मंगलवार, 16 मार्च 2021

एक दर्शनीय स्थल, कोटद्वार

दर्शनीय स्थानों में सबसे महत्वपूर्ण कण्व ऋषि का आश्रम है जो पहाड़ की तलहटी में, शहर से करीब 35 किमी की दूरी पर स्थित है। यही वह जगह है जहां शकुंतला-दुष्यंत के यशस्वी पुत्र भरत का जन्म और शैशव काल बीता था। जिनके नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा। सुनसान-बियाबान में यह शांत जगह सकून प्रदायी तो है पर भीतर ही भीतर कुछ विवाद समेटे, बहुत ही ज्यादा देखरेख की मांग भी करती है.............!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

जीवन में कभी-कभी कुछ ऐसा घट जाता है, जिसकी पहले दूर-दूर तक संभावना होती नहीं लगती। शायद इस लिए भी इसे अनिश्चित कहा गया है। कुछ ऐसा ही हुआ जब विभिन्न परिस्थितियों के चलते उत्तराखंड के एक शांत से शहर कोटद्वार जाने का मौका हासिल हो गया। यह उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे गढ़वाल मंडल के पौड़ी जिले का खोह नदी के तट पर बसा, प्रमुख नगर है। इतिहास में इसका उल्लेख 'खोहद्वार' के रूप में उपलब्ध है। इसे गढ़वाल का प्रवेशद्वार भी कहा जाता है। यहां करीब 150000 लोगों की बसाहट है। 



झंडा चौक, कोटद्वार 

देश भर से रेल द्वारा जुड़े, कोटद्वार की भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी है कि यहां से कुछ धार्मिक व पर्यटन के विश्वप्रसिद्ध स्थल बहुत नजदीक पड़ते हैं। जैसे हरिद्वार और ऋषिकेश यहां से लगभग 70 से 90 किमी की दूरी पर पश्चिम की ओर, कॉर्बेट नेशनल पार्क करीब 150 किमी दूर पूर्व की ओर, तक़रीबन 40 किमी उत्तर-पूर्व में लैंसडाउन, जहां प्राकृतिक गोद में गढ़वाल राइफल्स का रेजिमेंटल सेंटर है तथा करीब 85 किमी पूर्व में रामगंगा नदी पर बना दर्शनीय कालागढ़ बाँध स्थित है। वहीं बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के लिये भी सीधी बस और टैक्सी सेवा उपलब्ध है। उतनी ही आसानी से पौड़ी, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग भी जाया जा सकता है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून यहां से करीब सवा सौ किमी है। जबकि देश की राजधानी दिल्ली की दूरी तकरीबन सवा दो सौ किमी  पड़ती है।  

दुष्यंत-शकुंतला विवाह स्थली 


दर्शनीय स्थानों में सबसे महत्वपूर्ण कण्व ऋषि का आश्रम है जो पहाड़ की तलहटी में, शहर से करीब 13-14 किमी की दूरी पर स्थित है। यही वह जगह है जहां शकुंतला-दुष्यंत के यशस्वी पुत्र भरत का जन्म और शैशव काल बीता था। जिनके नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा। सुनसान-बियाबान में यह शांत जगह सकून प्रदायी तो है पर भीतर ही भीतर कुछ विवाद समेटे, बहुत ही ज्यादा देखरेख की मांग भी करती है। 

                                

सिद्धबली हनुमान जी 
नगर के पास ही स्थित हनुमान जी का सिद्धबली मंदिर भी एक प्रख्यात आस्था स्थली है। जहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।


अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों में दुर्गा देवी मंदिर जो कोटद्वार से लगभग 9 किलोमीटर दूर खोह नदी के तट पर तथा शक्ति पीठ, सुखरी देवी मंदिर दर्शनीय स्थान हैं।

उधर पहाड़ की एक चोटी चर्कान्य शिखर के रूप में जानी जाती है इसी स्थान पर महर्षि चरक ने निघुंट नामक ग्रन्थ की रचना की थी। जिसमें हिमालय की गोद में छुपी दैवीय, अनमोल औषधीय जड़ी-बूटी तथा पौधों के बारे में बहुमूल्य जानकारियां संग्रहित की गई थीं। अब जहां अंग्रेज रहे हों और वहां  चर्च ना हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता; उसी प्रथा के अनुसार यहां भी एक सुंदर दर्शनीय सेंत जोसेफ चर्च बना हुआ है। जो शिल्प कला का बेहतरीन नमूना है। 

हमारा देश ऐसी असंख्य जगहों से भरा पड़ा है जो अपने आप  में हर दृष्टि से समृद्ध, मनोभावन, ऐतिहासिक और धार्मिक जानकारियों का खजाना समेटे हैं ! जरुरत है तो सिर्फ अन्वेषण की !!

