?

ज्ञानी : नहीं !! यानि कि !!! अब !!!! अबे, बेकार की बहस करने लग जाता है... जब देखो ! फालतू की बातें छोड़, अपना फर्ज देख देश के प्रति ! कितनी बार समझाया है कि यह मत सोच कि देश ने तुझे क्या दिया, यह देख कि तुम देश को का दे रहे हो। चलो भगो...! बहुते काम पेंडिग है हमरा,,! चले आते हैं एक चाय के बदले हमारा दिमाग खाने !

अज्ञानी (चलते-चलते) : गुरु, मुंह मत खुलवाओ। और कुछ तो मैं नहीं जानता ! पर अब तो सच यही है कि मंहगाई मारे डाल रही है ! सांसो लेना दूभर हो गया है ! आम लोगों की परेशानी और हालत मैं भी जानता हूं, तुम भी जानते हो ! कल से अपनी चाय का इंतजाम खुद ही कर लेना ! चलता हूँ, नहीं तो एक दिन की पगार कट जायेगी, मंदी के नाम पर !
राम, राम.........! 

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