बुधवार, 3 फ़रवरी 2010

मणिकर्ण शिवजी की रमण भूमि है.

मणिकर्ण में मंदिर और गुरुद्वारे के लंगर में बनने वाले चावल गर्म पानी के सोतों में पकाए जाते हैं।

"मणिकर्ण", हिमाचल मे पार्वती नदी की घाटी मे बसा एक पवित्र धर्म-स्थल है। हिन्दु तथा सिक्ख समुदाय का पावन तीर्थ। जो कुल्लू से 35किमी दूर समुंद्र तट से 1650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां आराम से बस या टैक्सी से जाया जा सकता है।

पौराणिक कथा है कि विवाह के पश्चात एक बार शिवजी तथा पार्वतीजी घूमते-घूमते इस जगह आ पहुंचे। उन्हें यह जगह इतनी अच्छी लगी कि वे यहां ग्यारह हजार वर्ष तक निवास करते रहे। इस जगह के लगाव के कारण ही उन्होंने जब काशी की स्थापना की तो वहां भी नदी के घाट का नाम मणिकर्णिका घाट रक्खा। इस क्षेत्र को अर्द्धनारीश्वर क्षेत्र भी कहते हैं,तथा यह समस्त सिद्धीयों का देने वाला स्थान है। इस जगह का" मणिकर्ण" नाम पड़ने की भी एक पौराणिक कथा है।

यहां प्रवास के दौरान एक बार स्नान करते हुए माँ पार्वती के कान की मणि पानी मे गिर तीव्र धार के साथ पाताल पहुंच गयी। मणि ना मिलने से परेशान माँ ने शिवजी से कहा। शिवजी को नैना देवी से पता चला कि मणि नागलोक के देवता शेषनाग के पास है। इससे शिवजी क्रोधित हो गये जिससे ड़र कर शेषनाग ने जोर की फुंकार मार कर मणियों को माँ के पास भिजवा दिया। इन कान की मणियों के कारण ही इस जगह का नाम मणिकर्ण पडा। शेषनाग की फुंकार इतनी तीव्र थी कि उससे यहां गर्म पानी का स्रोत उत्पन्न हो गया। यह एक अजूबा ही है कि कुछ फ़िट की दूरी पर दो अलग तासीरों के जल की उपस्थिति है। एक इतना गर्म है कि यहां मंदिर - गुरुद्वारे के लंगरों का चावल कुछ ही मिनटों मे पका कर धर देता है तो दूसरी ओर इतना ठंडा की हाथ डालो तो हाथ सुन्न हो जाता है।

यही वह जगह है जहां महाभारत काल मे शिवजी ने अर्जुन की परीक्षा लेने के लिए किरात के रूप मे उससे युद्ध किया था। यहीं पर सिक्ख समुदाय का भव्य गुरुद्वारा भी है जहां देश विदेश से लोग आ पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। इसकी स्थापना कैमलपुर, अब पाकिस्तान मे, के निवासी श्री नारायण हरी द्वारा 1940 के आसपास की गयी थी।

थोडी सी हिम्मत, जरा सा जज्बा, नयी जगह देखने-जानने की ललक हो तो एक बार यहां जरूर जाएं।

8 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

आभार जानकारी का.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

"मणिकर्ण में मंदिर और गुरुद्वारे के लंगर में बनने वाले चावल गर्म पानी के सोतों में पकाए जाते हैं।"

कभी अवसर मिला तो अवश्य देखेंगे जी!
जानकारी के लिए आभार!

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत उम्दा जानकारी दी है कभी देखने का मौका निकालूँगा....

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी.

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बहुत बढिया जानकारी कुछ तस्वीरें भी होतीं तो आनन्द आ जाता.

नीरज जाट ने कहा…

गगन जी,
आने दो गर्मी का मौसम. आपको मणिकर्ण का सचित्र विवरण पढाने की जिम्मेदारी मेरी.
बढिया पौराणिक जानकारी.

Gagan Sharma, Kuchh Alag sa ने कहा…

नीरज जी,
समय लिखिएगा, हो सकता है वहीं मुलाकात हो जाए।

aa ने कहा…

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