21 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (17-03-2021) को    "अपने घर में ताला और दूसरों के घर में ताँक-झाँक"   (चर्चा अंक-4008)    पर भी होगी। 
--   
मित्रों! कुछ वर्षों से ब्लॉगों का संक्रमणकाल चल रहा है। आप अन्य सामाजिक साइटों के अतिरिक्त दिल खोलकर दूसरों के ब्लॉगों पर भी अपनी टिप्पणी दीजिए। जिससे कि ब्लॉगों को जीवित रखा जा सके। चर्चा मंच का उद्देश्य उन ब्लॉगों को भी महत्व देना है जो टिप्पणियों के लिए तरसते रहते हैं क्योंकि उनका प्रसारण कहीं हो भी नहीं रहा है। ऐसे में चर्चा मंच विगत बारह वर्षों से अपने धर्म को निभा रहा है। 
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
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गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

शास्त्री जी
सम्मिलित कर मान देने हेतु अनेकानेक धन्यवाद

Sudha Devrani ने कहा…

गढ़वाल का द्वार कोटद्वार का बहुत ही सुन्दर सचित्र वर्णन।

सधु चन्द्र ने कहा…

सुंदर ।
वाकई दर्शनीय स्थल।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

सुधा जी
अनेकानेक धन्यवाद

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

सधु जी
हार्दिक धन्यवाद

Kamini Sinha ने कहा…


"हमारा देश ऐसी असंख्य जगहों से भरा पड़ा है जो अपने आप में हर दृष्टि से समृद्ध, मनोभावन, ऐतिहासिक और धार्मिक जानकारियों का खजाना समेटे हैं ! जरुरत है तो सिर्फ अन्वेषण की !!"
ये बात बिलकुल सही है अगर घूमने निकले तो अपने देश की ही सुंदरता देखते रह जायेगे। मगर नशा देश को देखने से ज्यादा विदेश देखने का हो गया है। कोटद्वार का बहुत ही सुंदर वर्णन किया है आपने, मुझे भी कोटद्वार देखने का सौभाग्य मिला है, सादर नमन आपको

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

कामिनी जी
सदा स्वागत है,आपका

विकास नैनवाल 'अंजान' ने कहा…

सुन्दर रही आपकी यह यात्रा....

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

विकास जी
जी! आभार

Abhilasha ने कहा…

बेहतरीन और ज्ञानवर्धक यात्रावृत

मन की वीणा ने कहा…

जानकारी युक्त सुंदर यात्रा वृतांत।
सार्थक पोस्ट।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

अभिलाषा जी
आपका सदा स्वागत है

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

सुमन जी
अनेकानेक धन्यवाद

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

कुसुम जी
हौसलाअफजाई के लिए हार्दिक आभार

Alaknanda Singh ने कहा…

वाह शर्मा जी, अब तो काटद्वारा जाना ही पड़ेगा...बहुत खूब... #Travelportal शुरू करने के आसार लग रहे हैं

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

अलकनंदा जी
आस-पास की महत्वपूर्ण जगहों, खासकर कण्वाश्रम के कारण, इसकी महत्ता बढ गई है नहीं तो यह एक कस्बाई नगर ही है

Kadam Sharma ने कहा…

Behtarin Jankari

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

अनेकानेक धन्यवाद, कदम जी

Jigyasa Singh ने कहा…

चित्रों के साथ कोटद्वार की समुचित जानकारी देने के लिए धन्यवाद, गगन जी मैं तो बेटे से कहने भी लगी कि कोटद्वार चलते हैं,बहुत बढ़िया।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

जिज्ञासा जी
आस-पास के धार्मिक स्थलों के कारण ही इसकी अहमियत है। अपने आप में तो साधारण कस्बाई शहर ही है।

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