कोई अपने अहंकार में यदि अपनी भूल को भूल ही नहीं मानता और ऐसे में जब उसकी कुंठा व सोच, दंभ का चोला पहन, शब्दों का रूप अख्तियार कर अवाम के सामने आती है, तब-तब जनता उसे सबक सिखाती है ! इसका कोई भी अपवाद नहीं है ! देश प्रेमी जनता कभी भी दुर्वचनों, दुर्भावनाओं या गलतबयानियों को प्रशय नहीं देती ! सामने वाले का मफलर, गमछा, टोपी, शॉल किस रंग का है, इससे पब्लिक को कोई मतलब नहीं होता, उसके लिए सामने वाले के मनोभाव, उद्गार तथा देश के प्रति निष्ठा मायने रखती है.......................!!
#हिन्दी_ब्लागिंग
अभी बहुत ज्यादा दिन नहीं हुए जब किसी ने अपने सबसे बड़े सहयोगी की जरुरत को ही नकार दिया था ! तब जनता ने उन्हें ही कुछ हद तक नकारा बना दिया था ! एक था, जिसने जन्मों-जन्मों तक की भविष्यवाणी कर दी थी, जनता ने उसी के सिम्बल से उसे बुहार कर किनारे कर दिया ! एक के लगातार विष-वमन से तंग आ लोगों ने उसका दायरा ही तंग कर डाला ! एक ने जातियों का व्यूह रचा, अवाम ने उसे पांति के ही लायक ना छोड़ा ! एक ने डर, हिंसा, खौफ का माहौल बना खुद को अजेय करना चाहा, उसे आज दर-दर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है ! देश प्रेमी जनता कभी भी दुर्वचनों, दुर्भावनाओं या गलतबयानियों को प्रशय नहीं देती ! सामने वाले का मफलर, गमछा, टोपी, शॉल किस रंग का है, इससे पब्लिक को कोई मतलब नहीं होता, उसके लिए सामने वाले के मनोभाव, उद्गार तथा देश के प्रति निष्ठा मायने रखती है !
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| जनता जनार्दन |
याद आता है जब 1977 में इंदिरा जी चुनाव हारी थीं, तब जीतने के बाद जनता दल, देश और देशवासियों के हित में कुछ करने के बजाय सिर्फ इस बात पर जुट गया कि इस महिला को जेल भिजवाना है ! पब्लिक को यह सब रास नहीं आया और जनता दल को ही दलदल बना डाला !
निष्कर्ष यही है कि कोई अपने अहंकार में यदि अपनी भूल को भूल ही नहीं मानता और ऐसे में जब उसकी कुंठा व सोच, दंभ का चोला पहन, शब्दों का रूप अख्तियार कर अवाम के सामने आई है, तब-तब जनता ने उसे सबक सिखाया है, इसका कोई भी अपवाद नहीं है ! पब्लिक सब बूझती है ! किसी नायक, नेता की नीयत और फितरत उससे छिपी नहीं रहती ! देर-सबेर वह सबक जरूर सिखाती है ! उसके लिए परिवार, जाति, भाषा, धर्म मायने जरूर रखते हैं, पर देश की सुरक्षा, देश की भलाई या देश की उन्नति की कीमत पर नहीं !
जय हिंद 🙏

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