शनिवार, 24 अक्तूबर 2020

एक गाँव, अफसरों वाला

यह तो सिर्फ एक गाँव की बात है ! पर कटु सत्य तो यह है कि हमारे देश के हर क्षेत्र में तरह-तरह के अनगिनत गौरव स्थल मौजूद हैं, जिन पर देशवासियों को नाज हो सकता है। पर उनमें से अधिकतर की जानकारी हमें नहीं है या देने की जरुरत ही नहीं समझी जाती ! शुरू से ही ऐसा रहा है ! लिखने-बताने वालों ने अपने पूर्वाग्रहों के चलते या फिर किसी दवाबवश, वही लिखा या बताया जितना उनसे कहा गया ! आज जब जागरूकता और सहूलियतें बढ़ी, तो ऐसी-ऐसी धरोहरें सामने आने लगीं कि हम किंकर्त्वयविमूढ़ रह गए...........!

#हिन्दी_ब्लागिंग 

आम धारणा है कि शहरों में पले युवा, सुविधासम्पन्न होने के कारण, गाँव-देहात के अपने समवयस्कों से ज्यादा होनहार, होशियारऔर समझदार होते हैं। हालांकि यह बात बहुतेरी बार झुठलाई जा चुकी है पर सोच का क्या किया जा सकता है ! हमारे संचार माध्यमों, मुद्रित, श्रव्य या दृश्य-श्रव्य कोई भी हो, उनको सनसनीखेज ख़बरों से ही फुरसत नहीं मिलती जो ऐसी गलत धारणाओं को झुठलाती सच्चाइयों को सारे देशवासियों के सामने लाएं  ! 

इसी सोच को दरकिनार करती हमारे देश में एक ऐसी जगह है जिसका सानी शायद ही कोई और स्थान हो ! एक ऐसा गाँव जिसके हर दूसरे घर का होनहार युवा आईएएस, आईपीएस या अन्य किसी उच्च सरकारी पद पर आसीन है। इस गाँव की हवा-पानी-माटी में ही ऐसी कोई बात है जिसने एक के बाद एक सैकड़ों युवाओं को देश के उच्च पदों तक पहुंचाया। तभी तो इस का नाम अफसरों वाला गाँव के रूप में ख्यात हो गया। 

इंटरमीडिएट कॉलेज, जिसका परीक्षा परिणाम हर वर्ष 90 प्रतिशत रहता है, से उत्तीर्ण अनगिनत प्रतिभावान छात्र आज पुलिस, प्रशासनिक तथा चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत हैं। कुछ दिनों पहले ही गाँव से एक साथ 11 लड़कों का चयन सब इंस्पेक्टर के पद पर हुआ था

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद डिवीज़न के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 24 किमी दूर दो नदियों, सई और लोनी, के बीच बसे इस गाँव का नाम बहुचरा है। दिखने में मोटे तौर पर यह भी प्रदेश के दूसरे गाँवों जैसा ही एक आम सा गाँव है, पर जो बात इसे दूसरों से अलग करती है वह है यहां की उपज ! यहां खेती तो नाम मात्र की होती है, पर होनहार बच्चों के लिए इस गाँव की जमीन खूब उपजाऊ है। 

यहां के लोग बताते हैं कि ''1919 में हमारे गाँव से 25 जवान ब्रिटिश सरकार की तरफ से प्रथम विश्व युद्ध में भाग लेने गए थे। उनके लौटने पर जब सरकार की तरफ से उन्हें इनाम देने की बात आई तो उन्होंने इनाम के बदले गाँव में एक स्कूल खोलने की दरख्वास्त कर दी ! उनकी बात मान ली गई और इस तरह गाँव को एक स्कूल मिल गया। पर लोगों को पढ़ाई में ज्यादा रूचि नहीं थी ! लोग बच्चों को पढ़ने भेजने से कतराते थे। पर हमारे पूर्वजों को शिक्षा की महत्ता मालुम थी सो गाँव में ये नियम बनाया गया कि पांच साल का होते ही बच्चे को स्कूल में दाखिल करवाना पडेगा ! नहीं तो  भारी जुर्माना देना होगा ! उसी कारण आज यहां की साक्षारता दर, प्रदेश की 67.68% के मुकाबले तकरीबन 82% है। पर उसी जबरदस्ती के कारण विद्यालय का नाम जबरिया अनिवार्य प्राथमिक विद्यालय भी पड़ गया। 

