मुखर्जी बाबू के रिटायरमेंट का समय नजदीक आ गया था। उनका एक ही लड़का था। अभी-अभी ग्रैजुएशन पूरी की थी। किसी ढंग की नौकरी की तलाश हो रही थी। उन दिनों नौकरी के लिए इतनी मारामारी नहीं होती थी। लियाकत और सिफारिश से काम चल जाता था। यह बात अलग थी कि सिफारिश सिर्फ नौकरी दिलवा सकती थी, बाद में उसे संभालने और तरक्की पाने में लियाकत ही काम आती थी।
सो इधर-उधर घूमने में और समय जाया करने के बजाय मुखर्जी बाबू ने लड़के को खूद जहां मुलाजिम थे वहीं काम दिलाने का फैसला किया। अंग्रेज मैनेजर उनकी लगन और काम पर पकड़ के कारण उन्हें मानता भी बहुत था, पर झिझक तथा संकोच वश उन्होंने अभी तक अपने बेटे के लिए बात नहीं की थी। हो सकता है इसे उन्होंने अंतिम विकल्प के रूप मेँ भी रख छोड़ा हो। जो भी हो एक दिन मुखर्जी बाबू अपने बेटे को ले मैनेजर के सामने जा खड़े हुए।
मैनेजर ने उन्हें देख उनके आने का कारण पूछा। मुखर्जी बाबू ने अपने बेटे की ओर इशारा कर कहा, सर आई सन, नो वर्क। वी पूअर। वांट सर्विस। प्लीज हेल्प।
बेटे ने बाप की तरफ अजीब निगाहों से ताका और सिर झुका लिया।
मैनेजर ने एक नजर लड़के की तरफ देखा जो जमीन की ओर नजरें झुकाए खड़ा था और बोला, वेल, टेल हिम टु ज्वाइन आन मंड़े।
मुखर्जी बाबू ने मैनेजर का शुक्रिया अदा किया और बेटे को ले घर वापस आ गये।
घर आते ही लड़के ने मां से शिकायत की कि आज बाबा ने पूरी बेइज्जती करवा ली है। मां ने पूछा, अरे, हुआ क्या? बता तो सही यूं ही बड़बड़ाए जा रहा है। बेटा बोला कि बाबा को इतनी अच्छी अंग्रेजी आती है पर वहां आफिस में कैसी गलत-सलत, आई सन, आई सन कर के बात कर रहे थे. माई सन नहीं बोल सकते थे, और क्या बताऊं।
लड़के की बात खत्म होते-होते मुखर्जी बाबू ने अपनी पत्नी से बंगला में कहा, ओ के बुजीए दाओ। ओ चाकरी पेये गैचे। आमार आई सन जा कोरे दीएचे ओ माई सन कोक्खोनो कोरते पात्तो ना (उसे समझा दो। उसे नौकरी मिल गयी है। मेरे आई सन ने जो काम किया है वो माई सन कभी भी नहीं कर पाता)
इस ब्लॉग में एक छोटी सी कोशिश की गई है कि अपने संस्मरणों के साथ-साथ समाज में चली आ रही मान्यताओं, कथा-कहानियों को, बगैर किसी पूर्वाग्रह के, एक अलग नजरिए से देखने, समझने और सामने लाने की ! इसके साथ ही यह कोशिश भी रहेगी कि कुछ अलग सी, रोचक, अविदित सी जानकारी मिलते ही उसे साझा कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके ! अब इसमें इसको सफलता मिले, ना मिले, प्रयास तो सदा जारी रहेगा !
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विशिष्ट पोस्ट
जिसने सबसे ज्यादा विभिन्न रोगग्रस्त पात्रों का किरदार निभाया
अनेकों बार Autism, Dyslexia, Progeria, Paraplegia, Alzheimer, Amnesia, Schizophrenia जैसी अनेक बीमारियों पर, जिनका नाम भी आम लोगों ने सुना...
6 टिप्पणियां:
wonderful - mukherjee was a practifal father
wonderful - mukherjee was a practifal father
DAda,
khub bhaalo
सही कहा मुखर्जी बाबू ने, मजेदार पोस्ट।
बहुत बढ़िया और रोचक!
बढिया पोस्ट!
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