बुधवार, 2 सितंबर 2009

संगीतकार नौशाद को अपनी शादी दर्जी बन कर करनी पडी थी

कल्पना कीजिए की जिसने अपने संगीत से सारे भारत में धूम मचा रखी थी , उसे ही अपनी शादी दर्जी बन कर करनी पड़ रही थी।

आज के समय में गीत-संगीत, नाच-गाना प्रतिभा की पहचान के रूप में देखे जाते हैं। किसी का भी बच्चा जरा ठुमक कर क्या चल लिया या किसी फिल्मी गाने की नकल कर भर ली तो उसके मां-बाप उसे किसी मंच पर पहुंचाने के लिये आतुर हो उठते हैं। फिर चाहे बच्चे को सरगम का 'सा' या नाच का 'ना' का पता भी ना हो। पर कुछ ही सालों पहले की बात है जब इन कलाओं को अच्छी दृष्टि से नहीं देखा जाता था। मां-बाप इन विधाओं के सख्त खिलाफ हुआ करते थे। इसी सब के चलते संगीतकार नौशाद को कैसी-कैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था, सुनिये उन्हीं की जुबानी :-


"मां ने मेरी शादी पक्की कर लखनऊ बुलवा लिया। तैयारियों के बीच एक दिन उन्होंने मुझे बुलाया और कहा, बेटा ससुराल में किसी को पता नहीं चलना चाहिये कि तुम गाने बजाने का काम करते हो। मैं आश्चर्य में पड़ गया और पूछा, ऐसा क्यों अम्मी? तो अम्मी ने कहा कि मैंने सब को कह रखा है कि मेरा बेटा बंबई में दर्जी का काम करता है। अगर मैं बता देती कि तू गाने बजाने का काम करता है तो तेरी शादी ही तय नहीं होनी थी। तेरी ससुराल वाले सूफी किस्म के लोग हैं। मैं मां की बात मानने को मजबूर था। पर मन में एक प्रश्न घुमड़ रहा था कि क्या संगीत का काम इतना घटिया है कि एक दर्जी उस पर भारी पड़ रहा है। फिर उसके बाद जो हुआ उसका आप अंदाज लगा मेरी हालत समझ सकते हैं। 

उन्हीं दिनों फिल्म "रतन" रिलीज हुई थी और उसके मेरे द्वारा निर्देशित गाने सारे हिंदुस्तान में धूम मचा रहे थे। तो जब मेरी बारात चली तो बैंड वालों ने उसी फिल्म के गाने बजाने शुरु कर दिये। लड़की वालों के यहां भी शहनाई पर "रतन" के गानों की बहार थी और मैं दर्जी बना निकाह की रस्में पूरी कर रहा था।"
बाद में जब नौशाद साहब की श्रीमतीजी बंबई आयीं तो उन्हें पता चला कि उनके शौहर मशहूर संगीतकार हैं।

13 टिप्‍पणियां:

L.Goswami ने कहा…

अच्छी रही जानकारी.

अर्चना तिवारी ने कहा…

जानकारी रोचक लगी...में भी लखनऊ की हूँ

Udan Tashtari ने कहा…

रोचक जानकारी. नौशाद साहब के बारे में जानकर अच्छा लगा.

सतीश पंचम ने कहा…

हमम्....बहुत बढिया और रोचक जानकारी दी है।

सागर नाहर ने कहा…

यह भी एक मजेदार किस्सा है।
अगर आप बरहा से टाइप कर रहे हैं तो ऐसे लिखें laKanaU=लखनऊ

Himanshu Pandey ने कहा…

जानकारी रोचक है । शुक्रिया ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

जानकारी परोसती पोस्ट के लिए,
आपको बहुत-बहुत धन्यवाद!

राज भाटिय़ा ने कहा…

शर्मा जी आप ने बहुत सुंदर लिखा, ओर पढ कर मजा आ गया, वेसे हमारे यहां अब भी इन नाच गाने को अच्छा नही समझते,

Creative Manch ने कहा…

सच में आपने बड़ी आश्चर्यजनक और मनोरंजक जानकारी दी !
आभार

शरद कोकास ने कहा…

लखनऊ के लिये lakhna oo लिख कर बैक करें और a डिलीट कर दें । नौशाद जी को 1972 मे मुशायरे मे सुना था जब हम स्कूल मे पढते थे । उनका आटोग्राफ आज भी मेरे पास है ।

Pt. D.K. Sharma "Vatsa" ने कहा…

रोचक्!!!!
एक वो जमाना था....और एक ये जमाना है जहाँ लोग आर्केस्ट्रा में भी नाचने को शान समझने लगे हैं!!!

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

Nice post !
Shows that the Great Music director Naushad ali Saa'b , could laugh at himself & was so truthful in his life's accounts. BRAVO !!

Nitish Raj ने कहा…

नौशाद साहब के बारे में अच्छी जानकारी। धन्यवाद।

विशिष्ट पोस्ट

तराजू वाली प्रतिमा को खुद ही अपनी आँखों पर बंधी पट्टी उतार फेंकनी होगी

शिक्षा, चिकित्सा और न्याय ! आम-जन का विश्वास  आक्रोश के मारे  इन तीनों सर्वाधिक जनहित के क्षेत्रों से उठने लगा है ! लोग अब भगवान से उतना नह...