जबरिया अनिवार्य प्राथमिक विद्यालय  
वर्ष 1969 से स्थापित महात्मा गांधी इंटरमीडिएट कॉलेज, जिसका परीक्षा परिणाम हर वर्ष 90 प्रतिशत रहता है, से उत्तीर्ण अनगिनत प्रतिभावान छात्र आज पुलिस, प्रशासनिक तथा चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत हैं।कुछ दिनों पहले ही गाँव से एक साथ 11 लड़कों का चयन सब इंस्पेक्टर के पद पर हुआ था। इसके पहले भी कई इंस्पेक्टर इस गाँव से चयनित हो चुके हैं तथा कई पुरुस्कारों से नवाजे जा चुके हैं।

यह तो सिर्फ एक गांव की बात है ! पर कटु सत्य तो यह है कि हमारे देश के हर क्षेत्र में तरह-तरह के अनगिनत गौरव स्थल मौजूद हैं, जिन पर देशवासियों को नाज हो सकता है। पर उनमें से अधिकतर की जानकारी हमें नहीं है या देने की जरुरत ही नहीं समझी जाती ! शुरू से ही ऐसा रहा है ! लिखने-बताने वालों ने अपने पूर्वाग्रहों चलते या फिर किसी दवाब वश वही लिखा या बताया जितना उनसे कहा गया ! आज जब जागरूकता और सहूलियतें बढ़ी तो ऐसी-ऐसी धरोहरें सामने आने लगीं कि हम खुद ही किंकर्त्वयविमूढ़ रह गए। 

20 टिप्‍पणियां:

शिवम् कुमार पाण्डेय ने कहा…

"एक गांव अफसरों वाला"
बहुत बढ़िया लगा पढ़कर। इसी तरह एक गांव फौजियों वाला है गहमर।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

शिवम जी
वही तो, अनोखी जगहें, अनोखे लोग, अनोखी परंपराएं, अनोखी धरोहरें अनगिनत ऐसी जानकारियां हैं जो अनजानी हैं पर किसी को फुर्सत नहीं है उन्हें सामने लाने बताने की

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (25-10-2020) को    "विजयादशमी विजय का, है पावन त्यौहार"  (चर्चा अंक- 3865)     पर भी होगी। 
-- 
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
--   
विजयादशमी (दशहरा) की 
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
--
सादर...! 
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
--

Digvijay Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 25 अक्टूबर अक्टूबर 2020 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

शास्त्री जी
रचना को मान देने हेतु अनेकानेक धन्यवाद

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

दिग्विजय जी
सम्मिलित करने हेतु अनेकानेक धन्यवाद

Sudha Devrani ने कहा…

सुन्दर जानकारी रोचक लेख।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

सुधा जी
हार्दिक आभार

विभा रानी श्रीवास्तव ने कहा…

सुन्दर सार्थक लेखन

Onkar ने कहा…

बहुत बढ़िया

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

नमन ऐसे गांवों की मिट्टी को। सुन्दर।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

विभा जी
हार्दिक आभार

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

ओंकार जी
हार्दिक आभार

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

सुशील जी
गांव के लोगों को उनकी सोच को उनके समर्पण को भी नमन, जिन्होंने किसी भी परिस्थिति में अपना संकल्प नहीं छोडा

Kadam Sharma ने कहा…

Anokhi jankari

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

धन्यवाद, कदम जी

Madhulika Patel ने कहा…

अफ़सरों वाला गाँव,सुनकर ही बहुत अच्छा लगता है ।बहुत सुंदर एवं अच्छी जानकारी ।बहुत बहुत आभार ।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

मधुलिका जी
''कुछ अलग सा'' पर आपका सदा स्वागत है

विकास नैनवाल 'अंजान' ने कहा…

बहुत सुन्दर जानकारी देता लेख।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

विकास जी
सदा स्वागत है

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