गुरुवार, 29 जनवरी 2026

पिग्गी बैंक में सूअर ही क्यों 🤔

ये चाहे मिट्टी से बनें हों, प्लास्टिक से या किसी भी दूसरी धातु से, बच्चों में अत्यंत प्रिय, इनका नाम पिगी बैंक ही होता है ! समय के साथ अब इनकी बनावट भी बदली है और यह विभिन्न आकारों-प्रकारों में मिलने लगा है ! पर भले ही इसका आकार-प्रकार और इसको बनाने में प्रयुक्त पदार्थ बदल गए हों, पर जो चीज नहीं बदली, वह है इसका बचपन से सीख देता आ रहा संदेश कि बचत  करना अच्छी बात है........!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

चपन से ही देखते आने के बावजूद हम में से कभी किसी ने सोचा कि बच्चों की छोटी-छोटी बचत के लिए जो गुल्लक होती है, ज्यादातर उसका रूप पिग यानी सूअर का ही क्यों होता है ? दुनिया में बहुतेरे जानवर और परिंदे हैं उनका आकार क्यों नहीं अपनाया गया ? सबसे पहले ये कहां बने यह तय करना कुछ मुश्किल है, पर इसके बारे में कुछ निम्नलिखित तथ्य उपलब्ध हैं ! 

आओ बचत करें 
मध्य युग में धातुएं के अत्यधिक मंहगा होने के कारण  यूरोप में पिग (pygg) नाम की एक खास मिट्टी से प्लेटें इत्यादि बर्तन बनाए जाते थे। उसी समय कुम्हारों ने अपने छोटे सिक्कों को सुरक्षित रखने के लिए गुल्लक बनाई और उसे पिगी बैंक कहा जाने लगा। समय के साथ धीरे-धीरे, भूलवश Pygg शब्द को Pig समझ लिया गया। इसीलिए आगे चल कर कुम्हार लोग सूअर रूपी गुल्लकें बनाने लग गए, इस तरह यह शब्द पिगी बैंक प्रचलन में आ गया। कुछ लोग इसका संबंध चीन, जर्मनी और इंडोनेशिया से भी जोड़ते हैं क्योंकि वहां भी प्राचीन काल के ऐसे बर्तन मिले हैं ! पर इसकी उत्पत्ति के बारे में निश्चित तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता !  

पिग 
भले ही इतिहास, जिज्ञासाएं, कथाएं, कुछ भी हों, आज पिगी बैंक का मतलब या पर्याय सिक्के जमा करने के लिए बने किसी भी आकार और रूप के उपकरण से हो गया है ! ये चाहे मिट्टी से बनें हों, प्लास्टिक से या किसी भी दूसरी धातु से, बच्चों में अत्यंत प्रिय, इनका नाम पिगी बैंक ही होता है ! समय के साथ अब इनकी बनावट भी बदली है और यह विभिन्न आकारों-प्रकारों में मिलने लगा है ! पर भले ही इसका आकार-प्रकार और इसको बनाने में प्रयुक्त पदार्थ बदल गए हों, पर जो चीज नहीं बदली, वह है इसका बचपन से सीख देता आ रहा यह संदेश कि बचत  करना अच्छी बात है और यह नियम लोगों के बड़े होने पर आदत में तब्दील होता चला जाता है !  

आधुनिक पिग्गी 
एक नजर उस पिग मिटटी से मिलते-जुलते नाम वाले पिग जैसे दिखने और अपने यहां पाए जाने वाले जीव पर भी ! भारत में पाए जाने वाले इस पिग को पिग्मी हॉग के नाम से जाना जाता है, जो असल में जंगली सूअरों की एक लुप्तप्राय प्रजाति है। अपने असम के राष्ट्रिय उद्यानों में इसे सुरक्षित रखा गया है ! घास के मैदानों में रहने वाला यह जीव अपनी थूथन से मिटटी खोद कर कंद, जंगली फल, केंचुए, दीमक जैसे कीटों को अपना आहार बनाता है और उसके इन्हीं उपक्रमों से मिटटी उपजाऊ होती चली जाती है ! 

पिग्मी हॉग 
अब यह तो प्रभु की माया और इच्छा है कि कौन-कब-कहां ख्याति प्राप्त करता है ! कैसे जंगल-जंगल घूमने वाला घर-घर में पैठ बना लेता है !

@संदर्भ और चित्रों के लिए अंतर्जाल का हार्दिक आभार 🙏  

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